Aap Ki Sabha Giridih

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अब हर मुद्दे पर चर्चा होगी आपकी सभा मे। 👨‍👨‍👧✍️
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24/05/2026

झारखंड में लोकतंत्र कि पल पल हत्या हो रही है ,किसी भी गलत चीज पर आवाज उठाना गुनाह बनता जा रहा है

23/05/2026

गिरिडीह शहरी क्षेत्र में डबल इंजन कि सरकार चल रही है , उसके बाद भी बिजली और पानी जैसी आधारभूत सुविधा भी उपलब्ध नहीं हो रही है।

आज अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद गिरिडीह के द्वारा  जिले के विभिन्न कॉलेजों में विरोध प्रदर्शन किया गया वर्तमान में झारखं...
20/05/2026

आज अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद गिरिडीह के द्वारा जिले के विभिन्न कॉलेजों में विरोध प्रदर्शन किया गया वर्तमान में झारखंड सरकार द्वारा प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों में 'Restructuring' एवं 'Cluster System' लागू करने का निर्णय लिया गया है। इसी का पुरजोर विरोध गिरिडीह कॉलेज गिरिडीह, आदर्श कॉलेज राजधनवार , श्री आरके महिला कॉलेज गिरिडीह, लंगटा बाबा कॉलेज मिर्जागंज एवं घाघरा साइंस कॉलेज बगोदर में
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने किया इस अवसर पर अभाविप प्रदेश सह मंत्री सह गिरिडीह जिला संयोजक मंटू मुर्मू ने इस व्यवस्था का पुरजोर विरोध करते हुए कहा कि इस प्रणाली के क्रियान्वयन से छात्र-छात्रों को निम्नलिखित समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।

(1)आर्थिक एवं मानसिक बोझ: क्लस्टर सिस्टम के तहत एक ही विषय की पढ़ाई के लिए विद्यार्थियों को अलग-अलग महाविद्यालयों में जाना होगा, जो आर्थिक रूप से कमजोर और ग्रामीण परिवेश के छात्रों के लिए अत्यधिक कष्टकारी होगा।
समय की बर्बादी: विभिन्न महाविद्यालयों के बीच आवागमन में विद्यार्थियों का बहुमूल्य समय नष्ट होगा, जिससे उनकी नियमित पढ़ाई और शोध कार्य बाधित होंगे।

(2) सुरक्षा संबंधी चिंता: छात्राओं के लिए अलग-अलग केंद्रों और महाविद्यालयों में जाकर शिक्षा ग्रहण करना सुरक्षा की दृष्टि से भी चुनौतीपूर्ण सिद्ध हो सकता है।
बुनियादी ढांचे का अभाव: वर्तमान परिस्थितियों में परिवहन और अन्य संसाधनों की कमी इस व्यवस्था को छात्र-विरोधी बनाती है।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने सरकार से इस काले कानून को 24 घंटा के अंदर वापस लेने के लिए सरकार से आग्रह किया है अगर 24 घंटा में इस काले कानून को वापस नहीं लिए जाता है तो परिषद का कार्यकर्ता सड़क से सदन तक पुरजोर विरोध किया जाएगा । कृष्णा त्रिवेदी ने कहा कि मैं सरकार से मांग करता हूं कि छात्रहित और शिक्षा की सुलभता को सर्वोपरि रखते हुए, इस Restructuring एवं Cluster System को अविलंब वापस लिया जाए। यदि इस पर विचार नहीं किया गया, तो परिषद छात्र हितों की रक्षा हेतु उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगा मौके पर विभिन्न कॉलेजों का अगुवाई जैसे आदर्श कॉलेज का नेतृत्व प्रदेश शोध संयोजक कृष्णा त्रिवेदी ने किया, लंगटा बाबा कॉलेज का नेतृत्व विभाग संयोजक विजय ओझा एवं विपिन राय ने किया, श्री आरके महिला कॉलेज का नेतृत्व अनीश राय ने किया, गिरिडीह कॉलेज गिरिडीह का नेतृत्व नगर मंत्री नीरज चौधरी ने किया, घाघरा साइंस कॉलेज का नेतृत्व कॉलेज उपाध्यक्ष हर्ष ने किया मौके पर नगर शाह मंत्री अभिजीत सिन्हा,सदानंद राय , कॉलेज अध्यक्ष अंकुश सिंह, कॉलेज मंत्री कृष पासवान, कॉलेज उपाध्यक्ष संदीप वर्मा, दीपक वर्मा,मुन्ना पंडित , विवेक , देवराज,मनोहर उपाध्याय आदि कार्यकर्ता उपस्थित थे

