ओबीसी संयोजन समिति, असम राज्यoffice

  • Home
  • India
  • Gauhati
  • ओबीसी संयोजन समिति, असम राज्यoffice
Directions

ओबीसी संयोजन समिति, असम राज्यoffice Contact information, map and directions, contact form, opening hours, services, ratings, photos, videos and announcements from ओबीसी संयोजन समिति, असम राज्यoffice, Social Media Agency, Guwahati, Assam, India, Gauhati.

OBC का सवाल सिर्फ “जाति” लिख देने से खत्म नहीं होगा!आज 14 अगस्त 2026 को Census 2027 के 40 सवाल अधिसूचित किए गए। प्रश्न स...
15/08/2026

OBC का सवाल सिर्फ “जाति” लिख देने से खत्म नहीं होगा!

आज 14 अगस्त 2026 को Census 2027 के 40 सवाल अधिसूचित किए गए। प्रश्न संख्या 10 में “SC/ST/Caste” लिखा है, लेकिन OBC का अलग कॉलम/श्रेणी स्पष्ट रूप से नहीं दी गई।

अगर Narendra Modi Amit Shah Bharatiya Janata Party (BJP) सरकार सच में जातिगत जनगणना कर रही है तो OBC की जातियों का अलग-अलग वैज्ञानिक रिकॉर्ड और कुल OBC आबादी का आधिकारिक आंकड़ा कैसे सुनिश्चित होगा?

ओबीसी महासभा की मांग स्पष्ट है—जाति पूछो तो जाति का पूरा डेटा दो।
OBC की गणना करो और आधिकारिक आंकड़ा दो।

आधे-अधूरे प्रारूप से करोड़ों पिछड़े वर्ग के लोगों के साथ न्याय नहीं होगा।

जनगणना हमारा अधिकार है, सही सामाजिक आंकड़ा हमारा अधिकार है।


#जातिगत_जनगणना

!!!! ॐ नमः शिवाय !!!!07 अगस्त 2026"ओबीसी सामाजिक न्याय दिवस"                     एवंश्रावण मास कार्तिगई कथा आयोजन       ...
04/08/2026

!!!! ॐ नमः शिवाय !!!!

07 अगस्त 2026

"ओबीसी सामाजिक न्याय दिवस"
एवं
श्रावण मास कार्तिगई कथा आयोजन

सादर आमंत्रण!!

कार्तिगई कथा श्रावण मास में जब चंद्रमा कृत्तिका नक्षत्र में होता है, उस पावन अवसर पर भगवान महादेव एवं भगवान कार्तिकेय (मुरुगन) की आराधना एवं कथा का आयोजन किया जाता है।

07 अगस्त 1990 को तत्कालीन प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह ने मंडल आयोग की अनुशंसाओं के प्रथम चरण को लागू कर ओबीसी वर्ग को 27% आरक्षण प्रदान किया। यह स्वतंत्र भारत में सामाजिक न्याय की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर माना जाता है।

कार्यक्रम

1. श्रावण मास कार्तिगई कथा एवं विशेष प्रवचन - आचार्य श्री नारायण कौशिक जी महाराज (युग पुरोहित)

2. "ओबीसी सामाजिक न्याय दिवस" पर विशेष व्याख्यान:- अधिवक्ता श्री शत्रुहन सिंह साहू (सदस्य राज्य विधिज्ञ परिषद छत्तीसगढ़)

3. "ओबीसी दिवस" (10 सितम्बर 2026) की तैयारी एवं संगठनात्मक चर्चा-: श्री टिकेश्वर साहू

दिनांक: 07 अगस्त 2026 (शुक्रवार)
समय: दोपहर 12:00 बजे से सायं 5:00 बजे तक
स्थान: साहू समाज भवन,इतवारी बाजार, साईं मंदिर के पास,बांसपारा -धमतरी (छत्तीसगढ़)

आयोजक
ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) संयोजन समिति, छत्तीसगढ़ (रजि.)

