05/02/2026
फरवरी 2026 के इस समय में गेहूं की फसल के लिए पीला रतुआ (Yellow Rust) और अन्य फफूंद जनित रोग एक बड़ी चुनौती बन सकते हैं। इस समय का ठंडा और नमी वाला मौसम (10°C से 20°C तापमान) इन बीमारियों के फैलने के लिए सबसे अनुकूल है।
यहाँ मुख्य बीमारियों के लक्षण और उनके बचाव के उपाय दिए गए हैं:
1. पीला रतुआ (Yellow Rust)
यह पक्सीनिया स्ट्रिइफॉर्मिस नामक कवक से होता है। यह हवा के जरिए बहुत तेजी से फैलता है।
लक्षण: पत्तियों पर पीले रंग की धारियां (stripes) दिखाई देती हैं। अगर आप पत्ती को हाथ से छुएंगे, तो पीला पाउडर आपकी उंगलियों पर लग जाएगा।
नुकसान: यह पौधों की भोजन बनाने की प्रक्रिया को रोक देता है, जिससे दाना पतला रह जाता है और पैदावार में 40% तक की कमी आ सकती है।
2. अन्य संभावित रोग (Common Fungus)
चूर्णिल आसिता (Powdery Mildew): पत्तियों पर सफेद आटे जैसा पाउडर जमा हो जाता है। यह उन खेतों में ज्यादा होता है जहाँ फसल बहुत घनी होती है।
करनाल बंट (Karnal Bunt): यह संक्रमण फूल आने के समय (Flowering stage) पर होता है। इसमें दाने काले पाउडर में बदल जाते हैं और सड़ी हुई मछली जैसी गंध आती है।महत्वपूर्ण सावधानियां:
निरीक्षण: सप्ताह में कम से कम दो बार अपने खेत का बारीकी से चक्कर लगाएं, विशेषकर मेड़ों के किनारे।
शुरुआती छिड़काव: जैसे ही पीला रतुआ का एक भी धब्बा दिखे, पूरे खेत का इंतज़ार न करें, तुरंत प्रभावित जगह और उसके आसपास स्प्रे करें।
नाइट्रोजन का प्रयोग: बीमारी दिखने पर यूरिया का अधिक प्रयोग न करें, क्योंकि इससे फफूंद और तेजी से बढ़ती है।
मौसम: स्प्रे हमेशा साफ मौसम में करें। यदि बारिश की संभावना हो, तो दवा में 'स्टीकर' (Sticker) जरूर मिलाएं।