झारखंड में पुलिस का एक और जिम्मेवारी बढ़ गया है टावर से प्रेमी और प्रेमिका को सुरक्षित नीचे उतारना गजब हाल है इस जेनरेशन...
19/05/2026

झारखंड में पुलिस का एक और जिम्मेवारी बढ़ गया है टावर से प्रेमी और प्रेमिका को सुरक्षित नीचे उतारना
गजब हाल है इस जेनरेशन का परिवार, मोहल्ला , गांव और साथ में प्रशासन को तबाह किए हुए है ।

20 मई को मेडिकल स्टोर रहेंगे बंद ,इसके साथ कुछ सवाल भी है जिसे आप सभी को पढ़ना चाहिए और जवाब तलाशने का प्रयास करना चाहिए...
19/05/2026

20 मई को मेडिकल स्टोर रहेंगे बंद ,इसके साथ कुछ सवाल भी है जिसे आप सभी को पढ़ना चाहिए और जवाब तलाशने का प्रयास करना चाहिए

जब देश का हर क्षेत्र डिजिटल बदलाव को स्वीकार कर चुका है, तो दवाइयों की ऑनलाइन बिक्री पर इतना भय और विरोध क्यों?
आज कपड़े से लेकर किराना, मोबाइल, टिकट, बैंकिंग, होटल और यहां तक कि खाने-पीने का सामान भी लोग ऑनलाइन मंगा रहे हैं।
इन बदलावों से लाखों ऑफलाइन व्यापार प्रभावित हुए, लेकिन समय के साथ उन्होंने खुद को बदला और प्रतिस्पर्धा में टिके रहने की कोशिश की।
फिर मेडिकल व्यवसाय ही ऐसा क्यों मानता है कि बदलाव सिर्फ दूसरों के लिए होना चाहिए?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि मेडिकल व्यवसाय से जुड़े लोग खुद अपने घर के कितने सामान ऑनलाइन खरीदते हैं — मोबाइल, कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनें, यहां तक कि रोजमर्रा की चीजें भी।
तो क्या उस समय दूसरे व्यापारियों को नुकसान नहीं होता?
अगर हर व्यापारी सिर्फ अपने नुकसान के नाम पर ऑनलाइन व्यवस्था बंद कराने लगे, तो फिर डिजिटल इंडिया और आधुनिक बाजार व्यवस्था का कोई मतलब ही नहीं बचेगा।
नकली दवाओं का डर दिखाया जा रहा है, लेकिन क्या नकली दवाएं सिर्फ ऑनलाइन मिलती हैं?
देश में कई बार ऑफलाइन मेडिकल दुकानों और सप्लाई चैन से भी नकली दवाएं पकड़ी गई हैं।
गलती व्यवस्था की निगरानी में हो सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि पूरे ऑनलाइन सिस्टम को ही बंद करने की मांग शुरू कर दी जाए।
और “बिना डॉक्टर सलाह दवा लेना खतरनाक है” — यह बात बिल्कुल सही है।
लेकिन यह नियम सिर्फ ऑनलाइन पर लागू नहीं होता, ऑफलाइन दुकानों पर भी बिना पर्ची दवाएं बेचे जाने की शिकायतें आम रही हैं।
इसलिए समस्या नियमों के पालन की है, माध्यम की नहीं।
असल सच्चाई यह है कि ऑनलाइन दवा बिक्री आने के बाद मेडिकल दुकानों की वर्षों पुरानी मनमानी और मोनोपॉली कमजोर हुई है।
जहां पहले ग्राहक को एक रुपये का डिस्काउंट तक नहीं मिलता था, वहीं आज वही दवाइयां ऑनलाइन कम कीमत, ऑफर और पारदर्शी रेट पर उपलब्ध हैं।
इससे सबसे ज्यादा राहत गरीब और मध्यम वर्ग के उन परिवारों को मिली है, जिन्हें हर महीने हजारों रुपये दवाइयों पर खर्च करने पड़ते हैं।
प्रतिस्पर्धा बाजार का नियम है।
जो बेहतर सेवा देगा, सही दाम देगा और लोगों की सुविधा समझेगा, जनता उसी को चुनेगी।
हड़ताल करके जनता को दवा से परेशान करना समाधान नहीं है।
समाधान है — बेहतर सेवा, उचित व्यवहार और उचित कीमत।
निष्कर्ष यही है कि ऑनलाइन शॉपिंग ने सिर्फ मेडिकल नहीं, बल्कि हजारों छोटे और मध्यम वर्गीय व्यापारियों की कमर तोड़ी है।
अगर सच में ऑनलाइन व्यवस्था के खिलाफ लड़ाई लड़नी है, तो फिर यह लड़ाई सिर्फ मेडिकल सेक्टर तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।
कपड़ा व्यापारी, मोबाइल दुकानदार, किराना व्यवसायी, इलेक्ट्रॉनिक्स व्यापारी — सभी को साथ आना पड़ेगा।
सिर्फ अपने व्यापार पर असर पड़ने पर विरोध करना और बाकी समय ऑनलाइन खरीदारी करना, यह दोहरी सोच दिखाता है।
अगर लड़ाई सच में “ऑनलाइन बनाम ऑफलाइन” की है, तो फिर यह लड़ाई सभी व्यापारियों की होनी चाहिए, सिर्फ मेडिकल दुकानों की नहीं।