संपर्क:
9827183817 | 940601165 | 9009190075 | 9893319674 | 9981894385 | 7828476664

सामाजिक न्याय • सामाजिक समरसता • संगठन • जागरूकता

छत्रपति शाहू जी महाराज (राजर्षि शाहू महाराज) किन152वीं जयंती विशेष -राजर्षि शाहू जी महाराज कोल्हापुर रियासत के प्रसिद्ध ...
26/06/2026

छत्रपति शाहू जी महाराज (राजर्षि शाहू महाराज) किन152वीं जयंती विशेष -

राजर्षि शाहू जी महाराज कोल्हापुर रियासत के प्रसिद्ध शासक, सामाजिक सुधारक और शिक्षाप्रेमी थे। उनका जन्म 26 जून 1874 को कागल (कोल्हापुर, महाराष्ट्र) में यशवंतराव घाटगे के रूप में हुआ था। वे शिवाजी महाराज की वंश परंपरा से जुड़े भोंसले राजवंश के थे। महारानी आनंदीबाई ने उन्हें गोद लिया और 1894 में मात्र 20 वर्ष की आयु में कोल्हापुर की गद्दी संभाली। उन्होंने 1922 तक शासन किया।
खास बातें और योगदान:
सामाजिक न्याय और आरक्षण के अग्रदूत: 1902 में उन्होंने भारत में सबसे पहले 50% आरक्षण की नीति लागू की — सरकारी नौकरियों और शिक्षा में पिछड़ी जातियों (Non-Brahmin) के लिए। यह सामाजिक समानता की दिशा में क्रांतिकारी कदम था।
शिक्षा क्रांति:
मुफ्त और अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा (1917) लागू की, जो सभी जाति-धर्म के बच्चों के लिए थी।
लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा दिया, लड़कियों के लिए स्कूल, हॉस्टल और छात्रवृत्तियां शुरू कीं।
कई हॉस्टल, स्कूल और कॉलेज स्थापित किए (जैसे राजाराम कॉलेज)।
पिछड़े वर्गों, दलितों और महिलाओं के लिए विशेष सुविधाएं दीं। उन्होंने डॉ. बी.आर. आंबेडकर जैसे नेताओं का भी समर्थन किया।
किसानों और समाज के उत्थान: सिंचाई नीतियां शुरू कीं, भूमि सुधार किए और किसानों की स्थिति सुधारने के प्रयास किए।
महिलाओं के अधिकार: बाल विवाह पर रोक, विधवा पुनर्विवाह को बढ़ावा, देवदासी प्रथा पर प्रतिबंध जैसी सुधार लाए।
व्यक्तित्व: वे "राजर्षि" उपाधि से सम्मानित थे। लोकप्रिय राजा के रूप में जाने जाते थे, जो जातिवाद के खिलाफ थे और समानता के पक्षधर थे। उनका निधन 6 मई 1922 को मात्र 47 वर्ष की आयु में हुआ।
शाहू महाराज का योगदान आज भी महाराष्ट्र और पूरे भारत में सामाजिक न्याय, शिक्षा और समावेशी विकास की प्रेरणा है।

नोट: कभी-कभी लोग 18वीं शताब्दी के मराठा सम्राट शाहू (शिवाजी के पौत्र) को भी छत्रपति शाहू कहते हैं, लेकिन "शाहू जी महाराज" से आमतौर पर कोल्हापुर वाले राजर्षि शाहू महाराज ही समझे जाते हैं।

135 वीं जयंती विशेष-डॉ भीमराव रामजी अंबेडकर ( डॉ बी.आर. अंबेडकर) डॉ. अंबेडकर भारत के सबसे महान सामाजिक सुधारकों, विधिवेत...
14/04/2026

135 वीं जयंती विशेष-
डॉ भीमराव रामजी अंबेडकर ( डॉ बी.आर. अंबेडकर)
डॉ. अंबेडकर भारत के सबसे महान सामाजिक सुधारकों, विधिवेत्ताओं, अर्थशास्त्रियों, राजनीतिज्ञों और बौद्ध धर्म के अनुयायियों में से एक थे।वे पहले भारतीय थे जिन्होंने विदेश में अर्थशास्त्र में डॉक्टरेट की।1947 में संविधान सभा के ड्राफ्टिंग कमेटी के अध्यक्ष बने।भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाए।"बहिष्कृत हितकारिणी सभा" की स्थापना की। हिंदू कोड बिल के माध्यम से महिलाओं को बेटे के सामान संपत्ति और विवाह में अधिकार दिलाने की लड़ाई लड़े।

