ओबीसी संयोजन समिति, छत्तीसगढ़ महिला विंग्स

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संत कबीर (1398-1518) ईसवी जेठ पूर्णिमा प्रसिद्ध भारतीय कवि,समाज सुधारक और निर्गुण मार्ग के संत "साँच बराबर तप नहीं, झूठ ...
29/06/2026

संत कबीर
(1398-1518) ईसवी जेठ पूर्णिमा

प्रसिद्ध भारतीय कवि,समाज सुधारक और निर्गुण मार्ग के संत

"साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप।
जाके हृदय साँच है, ताके हृदय आप।।"

सत्य, समता और मानवता के अमर गायक संत कबीर दास जी ने अपने निर्भीक विचारों से जातिवाद, छुआछूत, पाखंड और सामाजिक अन्याय के विरुद्ध जन-जागरण का अलख जगाया। उनका जीवन और वाणी आज भी समाज को सत्य, न्याय और भाईचारे की राह दिखाते हैं।

महान संत, समाज सुधारक एवं युगद्रष्टा संत कबीर दास जी की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन..!

छत्रपति शाहू जी महाराज (राजर्षि शाहू महाराज) किन152वीं जयंती विशेष -राजर्षि शाहू जी महाराज कोल्हापुर रियासत के प्रसिद्ध ...
26/06/2026

छत्रपति शाहू जी महाराज (राजर्षि शाहू महाराज) किन152वीं जयंती विशेष -

राजर्षि शाहू जी महाराज कोल्हापुर रियासत के प्रसिद्ध शासक, सामाजिक सुधारक और शिक्षाप्रेमी थे। उनका जन्म 26 जून 1874 को कागल (कोल्हापुर, महाराष्ट्र) में यशवंतराव घाटगे के रूप में हुआ था। वे शिवाजी महाराज की वंश परंपरा से जुड़े भोंसले राजवंश के थे। महारानी आनंदीबाई ने उन्हें गोद लिया और 1894 में मात्र 20 वर्ष की आयु में कोल्हापुर की गद्दी संभाली। उन्होंने 1922 तक शासन किया।
खास बातें और योगदान:
सामाजिक न्याय और आरक्षण के अग्रदूत: 1902 में उन्होंने भारत में सबसे पहले 50% आरक्षण की नीति लागू की — सरकारी नौकरियों और शिक्षा में पिछड़ी जातियों (Non-Brahmin) के लिए। यह सामाजिक समानता की दिशा में क्रांतिकारी कदम था।
शिक्षा क्रांति:
मुफ्त और अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा (1917) लागू की, जो सभी जाति-धर्म के बच्चों के लिए थी।
लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा दिया, लड़कियों के लिए स्कूल, हॉस्टल और छात्रवृत्तियां शुरू कीं।
कई हॉस्टल, स्कूल और कॉलेज स्थापित किए (जैसे राजाराम कॉलेज)।
पिछड़े वर्गों, दलितों और महिलाओं के लिए विशेष सुविधाएं दीं। उन्होंने डॉ. बी.आर. आंबेडकर जैसे नेताओं का भी समर्थन किया।
किसानों और समाज के उत्थान: सिंचाई नीतियां शुरू कीं, भूमि सुधार किए और किसानों की स्थिति सुधारने के प्रयास किए।
महिलाओं के अधिकार: बाल विवाह पर रोक, विधवा पुनर्विवाह को बढ़ावा, देवदासी प्रथा पर प्रतिबंध जैसी सुधार लाए।
व्यक्तित्व: वे "राजर्षि" उपाधि से सम्मानित थे। लोकप्रिय राजा के रूप में जाने जाते थे, जो जातिवाद के खिलाफ थे और समानता के पक्षधर थे। उनका निधन 6 मई 1922 को मात्र 47 वर्ष की आयु में हुआ।
शाहू महाराज का योगदान आज भी महाराष्ट्र और पूरे भारत में सामाजिक न्याय, शिक्षा और समावेशी विकास की प्रेरणा है।

नोट: कभी-कभी लोग 18वीं शताब्दी के मराठा सम्राट शाहू (शिवाजी के पौत्र) को भी छत्रपति शाहू कहते हैं, लेकिन "शाहू जी महाराज" से आमतौर पर कोल्हापुर वाले राजर्षि शाहू महाराज ही समझे जाते हैं।

