02/09/2026
जींद में 5 बड़ी प्रॉपर्टियों पर सीलिंग की तैयारी, 1.04 करोड़ से ज्यादा टैक्स बकाया
-नगर परिषद ने 4-4 नोटिस के बाद उठाया सख्त कदम, 10 सितम्बर को पुलिस बल की मौजूदगी में होगी कार्रवाई
-होटल, कॉटन मिल और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान नगर परिषद के निशाने पर
जींद, 1 सितम्बर : शहर में लंबे समय से प्रॉपर्टी टैक्स जमा नहीं करवाने वाले बड़े बकायादारों के खिलाफ अब नगर परिषद जींद ने सख्त कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। नगर परिषद ने 5 ऐसी बड़ी व्यावसायिक प्रॉपर्टियों को चिन्हित किया है, जिन पर प्रॉपर्टी टैक्स और फायर टैक्स का लाखों रुपए बकाया है। संबंधित प्रॉपर्टी धारकों को टैक्स जमा करवाने के लिए बार-बार नोटिस जारी किए जाने के बावजूद भुगतान नहीं होने पर अब इन प्रॉपर्टियों को सील करने की कार्रवाई की जाएगी।
नगर परिषद की ओर से इस संबंध में जिला नगर आयुक्त से आवश्यक अनुमति लेने के बाद अब कार्रवाई के लिए ड्यूटी मजिस्ट्रेट और पुलिस बल उपलब्ध करवाने की मांग की गई है। नगर परिषद ने 10 सितंबर 2026 को सीलिंग कार्रवाई प्रस्तावित की है। इसके लिए 15 पुलिस कर्मचारियों और 10 महिला पुलिस कर्मचारियों की मांग की गई है। नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी सुशील भुक्कल की ओर से जिला नगर आयुक्त को भेजे गए पत्र में बताया गया है कि नगर परिषद सीमा के अंदर इन प्रॉपर्टी धारकों को अपनी संपत्तियों का टैक्स जमा करवाने के लिए कई बार नोटिस भेजे जा चुके हैं। इसके बावजूद बकाया राशि जमा नहीं करवाई गई। ऐसे में हरियाणा म्यूनिसिपल एक्ट 1973 की धारा 98ए के तहत संबंधित प्रॉपर्टियों को सील करने की कार्रवाई प्रस्तावित की गई है।
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4-4 नोटिस के बाद भी नहीं जमा कराया टैक्स
नगर परिषद के अनुसार संबंधित प्रॉपर्टी धारकों को अब तक 4-4 बार नोटिस दिए जा चुके हैं। नोटिस के माध्यम से उन्हें बकाया प्रॉपर्टी टैक्स और फायर टैक्स जमा करवाने के लिए कहा गया, लेकिन निर्धारित समय में भुगतान नहीं किया गया। नगर परिषद का कहना है कि टैक्स वसूली नगर निकाय की आर्थिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। शहर में विकास कार्य, सफाई व्यवस्था, स्ट्रीट लाइट, सड़कों सहित विभिन्न नागरिक सुविधाओं के संचालन में नगर परिषद को राजस्व की आवश्यकता होती है। ऐसे में बड़े स्तर पर टैक्स बकाया रहने से परिषद के राजस्व पर भी असर पड़ता है। अब परिषद ने ऐसे बकायादारों के खिलाफ कार्रवाई तेज करने का निर्णय लिया है। प्रस्तावित सीलिंग कार्रवाई को इसी दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
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होटल से लेकर कॉटन मिल तक शामिल
नगर परिषद द्वारा तैयार सूची में शहर की 5 बड़ी व्यावसायिक प्रॉपर्टियां शामिल हैं। इनमें 4 नामी-गामी होटल और एक ऑयल एंड जनरल मिल शामिल हैं। इन पांचों प्रॉपर्टियों का कुल बकाया 1,12,31,018.60 रुपए बैठता है। यानी नगर परिषद की कार्रवाई केवल कुछ हजार या लाख रुपये के छोटे बकायादारों तक सीमित नहीं है, बल्कि एक करोड़ रुपए से अधिक की राशि की वसूली के लिए बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की तैयारी की गई है।
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पहले नोटिस, अब सीलिंग की तैयारी
