14/09/2026
उदयपुर, तकनीक कितनी उन्नत हो, इससे अधिक महत्वपूर्ण है उसकी दिशा :
एमएलएसयू में "अभियांत्रिकी, नवाचार और राष्ट्र निर्माण’ विषय पर राष्ट्रीय मंथन
तेजी से बदलती तकनीकी दुनिया में जब कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अंतरिक्ष विज्ञान, जैव- प्रौद्योगिकी, रोबोटिक्स, डिजिटल तकनीक, ऊर्जा और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्र राष्ट्रों की विकास-यात्रा को नई दिशा दे रहे हैं, ऐसे समय में अभियंता की भूमिका केवल तकनीकी समाधान विकसित करने तक सीमित नहीं रह सकती। इसी व्यापक चिंतन को केंद्र में रखते हुए राष्ट्रीय अभियंता दिवस के अवसर पर मंगलवार, कल 15 सितंबर को मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर में “अभियांत्रिकी, नवाचार और राष्ट्र निर्माण” विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित होगी।
संगोष्ठी का आयोजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर एवं विज्ञान भारती, चित्तौड़ प्रांत के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है।
कार्यक्रम राष्ट्रीय अभियंता दिवस के साथ महान अभियंता, राष्ट्र निर्माता एवं भारत रत्न सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की जयंती को समर्पित होगा। ज्ञातव्य है कि भारत में प्रत्येक वर्ष 15 सितंबर को महान अभियंता, राष्ट्र निर्माता एवं भारत रत्न सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की जयंती के उपलक्ष्य में अभियंता दिवस मनाया जाता है। कार्यक्रम का आयोजन विश्वविद्यालय के अतिथि गृह स्थित बप्पा रावल सभागार में प्रातः 10:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक होगा।
*तकनीक नहीं, तकनीक की दिशा होगी विमर्श का केंद्र*
संगोष्ठी में इस प्रश्न पर विशेष मंथन होगा कि तेजी से विकसित होती तकनीक को भारत की सामाजिक, आर्थिक और राष्ट्रीय आवश्यकताओं से किस प्रकार जोड़ा जाए। आयोजन का उद्देश्य अभियांत्रिकी को केवल तकनीकी दक्षता के दायरे से बाहर निकालकर नवाचार, स्वदेशी तकनीकी क्षमता, युवा शक्ति और राष्ट्र निर्माण के व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखने के लिए एक सार्थक संवाद का मंच उपलब्ध कराना है।
आयोजकों के अनुसार आज आवश्यकता केवल ऐसी तकनीक विकसित करने की नहीं है जो अत्याधुनिक हो, बल्कि ऐसी तकनीक की है जो भारत की वास्तविक समस्याओं का समाधान कर सके, समाज के व्यापक वर्ग तक पहुँच सके और आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत के निर्माण में योगदान दे सके।
*राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञ होंगे शामिल*
संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. अरविंद सी. रानाडे, निदेशक, नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन–भारत (NIF), गांधीनगर एवं राष्ट्रीय सचिव, विज्ञान भारती, अपने विचार रखेंगे। वे नवाचार, स्वदेशी विज्ञान, जमीनी स्तर पर विकसित तकनीकी समाधानों तथा राष्ट्र निर्माण में वैज्ञानिक और अभियान्त्रिकी दृष्टिकोण की भूमिका पर अपने विचार रखेंगे। मुख्य अतिथि श्री प्रवीण रामदास जी, राष्ट्रीय सचिव, विज्ञान भारती, भी प्रतिभागियों को संबोधित करेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कार्यक्रम संरक्षक मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कैलाश डागा करेंगे।