विश्वनाथ प्रताप सिंह (वी.पी. सिंह) जयंती विशेष(25 जून 1931 – 27 नवंबर 2008) 🇮🇳भारत के सातवें प्रधानमंत्री (2 दिसंबर 1989...
25/06/2026

विश्वनाथ प्रताप सिंह (वी.पी. सिंह) जयंती विशेष
(25 जून 1931 – 27 नवंबर 2008) 🇮🇳

भारत के सातवें प्रधानमंत्री (2 दिसंबर 1989 से 10 नवंबर 1990 तक) विश्वनाथ प्रताप सिंह आज भी सामाजिक न्याय, ईमानदारी और सिद्धांतों की राजनीति के प्रतीक माने जाते हैं।
जीवन परिचय
एक राजपूत जमींदार परिवार (मांडा राजघराना) में जन्म। उन्होंने मांडा के राजा बहादुर राम गोपाल सिंह द्वारा गोद लिया गया था।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय और पूना (पुणे) विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की (बी.ए., एलएल.बी. और बी.एससी.)।
25 जून 1955 को श्रीमती सीता कुमारी (देवगढ़-मादड़िया राजपरिवार की राजकुमारी) से विवाह। दो पुत्र: अजेय प्रताप सिंह और अभय प्रताप सिंह।
राजनीतिक सफर
छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय; भूदान आंदोलन में भाग लिया। इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्र संघ के उपाध्यक्ष रहे।
कांग्रेस से राजनीतिक शुरुआत। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री (1980–1982)।
राजीव गांधी सरकार में वित्त मंत्री के रूप में काले धन, कर चोरी और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त अभियान चलाया।
रक्षा मंत्री रहते बोफोर्स घोटाले की निष्पक्ष जांच में ईमानदारी का परिचय दिया, जिसके कारण कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया।
बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर को भारत रत्न से सम्मानित किया। उनके प्रयासों से 12 अप्रैल 1990 को संसद के सेंट्रल हॉल में डॉ. आंबेडकर की तस्वीर लगवाई गई (संसद में पहली बार)।
1988 में जनता दल की स्थापना की। 1989 में नेशनल फ्रंट गठबंधन के जरिए प्रधानमंत्री बने।

11 मई को आयोजित वर्चुअल बैठक में विषयों के अनुरूप जो चर्चा हुआ है उसे सार्थक शब्दों में दिया जा रहा है आप इसे जरुर स्टडी...
11/05/2026

11 मई को आयोजित वर्चुअल बैठक में विषयों के अनुरूप जो चर्चा हुआ है उसे सार्थक शब्दों में दिया जा रहा है आप इसे जरुर स्टडी करें ......

मुख्य विषय:
01.स्वराज्य रक्षक छत्रपति संभाजी महाराज की जयंती (14 मई) के अवसर पर रायपुर में आयोजित ओबीसी संगठनात्मक समन्वय बैठक

आदरणीय साथियों,
छत्रपति संभाजी महाराज स्वराज्य की रक्षा के प्रतीक हैं। मुगल साम्राज्य की जबरदस्त ताकत के सामने उन्होंने धर्म, स्वाभिमान और हिंदवी स्वराज्य की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उनकी जयंती पर हम केवल श्रद्धांजलि नहीं अर्पित कर रहे, बल्कि उनके संघर्ष से प्रेरणा लेकर आज के सामाजिक-राजनीतिक संघर्ष में ओबीसी, पिछड़े, दलित और शोषित वर्गों के हक-अधिकारों की रक्षा का संकल्प ले रहे हैं।
रायपुर की यह ओबीसी संगठनात्मक समन्वय बैठक इसी उद्देश्य से आयोजित हो रही है — सभी ओबीसी संगठनों में समन्वय स्थापित करना, एकजुटता बढ़ाना और सामाजिक न्याय की लड़ाई को मजबूत करना।

