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13/01/2026

काले अंग्रेज की वर्तमान सरकार की नाकामी देखो अभी तक आरोपी को पकड़ नही पाई है और आधा से ज्यादा पुलिस वालो को हमारे शेर भाई चंद्रशेखर आजाद और अभिषेक जाटव को पीड़ित परिवार से ना मिल पाए , तो टीम लगा दिए है अभी एक सच्चा अंबेडकरवादी सांसद है और ये डर है सोचो 🤗

Baba sahab my god ❤️❤️❤️❤️❤️
08/01/2026

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05/01/2026

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04/01/2026
महात्मा ज्योतिबा फुले (1827-1890) को आधुनिक भारत के सबसे पहले और सबसे क्रांतिकारी समाज-सुधारकों में से एक माना जाता है। ...
28/11/2025

महात्मा ज्योतिबा फुले (1827-1890) को आधुनिक भारत के सबसे पहले और सबसे क्रांतिकारी समाज-सुधारकों में से एक माना जाता है। उन्होंने स्त्रियों और दलितों (तत्कालीन अछूत कहे जाने वाले शूद्र-अतिशूद्र वर्गों) के उत्थान के लिए जीवनभर संघर्ष किया। उनके प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं:

# # # महिलाओं के लिए किए गए कार्य
1. **भारत में पहला बालिका विद्यालय खोला**
- 1848 में पुणे में भिड़ेवाडा में ज्योतिबा ने अपनी पत्नी सावित्रीबाई फुले के साथ मिलकर देश का सबसे पहला लड़कियों का स्कूल शुरू किया। उस समय लड़कियों को पढ़ाना घोर पाप माना जाता था।

2. **सावित्रीबाई को शिक्षिका बनाया**
- ज्योतिबा ने सबसे पहले अपनी पत्नी सावित्रीबाई को पढ़ाया और उन्हें भारत की पहली प्रशिक्षित महिला शिक्षिका बनाया। बाद में सावित्रीबाई ने तीन बालिका विद्यालय चलाए।

3. **विधवा विवाह का समर्थन और विधवा आश्रम**
- 1863 में विधवा ब्राह्मण महिलाओं की दयनीय स्थिति देखकर उन्होंने विधवा पुनर्विवाह को बढ़ावा दिया।
- 1854 में गर्भवती बलात्कार पीड़िताओं और विधवाओं के लिए “बालहत्या प्रतिबंधक गृह” खोला, जहाँ अनाथ बच्चों को पाला-पोसा जाता था।

4. **विधवाओं के सिर मुंडन के खिलाफ आंदोलन**
- उन्होंने विधवाओं के सिर मुंडवाने की अमानवीय प्रथा के खिलाफ जोरदार आवाज उठाई।

5. **स्त्री-शूद्रों की गुलामी पर पहली किताब**
- 1873 में उनकी किताब “गुलाम” (गुलामगिरी) प्रकाशित हुई, जिसमें उन्होंने साफ कहा कि भारत में स्त्रियां और शूद्र दोनों ब्राह्मणवाद की गुलाम हैं।

# # # दलितों-शूद्रों के लिए किए गए कार्य
1. **शूद्र-अतिशूद्रों के लिए अलग स्कूल**
- 1851-52 में उन्होंने अछूत समझे जाने वाले बच्चों के लिए अलग से स्कूल खोले, क्योंकि उन्हें सामान्य स्कूलों में प्रवेश नहीं मिलता था।

2. **सत्यशोधक समाज की स्थापना (1873)**
- ब्राह्मण पुरोहितों द्वारा शूद्रों-अतिशूद्रों का शोषण बंद करने के लिए 24 सितंबर 1873 को “सत्यशोधक समाज” बनाया।
- इसका उद्देश्य: बिना ब्राह्मण पुरोहित के, मराठी में सत्यशोधक तरीके से विवाह, अंतिम संस्कार आदि कराना और जाति-भेद मिटाना।
- पहली बार गैर-ब्राह्मणों को पुरोहित बनाने का प्रशिक्षण दिया।

3. **अछूतों को अपने घर में पानी पिलाया**
- अपने घर में अछूतों के लिए पानी की व्यवस्था की और उन्हें घर में बुलाकर पानी पिलाया – उस समय यह क्रांतिकारी कदम था।

4. **नाईयों का बहिष्कार**
- अछूतों के बाल न काटने वाले नाइयों का सामाजिक बहिष्कार किया और खुद महार-मांग बच्चों के बाल काटे।

