21/05/2026
पथरी जंगल में गहराया जल संकट: सूख रहे हैं जलस्रोत, पानी की बूंद-बूंद को तरस रहे है वन्यजीव
सयोगी तसव्वर
[पथरी जंगल हरिद्वार]
[21/5/2025]: भीषण गर्मी और बढ़ते तापमान का असर अब इंसानी बस्तियों के साथ-साथ जंगलों में भी साफ दिखने लगा है। पथरी जंगल से आ रही तस्वीरें बेहद चिंताजनक हैं, जहाँ वन्यजीवों के पीने के पानी का मुख्य सहारा माने जाने वाले तालाब और पोखर पूरी तरह सूखने की कगार पर पहुँच चुके हैं।
जंगल के भीतर मौजूद जलस्रोत या तो पूरी तरह से मैदान में तब्दील हो चुके हैं या फिर उनमें नामात्र का गंदा पानी बचा है। पानी के इस भयंकर संकट के कारण बेजुबान जानवर बूंद-बूंद पानी के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
सूखते तालाब और बेहाल वन्यजीव
स्थानीय सूत्रों और तस्वीरों से साफ पता चलता है कि पथरी जंगल के कई बड़े तालाबों का पानी सूख चुका है। जहाँ कभी लबालब पानी रहता था, वहाँ अब केवल सूखी और दरकी हुई मिट्टी दिखाई दे रही है। कुछ स्थानों पर जहाँ थोड़ा-बहुत पानी बचा भी है, वह अत्यधिक गंदा और हरा हो चुका है, जो जानवरों के स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक साबित हो सकता है।
पानी की तलाश में अब अन्य छोटे-बड़े वन्यजीवों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
बढ़ रहा है इंसानी बस्तियों की ओर रुख का खतरा
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि जब जंगलों में प्राकृतिक जलस्रोत पूरी तरह सूख जाते हैं, तो जानवर अपनी प्यास बुझाने के लिए मजबूरन रिहायशी इलाकों और आस-पास के गांवों का रुख करते हैं। ऐसी स्थिति में मानव-वन्यजीव संघर्ष (Man-Animal Conflict) की घटनाएं बढ़ने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है, जिससे जानवरों और ग्रामीणों दोनों की जान जोखिम में पड़ जाती है।
स्थानीय ग्रामीणों और पर्यावरण प्रेमियों ने वन विभाग से इस गंभीर स्थिति पर तुरंत संज्ञान लेने की मांग की है। लोगों का कहना है कि:
जंगल के भीतर बने कृत्रिम वॉटर होलों (Water Holes) को टैंकरों के माध्यम से तुरंत भरा जाए।
सूख चुके तालाबों की जल्द से जल्द खुदाई (Dredging) करवाई जाए ताकि आने वाले मानसून में पानी का संचयन सही तरीके से हो सके