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दिवाली पर बाकी के मिठाइयों की छिटपुट बिक्री को देख कर समाजसेवा वाली फीलिंग लेता हुआ सोनपापड़ी।
24/10/2022

दिवाली पर बाकी के मिठाइयों की छिटपुट बिक्री को देख कर समाजसेवा वाली फीलिंग लेता हुआ सोनपापड़ी।

17/08/2022
05/08/2022

*वाह रे पैसा!*
*तेरे कितने नाम?*
मंदिर मे दिया जाये तो
*( चढ़ावा )*
स्कुल में
*( फ़ीस )*
शादी में दो तो
*( दहेज )*
तलाक देने पर
*( गुजारा भत्ता )*
आप किसी को देते
हो तो *( कर्ज )*
अदालत में
*( जुर्माना )*
सरकार लेती है तो
*( कर )*
सेवानिवृत्त होने पे
*( पेंशन )*
अपहर्ताओ के लिए
*( फिरौती )*
होटल में सेवा के लिए
*( टिप )*
बैंक से उधार लो तो
*( ऋण )*
श्रमिकों के लिए
*( वेतन )*
मातहत कर्मियों के लिए
*( मजदूरी )*
अवैध रूप से प्राप्त सेवा
*( रिश्वत )*
और मुझे दोगे तो
*(गिफ्ट)*
*मैं पैसा हूँ:!*
मुझे आप मरने के बाद ऊपर नहीं ले जा सकते;
मगर जीते जी मैं आपको बहुत ऊपर ले जा सकता हूँ।
*मैं पैसा हूँ:!*
मुझे पसंद करो सिर्फ इस हद तक कि लोग आपको नापसन्द न करने लगें।
*मैं पैसा हूँ:!*
मैं भगवान् नहीं मगर लोग मुझे भगवान् से कम नहीं मानते।
*मैं पैसा हूँ:!*
मैं नमक की तरह हूँ। जो जरुरी तो है, मगर जरुरत से ज्यादा हो तो जिंदगी का स्वाद बिगाड़ देता है।
*मैं पैसा हूँ:!*
इतिहास में कई ऐसे उदाहरण मिल जाएंगे जिनके पास मैं बेशुमार था;
मगर फिर भी वो मेरे और उनके लिए रोने वाला कोई नहीं था।
*मैं पैसा हूँ:!*
मैं कुछ भी नहीं हूँ; मगर मैं निर्धारित करता हूँ कि लोग
आपको कितनी इज्जत देते है।
*मैं पैसा हूँ:!*
मैं आपके पास हूँ तो आपका हूँ!
आपके पास नहीं हूँ तो,
आपका नहीं हूँ! मगर मैं
आपके पास हूँ तो
सब आपके हैं।
*मैं पैसा हूँ:!*
मैं नई नई रिश्तेदारियाँ बनाता हूँ;
मगर असली औऱ पुरानी बिगाड़ देता हूँ।
*मैं पैसा हूँ:!*
मैं सारे फसाद की जड़ हूँ;
मगर फिर भी न जाने क्यों
सब मेरे पीछे इतना पागल हैं?
एक सच्चाई ये भी है कि.........
*बदलता हुआ दौर है साहब ...*
*पहले "आयु" में बड़े का*
*सम्मान होता था...!*
*अब "आय" में बड़े का*
*सम्मान होता है...!*

28/07/2022

जरूर पढें - जीवन के लिए खर्च

🍰🍰🍰🍰🍰🍰🍰🍰🍰🍰🍰🍰🍰🍰🍰🍰

- पत्नी ने कहा - आज धोने के लिए ज्यादा कपड़े मत निकालना…
पति- क्यों??
उसने कहा..- अपनी काम वाली बाई दो दिन नहीं आएगी…
पति- क्यों??
पत्नी- गणपति के लिए अपने नाती से मिलने बेटी के यहाँ जा रही है, बोली थी…

पति- ठीक है, अधिक कपड़े नहीं निकालता…

पत्नी- और हाँ!!! गणपति के लिए पाँच सौ रूपए दे दूँ उसे? त्यौहार का बोनस..