19/05/2026

क्या राज्य सभा का चुनाव झारखंड के राजनीति को बदल देगा

18/05/2026
18/05/2026

पचंबा स्थित सलैया स्टेशन रोड को बनाने को लेकर मांग हुई तेज , स्टेशन मास्टर को सौंपा गया ज्ञापन



भारत से विदेशी निवेशकों की निकासी: क्या यह खतरे की घंटी है?साल 2026 में भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों (FPI/FII) क...
18/05/2026

भारत से विदेशी निवेशकों की निकासी: क्या यह खतरे की घंटी है?

साल 2026 में भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों (FPI/FII) की भारी निकासी ने आर्थिक जगत में चिंता बढ़ा दी है। सिर्फ दो महीनों में करीब ₹2.2 लाख करोड़ से अधिक पूंजी भारतीय बाजार से बाहर चली गई। सवाल उठ रहा है — क्या यह भारत की अर्थव्यवस्था के लिए चेतावनी है या केवल अस्थायी वैश्विक प्रभाव?
विदेशी निवेशकों ने कितना पैसा निकाला?
ताज़ा रिपोर्टों के अनुसार मई 2026 तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय बाजार से ₹2.2 लाख करोड़ से ज्यादा निकाले हैं।
पिछले वर्षों की तुलनावर्ष
FPI/FII निकासी
2024
लगभग ₹1.29 लाख करोड़
2025
लगभग ₹1.66 लाख करोड़
2026 (मई तक)
₹2.2 लाख करोड़+
2026 की सिर्फ शुरुआती चार–पांच महीनों की निकासी, पूरे 2025 से ज्यादा हो चुकी है।

आखिर विदेशी निवेशक क्यों भाग रहे हैं?
1. रुपये की कमजोरी
भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले लगातार कमजोर हुआ है। कमजोर मुद्रा का मतलब विदेशी निवेशकों के लिए कम रिटर्न।
जब डॉलर मजबूत होता है तो विदेशी निवेशक अमेरिका जैसे सुरक्षित बाजारों की तरफ लौटते हैं।
2. कच्चे तेल की कीमतें
भारत तेल आयात पर बहुत निर्भर है। तेल महंगा होने से:
व्यापार घाटा बढ़ता है
रुपये पर दबाव बढ़ता है
महंगाई बढ़ती है
इसी वजह से विदेशी निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ता है।
3. AI और टेक निवेश का झुकाव दूसरे देशों की तरफ
रिपोर्टों में कहा गया कि विदेशी निवेशक दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे देशों में ज्यादा पैसा लगा रहे हैं क्योंकि वहां AI और सेमीकंडक्टर सेक्टर तेजी से बढ़ रहे हैं।
4. वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव
अमेरिका-चीन तनाव
पश्चिम एशिया संकट
तेल बाजार की अनिश्चितता
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ना
इन सबने “Risk Off” माहौल बना दिया है, जिसमें निवेशक उभरते बाजारों से पैसा निकालते हैं।
क्या भारत की स्थिति श्रीलंका या पाकिस्तान जैसी हो सकती है?
यह तुलना पूरी तरह सही नहीं है।
भारत की ताकतें
भारत के पास अभी भी:
लगभग 600+ अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार
मजबूत बैंकिंग सिस्टम
बड़ा घरेलू बाजार
तेज डिजिटल अर्थव्यवस्था
लगातार टैक्स कलेक्शन ग्रोथ
जैसी मजबूत बुनियादी चीजें हैं।
श्रीलंका और पाकिस्तान की तरह भारत पर तत्काल विदेशी कर्ज संकट नहीं है।
लेकिन चिंता की बातें भी गंभीर हैं
शेयर बाजार पर असर

सेंसेक्स और निफ्टी पर दबाव
मिडकैप और स्मॉलकैप में बड़ी गिरावट
निवेशकों का भारी नुकसान
हाल में बाजार में ₹7 लाख करोड़ से ज्यादा मार्केट वैल्यू एक दिन में साफ हुई।
सत्ता पर काबिज सरकारों का कहना है कि कुछ नहीं हो रहा है सब ठीक है और अपनी नाकामियों को छुपा रहे हैं.अगर ऐसे ही होता रहा तो भारत में एक बहुत बड़े आर्थिक संकट की स्थिति उत्पन्न हो सकती है.

