17/06/2026
Women Supporting Women: बदलाव की असली शुरुआत
घरों में बहू और बेटियों पर जो नियम, परंपराएँ और दबाव डाले जाते हैं, वे हमेशा पुरुषों द्वारा ही नहीं बनाए जाते। कई बार ये वही महिलाएँ आगे बढ़ाती हैं जिन्होंने वर्षों तक इन्हीं परिस्थितियों को सहा और स्वीकार किया होता है।
समस्या तब पैदा होती है जब एक पीढ़ी अपने संघर्षों और बंदिशों को अगली पीढ़ी की महिलाओं के लिए भी अनिवार्य बना देती है। “मैंने सहा है, तो तुम्हें भी सहना होगा” वाली मानसिकता महिलाओं की स्वतंत्रता और विकास को रोकती है।
लेकिन अब समय बदल रहा है। अब जरूरत है कि महिलाएँ एक-दूसरे की आलोचक नहीं, बल्कि सहयोगी बनें। जब एक महिला दूसरी महिला का साथ देती है, उसके सपनों को समझती है और उसे आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करती है, तभी वास्तविक महिला सशक्तिकरण संभव होता है।
यह जंजीर पीढ़ियों से चली आ रही है, लेकिन इसे तोड़ने की ताकत भी महिलाओं के पास ही है। बदलाव की शुरुआत तब होगी जब महिलाएँ एक-दूसरे को रोकने के ब