पति- क्यों? अभी दिवाली आ ही रही है, तब दे देंगे…

पत्नी- अरे नहीं बाबा!! गरीब है बेचारी, बेटी-नाती के यहाँ जा रही है, तो उसे भी अच्छा लगेगा… और इस महँगाई के दौर में उसकी पगार से त्यौहार कैसे मनाएगी बेचारी!!

पति- तुम भी ना… जरूरत से ज्यादा ही भावुक हो जाती हो…

पत्नी- अरे नहीं… चिंता मत करो… मैं आज का पिज्जा खाने का कार्यक्रम रद्द कर देती हूँ… खामख्वाहपाँच सौ रूपए उड़ जाएँगे, बासी पाव के उन आठ टुकड़ों के पीछे…

पति- वा, वा… क्या कहने!! हमारे मुँह से पिज्जा छीनकर बाई की थाली में??
तीन दिन बाद… पोंछा लगाती हुई कामवाली बाई से पति ने पूछा...

पति- क्या बाई?, कैसी रही छुट्टी?

बाई- बहुत बढ़िया हुई साहब… दीदी ने पाँच सौ रूपए दिए थे ना.. त्यौहार का बोनस..

पति- तो जा आई बेटी के यहाँ…मिल ली अपने नाती से…?

बाई- हाँ साब… मजा आया, दो दिन में 500 रूपए खर्च कर दिए…

पति- अच्छा!! मतलब क्या किया 500 रूपए का??

बाई- नाती के लिए 150 रूपए का शर्ट, 40 रूपए की गुड़िया, बेटी को 50 रूपए के पेढे लिए, 50 रूपए के पेढे मंदिर में प्रसाद चढ़ाया, 60 रूपए किराए के लग गए.. 25 रूपए की चूड़ियाँ बेटी के लिए और जमाई के लिए 50 रूपए का बेल्ट लिया अच्छा सा… बचे हुए 75 रूपए नाती को दे दिए कॉपी-पेन्सिल खरीदने के लिए… झाड़ू-पोंछा करते हुए पूरा हिसाब उसकी ज़बान पर रटा हुआ था…

पति- 500 रूपए में इतना कुछ???

वह आश्चर्य से मन ही मन विचार करने लगा...उसकी आँखों के सामने आठ टुकड़े किया हुआ बड़ा सा पिज्ज़ा घूमने लगा, एक-एक टुकड़ा उसके दिमाग में हथौड़ा मारने लगा… अपने एक पिज्जा के खर्च की तुलना वह कामवाली बाई के त्यौहारी खर्च से करने लगा… पहला टुकड़ा बच्चे की ड्रेस का, दूसरा टुकड़ा पेढे का, तीसरा टुकड़ा मंदिर का प्रसाद, चौथा किराए का, पाँचवाँ गुड़िया का, छठवां टुकड़ा चूडियों का, सातवाँ जमाई के बेल्ट का और आठवाँ टुकड़ा बच्चे की कॉपी-पेन्सिल का..आज तक उसने हमेशा पिज्जा की एक ही बाजू देखी थी, कभी पलटाकर नहीं देखा था कि पिज्जा पीछे से कैसा दिखता है…
लेकिन आज कामवाली बाई ने उसे पिज्जा की दूसरी बाजू दिखा दी थी… पिज्जा के आठ टुकड़े उसे जीवन का अर्थ समझा गए थे…

“जीवन के लिए खर्च” या
“खर्च के लिए जीवन” का
नवीन अर्थ एक झटके में उसे समझ आ गया

27/07/2022

एक शिक्षक ने क्लास के सभी बच्चों को एक एक खूबसूरत टॉफ़ी दी और फिर कहा..."बच्चो ! आप सब को दस मिनट तक अपनी टॉफ़ी नहीं खानी है और ये कहकर वो क्लास रूम से बाहर चले गए।"

