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24/05/2026
🏆 *साहित्य सम्मान - 2026* ✍ *अंतरराष्ट्रीय हिन्दी साहित्य मंच "हमारीवाणी"* 👉 *सारा सच* (मीडिया) के अंतर्गत *अंतरराष्ट्री...
24/05/2026

🏆 *साहित्य सम्मान - 2026*

✍ *अंतरराष्ट्रीय हिन्दी साहित्य मंच "हमारीवाणी"*

👉 *सारा सच* (मीडिया) के अंतर्गत *अंतरराष्ट्रीय हिन्दी साहित्य साप्ताहिक प्रतियोगिता* का आयोजन हो रहा है

🏅 *मई तीसरे साप्ताह की प्रतियोगिता मे सर्वश्रेष्ठ लेखको के नाम* 🏵

🏵 *प्रतियोगिता का विषय*
*पेट्रोल / डीजल / सोना / चांदी / यात्रा / तेल / महंगाई / बचाओ / सरकार*

🏆 *पहला स्थान* - डॉ वाई कस्तूरी बाई (कर्नाटका)
🏆 *दूसरा स्थान* - विदुषी प्रज्ञा (दिल्ली)
🏆 *तीसरा स्थान* - अमीता मराठे (मध्य प्रदेश)
🏆 *चौथा स्थान* - गणपत लाल उदय (राजस्थान)
🏆 *पांचवा स्थान* - कमल धमीजा (हरियाणा)
🏆 *छठा स्थान* - अनंतराम चौबे (मध्य प्रदेश)
🏆 *सातवा स्थान* - संजय वर्मा (मध्य प्रदेश)
🏆 *आठवा स्थान* - डॉ ऊषा पाण्डेय (वैस्ट बंगाल)
🏆 *नोवा स्थान* - उमेश नाग (राजस्थान)
🏆 *दसवा स्थान* - डॉ तरुण राय कागा (राजस्थान)

🥈 *आप को सारा सच व हमारीवाणी की ओर से बधाई* 🥈🥇🥉🏅🎖

⭕⭕⭕⭕⭕⭕⭕
1👉 *दस विजेताओं* को फोटो के साथ *राष्ट्रीय हिन्दी समाचार पत्र* के *"पहले पेज"* पर जगह देकर विजेता घोषित किया जाता है
2👉 *दस विजेताओं* की *रचना* उनके फोटो के साथ *राष्ट्रीय हिंदी समाचार पत्र* मे *"प्रकाशित"* भी होती है
3👉 *विजेताओं* और सभी प्रतिभागीयों को *"सम्मान पत्र"* (PDF) भी दिया जाता है
4👉 *सभी प्रतिभागियों* की रचना *वेबसाइट* पर प्रकाशित की जाती है
5👉 *सभी प्रतिभागियों* की *रचना* व उनका *"प्रमोशन" सोशल मीडिया* (फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब) पर भी किया जाता है

⭕⭕⭕⭕⭕⭕⭕
*सारा सच* (दिल्ली से प्रकाशित) राष्ट्रीय हिंदी समाचर पत्र *भारत सरकार समाचारपत्रों के पंजीयक कार्यालय (RNI)* द्वारा पंजीकृत
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*रचना भेजने के माध्यम:-*
1. व्हाट्सएप - 9990007067
2. ईमेल - [email protected]

*पंजीकरण-शुल्क* भेजने के माध्यम:-
1. फ़ोन पे - 9990007067
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#हमारीवाणी #सारासच #लेखक #कविता #साहित्य #काव्य

अधिक जानकारी के लिए देखे-
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👉 *https://www.hamarivani.in/*
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🏆 *साहित्य सम्मान - 2026* ✍ *अंतरराष्ट्रीय हिन्दी साहित्य मंच "हमारीवाणी"* 👉 *सारा सच* (मीडिया) के अंतर्गत *अंतरराष्ट्री...
22/05/2026

🏆 *साहित्य सम्मान - 2026*

✍ *अंतरराष्ट्रीय हिन्दी साहित्य मंच "हमारीवाणी"*

👉 *सारा सच* (मीडिया) के अंतर्गत *अंतरराष्ट्रीय हिन्दी साहित्य साप्ताहिक प्रतियोगिता* का आयोजन हो रहा है