02. महात्मा ज्योतिबा फुले: शिक्षा एवं सामाजिक क्रांति के प्रणेता
महात्मा ज्योतिबा फुले भारतीय इतिहास की वह अमर कड़ी हैं जिन्होंने अंधकारमय सामंती और जातिवादी व्यवस्था के खिलाफ शिक्षा की क्रांति शुरू की। उन्होंने महिलाओं, शूद्रों और पिछड़ों को शिक्षा का अधिकार दिलाने के लिए स्कूल खोले, सत्यशोधक समाज की स्थापना की और ब्राह्मणवादी वर्चस्व को चुनौती दी।
11 मई 1888 को विट्ठल राव कृष्णजी वंदेकर जी ने उन्हें "महात्मा" की उपाधि दी — यह उपाधि किसी पद या शासन से नहीं, बल्कि जनता की सेवा और क्रांतिकारी विचारों से मिली।
आज हमें मंथन करना है:
समानतावादी समाज निर्माण के लिए शिक्षा को सबसे बड़ा हथियार बनाना।
ओबीसी हक-अधिकारों (आरक्षण, प्रमोशन, आर्थिक योजनाएं) की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित करना।
फुले-शाहू-अंबेडकर की विचारधारा को गांव-गांव तक पहुंचाना।
जाति-आधारित भेदभाव के खिलाफ सकारात्मक सामाजिक अभियान चलाना।
कर्तव्य निर्वहन का समय है — केवल मांग नहीं, बल्कि संगठित शक्ति के माध्यम से हक छीनने का।

03. हाल ही संपन्न 5 राज्यों के विधानसभा चुनावों का विश्लेषण

हाल ही में असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी के विधानसभा चुनाव संपन्न हुए। इन चुनावों से कई महत्वपूर्ण सबक मिले हैं:

जनता का मुद्दा केंद्रित रुख: विकास, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर जनता ने स्पष्ट संदेश दिया।
सामाजिक गठबंधनों की अहमियत: ओबीसी, पिछड़े और वंचित वर्गों को साथ लेकर चलने वाले गठबंधन बेहतर परिणाम दे रहे हैं।
क्षेत्रीय ताकत: कुछ राज्यों में नई ताकतें (जैसे तमिलनाडु में TVK) उभरीं, जो पुरानी द्विध्रुवीय राजनीति को तोड़ रही हैं।
ओबीसी वोट की निर्णायक भूमिका: इन चुनावों में भी ओबीसी समुदाय की एकजुटता और रणनीतिक वोटिंग ने कई सीटों का रुख तय किया।
हमारे लिए सीख:
संगठन मजबूत न हो तो राजनीतिक लाभ अस्थायी रहता है।
ओबीसी एकता बिना सामाजिक न्याय के एजेंडे को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता।
चुनावी विश्लेषण के आधार पर अगले लोकसभा/विधानसभा चुनावों की रणनीति तैयार करनी होगी।
समापन एवं आह्वान
साथियों, संभाजी महाराज की बहादुरी, फुले जी की क्रांतिकारी सोच और हालिया चुनावों के अनुभव को मिलाकर हमें एक मजबूत, संगठित और जागरूक ओबीसी मोर्चा खड़ा करना है।
कार्ययोजना के सुझाव:
सभी ओबीसी संगठनों का समन्वय कमेटी गठन।
14 मई के कार्यक्रम को भव्य बनाना — सांस्कृतिक कार्यक्रम, चर्चा सत्र और संकल्प पत्र जारी करना।
राज्य स्तर पर जिला-ब्लॉक तक ओबीसी सेल सक्रिय करना।
शिक्षा, रोजगार और आरक्षण संरक्षण पर विशेष अभियान।
युवाओं और महिलाओं को मुख्यधारा में लाना।
छत्रपति संभाजी महाराज अमर रहे!
महात्मा ज्योतिबा फुले अमर रहे!
सामाजिक न्याय जिंदाबाद!
ओबीसी एकता जिंदाबाद!
यह बैठक सिर्फ चर्चा की नहीं, बल्कि क्रियान्वयन की हो। हम सब मिलकर इतिहास रचेंगे।
भारत माता की जय!
जय भवानी, जय शिवाजी!