कुछ पल के लिए क्लास में सन्नाटा छाया था, हर बच्चा उसके सामने पड़ी टॉफ़ी को देख रहा था और हर गुज़रते पल के साथ खुद को रोकना मुश्किल हो रहा था।

दस मिनट पूरे हुए और वो शिक्षक क्लास रूम में आ गए। समीक्षा की। पूरे वर्ग में सात बच्चे थे, जिनकी टाफियाँ जस की तस थी,जबकि बाकी के सभी बच्चे टॉफ़ी खाकर उसके रंग और स्वाद पर टिप्पणी कर रहे थे।

शिक्षक ने चुपके से इन सात बच्चों के नाम को अपनी डायरी में दर्ज कर लिए और नोट करने के बाद पढ़ाना शुरू किया।

इस शिक्षक का नाम प्रोफेसर वाल्टर मशाल था।

कुछ वर्षों के बाद प्रोफेसर वाल्टर ने अपनी वही डायरी खोली और सात बच्चों के नाम निकाल कर उनके बारे में खोज बीन शुरू किया।

काफ़ी मेहनत के बाद , उन्हें पता चला कि सातों बच्चों ने अपने जीवन में कई सफलताओं को हासिल किया है और अपनी अपनी फील्ड में सबसे सफल है।

प्रोफेसर वाल्टर ने अपने बाकी वर्ग के छात्रों की भी समीक्षा की और यह पता चला कि उनमें से ज्यादातर एक आम जीवन जी रहे थे, जबकी कुछ लोग ऐसे भी थे जिन्हें सख्त आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों का सामना करना पड रहा था।

इस सभी प्रयास और शोध का परिणाम प्रोफेसर वाल्टर ने एक वाक्य में निकाला और वह यह था...."जो आदमी दस मिनट तक धैर्य नहीं रख सकता, वह संभवतः अपने जीवन में कभी आगे नहीं बढ़ सकता.... ”

इस शोध को दुनिया भर में शोहरत मिली और इसका नाम "मार्श मेलो थ्योरी" रखा गया था क्योंकि प्रोफेसर वाल्टर ने बच्चों को जो टॉफ़ी दी थी उसका नाम "मार्श मेलो" था। यह फोम की तरह नरम थी।

इस थ्योरी के अनुसार दुनिया के सबसे सफल लोगों में कई गुणों के साथ एक गुण 'धैर्य' पाया जाता है, क्योंकि यह ख़ूबी इंसान के बर्दाश्त की ताक़त को बढ़ाती है,जिसकी बदौलत आदमी कठिन परिस्थितियों में निराश नहीं होता और वह एक असाधारण व्यक्तित्व बन जाता है।

अतः धैर्य कठिन परिस्थितियों में व्यक्ति की सहनशीलता की अवस्था है जो उसके व्यवहार को क्रोध या खीझ जैसी नकारात्मक अभिवृत्तियों से बचाती है। दीर्घकालीन समस्याओं से घिरे होने के कारण व्यक्ति जो दबाव या तनाव अनुभव करने लगता है उसको सहन कर सकने की क्षमता भी धैर्य का एक उदाहरण है। वस्तुतः धैर्य नकारात्मकता से पूर्व सहनशीलता का एक स्तर है। यह व्यक्ति की चारित्रिक दृढ़ता का परिचायक भी है।
हमारे मनीषियों ने इसीलिये कहा :

न धैर्येण बिना लक्ष्मी-
र्न शौर्येण बिना जयः।
न ज्ञानेन बिना मोक्षो
न दानेन बिना यशः॥

धैर्य के बिना धन, वीरता के बिना विजय, ज्ञान के बिना मोक्ष और दान के बिना यश प्राप्त नहीं होता है॥

वैष्णो देवी जाने वालों के ल‍िए बड़ी खबर :-बंद हो जाएगा 60 साल पुराना यात्रा पर्ची स‍िस्‍टम; अब ऐसे होंगे दर्शनवैष्‍णो दे...
21/07/2022

