20/08/2026
रांची: झारखंड की राजधानी रांची में पिछले 26 दिनों से चल रहा छात्र आंदोलन बुधवार को फिलहाल स्थगित कर दिया गया। जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में आंदोलनरत दोनों गुटों ने अपने-अपने आंदोलन को स्थगित करने का निर्णय लिया। इसके बाद जेएसएससी-जेपीएससी रिफॉर्म मंच की ओर से शाम में आभार यात्रा निकाली गई। वहीं, न्याय मंच ने बुधवार सुबह ही अपने आंदोलन की समाप्ति की घोषणा कर दी थी।
रिफॉर्म मंच की ओर से अनशन पर बैठे तीन छात्रों का पद्मश्री मधु मंसूरी और कोतवाली इंस्पेक्टर सनोज कुमार ने जूस पिलाकर और माला पहनाकर अनशन समाप्त कराया।
22 परीक्षाएं रद्द होने को बताया छात्रों की जीत
रिफॉर्म मंच के रविंद्र पासवान ने कहा कि छात्र पिछले 26 दिनों से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे थे। छात्रों के आंदोलन को देखते हुए मुख्यमंत्री ने कुल 22 परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लिया है। उन्होंने इसे छात्रों की बड़ी जीत बताते हुए आंदोलन में शामिल सभी छात्रों को बधाई दी।
वहीं, छात्र प्रतिनिधि पीयूष कुमार सिंह ने कहा कि जिस दिन मुख्यमंत्री ने परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा की, उसी दिन मंत्री दीपिका पांडेय सिंह और डॉ. इरफान अंसारी आंदोलन स्थल पर पहुंचे थे। उन्होंने छात्रों से कहा था कि मुख्यमंत्री ने कई मांगों को स्वीकार किया है और सरकार को दो महीने का समय दिया जाए। इस दौरान परीक्षा प्रक्रिया में मौजूद गड़बड़ियों को दूर करने का आश्वासन दिया गया था।
इसी आश्वासन के बाद छात्रों ने अपने आंदोलन को दो महीने के लिए स्थगित करने का फैसला लिया है। छात्रों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर दो महीने के भीतर उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो इससे भी बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा।
पीजीटी समेत कई परीक्षाओं को रद्द करने की मांग
आंदोलन के नेतृत्वकर्ता कुणाल प्रताप ने कहा कि सरकार ने 22 परीक्षाओं को रद्द किया है, लेकिन पीजीटी परीक्षा को भी रद्द किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, जिस परीक्षा से कथित धांधली की शुरुआत हुई, उस पर भी सरकार को कार्रवाई करनी चाहिए।
उन्होंने एक्साइज कांस्टेबल, फील्ड सुपरवाइजर समेत कई परीक्षाओं के रद्द किए जाने का जिक्र करते हुए कहा कि माध्यमिक शिक्षक नियुक्ति परीक्षा और लैब असिस्टेंट परीक्षा में भी अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। इन परीक्षाओं को भी रद्द करने की मांग की गई है।
कुणाल प्रताप ने कहा कि अगर दो महीने बाद सरकार की मंशा छात्रों के हित में स्पष्ट नहीं दिखी, तो छात्र एक बार फिर आंदोलन की राह पर उतरेंगे।
मृतकों के परिजनों को एक-एक करोड़ मुआवजे की मांग
रिफॉर्म मंच ने एक्साइज कांस्टेबल परीक्षा की नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान जान गंवाने वाले अभ्यर्थियों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग की है। मंच का दावा है कि नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान पूरे राज्य में करीब 21 अभ्यर्थियों की जान गई।
कोर्ट में भी छात्रों के पक्ष में सरकार का स्टैंड रखने की मांग
आंदोलनरत छात्रों ने कहा कि सरकार ने यदि छात्रों के हित में अनियमितता वाली परीक्षाओं को रद्द किया है और भविष्य में यह मामला अदालत में जाता है, तो कोर्ट के सामने भी सरकार का पक्ष छात्रों के हित में होना चाहिए।
छात्रों ने मांग की कि अदालत में सरकार की ओर से छात्रों द्वारा पेश किए गए तथ्यों को मजबूती से रखा जाए और ऐसा संदेश नहीं जाना चाहिए कि सरकार छात्रों की मांगों के खिलाफ है।
छात्रों ने कहा कि सरकार के आश्वासन पर उन्होंने एक बार फिर सरकारी व्यवस्था पर भरोसा जताया है। अब सरकार की जिम्मेदारी है कि छात्रों को दोबारा निराश न होना पड़े और दो महीने के भीतर उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई की जाए।
फिलहाल 26 दिनों से जारी आंदोलन स्थगित हो गया है, लेकिन छात्रों ने साफ कर दिया है कि दो महीने के भीतर समाधान नहीं निकला तो आंदोलन फिर शुरू होगा और इस बार इसका स्वरूप और बड़ा हो सकता है।