“जो धर्म स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व सिखाता है, वही सच्चा धर्म है।”
“शिक्षा सामाजिक बुराइयों से लड़ने का शक्तिशाली हथियार है।”

स्मृति विशेष:बिंदेश्वरी प्रसाद मंडल ( 25 अगस्त 1918-13 अप्रैल 1982) एक भारतीय राजनेता,सामाजिक न्याय के प्रबल समर्थक और म...
13/04/2026

स्मृति विशेष:
बिंदेश्वरी प्रसाद मंडल ( 25 अगस्त 1918-13 अप्रैल 1982) एक भारतीय राजनेता,सामाजिक न्याय के प्रबल समर्थक और मंडल आयोग के अध्यक्ष थे। वे जमींदार यादव परिवार से आते हैं। वे भारतीय राजनीति में ओबीसी उत्थान और आरक्षण नीति के प्रणेता और ' मूक क्रांति के नायक ' के रूप में याद किए जाते हैं। बिहार के 7वें मुख्यमंत्री रह चुके हैं।उनके योगदान से ओबीसी समुदाय में शिक्षा, नौकरी और राजनीति में प्रतिनिधित्व बढ़ा। बिहार के मधेपुरा में उनके नाम पर इंजीनियरिंग कॉलेज है और 2001 में डाक टिकट जारी किया गया।

44 वें स्मृति दिवस पर सादर नमन .......

महात्मा ज्योतिबा फुले का जीवन हमें सिखाता है कि शिक्षा ही सामाजिक न्याय और समानता का सबसे बड़ा हथियार है। उन्होंने ब्राह...
11/04/2026

महात्मा ज्योतिबा फुले का जीवन हमें सिखाता है कि शिक्षा ही सामाजिक न्याय और समानता का सबसे बड़ा हथियार है। उन्होंने ब्राह्मणवादी व्यवस्था को चुनौती दी और "बहुजन हिताय" का मंत्र दिया, जो आज भी प्रासंगिक है। आज उनकी 199 वीं जयंती पर उनके विचारों को अपनाने और सामाजिक समानता के लिए काम करने का संकल्प लेना ही सच्ची श्रद्धांजलि है।ज्योतिबा फुले जी को 'महात्मा' की उपाधि 11 मई 1888 को मिली थी।
यह उपाधि मुंबई में एक विशाल जनसभा में महाराष्ट्रीय सामाजिक कार्यकर्ता विठ्ठलराव कृष्णाजी वंदेकर द्वारा दी गई थी।

11 अप्रैल 1827

Q:क्या ओबीसी को राजनीतिक पार्टियों का गुलाम कहना उचित है ? आइए इस पर विश्लेषण करते हैं।Ans:ओबीसी के लोग कांग्रेस या बीजे...
07/04/2026

Q:क्या ओबीसी को राजनीतिक पार्टियों का गुलाम कहना उचित है ? आइए इस पर विश्लेषण करते हैं।