वैष्णो देवी जाने वालों के ल‍िए बड़ी खबर :-
बंद हो जाएगा 60 साल पुराना यात्रा पर्ची स‍िस्‍टम; अब ऐसे होंगे दर्शन

वैष्‍णो देवी में 60 साल से चला आ रहा यात्रा पर्ची स‍िस्‍टम अब पूरी तरह से बंद हो जाएगा. नया स‍िस्‍टम शुरू होने के बाद आपको यात्रा पर्ची की बजाय आरएफआईडी कार्ड लेना होगा. यात्र‍ियों की सुरक्षा के मद्देनजर श्राइन बोर्ड की तरफ से लगातार कदम उठाए जा रहे हैं.
अगर आप माता वैष्‍णो देवी के दर्शन कर चुके हैं तो आपको पता होगा क‍ि यात्रा पर्ची के ब‍िना श्रद्धालुओं को बानगंगा पर प्रवेश नहीं द‍िया जाता. यानी आपकी यात्रा का पहला पड़ाव यात्रा पर्ची लेकर बानगंगा से प्रवेश करना है. लेक‍िन आने वाले समय में आपको दर्शन करने के ल‍िए यात्रा पर्ची नहीं म‍िलेगी. जी हां, श्राइन बोर्ड यात्रा पर्ची की जगह नई टेक्‍नोलॉजी पर काम कर रहा है. नई तकनीक लागू होने के बाद 60 साल से चली आ रही यात्रा पर्ची की परंपरा खत्‍म हो जाएगी.

*अगस्‍त से शुरू होगा नया स‍िस्‍टम*
दरअसल, 1 जनवरी 2022 को भवन पर हुए हादसे के बाद श्राइन बोर्ड की तरफ से यात्र‍ियों की सुरक्षा के ल‍िए कई तरह के कदम उठाए जा रहे हैं. उसमें से यात्री पर्ची की बजाय नई तकनीकयुक्त रेडियो फ्रिकवेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) सर्व‍िस भी एक है. नई आरएफआईडी सर्व‍िस को अगस्‍त महीने से जरूरी कर द‍िया गया है. यानी अगले महीने से यद‍ि आप दर्शन के ल‍िए जाते हैं तो आपको यात्री पर्ची लेने की जरूरत नहीं होगी.

*क्‍या है आरएफआईडी कार्ड?*
आरएफआईडी कार्ड पूरी तरह से चिपयुक्त है, ज‍िसे सर्वर के साथ कनेक्‍ट क‍िया जाएगा. इसके लिए बाकायदा कंट्रोल रूम भी बनाया गया है. कार्ड में श्रद्धालु की फोटो के साथ पूरी तरह की जानकारी दी गई होगी. यात्रा शुरू करने से पहले श्राइन बोर्ड के यात्रा पंजीकरण काउंटर से आरएफआईडी कार्ड म‍िलेगा. यात्रा पूरी होने के बाद इस कार्ड को श्रद्धालु को वापस करना होगा. इस कार्ड को मेट्रो टोकन की तरह कई बार यूज क‍िया जा सकता है.

दर्शन के बाद वापस करना होगा कार्ड
एक आरएफआईडी की कीमत 10 रुपये है. लेकिन श्राइन बोर्ड की तरफ से श्रद्धालुओं को यह निशुल्‍क द‍िया जाएगा. श्राइन बोर्ड ही इसका खर्चा उठाएगा. आरएफआईडी कार्ड का टेंडर श्राइन बोर्ड ने पुणे की एक कंपनी को दिया है. यद‍ि आप ऑनलाइन पंजीकरण करतो हैा तो कटड़ा पहुंचने पर आपके फोन पर मैसेज आएगा कि आपको कितने बजे, किस काउंटर पर जाकर आरएफआईडी कार्ड लेना है. इसके लिए वायरलैस फिडेलिटी फैस‍िल‍िटी विकसित की जा रही है.