🏅 *मई दूसरे साप्ताह की प्रतियोगिता मे सर्वश्रेष्ठ लेखको के नाम* 🏵

🏵 *प्रतियोगिता का विषय*
* #बंगाल #परिवर्तन #संघर्ष #इतिहास #हिंसा #शासन #आंदोलन #राजनीति #चुनाव*

🏆 *पहला स्थान* - अनंतराम चौबे (मध्य प्रदेश)
🏆 *दूसरा स्थान* - अमीता मराठे (मध्य प्रदेश)
🏆 *तीसरा स्थान* - डॉ ऊषा पाण्डेय (वैस्ट बंगाल)
🏆 *चौथा स्थान* - डॉ वाई कस्तूरी बाई (कर्नाटका)
🏆 *पांचवा स्थान* - गोरक्ष जाधव (महाराष्ट्र)
🏆 *छठा स्थान* - विदुषी प्रज्ञा (दिल्ली)
🏆 *सातवा स्थान* - कमल धमीजा (हरियाणा)
🏆 *आठवा स्थान* - संजय जैन बीना (महाराष्ट्र)
🏆 *नोवा स्थान* - रशीद अकेला (झारखण्ड)
🏆 *दसवा स्थान* - उमेश नाग (राजस्थान)

🥈 *आप को सारा सच व हमारीवाणी की ओर से बधाई* 🥈🥇🥉🏅🎖

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1👉 *दस विजेताओं* को फोटो के साथ *राष्ट्रीय हिन्दी समाचार पत्र* के *"पहले पेज"* पर जगह देकर विजेता घोषित किया जाता है
2👉 *दस विजेताओं* की *रचना* उनके फोटो के साथ *राष्ट्रीय हिंदी समाचार पत्र* मे *"प्रकाशित"* भी होती है
3👉 *विजेताओं* और सभी प्रतिभागीयों को *"सम्मान पत्र"* (PDF) भी दिया जाता है
4👉 *सभी प्रतिभागियों* की रचना *वेबसाइट* पर प्रकाशित की जाती है
5👉 *सभी प्रतिभागियों* की *रचना* व उनका *"प्रमोशन" सोशल मीडिया* (फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब) पर भी किया जाता है

⭕⭕⭕⭕⭕⭕⭕
*सारा सच* (दिल्ली से प्रकाशित) राष्ट्रीय हिंदी समाचर पत्र *भारत सरकार समाचारपत्रों के पंजीयक कार्यालय (RNI)* द्वारा पंजीकृत
⭕⭕⭕⭕⭕⭕⭕

*रचना भेजने के माध्यम:-*
1. व्हाट्सएप - 9990007067
2. ईमेल - [email protected]

*पंजीकरण-शुल्क* भेजने के माध्यम:-
1. फ़ोन पे - 9990007067
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#हमारीवाणी #सारासच #लेखक #कविता #साहित्य #काव्य

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विषय: मजेदार हास्य व्यंग्य लेख —  #कॉकरोच का धमाल” छपने के लिए।     #सारासच    #हमारीवाणी     मैं आज के ताजा माहौल को दे...
21/05/2026

विषय: मजेदार हास्य व्यंग्य लेख — #कॉकरोच का धमाल” छपने के लिए।

#सारासच #हमारीवाणी
मैं आज के ताजा माहौल को देखते हुए एक बहुत ही मजेदार और प्रेरणा देने वाला विशेष लेख “कॉकरोच का धमाल” आपको भेज रहा हूँ। आज के इस चिंता और तनाव भरे समय में यह लेख पाठकों के चेहरे पर मुस्कान लाएगा और उन्हें एक अच्छा संदेश भी देगा।
मुझे पूरा भरोसा है कि आपके जाने-माने और बड़े अखबार के पाठकों को यह अनोखा लेख बहुत पसंद आएगा और उन्हें आगे बढ़ने की सीख भी देगा।
उम्मीद है कि आप इस मजेदार लेख को अपने सम्मानित अखबार में जरूर जगह देंगे।
धन्यवाद।
भवदीय,
जौली अंकल