Ans:ओबीसी के लोग कांग्रेस या बीजेपी के “गुलाम” नहीं हैं। वे भारतीय लोकतंत्र के सबसे बड़े वोट बैंक में से एक हैं (लगभग 40-52% आबादी, मंडल आयोग के अनुसार), और वे अपनी सुविधा, हित और गणित के हिसाब से वोट देते हैं। “गुलाम” शब्द इस्तेमाल करना ही गलत है—यह एक समुदाय को अपमानित करता है और वास्तविकता को छुपाता है।
वास्तविक कारण क्या हैं?
जाति-आधारित वोट बैंक की राजनीति
भारत में वोटिंग ज्यादातर जाति, समुदाय और स्थानीय गणित पर होती है। ओबीसी (यादव, कुर्मी, पटेल, जाट, गुर्जर, माली, आदि) एक मोनोलिथिक ब्लॉक नहीं हैं।
बीजेपी ने 2014 के बाद “नॉन-यादव ओबीसी” और “अति-पिछड़ा” (EBC) को अलग-अलग किया। छोटी-छोटी ओबीसी जातियों को टिकट, मंत्री पद और योजनाओं का फायदा देकर अपना वोट बैंक बनाया।
कांग्रेस ने पहले मंडल कमीशन (1990) का विरोध किया था (राजीव गांधी के समय), बाद में समर्थन किया, लेकिन संगठनात्मक रूप से ऊपरी जातियों पर निर्भर रही। इसलिए उसका ओबीसी आधार कमजोर हुआ।
दोनों पार्टियाँ आरक्षण, प्रमोशन, शिक्षा और नौकरियों के वादे करती हैं—इसीलिए ओबीसी वोटर उन्हें “उपयोगी” मानते हैं।
कल्याणकारी योजनाओं का असर
गरीबी रेखा के नीचे या निचले मध्यम वर्ग के बहुत से ओबीसी परिवारों को बीजेपी की योजनाएँ (PM Awas, Ujjwala, Ayushman, free ration, किसान सम्मान निधि, मुद्रा लोन) सीधा फायदा पहुँचाती हैं। कांग्रेस भी जब सत्ता में थी तो इसी तरह की योजनाएँ चलाती थी। जब कोई पार्टी सत्ता में होती है तो उसके पास पैसा और स्कीम होती है—वोटर उसी को चुनते हैं। यह गुलामी नहीं, व्यावहारिक गणित है।
क्षेत्रीय और राज्य-विशेष अंतर
उत्तर प्रदेश-बिहार में यादव-जैसे बड़े ओबीसी समुदाय SP/RJD को वोट देते हैं, न कि सीधे कांग्रेस-बीजेपी को।
मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, हरियाणा में बीजेपी को ओबीसी का बड़ा समर्थन मिलता है।
कुछ राज्यों में कांग्रेस अभी भी ओबीसी वोट ले लेती है।
मतलब कोई “गुलामी” नहीं है—वोटर जहाँ फायदा दिखता है, वहाँ जाते हैं। 2019 और 2024 के चुनावों में बीजेपी ने ओबीसी को अपनी तरफ ज्यादा खींचा, लेकिन 2025-26 के उपचुनावों या भविष्य में यह बदल भी सकता है।
नेतृत्व और पहचान
नरेंद्र मोदी खुद ओबीसी (घांची) बैकग्राउंड से हैं—इससे बहुत से ओबीसी वोटरों में “अपना आदमी” वाला भाव आता है। कांग्रेस के पास अभी ऐसा कोई चेहरा नहीं है। लेकिन यह स्थायी नहीं है। 1990 के दशक में VP सिंह (ओबीसी) ने मंडल लागू किया तो ओबीसी ने जनता दल को सपोर्ट किया। वोटर बदलते रहते हैं।

अगर कोई समुदाय किसी पार्टी को बार-बार वोट दे रहा है, तो वह इसलिए क्योंकि वह पार्टी उस समय उसके हितों के सबसे करीब लगती है। “गुलाम” कहना उन लाखों ओबीसी मतदाताओं का अपमान है जो अपनी मर्जी से वोट डालते हैं। अगर वे असंतुष्ट होंगे तो अगले चुनाव में वोट बदल देंगे—जैसा उन्होंने कई बार किया है।
भारतीय राजनीति में जाति, विकास और सत्ता का गठजोड़ है। इसे “गुलामी” कहकर सरल बनाना वास्तविकता से बचना है। ओबीसी लोग किसी के गुलाम नहीं—वे वोटर हैं, और वोटर की ताकत यही है कि वह अपनी शर्त पर पार्टी चुन सकता है।

 #जयंती_विशेष राष्ट्र निर्माता भारतरत्न जननायक कर्पूरी ठाकूर जयंती जननायक कर्पूरी ठाकुर भारत के राजनीति के वे अनोखे उदाह...
24/01/2026

#जयंती_विशेष
राष्ट्र निर्माता भारतरत्न जननायक कर्पूरी ठाकूर जयंती
जननायक कर्पूरी ठाकुर भारत के राजनीति के वे अनोखे उदाहरण हैं जिन्होंने राजनीति में आने से पूर्व में और मुख्यमंत्री बनने के बाद भी जातीय अपमान अवहेलना का दंश झेला, कारण एक ही था उनके विचार और संघर्ष । जो सामंती वर्ग समाज को लोकतंत्र होने के बाद भी वर्ण जाति अहंकार पर चलाना चाहता हो, उनके जातीय वर्चस्व को चुनौती देनेवाले नायक को स्वीकार करना उन्हें आज भी संभव नहीं है।
जननायक इस व्यवस्था को चुनौती थे उसे मूल से उखाड़ फेंकने के लिए जो शक्ति वंचितों को चाहिए थी चाहें वो शिक्षा के रूप में आरक्षण के रूप में अवसर के रूप में या सत्ता के भागीदारी के रूप में उन्होंने वंचितों को दी जिसका परिणाम उनमें आत्मभान स्वाभिमान पैदा हुआ ।
आज भारत की राजनीति में जो पिछड़े वर्गो का उभार उनकी महत्वाकांक्षा निर्माण हुई है उसकी नींव जननायक के द्वारा रखी गई थी।
आज उनके जन्मदिन पर उनकी मौलिक विरासत को याद करते हुए समता मूलक समाज के निर्माण के लिए अविरत संघर्ष करना होगा।
#स्वर्णिमभारतनिर्माताभारतरत्नजननायककर्पूरीठाकूर

