28/05/2021
I-Coffee
विश्व के सबसे ज्यादा डाइबिटीज के मरीज भारत मे हैं। भारत में 10 में से 9 घरों में एक न एक व्यक्ति को डायबिटीज है। डायबीटीज के मरीज की एलोपैथिक दवाई एक छोटी सी गोली से शुरू होती है और फिर धीरे धीरे कुछ सालों में गोलियों की संख्या और mg बढ़ते जातें है। आखिकार कई मरीज इंसुलिन पर निर्भर हो जाते हैं।
डायबीटीज की वजह से किडनी और लीवर डेमेज होना आम बात है। सबसे ज्यादा डाइबिटीज के मरीजों को ही हार्ट अटैक आते है क्योकि डाइबिटीज हार्ट भी खराब करती है। साथ ही डाइबिटीज के मरीज की स्किन और आंखे भी खराब होने लग जाते है। शरीर के घाव भी नही भरते। कुल मिलाकर पूरे जीवन का नाश होने लगता है।
मगर घबराने की जरूरत नही है हमारे आयुर्वेद के जनक ऋषि चरक ने अपनी पुस्तक चरक संहिता में लिखा है कि *एकानायकम* यानी *स्लासिया रेटाकुलाटा* (बोटिनकल नाम) नाम के पौधे की जड़ के अर्क को अगर रोज सेवन किया जाए तो मधुमेह यानी डाइबिटीज हमेशा कंट्रोल रहेगी और मरीज के अंग भी खराब नही होंगे।
यानी हार्ट अटैक, किडनी या लीवर खराब होना, आंखे कमजोर होना घावों का न भरना ऐसी सभी समस्याएं नही होंगी।
इंड्सविवा ने इस पौधे की ऑर्गेनिक खेती करके इसकी जड़ के अर्क को खास टेक्नोलॉजी से निकाला और प्रोसेस किया है। इसकी जड़ का अर्क बहुत कड़वा होता है इस वजह से कंपनी ने उसे कॉफी में मिक्स कर दिया है।
कंपनी कर्नाटक में कुर्ग नामक जगह पर ये काफी उगाती है जहां भारत की बेस्ट कॉफी उगती है।
आई कॉफी के 1 बॉक्स में 50 कॉफी पाउच आते हैं। 100 से 120 ml गर्म पानी करना है फिर उस पानी मे एक पाउच कॉफी डालकर मिलाकर पीनी है। एक पाउच सुबह और एक पाउच शाम को पीना है।
आई कॉफी शुरू करने से एक दिन पहले लैब में जांच करवानी है और 1 बॉक्स खत्म होने के बाद फिर से जांच करवानी है। इससे आपको क्लियर हो जाएगा की कितना फर्क आया है।
डाइबिटीज की दवाइयां धीरे धीरे करके कम करनी है। 2 से 3 महीनों बाद दवाइयों की कोई जरूरत नही रहेगी। साथ ही अगर कोई इन्सुलिन लेता है तो उसकी भी धीरे धीरे यूनिट्स कम करनी है। कुछ महीनों बाद इन्सुलिन लेनी की जरूरत भी नही पड़ेगी।
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