“कॉकरोच का धमाल”
आज एक ऐसे गंभीर, संवेदनशील और विशेष विषय पर बात करते है, जिसे सुनकर शायद आपकी रीढ़ की हड्डी में सिहरन दौड़ जाए। जी नहीं, मैं किसी नए टैक्स या महंगाई की बात नहीं कर रहा, मैं बात कर रहा हूँ उस प्राणी की, जो डायनासोर के जमाने से लेकर आज के परमाणु युग तक, सीना तानकर और छह पैर हिलाकर हमारे रसोईघर में राज कर रहा है यानी कॉकरोच। आजकल पूरे देश में इस जीव की ऐसी जबरदस्त चर्चा है कि पूछिए मत। पिछले चार पांच दिनों में लाखों लोग इसके प्रशंसक हो चुके हैं और हर दिन यह तादाद बढ़ती ही जा रही है। समाचार और सोशल मीडिया के सारे मंचों पर इसके नाम की आंधी चल रही है, और ऐसा लग रहा है कि जैसे देश में कोई कॉकरोच क्रांति आ गई हो। खुद कॉकरोच भी अपने एंटीना हिला हिलाकर हैरान है कि आखिर ऊपर वाला अचानक उस पर इतना मेहरबान कैसे हो गया और उसे इतना ज्यादा प्यार क्यों मिल रहा है।

अब जरा इस ब्रह्मांड के डर के विज्ञान और इसकी पूरी श्रृंखला को समझिए, जो हमारे समाज में एक बहुत ही खूबसूरत और स्वचालित व्यवस्था के तहत काम करती है। उदाहरण के लिए चूहा बिल्ली से डरता है, बिल्ली कुत्ते से डरती है, कुत्ता आदमी से डरता है, और वो बहादुर आदमी अपनी धर्मपत्नी यानी बीवी से डरता है। लेकिन कहानी का मुख्य मोड़ यहाँ नहीं है, वह बीवी जिससे बड़े बड़े सूरमा थर-थर कांपते हैं, जैसे ही रसोईघर में एक नन्हे से कॉकरोच को देख लेती है, तो उसकी चीख से पूरा मोहल्ला जाग जाता है और वो सीधे खाने की मेज के ऊपर छलांग लगा देती है। कहने का भाव यह है कि इस पूरी दुनिया का अंतिम और सबसे बड़ा विजेता कोई और नहीं, बल्कि हमारा कॉकरोच महाशय ही है, क्योंकि जिससे साक्षात यमराज की शक्ति रखने वाली बीवी भी डर जाए, उससे पूरा ब्रह्मांड अपने आप ही डर जाता है।

इस डर और दीवानगी के बीच, मुझे एक पुराना किस्सा याद आता है जब एक महाशय ने अपनी पत्नी को खुश करने के लिए कीड़े मकोड़े मारने वाले विशेषज्ञ को बुलाया ताकि घर के सारे कॉकरोच साफ हो सकें। अगले दिन जब उन्होंने देखा कि रसोईघर में अभी भी दो चार कॉकरोच मजे से हलवा खा रहे हैं, तो उन्होंने गुस्से में कॉकरोच से पूछा कि तुम लोग मरते क्यों नहीं, कल दवा छिड़की थी ना, तो कॉकरोच ने बड़े अदब से मूंछें मटकाते हुए जवाब दिया कि अरे अंकल जी, वो जहर था क्या, हमें तो लगा हमारी लोकप्रियता देखकर आपने हमारे स्वागत में कोई सुगंधित इत्र छिड़का है।

एक प्रसिद्ध व्यंग्यकार के अंदाज में कहें तो, सरकार को तुरंत कॉकरोच संरक्षण एवं विकास मंत्रालय खोल देना चाहिए क्योंकि जब देश के लाखों लोग इनके प्रशंसक बन ही रहे हैं, तो इन्हें राशन कार्ड और पहचान पत्र भी दे देना चाहिए। आखिर जिस जीव में इतनी ताकत हो कि वह बिना सिर के भी एक हफ्ते तक जिंदा रह सके, उसे तो हमारे देश की राजनीति में होना चाहिए था, जहाँ वैसे भी लोग बिना दिमाग इस्तेमाल किए सालों साल राज करते हैं। आजकल लोग सुबह उठकर अखबार में मुख्य समाचार बाद में देखते हैं, पहले यह चेक करते हैं कि आज कॉकरोच ने कौन सा नया कीर्तिमान तोड़ा है, यह ऐसा कॉकरोच है जिसे देखकर नफरत नहीं, बल्कि प्यार उमड़ रहा है और कॉकरोच खुद शीशे के सामने खड़ा होकर सोच रहा है कि कहीं मैं पिछले जन्म में कोई बड़ा कलाकार तो नहीं था।

