11/12/2025
गेहूँ की फसल में मैंगनीज सल्फेट (MnSO_4) एक अत्यंत महत्वपूर्ण सूक्ष्म पोषक तत्व (Micronutrient) है। भले ही इसकी आवश्यकता कम मात्रा में होती है, लेकिन इसके बिना फसल की पैदावार और गुणवत्ता पर भारी असर पड़ सकता है।
यहाँ गेहूँ में मैंगनीज सल्फेट की भूमिका, कमी के लक्षण और प्रयोग की विधि विस्तार से दी गई है:
1. मैंगनीज सल्फेट के मुख्य कार्य (Role)
प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis): मैंगनीज क्लोरोफिल (हरा रंग) के निर्माण में मदद करता है। यह सूर्य की रोशनी को भोजन में बदलने की प्रक्रिया को तेज करता है, जिससे पौधे हरे-भरे रहते हैं।
एंजाइम सक्रियता: यह पौधे के अंदर कई तरह के एंजाइम्स को सक्रिय करता है जो नाइट्रोजन के पाचन और प्रोटीन निर्माण के लिए जरूरी होते हैं।
जड़ों का विकास: यह जड़ों को मजबूत बनाता है जिससे पौधा मिट्टी से अन्य पोषक तत्व आसानी से सोख पाता है।
रोग प्रतिरोधक क्षमता: यह फसल में बीमारियों से लड़ने की ताकत बढ़ाता है, खासकर जड़ गलने या फफूंदी वाले रोगों के प्रति।
2. कमी के लक्षण (Deficiency Symptoms)
यदि आपकी गेहूँ की फसल में मैंगनीज की कमी है, तो आपको निम्नलिखित संकेत दिखाई देंगे:
पत्तियों पर धब्बे: पत्तियों की नसों के बीच का हिस्सा पीला पड़ने लगता है, जबकि नसें हरी रहती हैं। इसे 'इंटरवेनल क्लोरोसिस' कहते हैं।
ग्रे स्पेक (Grey Speck): पत्तियों पर भूरे या सलेटी रंग के छोटे-छोटे धब्बे या धारियां दिखाई देती हैं। यह मैंगनीज की कमी का सबसे मुख्य लक्षण है।
पौधे का विकास रुकना: पौधों की बढ़वार रुक जाती है और 'कल्ले' (Tillers) कम निकलते हैं।
3. प्रयोग की विधि और मात्रा (Dosage & Application)
गेहूँ में मैंगनीज की पूर्ति के लिए छिड़काव (Spray) सबसे अच्छा तरीका माना जाता है, क्योंकि मिट्टी में डालने पर यह अक्सर पौधों को पूरी तरह नहीं मिल पाता (विशेषकर क्षारीय मिट्टी में)।
पहला छिड़काव: पहली सिंचाई के 2-3 दिन पहले या बाद में (बुवाई के लगभग 25-30 दिन बाद)।
मात्रा:
मैंगनीज सल्फेट (30.5%): 1 किलोग्राम प्रति एकड़।
पानी: 100 से 150 लीटर पानी में घोलकर।
दूसरा छिड़काव (यदि कमी ज्यादा हो): पहले छिड़काव के 10-15 दिन बाद।
महत्वपूर्ण टिप: धूप निकलने पर ही छिड़काव करें ताकि पत्तियां इसे अच्छे से सोख सकें। मैंगनीज सल्फेट को कभी भी खरपतवार नाशक (Herbicides) के साथ मिलाकर न छिड़कें, इससे दोनों का असर कम हो सकता है।