गिरिडीह। रेलवे विभाग के प्रतिनिधि रविवार को धनबाद से गिरिडीह पहुंचे और सलैया रोड का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान स्थान...
18/05/2026

गिरिडीह। रेलवे विभाग के प्रतिनिधि रविवार को धनबाद से गिरिडीह पहुंचे और सलैया रोड का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान स्थानीय नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों की समस्याएं सुनकर मामले को उच्चाधिकारियों तक पहुंचाने का आश्वासन दिया गया। निरीक्षण सलैया संघर्ष मोर्चा के नेता राजेश सिन्हा सहित अन्य ग्रामीणों की मौजूदगी में हुआ।

निरीक्षण के दौरान सलैया स्टेशन रोड और न्यू गिरिडीह स्टेशन रोड की जर्जर स्थिति को लेकर लोगों ने नाराजगी जताई। स्टेशन मास्टर मुकेश कुमार को ज्ञापन सौंपकर हटिया-आसनसोल इंटरसिटी एक्सप्रेस और गोड्डा-दिल्ली एक्सप्रेस के सलैया स्टेशन पर ठहराव की मांग की गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क और ट्रेन ठहराव की सुविधा नहीं होने से विद्यार्थियों, व्यापारियों और यात्रियों को काफी परेशानी होती है।

धनबाद से आए रेलवे इंटेलिजेंस अधिकारियों ने क्षेत्र की स्थिति का जायजा लेते हुए बताया कि सड़क निर्माण के लिए आवश्यक एनओसी संबंधित कार्यालयों को भेज दी गई है और जल्द आगे की कार्रवाई की जाएगी।

बैठक में राजेश सिन्हा ने बताया कि रेलवे विभाग के प्रतिनिधि दोपहर एक बजे सलैया पहुंचे। गौतम सोनी ने कहा कि सलैया का आंदोलन लगातार जारी रहेगा। तुलसी राणा ने कहा कि सलैया स्टेशन रोड का निर्माण हर हाल में होना चाहिए। वहीं करण कृपालु और कन्हैया खेतान ने क्षेत्रवासियों से आंदोलन में एकजुट होने की अपील की। मौके पर मिथिलेश पांडेय, दीपक पांडा, छोटू राणा, सुधांशु भदानी समेत कई ग्रामीण मौजूद रहे और न्यू गिरिडीह व सलैया स्टेशन रोड के जल्द निर्माण की मांग दोहराई।

स्थानीय लोगों ने कहा कि सड़क की खराब स्थिति और एक्सप्रेस ट्रेनों के ठहराव नहीं होने के कारण उन्हें न्यू गिरिडीह स्टेशन जाना पड़ता है, जिससे समय और पैसे दोनों का नुकसान होता है। लोगों को उम्मीद है कि निरीक्षण और ज्ञापन के बाद जल्द ही इस दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।

झारखंड में इन दिनों एक अजीब और चिंताजनक प्रवृत्ति देखने को मिल रही है। प्रेम विवाह की जिद में युवक-युवतियां मोबाइल टावर ...
18/05/2026

झारखंड में इन दिनों एक अजीब और चिंताजनक प्रवृत्ति देखने को मिल रही है। प्रेम विवाह की जिद में युवक-युवतियां मोबाइल टावर पर चढ़ जा रहे हैं, जिससे प्रशासन और आम लोगों की परेशानी बढ़ रही है। ऐसी घटनाएं न केवल जान जोखिम में डालती हैं, बल्कि घंटों तक बचाव अभियान चलाना पड़ता है। कई बार पुलिस, दमकल विभाग और स्थानीय लोगों को काफी मशक्कत करनी पड़ती है। विशेषज्ञों का मानना है कि परिवारों को बच्चों से खुलकर संवाद करना चाहिए और रिश्तों को समझदारी से संभालना चाहिए। प्यार महत्वपूर्ण है, लेकिन किसी भी समस्या का समाधान अपनी जान जोखिम में डालना नहीं हो सकता।

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