चलो, हंसी मजाक अपनी जगह है, लेकिन पैंतालीस किताबें लिखने के बाद अगर मैं आपको कोई गहरी बात न समझाऊं, तो मेरा जौली अंकल होना बेकार है, इसलिए इस कॉकरोच की कहानी से हमें एक बहुत बड़ा और गंभीर सामाजिक संदेश मिलता है। कॉकरोच की सबसे बड़ी खासियत विपरीत परिस्थितियों में भी जीवित रहने की कला और हर माहौल में खुद को ढाल लेना है, दुनिया इधर की उधर हो जाए, परमाणु बम गिर जाए या कोई चप्पल तानकर खड़ा हो, कॉकरोच कभी हार नहीं मानता, वो मुस्कुराकर और मूंछ हिलाकर आगे बढ़ जाता है। आज के इस तनावभरे दौर में, हमें भी कॉकरोच से यही झेलने की क्षमता और जुझारूपन सीखना चाहिए कि मुश्किलें चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हों, हमें घबराना नहीं है, बल्कि अपने भीतर के डर को भगाकर समाज में शांति और खुशियां फैलानी हैं, और हर परिस्थिति में कॉकरोच की तरह अडिग रहना है क्योंकि जिंदगी मुस्कुराते हुए जीने का नाम है, डरने का नहीं।

- जौली अंकल

बंगभूमि का अमर स्वर - Dr. Pro. Y. Kasturi Bai      *******************बंगभूमि केवल एक प्रदेश नहीं,वह इतिहास की जागृत चेत...
18/05/2026

बंगभूमि का अमर स्वर - Dr. Pro. Y. Kasturi Bai
*******************

बंगभूमि केवल एक प्रदेश नहीं,
वह इतिहास की जागृत चेतना है।
यह वही धरा है जहाँ स्वाधीनता का प्रथम स्वर गूँजा,
जहाँ जनमानस ने अन्याय के विरुद्ध विद्रोह सीखा।

कभी विभाजन की वेदना ने इसे अश्रुपूरित किया,
कभी स्वदेशी आंदोलन ने इसे अग्निमय बना दिया।
क्रांतिकारियों के चरणों से यह भूमि पावन हुई,
और संघर्षों की ज्वाला से युगों तक आलोकित रही।

यहाँ परिवर्तन केवल शासन परिवर्तन नहीं रहा,
बल्कि विचारों का महासंग्राम बनकर उभरा।
कभी किसान आंदोलनों ने नई दिशा दी,
कभी छात्र चेतना ने व्यवस्था को चुनौती दी।

बंगाल की राजनीति सदैव प्रखर रही है।
यहाँ शब्द भी शस्त्र बन जाते हैं,
और भाषण जनभावनाओं का ज्वार बन उठते हैं।
शासन बदलते रहे,
किन्तु संघर्षों की धारा कभी नहीं रुकी।

दुर्भाग्यवश अनेक बार हिंसा ने भी इस भूमि को आहत किया।
चुनाव लोकतंत्र का पर्व होने के स्थान पर
कभी-कभी भय और टकराव का रूप ले बैठे।
रक्तरंजित मार्गों ने मानवता को प्रश्नों के सम्मुख खड़ा किया।

किन्तु यही बंगभूमि संगीत की मधुर सरिता भी है।
रवीन्द्र-संगीत की स्वर लहरियाँ यहाँ के आकाश में गूँजती हैं।
साहित्य यहाँ केवल पठन नहीं, जीवन का आलोक है।
संस्कृति यहाँ की श्वासों में बसती है,
और आहार-विहार में भी आत्मीयता की सुगंध मिलती है।

माटी की सौंधी गंध, मछली-भात की सरलता,
दुर्गोत्सव की दिव्यता,
और मानवीय संवेदनाओं की कोमलता—
इन सबने बंगाल को अद्वितीय बना दिया है।

बंगाल आज भी भारत की चेतना में
परिवर्तन, साहित्य, संस्कृति और अदम्य साहस का अमिट प्रतीक बना हुआ है॥
Dr. Pro. Y. Kasturi Bai
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