5. **किसानों-शूद्रों की पहली किताब**
- 1883 में “शेतकऱ्याचा आसुड” (किसान का कोड़ा) लिखा, जिसमें खोत-जमींदार और ब्राह्मण कर्मचारियों द्वारा किसानों के शोषण को बेनकाब किया।

6. **पुणे नगरपालिका में सदस्य बनकर काम**
- 1876-1882 तक पुणे म्युनिसिपैलिटी के निर्वाचित सदस्य रहे और अछूतों के लिए अलग स्कूल, पानी की टंकी आदि की व्यवस्था करवाई।

# # # अन्य महत्वपूर्ण कार्य
- अनाथालय चलाया (1854 से)
- अकाल पीड़ितों के लिए राहत कार्य किए
- ब्राह्मणवाद और जातिवाद पर सीधी चुनौती दी
- “सारे जीवन में कभी मंदिर नहीं गए, न पुरोहित बुलाया

संक्षेप में कहें तो महात्मा ज्योतिबा फुले ने वह सारे काम सबसे पहले और सबसे आक्रामक तरीके से किए जो बाद में डॉ. आंबेडकर ने आगे बढ़ाए। वे भारतीय स्त्री-मुक्ति और दलित-मुक्ति आंदोलन के असली संस्थापक थे।

भारत के लिए एक ऐतिहासिक पल!पेरिस स्थित UNESCO मुख्यालय में डॉ. बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा का अनावरण किया गया, ज...
28/11/2025

भारत के लिए एक ऐतिहासिक पल!

पेरिस स्थित UNESCO मुख्यालय में डॉ. बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा का अनावरण किया गया, जो दुनिया के मंच पर उनके विचारों और योगदान को मिली बड़ी मान्यता का प्रतीक है। यह पहली बार है जब किसी अंतरराष्ट्रीय संस्था के मुख्यालय में अंबेडकर की प्रतिमा स्थापित की गई है, जो उनके वैश्विक प्रभाव को दर्शाती है।

UNESCO जैसे संस्थान में यह प्रतिमा स्थापित होना बताता है कि अंबेडकर के विचार—समानता, सामाजिक न्याय, मानव गरिमा, शिक्षा का अधिकार और लोकतांत्रिक सशक्तिकरण—सिर्फ भारत तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दुनिया भर के देशों और समाजों के लिए भी प्रेरणा बने हुए हैं। यह प्रतिष्ठान दुनिया को याद दिलाता है कि अंबेडकर आधुनिक लोकतंत्र और मानवाधिकारों के सबसे प्रासंगिक वैश्विक विचारकों में से एक हैं।

यह प्रतिमा उनकी उस विरासत का सम्मान है जिसने मानवता को सिखाया कि समाज तभी आगे बढ़ता है जब हर व्यक्ति को समान अवसर, सम्मान और न्याय मिले। UNESCO में यह स्थापना भारत की लोकतांत्रिक यात्रा और अंबेडकर की विचारधारा का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत प्रमाण है।

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*आज ५२ दिन हो गए* *सोनम वांगचुक को जेल गए।* *यह शख्स न मुस्लिम है, न पाकिस्तानी, न आतंकी, न वामपन्थी, खालिस्तानी, कांग्र...
25/11/2025

*आज ५२ दिन हो गए*
*सोनम वांगचुक को जेल गए।*

*यह शख्स न मुस्लिम है, न पाकिस्तानी, न आतंकी, न वामपन्थी, खालिस्तानी, कांग्रेसी, राजदिया, सपाई। ये व्यक्ति गुंडा नही, अपराधी नही, गैंगस्टर नही।*

*पर यह जेल में है।*
*क्यो है?*
*●●*
*जो अपराधी है, वो संसद, विधानसभा, मंत्रालय में बैठे हैं। बंगलो में रहते, लाल बत्ती में घूमते है। लेकिन एक वैज्ञानिक, समाजसेवक, अहिसंक, प्रबुद्ध शख्स जेल में है।*

*यह हमारे समाज के बारे में कुछ कहता है। यह हमारी सोसायटी के बारे में एक सच कहता है। ऐसा सच जो मेरे आपके, हम सबके मुंह पर एक थूक की तरह है।*

*५२ दिनों से देश मे कहीं, कोई आवाज सोनम के लिए नही उठी। नेता, पत्रकार, एक्टिविस्ट, वकील, लेखक, कवि, सोशल मीडिया पर लाइक्स बटोर रहे वॉरियर सबके मुंह इस थूक से लसलसे, घृणित औऱ बदबूदार दिख रहे हैं।*
*●●*
*उसने वोट चोरी की शिकायत नही की। वह सरकार उखाड़कर फेंकना नही चाहता। उसने सिर्फ एक मांग की..*

