09/07/2026
आज खुलकर एक बात कह देता हूँ,क्योंकि कल भाईचारे का भरत मिलन हो गया तो शायद यह बात दिल में ही रह जाएगी।कुछ लोग बार-बार कहते हैं, सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बना लेना, जैसे मुख्यमंत्री बनाने का ठेका किसी एक समाज ने ले रखा हो।भाइयों, अगर किसी एक समाज के पास मुख्यमंत्री बनाने की ताकत होती, तो सबसे पहले वह अपने समाज के हर योग्य व्यक्ति को विधायक, सांसद और मुख्यमंत्री बना चुका होता। राजनीति इतनी सीधी गणित नहीं है कि किसी जाति की पंचायत बैठे और मुख्यमंत्री तय कर दे।जनता वोट देती है विधायक को, विधायक चुनते हैं सरकार को, और मुख्यमंत्री तय करता है पार्टी का नेतृत्व। इसलिए बार-बार यह अहसान जताना कि "हमने फलां नेता को बनाया राजनीति से ज्यादा आत्ममुग्धता लगती है।और रही बात सचिन पायलट की...सचिन पायलट किसी एक समाज की जागीर नहीं हैं। वे कांग्रेस के नेता हैं, राजस्थान की राजनीति का बड़ा चेहरा हैं। उन्हें एक जाति के दायरे में बांधने की कोशिश करना उनके कद को छोटा करना है।आप कांग्रेस को वोट दें, भाजपा को दें, निर्दलीय को दें या नोटा दबाएं, यह आपका अधिकार है। लेकिन यह मत समझिए कि आपके वोट सीधे मुख्यमंत्री की कुर्सी पर जाकर गिरते हैं।सबसे बड़ा भ्रम यही है कि कुछ लोग वोट को समर्थन नहीं, एहसान समझ बैठे हैं।राजनीति में समर्थन दिया जाता है, गिरवी नहीं रखा जाता।सम्मान कमाया जाता है, ब्लैकमेल करके नहीं लिया जाता।और बड़े नेता जातियों से पैदा जरूर होते हैं, लेकिन उनकी पहचान 36 बिरादरी से बनती है।इसलिए बार-बार हम चाहें तो मुख्यमंत्री बना दें वाला संवाद छोड़ दीजिए। लोकतंत्र में कोई एक समाज किसी को मुख्यमंत्री नहीं बनाता, जनता का व्यापक समर्थन और राजनीतिक परिस्थितियाँ बनाती हैं।बाकी, जो सच है वो सच है...सूरज को चिराग दिखाने से रोशनी नहीं बढ़ती, और किसी बड़े नेता को बार-बार अपना बताने से वह सिर्फ आपका नहीं हो जाता।
Sachin Pilot