*कब शुरू हुई यात्रा पर्ची?*
सबसे पहले 1962 में सूचना विभाग ने श्रद्धालुओं के ल‍िए यात्रा पर्ची का स‍िस्‍टम शुरू क‍िया था. 1970 में पर्यटन विभाग ने यात्रा पर्ची की ज‍िम्‍मेदारी संभाली. 1986 में श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के गठन के बाद यात्रा पर्ची की ज‍िम्‍मेदारी श्राइन बोर्ड ने अपने हाथों में ले ली. अब इस सुव‍िधा को बंद करके आरएफआईडी कार्ड स‍िस्‍टम लागू क‍िया जा रहा है.

आदरणीय द्रौपदी मुर्मू जी को राष्ट्रपति चुनाव में भारत की 15वीं राष्ट्रपति के रूप में निर्वाचित होने पर सभी देशवाशियो को ...
21/07/2022

आदरणीय द्रौपदी मुर्मू जी को राष्ट्रपति चुनाव में भारत की 15वीं राष्ट्रपति के रूप में निर्वाचित होने पर सभी देशवाशियो को हार्दिक शुभकामनाये व बधाई I
निश्चित ही आप अपने अनुभव एवं कार्य कुशलता से राष्ट्र के प्रतिष्ठित पद को गौरवान्वित करेंगी और राष्ट्र के उत्थान में अपना योगदान देंगी।

श्रीमन्त राजू जी की माँ ने बहुत पहले ही बता दिया था कि पनीर तो बेटा इतने इतने से पैकेट में सुनारों की दुकान पर तोले के ह...
21/07/2022

श्रीमन्त राजू जी की माँ ने बहुत पहले ही बता दिया था कि पनीर तो बेटा इतने इतने से पैकेट में सुनारों की दुकान पर तोले के हिसाब से मिला करेगा... 😂😂 GST

यह बात उन दिनों की है जब बाबासाहेब डॉ भीमराव अंबेडकर दिन-रात संविधान लिखने के काम में लगे हुए थे।  #चौधरी_देवीदास_जी एक ...
21/07/2022

यह बात उन दिनों की है जब बाबासाहेब डॉ भीमराव अंबेडकर दिन-रात संविधान लिखने के काम में लगे हुए थे। #चौधरी_देवीदास_जी एक रात अन्य लोगों के साथ बाबासाहेब की कोठी पर ठहरे हुए थे..
रात को जब उनकी आंखें खुली तो उन्होंने देखा की बाबासाहेब के अध्ययन कक्ष की लाइट जली हुई है , खिड़की से झांक कर देखा तो पता चला कि बाबासाहेब ने अपनी बाई टांग छत के पंखे से बांधकर लटका रखी है यह देखकर चौधरी साहब की समझ में कुछ नहीं आया। सुबह होने पर चौधरी साहब ने साहस जुटाकर अचरज भरे स्वर में बाबासाहेब से पूछा बाबासाहेब रात को हमने देखा कि आपने अपनी एक टांग पंखे से बांध कर लटका रखी है ...
बाबासाहेब बीच में ही तुरंत हंस पड़े और बोले- " #अरे_हमारी_टांग_में_बहुत_दर्द_होता_था_और_हमको_नींद_भी_बहुत_जोर_से_आ_रही_थी_टांग_पंखे_से बांधकर लटकाने से दर्द भी भाग गया और नींद भी।अगर हम ऐसा नहीं करेंगे तो संविधान के जरिए आपको कुछ भी नहीं दे पाएंगे" वास्तव में बाबा साहेब प्राकृतिक नियमों को भी ताक पर रखकर संविधान का कार्य पूरा करते रहे।

ना कभी दर्द की परवाह की
ना नींद की ना भूख की
और ना ही प्यास की
संविधान बनाने जैसे कठिन काम के करने से बाबा साहेब का स्वास्थ्य दिन-ब-दिन और अधिक बिगड़ता चला गया।

ऐसे थे हमारे बाबा साहेब ।
#अम्बेडकर

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