संचालन : टिकेश्वर साहू ,मोबाइल: 94060 61165

135 वीं जयंती विशेष-डॉ भीमराव रामजी अंबेडकर ( डॉ बी.आर. अंबेडकर) डॉ. अंबेडकर भारत के सबसे महान सामाजिक सुधारकों, विधिवेत...
14/04/2026

135 वीं जयंती विशेष-
डॉ भीमराव रामजी अंबेडकर ( डॉ बी.आर. अंबेडकर)
डॉ. अंबेडकर भारत के सबसे महान सामाजिक सुधारकों, विधिवेत्ताओं, अर्थशास्त्रियों, राजनीतिज्ञों और बौद्ध धर्म के अनुयायियों में से एक थे।वे पहले भारतीय थे जिन्होंने विदेश में अर्थशास्त्र में डॉक्टरेट की।1947 में संविधान सभा के ड्राफ्टिंग कमेटी के अध्यक्ष बने।भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाए।"बहिष्कृत हितकारिणी सभा" की स्थापना की। हिंदू कोड बिल के माध्यम से महिलाओं को बेटे के सामान संपत्ति और विवाह में अधिकार दिलाने की लड़ाई लड़े।

“जो धर्म स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व सिखाता है, वही सच्चा धर्म है।”
“शिक्षा सामाजिक बुराइयों से लड़ने का शक्तिशाली हथियार है।”

स्मृति विशेष:बिंदेश्वरी प्रसाद मंडल ( 25 अगस्त 1918-13 अप्रैल 1982) एक भारतीय राजनेता,सामाजिक न्याय के प्रबल समर्थक और म...
13/04/2026

स्मृति विशेष:
बिंदेश्वरी प्रसाद मंडल ( 25 अगस्त 1918-13 अप्रैल 1982) एक भारतीय राजनेता,सामाजिक न्याय के प्रबल समर्थक और मंडल आयोग के अध्यक्ष थे। वे जमींदार यादव परिवार से आते हैं। वे भारतीय राजनीति में ओबीसी उत्थान और आरक्षण नीति के प्रणेता और ' मूक क्रांति के नायक ' के रूप में याद किए जाते हैं। बिहार के 7वें मुख्यमंत्री रह चुके हैं।उनके योगदान से ओबीसी समुदाय में शिक्षा, नौकरी और राजनीति में प्रतिनिधित्व बढ़ा। बिहार के मधेपुरा में उनके नाम पर इंजीनियरिंग कॉलेज है और 2001 में डाक टिकट जारी किया गया।

44 वें स्मृति दिवस पर सादर नमन .......

13 अप्रैल 2026 सोमवारसभी जिला मुख्यालयों पर ज्ञापन सौंपा जाएगा....
12/04/2026

13 अप्रैल 2026 सोमवार

सभी जिला मुख्यालयों पर ज्ञापन सौंपा जाएगा....

महात्मा ज्योतिबा फुले का जीवन हमें सिखाता है कि शिक्षा ही सामाजिक न्याय और समानता का सबसे बड़ा हथियार है। उन्होंने ब्राह...
11/04/2026

महात्मा ज्योतिबा फुले का जीवन हमें सिखाता है कि शिक्षा ही सामाजिक न्याय और समानता का सबसे बड़ा हथियार है। उन्होंने ब्राह्मणवादी व्यवस्था को चुनौती दी और "बहुजन हिताय" का मंत्र दिया, जो आज भी प्रासंगिक है। आज उनकी 199 वीं जयंती पर उनके विचारों को अपनाने और सामाजिक समानता के लिए काम करने का संकल्प लेना ही सच्ची श्रद्धांजलि है।ज्योतिबा फुले जी को 'महात्मा' की उपाधि 11 मई 1888 को मिली थी।
यह उपाधि मुंबई में एक विशाल जनसभा में महाराष्ट्रीय सामाजिक कार्यकर्ता विठ्ठलराव कृष्णाजी वंदेकर द्वारा दी गई थी।

11 अप्रैल 1827

09/04/2026

13 अप्रैल 2026 सोमवार

को जिला मुख्यालयों पर ज्ञापन सौंपा जाएगा
सभी साथी ध्यान देंगे

"तूता माना धरना स्थल" रायपुर का कार्यक्रम 21 अप्रैल 2026 मंगलवार होना है।

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