संगोष्ठी के संयोजक प्रो. हनुमान प्रसाद, निदेशक, इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर हैं एवं डॉ. गोविन्द नारायण पारीक, प्राचार्य, राजकीय पॉलिटेक्निक महाविद्यालय, अजमेर एवं अध्यक्ष, विज्ञान भारती, चित्तौड़ प्रांत हैं।
*पोस्टर प्रतियोगिता एवं प्रदर्शनी भी होगी*
संगोष्ठी के अंतर्गत ‘राष्ट्र निर्माण में लोक विज्ञान की भूमिका’ विषय पर पोस्टर प्रतियोगिता एवं प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी। पोस्टर प्रतियोगिता प्रातः 10:00 बजे से 11:00 बजे तक होगी। प्रतियोगिता में श्रेष्ठ तीन पोस्टरों का चयन किया जाएगा तथा प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को समापन समारोह के दौरान पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।
*जिज्ञासा से नवाचार तक बनेगा संवाद*
कार्यक्रम में पंजीयन एवं दीप प्रज्वलन के बाद स्वागत उद्बोधन, स्वदेशी विज्ञान आंदोलन एवं राष्ट्र निर्माण पर विचार-विमर्श, मुख्य अतिथि का उद्बोधन तथा जिज्ञासा समाधान सत्र आयोजित होगा। जिज्ञासा समाधान सत्र के माध्यम से विद्यार्थियों और युवा शोधार्थियों को विशेषज्ञों से सीधे संवाद का अवसर भी मिलेगा।
आयोजकों का मानना है कि हर बड़ा नवाचार किसी छोटे-से प्रश्न से शुरू होता है। ऐसे में संगोष्ठी का उद्देश्य केवल विशेषज्ञों के विचार सुनना नहीं, बल्कि युवाओं में यह दृष्टि विकसित करना भी है कि वे अपने आसपास की समस्याओं को शोध, विज्ञान और अभियांत्रिकी के अवसर के रूप में देखें।
*विश्वेश्वरैया की विरासत से आज के भारत तक*
सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया का जीवन इस बात का उदाहरण है कि अभियांत्रिकी को यदि दूरदृष्टि और राष्ट्रहित से जोड़ा जाए तो वह केवल संरचनाएँ नहीं, बल्कि समाज और संस्थाओं का भविष्य भी निर्मित कर सकती है। इसी विचार को आज के संदर्भ में आगे बढ़ाते हुए संगोष्ठी में यह विमर्श प्रमुख रहेगा कि “अभियंता केवल समस्याओं का तकनीकी समाधान खोजने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि भविष्य की संभावनाओं को आकार देने वाला राष्ट्र-निर्माता भी है।”
*आयोजन में सहयोग*
कार्यक्रम के आयोजन सचिव डॉ. अमित कुमार गुप्ता संग सह-आयोजन सचिव के रूप में डॉ. लोकेश कुमार अग्रवाल, डॉ. मोहन सिंह राठौड़ एवं श्रीमती मंजू चौधरी कार्य कर रहे हैं।
संगोष्ठी की सलाहकार समिति में डॉ. एम. एल. कालरा , डॉ. रामेश्वर आमेटा, डॉ. अविनाश पंवार, डॉ. घनश्याम पुरोहित, डॉ. हरीश, डॉ. जितेंद्र सिंह राठौड़, डॉ. कुलदीप शर्मा, डॉ. कमल सिंह राठौड़, डॉ. गिरधर पाल सिंह, डॉ. मोहित गोखरू, डॉ. राहुल गर्ग, डॉ. विमल सारस्वत, डॉ. जया अरोड़ा, डॉ. विजय कोली, डॉ. देवेंद्र जैन, डॉ. तृप्ता जैन, डॉ. लेखराज, डॉ. गिरिमा नागदा एवं डॉ. देवेंद्र कुमार शामिल हैं।
आयोजन समिति में डॉ. प्रफुल्ल कोठारी, डॉ. हिम्मानी पालीवाल, डॉ. जयपाल सिंह राठौड़, डॉ. विमला डांगी एवं डॉ. पुनीत शर्मा सहित विश्वविद्यालय के शोधार्थी एवं विद्यार्थी सहयोग कर रहे हैं।
आयोजकों ने विद्यार्थियों, शोधार्थियों, शिक्षकों, अभियंताओं तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में रुचि रखने वाले सभी प्रतिभागियों से संगोष्ठी में सहभागिता का आह्वान किया है। आयोजकों के अनुसार यह कार्यक्रम तकनीकी शिक्षा को सामाजिक सरोकारों से जोड़ने, स्वदेशी नवाचार को प्रोत्साहित करने तथा राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
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