18/11/2025
नैरेटिव्स स्थापित करने की कला !
नोट: पुनः स्पष्ट कर दूँ कि मैं सनातन धर्मी हूँ , और सनातन धर्म राईट अथवा लेफ्ट विंग नहीं है । हाँ , जो आज राईट विंग पार्टियां भारत में हैं वे स्वयम् को हिन्दू कहने में झिझकते नहीं हैं ।
अब पोस्ट पढ़ें …
बिहार में अभी हुये चुनाव में कुछ व्यक्ति जीते और अधिकतर हार गये ।
वास्तव में कुल 2616 प्रत्याशी खड़े थे और केवल 243 ही जीत सके क्योंकि उतनी ही सीट वहां की विधानसभा में है । अर्थात् 2373 प्रत्याशी हारे और उसमें से सैकड़ों योग्य भी रहे होंगे ।
अब शेष बातें अभी न करके केवल इस नैरेटिव पर चर्चा करी जाये ।
बताया गया कि देखिये बिहार अथवा भारत में चुनाव का स्तर क्या है ?
एक गणितज्ञ, एक ग़रीब बच्चों को पढ़ाने वाला अथवा शिक्षा का एक स्तंभ चुनाव में केवल 15,000 वोट पाता है और दूसरी ओर मैथिली ठाकुर है जिसने केवल यह कहा कि वे अलीनगर का नाम सीतानगर कर देंगी और चुनाव जीत गयीं ।
ले लि मजहब ( वामपंथ भी एक मजहब ही है अब ) के अनुसार कितना बड़ा पाप बिहार में हुआ है ।
बिहार के बाहर अथवा भारत के बाहर लोग सोचें कि क्या हो गया है ?
अब करते हैं इसी नैरेटिव्स का मंथन ।
प्रश्न करिये कि क्या मैथिली ठाकुर और सिन्हा एक दूसरे के विपरीत लड़ रहे थे कि उन दोनों में से एक को चुनना था ? नहीं न ?
क्या सिन्हा की हार के लिये कहीं से भी मैथिली ठाकुर को दोषी ठहराया जा सकता है ? नहीं न !
अब कुछ लोग कहेंगे कि मैथिली ठाकुर के शून्य योगदान और सिन्हा के अतुलनीय योगदान की तुलना करी जा रही थी ।
शिक्षा क्या करती है ? शिक्षा , मनुष्य को मानवीय मूल्यों की ओर ले जाती है , हृदय का निर्माण करती है और जीवन को सफल बनाती है ।
तो क्या लगभग 15 वर्षों से मैथिली ठाकुर के गाये भजन हमारे हृदय को पवित्र नहीं कर रहे ? क्या फूहड़ गानों के विपरीत मैथिली के भजन लोकगीत हमारे जीवन के लिए कुछ नहीं है ?
और यदि प्रत्याशी की विपरीतता का प्रश्न था तो “ ओसामा साहब “ ध्यान दें एक दुर्दांत अपराधी का बेटा जब अपनी माँ की गर्भ में पहुँचा तो साहब बन चुका था ।
क्या योग्यता है ओसामा साहब की ? क्यों नहीं एक भी मीडिया चैनल ने कहा कि एक दुर्दांत अपराध की छवि वाला जीत गया और सिन्हा जी हार गये ।
क्यों किसी ने यह नहीं कहा कि उन्हीं के इकोसिस्टम वाली कांग्रेस पार्टी को सिन्हा से विरुद्ध प्रत्याशी नहीं खड़ा करना था । सिन्हा जी तो तृतीय स्थान पर आये न !
मित्रों मुझे न मैथिली ठाकुर से कोई लेना देना है न सिन्हा न ओसामा …
मैं केवल यह बता रहा हूँ कि कैसे मीडिया एक नैरेटिव सेट करता है ।
🙏🌷🙏