27/09/2026
#राम_मंदिर (सियासी मुद्दा)
लोक और आलोक
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विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष हैं आलोक कुमार। यह आज उनका एक बयान छपा है, बयान है कि.. "राम मंदिर चढ़ावा चोरी को चुनावी मुद्दा न बनाया जाए", अब यह मामला समाप्त हो जाना चाहिए।
यही आलोक कुमार जी विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष तब भी रहे जब राम मंदिर की "प्राण प्रतिष्ठा" 22 जनवरी 2024 को हुई। प्राण प्रतिष्ठा आनन-फानन और अधूरे मंदिर में इसलिए कराई गई कि इसको भाजपा, विश्व हिंदू परिषद और आरएसएस को चुनावी लाभ का मुद्दा बनाना था।
प्राण प्रतिष्ठा हो गई, सियासी नारा दिया गया कि.. "जो राम को लाए हैं-हम उनको लाएंगे" और दूसरा नारा दिया गया था.. "अबकी बार 400 पार"। राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत जी मुख्य यजमान थे। सियासी तौर पर भाजपा और आरएसएस सब कुछ बल्ले बल्ले मान बैठा था।
फिर क्या था.. राम मंदिर #प्राण_प्रतिष्ठा के 3 महीने बाद ही जब #लोकसभा_के_चुनाव हुए तो उत्तर प्रदेश में नतीजा उल्टा हो गया। अयोध्या के साथ ही यूपी में भाजपा इतनी बुरी तरह हार गई कि वह नंबर दो की पार्टी हो गई (देखें नीचे ग्राफ)👇🏾
अब इधर उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनाव सर पर हैं और उधर राम मंदिर में चढ़ावा चोरी हो गई है। राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा उतना ज्यादा चर्चा और सुर्खियों में नहीं रहा जितना इधर चढ़ावा चोरी है। विहिप अध्यक्ष जी तनाव में नाहक नहीं हैं.! इसे चुनावी मुद्दा न बनाया जाए वह सब खतरे भांप रहे हैं।
लेकिन अरे भाई, राम मंदिर को चुनावी मुद्दा किसने बनाया.? इसका सियासी लाभ किसने लिया.? "जो राम को लाए हैं-हम उनको लाएंगे" यह नारा किसने दिया.?
और अब अगर राम मंदिर का चढ़ावा चोरी चुनावी मुद्दा नहीं बनना चाहिये... ऐसा विहिप अध्यक्ष कह रहे हैं तो क्या यह न माना जाए कि उनका यह भी कहना है की राम मंदिर को ही लोग भूल जाएं या राम मंदिर आंदोलन और निर्माण को भी लोग भूल जाएं.?
यह कैसे चलेगा कि.."मीठा-मीठा गप्प और कड़वा कड़वा थू".?
..कमर की पेटी बांध कर रखिए... "होइहैं सोई जो राम रचि राखा"
साभार Indu Bhushan Pandey