*6th शिड्यूल।*
*अपनी संस्कृति की रक्षा।*

*जो वादा, अपने घोषणा पत्र में लिख करके, सरकार सत्ता में आई थी। इस मांग को पूरा करवाना, राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा है। सोनम पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लगा है।*

*कोई दलील नहीं। अपील नही।*
*कोर्ट नही, सुनवाई नहीं।*
*५२ दिन।*
*●●*
*हम सबको, हम सबकी*
*सामूहिक लानत है।*

टीना डाबी और दीपना नेत्रपाल: दो अम्बेडकरवादी महिलाओं ने रचा इतिहासबाड़मेर जिले की आईएएस अधिकारी टीना डाबी ने एक बार फिर ...
25/11/2025

टीना डाबी और दीपना नेत्रपाल: दो अम्बेडकरवादी महिलाओं ने रचा इतिहास
बाड़मेर जिले की आईएएस अधिकारी टीना डाबी ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है। बाड़मेर ज़िले ने जल संचय जन भागीदारी पुरस्कार जीतकर पूरे देश में पहला स्थान हासिल किया है। इसी तरह बेंगलुरु स्थित क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्र और क्षमता निर्माण एवं ज्ञान केंद्र की प्रिंसिपल डायरेक्टर दीपना नेत्रपाल को राष्ट्रीय CAG पुरस्कार से नवाजा गया है।

नई दिल्ली। अंबेडकरी समाज से आने वाली बाड़मेर जिले की आईएएस अधिकारी टीना डाबी ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है। बाड़मेर ज़िले ने जल संचय जन भागीदारी पुरस्कार जीतकर पूरे देश में पहला स्थान हासिल किया है। यह उपलब्धि टीना डाबी की अगुवाई में संभव हुई, जिन्होंने जिले में हजारों पारंपरिक ‘टांक’ यानी भूमिगत जल संरचनाओं को पुनर्जीवित कराया और जल संरक्षण को एक जन आंदोलन का रूप दिया।

इस पुरस्कार के तहत बाड़मेर को 2 करोड़ रुपये की राशि मिलेगी। यह सम्मान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 18 नवंबर को दिल्ली के विज्ञान भवन में दे रही हैं। ‘कैच द रेन’ अभियान के तहत पूरे देश को 10,000 से ज़्यादा जल भंडारण संरचनाएँ बनाने का लक्ष्य दिया गया था, सबसे आगे निकलते हुए बाड़मेर ने इस लक्ष्य को न सिर्फ पूरा किया, बल्कि उत्तरी क्षेत्र में टॉप पोज़िशन लेकर सबको पीछे छोड़ दिया।

बता दें कि टीना डाबी ने साल 2015 UPSC परीक्षा में टॉप करके नई मिसाल कायम की थी। तब से कलेक्टर के रूप में वह जिस भी जिले में गईं, वहां उनके काम के अनोखे अंदाज की चर्चा रही। और अब बाड़मेर में जल संरक्षण को लेकर उनकी पहल पूरे भारत के लिए मॉडल बन गई है।

इसी तरह की एक और शानदार खबर दक्षिण भारत से आई है, जो कि अंबेडकरी समाज के लिए गर्व की बात है। बेंगलुरु स्थित क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्र और क्षमता निर्माण एवं ज्ञान केंद्र की प्रिंसिपल डायरेक्टर दीपना नेत्रपाल को राष्ट्रीय CAG पुरस्कार से नवाजा गया है। खास बात यह है कि यह सम्मान पाने वाली वह देश की पहली दलित महिला अधिकारी हैं।

दीपना नेत्रपाल को यह पुरस्कार GST ऑडिट में नई पहल और बेंगलुरु में ट्रेनिंग सिस्टम के बड़े बदलाव के लिए दिया गया है। क्षमता निर्माण, पब्लिक अकाउंटिंग और प्रशिक्षण के क्षेत्र में दीपना नेत्रपाल के प्रयासों ने पूरे ऑडिट सिस्टम को नया रूप देने में अहम भूमिका निभाई है।

जिस तरह वंचित समाज से आने वाली दोनों महिलाओं ने यह शानदार उपलब्धि हासिल की है, उसने यह दिखा गया है कि चाहे प्रशासनिक नेतृत्व हो या कोई नई पहल, महिलाएं और खासकर दलित-बहुजन समाज की महिलाएं इसमें पीछे नहीं है।

21/11/2025

आज उसका जन्म दिन है जिसने 800 पंडित को सूली पे लटका दिया था दलित महिला का स्तन ढकने के लिए , टीपू सुल्तान

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