11/05/2026
11 मई को आयोजित वर्चुअल बैठक में विषयों के अनुरूप जो चर्चा हुआ है उसे सार्थक शब्दों में दिया जा रहा है आप इसे जरुर स्टडी करें ......
मुख्य विषय:
01.स्वराज्य रक्षक छत्रपति संभाजी महाराज की जयंती (14 मई) के अवसर पर रायपुर में आयोजित ओबीसी संगठनात्मक समन्वय बैठक
आदरणीय साथियों,
छत्रपति संभाजी महाराज स्वराज्य की रक्षा के प्रतीक हैं। मुगल साम्राज्य की जबरदस्त ताकत के सामने उन्होंने धर्म, स्वाभिमान और हिंदवी स्वराज्य की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उनकी जयंती पर हम केवल श्रद्धांजलि नहीं अर्पित कर रहे, बल्कि उनके संघर्ष से प्रेरणा लेकर आज के सामाजिक-राजनीतिक संघर्ष में ओबीसी, पिछड़े, दलित और शोषित वर्गों के हक-अधिकारों की रक्षा का संकल्प ले रहे हैं।
रायपुर की यह ओबीसी संगठनात्मक समन्वय बैठक इसी उद्देश्य से आयोजित हो रही है — सभी ओबीसी संगठनों में समन्वय स्थापित करना, एकजुटता बढ़ाना और सामाजिक न्याय की लड़ाई को मजबूत करना।
02. महात्मा ज्योतिबा फुले: शिक्षा एवं सामाजिक क्रांति के प्रणेता
महात्मा ज्योतिबा फुले भारतीय इतिहास की वह अमर कड़ी हैं जिन्होंने अंधकारमय सामंती और जातिवादी व्यवस्था के खिलाफ शिक्षा की क्रांति शुरू की। उन्होंने महिलाओं, शूद्रों और पिछड़ों को शिक्षा का अधिकार दिलाने के लिए स्कूल खोले, सत्यशोधक समाज की स्थापना की और ब्राह्मणवादी वर्चस्व को चुनौती दी।
11 मई 1888 को विट्ठल राव कृष्णजी वंदेकर जी ने उन्हें "महात्मा" की उपाधि दी — यह उपाधि किसी पद या शासन से नहीं, बल्कि जनता की सेवा और क्रांतिकारी विचारों से मिली।
आज हमें मंथन करना है:
समानतावादी समाज निर्माण के लिए शिक्षा को सबसे बड़ा हथियार बनाना।
ओबीसी हक-अधिकारों (आरक्षण, प्रमोशन, आर्थिक योजनाएं) की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित करना।
फुले-शाहू-अंबेडकर की विचारधारा को गांव-गांव तक पहुंचाना।
जाति-आधारित भेदभाव के खिलाफ सकारात्मक सामाजिक अभियान चलाना।
कर्तव्य निर्वहन का समय है — केवल मांग नहीं, बल्कि संगठित शक्ति के माध्यम से हक छीनने का।
03. हाल ही संपन्न 5 राज्यों के विधानसभा चुनावों का विश्लेषण
हाल ही में असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी के विधानसभा चुनाव संपन्न हुए। इन चुनावों से कई महत्वपूर्ण सबक मिले हैं:
जनता का मुद्दा केंद्रित रुख: विकास, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर जनता ने स्पष्ट संदेश दिया।
सामाजिक गठबंधनों की अहमियत: ओबीसी, पिछड़े और वंचित वर्गों को साथ लेकर चलने वाले गठबंधन बेहतर परिणाम दे रहे हैं।
क्षेत्रीय ताकत: कुछ राज्यों में नई ताकतें (जैसे तमिलनाडु में TVK) उभरीं, जो पुरानी द्विध्रुवीय राजनीति को तोड़ रही हैं।
ओबीसी वोट की निर्णायक भूमिका: इन चुनावों में भी ओबीसी समुदाय की एकजुटता और रणनीतिक वोटिंग ने कई सीटों का रुख तय किया।
हमारे लिए सीख:
संगठन मजबूत न हो तो राजनीतिक लाभ अस्थायी रहता है।
ओबीसी एकता बिना सामाजिक न्याय के एजेंडे को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता।
चुनावी विश्लेषण के आधार पर अगले लोकसभा/विधानसभा चुनावों की रणनीति तैयार करनी होगी।
समापन एवं आह्वान
साथियों, संभाजी महाराज की बहादुरी, फुले जी की क्रांतिकारी सोच और हालिया चुनावों के अनुभव को मिलाकर हमें एक मजबूत, संगठित और जागरूक ओबीसी मोर्चा खड़ा करना है।
कार्ययोजना के सुझाव:
सभी ओबीसी संगठनों का समन्वय कमेटी गठन।
14 मई के कार्यक्रम को भव्य बनाना — सांस्कृतिक कार्यक्रम, चर्चा सत्र और संकल्प पत्र जारी करना।
राज्य स्तर पर जिला-ब्लॉक तक ओबीसी सेल सक्रिय करना।
शिक्षा, रोजगार और आरक्षण संरक्षण पर विशेष अभियान।
युवाओं और महिलाओं को मुख्यधारा में लाना।
छत्रपति संभाजी महाराज अमर रहे!
महात्मा ज्योतिबा फुले अमर रहे!
सामाजिक न्याय जिंदाबाद!
ओबीसी एकता जिंदाबाद!
यह बैठक सिर्फ चर्चा की नहीं, बल्कि क्रियान्वयन की हो। हम सब मिलकर इतिहास रचेंगे।
भारत माता की जय!
जय भवानी, जय शिवाजी!
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