11/06/2026
मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले से बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया है। ब्यावरा के पीपलबे स्थित प्रभुकृपा परिसर के श्रीयादव गोदाम (23) में रखा हजारों क्विंटल सरकारी गेहूं के बुरादा बनने के मामले में कार्रवाई के पहले ही जिले के 35 और गोदामों में गरीबों के निवाले के 1354.55 करोड़ रुपए (समर्थन मूल्य 2625 रु. प्रति क्विंटल के हिसाब से है गेहूं की कीमत बनती है) के 51 हजार 602.01 मीट्रिक टन गेहूं को और घुन लगने की पुष्टि हुई है। इन्हीं 35 में से तीन गोदामों में रखा 23.7 करोड़ का 8790 मीट्रिक टन गेहूं पूरी तरह से बुरादानुमा पाउडर बनने से रिजेक्ट की श्रेणी (रैक में लदान के समय पृथक) कर दिया गया है। यह चौंकाने वाला खुलासा भारतीय खाद्य निगम यानी फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (FCI Report) की निरीक्षण रिपोर्ट से हुआ है।
एफसीआई की रिपोर्ट में खुलासा
दरअसल भारतीय खाद्य निगम द्वारा गेहूं के उठाव / लदान के पूर्व प्रत्येक गोदाम में रखे अनाज का निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार की जाती है। आगामी माह में लगने वाली रैक के लिए इसकी हाल ही में जारी 35 गोदामों की रिपोर्ट में बड़ी मात्रा में गेहूं को घुन लगने और बुरादा बनने की बात सामने आई है। रिपोर्ट सामने आने के बाद वेयरहाउस कॉर्पोरेशन के क्षेत्रीय कार्यालय भोपाल से लेकर राजगढ़ जिला कार्यालय तक हडक़ंप मचा हुआ है। गरीबों के निवाले को कीड़ों के खाने के पीछे की सबसे बड़ी वजह समय पर कीटनाशक का छिडक़ाव और रखरखाव नहीं होना सामने आ रहा है। विभाग को गोदामों में रखे अनाज की सुरक्षित रखने हर 15 दिन में एक बार कीटनाशक छिडक़ाव व प्रत्येक तीन माह में कीटनाशक की गोलियां रखवाई जाती है, लेकिन इनका इस्तेमाल नहीं किया गया, इसलिए बड़ी मात्रा में गेहूं को कीड़ों ने चटकर दिया। खास बात यह है कि जिन गोदामों में सरकारी अनाज को कीड़े खा गए हैं उनमें से ज्यादातर नेताओं व बड़े रसूखदारों के है। इसलिए विभागीय अधिकारी भी सीधे तौर पर कार्रवाई करने से बच रहे हैं। रिपोर्ट में उक्त गोदामों में खराब हुए गेहूं को तुरंत कीटमुक्त कराकर एफसीआई को सूचित करने को कहा है।
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