*आज के ही दिन 01 जून 1873 को सामाजिक क्रांति के पुरोधा महात्मा ज्योतिबा फुले की बहुचर्चित किताब "गुलामगिरी" का प्रकाशन ह...
01/06/2025

*आज के ही दिन 01 जून 1873 को सामाजिक क्रांति के पुरोधा महात्मा ज्योतिबा फुले की बहुचर्चित किताब "गुलामगिरी" का प्रकाशन हुआ था। आज 152 साल बाद समाज में इस किताब की क्रांति देखने मिल रही है।आज पूरा भारतीय समाज सामाजिक न्याय के लिए आतुरता से एक साथ खड़े दिख रहे हैं।महात्मा ज्योतिबा फुले ने 1873 में पिछड़ एवं वंचित समाज के लिए "गुलामगिरी" लिखा, ताकि उन्हें जाति व्यवस्था के भेदभाव और उत्पीड़न का एहसास हो सके। गुलामगिरी भारतीय समाज की सामाजिक संरचना में ब्राह्मणवादी वर्चस्व और पाखंड के बारे में बात करता है। इस किताब में जाति व्यवस्था की प्रथा की गहराई के साथ आलोचना किया गया है। आप भी किसी बुक स्टोर से या ऑनलाइन शॉप से खरीदकर जरूर पढ़ें एवं बच्चों को पढ़ाएं।*

*टिकेश्वर साहू*
राष्ट्रीय प्रचारक एवम्
प्रदेशाध्यक्ष ओ.बी.सी.(मूल भारतीय समुदाय) संयोजन समिति, छत्तीसगढ़ 94060-61165

11 अप्रैल 1827सामाजिक क्रांति के प्रणेता राष्ट्रपिता महात्मा जोतिराव फुले जी के 198 वें जन्म जयंती के अवसर पर आप सभी को ...
11/04/2025

11 अप्रैल 1827
सामाजिक क्रांति के प्रणेता राष्ट्रपिता महात्मा जोतिराव फुले जी के 198 वें जन्म जयंती के अवसर पर आप सभी को को हार्दिक बधाई।

#राष्ट्रपिता_महात्मा_जोतिराव_फुले

पुनर्जागरण के राष्ट्रपिता महात्म ज्योतिबा फुले साहेब की जयंती हार्दिक मंगल कामनाएं.... पुनर्जागरण के राष्ट्रपिता की कहानी, वह कहानी है जो मानवतावादी प्रगतिशील ब्राह्मणों को भी पसंद है और बहुजनों को तो पसंद है, फिर भी कुछ मनुवादी ब्राह्मणवादी लोगों के द्वारा राष्ट्रपिता के जीवन पर आधारित बनी मूवी के आज होने वाले रिलीज को अभी हाल फिलहाल दो सप्ताह के लिए टाल दिया है......अब यह #फुले मूवी आज 11 अप्रैल के स्थान पर 25 अप्रैल को रिलीज होना तय हुआ, कोई बात नहीं यह मूवी जब रिलीज होगी तब हम सभी पूरे सिनेमा हॉल को फुल करके देखेंगे, हमे इंतजार रहेगा 25 अप्रैल का.... एक बार पुनः राष्ट्रपिता महात्म ज्योतिबा फुले साहेब की जयंती की हार्दिक मंगल कामनाएं.......

HighLight

Address

Guwahati, Assam, India
Gauhati

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when ओबीसी संयोजन समिति, असम राज्यoffice posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Shortcuts

Share