नगर परिषद ने कार्रवाई से पहले बकायादारों को पर्याप्त अवसर देने का दावा किया है। ईओ सुशील भुक्कल के अनुसार संबंधित प्रॉपर्टी धारकों को टैक्स जमा करवाने के लिए बार-बार नोटिस दिए गए। इसके बावजूद टैक्स जमा नहीं करवाए जाने पर अब सीलिंग की कार्रवाई का रास्ता अपनाया जा रहा है।नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी की ओर से जिला नगर आयुक्त को भेजी गई रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि संबंधित संपत्तियों को सील करने के लिए आवश्यक अनुमति के लिए मामला प्रस्तुत किया गया था। अनुमति मिलने के बाद अब कार्रवाई को जमीन पर उतारने की तैयारी है। इसके लिए जिला प्रशासन से ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त करने और पुलिस सहायता उपलब्ध करवाने का अनुरोध किया गया है। नगर परिषद ने 10 सितम्बर को कार्रवाई के लिए 15 पुरुष पुलिस कर्मचारी और 10 महिला पुलिस कर्मचारियों की मांग की है। इससे स्पष्ट है कि परिषद इस कार्रवाई को पूरी प्रशासनिक और सुरक्षा व्यवस्था के साथ अंजाम देना चाहती है।
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राजस्व वसूली को लेकर नगर परिषद का सख्त रुख
शहर में प्रॉपर्टी टैक्स नगर परिषद की आय का प्रमुख स्रोत है। बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से समय पर टैक्स वसूली होने से नगर परिषद को अपनी विभिन्न सेवाओं और विकास कार्यों के लिए आर्थिक संसाधन उपलब्ध होते हैं। ऐसे में करोड़ों रुपए की संभावित वसूली को लेकर परिषद अब सख्त रुख अपना रही है। नगर परिषद का मानना है कि जिन प्रॉपर्टी धारकों पर बड़ी राशि बकाया है, उनसे टैक्स की वसूली जरूरी है। यदि नोटिस के बावजूद टैक्स जमा नहीं कराया जाता है तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। प्रस्तावित सीलिंग कार्रवाई से अन्य बड़े बकायादारों को भी समय पर टैक्स जमा करवाने का संदेश जाएगा।
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एक करोड़ से अधिक की वसूली पर नजर
नगर परिषद की सूची में शामिल पांचों संपत्तियों का कुल बकाया 1.12 करोड़ रुपए से अधिक है। यदि प्रस्तावित कार्रवाई के बाद संबंधित प्रॉपर्टी धारक टैक्स जमा करवाते हैं तो नगर परिषद को बड़ी राशि का राजस्व प्राप्त हो सकता है। वहीं यदि भुगतान नहीं किया जाता है तो नियमानुसार सीलिंग कार्रवाई आगे बढ़ेगी। शहर में बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से टैक्स वसूली को लेकर यह कार्रवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे नगर परिषद के राजस्व संग्रह अभियान को गति मिल सकती है। छोटे प्रॉपर्टी धारकों के साथ-साथ बड़े बकायादारों से भी समान रूप से टैक्स वसूली होने पर नगर परिषद की वित्तीय स्थिति मजबूत हो सकती है। अब सभी की निगाहें 10 सितंबर को प्रस्तावित कार्रवाई पर टिकी हैं। देखना होगा कि कार्रवाई से पहले संबंधित प्रॉपर्टी धारक बकाया टैक्स जमा करवाते हैं या नगर परिषद को इन संपत्तियों पर सील लगाने की कार्रवाई करनी पड़ती है।
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नियमानुसार की जाएगी कार्रवाई : ईओ
ईओ सुशील कुमार ने स्पष्ट किया गया है कि कार्रवाई नियमानुसार की जाएगी। इसके लिए संबंधित अधिकारियों, ड्यूटी मजिस्ट्रेट और पुलिस बल की मौजूदगी सुनिश्चित की जा रही है। कार्रवाई के दौरान किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न नहीं हो, इसके लिए पर्याप्त पुलिस बल की मांग की गई है।