VSK Chittor

VSK Chittor A media center dedicated to Samvadat Souhardam; Amity through interaction. Welcoming all in journalism, students of mass communication and media.

Providing news of national interest, awakening national awareness through research and fact-based journalism.

11/08/2026

कला, संस्कृति व राष्ट्रीय विचारों के लिए आगे आई छात्र शक्ति !

राजसमंद। भिक्षु निलयम राजसमंद में आयोजित युवा संवाद कार्यक्रम में नगर के 500 से अधिक युवा एक साथ आये। समाज व राष्ट्र को आगे कैसे ले जाया जा सके, उस पर समाधानपरक संवाद में भाग लिया और अपने योगदान को लेकर संकल्पित दिखे।

गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय ग्रेटर नोएडा के पूर्व कुलगुरू प्रो भगवती प्रसाद शर्मा ने भारत के स्वर्णिम भविष्य में युवाओं के योगदान को लेकर संवाद किया। शिक्षा, समाज, रोजगार, स्वास्थ्य जैसे मुद्दो के समाधान पर खुलकर चर्चा की गई।

विरासत को संजोते हुए युवाओं ने गीत-संगीत, कविता, वाद्य यंत्र सहित अनेक प्रकार की प्रस्तुतियां दी।

युवा संवाद संगम में उमड़े 18-35 आयु वर्ग के युवाओं ने एक साथ वन्देमातरम का गान किया।

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स्वराज्य के लिए बलिदान होने वाले जेन-जी(11 अगस्त : खुदीराम बोस :- 18 वर्ष की आयु में फाँसी)----------------------------आ...
11/08/2026

स्वराज्य के लिए बलिदान होने वाले जेन-जी

(11 अगस्त : खुदीराम बोस :- 18 वर्ष की आयु में फाँसी)
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आज जब के किशोर जेन-Z जनरेशन कहे जाते है। युवा पीढ़ी बदलाव के लिए उठाती रही है। स्वराज्य, आपातकाल व औपनिवेशिक सिस्टम के विरुद्ध विविध सुधार के लिए योगदान दिया है।

अक्सर हाथों में युवा आदर्श भगत सिंह, चन्द्रशेखर आजाद, स्वामी विवेकानन्द के चित्र दिखाई देते है। वन्देमातरम व भारत माता की जय के नारे लगाये जाते है।

आज 11 अगस्त को यह बात करनी जरूरी हो जाती है कि कैसे एक 18 साल के किशोर ने स्वराज्य की लड़ाई में वंदेमातरम का नारा लगाकर और हाथों में भगवद्गीता रखकर फाँसी के फंदे को चूम लिया था।

हम उन्हे कह सकते है कि वे आज़ादी के लिए बलिदान होने वाले Gen-Z थे। जो भगत सिंह के लिए भी प्रेरणास्रोत बने।

अमर बलिदानी खुदीराम बोस, 3 दिसम्बर 1889 को पश्चिम बंगाल में जन्मे। माता-पिता का साया बचपन में ही उठ गया था। सो पालन-पोषण उनकी बड़ी बहन ने किया।

वर्ष 1902-1903 में अरविंद घोष और सिस्टर निवेदिता से प्रभावित होकर स्वतंत्रता संग्राम के रण में उतरे।

मात्र 15 वर्ष की आयु में बंगाल विभाजन आंदोलन के दौरान ब्रिटिश विरोधी पर्चे बाँटने के कारण गिरफ्तार किये गये।

अनुशीलन समिति और युगांतर जैसे संगठनों से जुड़ने के बाद क्रांति के भाव प्रबल हो गए। इस दौरान कलकत्ता का ब्रिटिश मजिस्ट्रेट डगलस किंग्सफोर्ड जो कि क्रांतिकारियों की क्रूर हत्या कर रहा था, उसे मृत्युदंड देने का जिम्मा अनुशीलन समिति ने खुदीराम बोस और उनके साथी को सौंपा।

मिशन को अंजाम देने दोनों मुज्जफरपुर (बिहार) पहुँचे और 30 अप्रैल 1908 को किंग्सफोर्ड की बग्गी पर बम फेंका, हालांकि नियति को कुछ और मंजूर था। उस बग्गी में मौजूद दो अन्य ब्रिटिश महिलाओं की मौत हुई और किंग्सफोर्ड बच गया। जिसके बाद दोनो क्रांतिकारियों की घेराबंदी कर दी गई।

तब प्रफुल्ल चाकी ने स्वयं को गोली मार बलिदान दिया और खुदीराम बोस को वेनि रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया गया।

11 अगस्त 1908 को मुजफ्फरपुर में उन्हें फांसी दी गई तब उनके हाथों में भगवतगीता थी और मुख पर वन्देमातरम्।

उनके सम्मान में बंगाल के जुलाहों ने एक खास 'खुदीराम धोती' का निर्माण किया, जिस पर उनक़ा नाम लिखा होता। जिसे पहनना देश के युवा वर्ग के लिए गर्व की बात समझा जाता था...!

इस तरह वे बाद में भगत सिंह और बाकी क्रांतिकारियों के लिये प्रेरणा का मार्ग बने।
#दिनविशेष #हरदिनपावन

युवा राष्ट्र प्रथम का भाव लेकर आगे बढ़ें , विकसित राष्ट्र बनाने मे सहयोग दे - योगेंद्र- राजकीय मीरा कन्या महाविद्यालय यु...
11/08/2026

युवा राष्ट्र प्रथम का भाव लेकर आगे बढ़ें , विकसित राष्ट्र बनाने मे सहयोग दे - योगेंद्र

- राजकीय मीरा कन्या महाविद्यालय युवा संवाद कार्यक्रम

उदयपुर। राजकीय मीरा कन्या महाविद्यालय उदयपुर के राजनीति विज्ञान परिषद द्वारा युवा संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह क्षेत्र संपर्क प्रमुख योगेन्द्र कुमार थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य प्रो. अंजना गौतम ने की। राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. मंजू फडिया मंचासीन रहीं।

सामाजिक कार्यकर्ता एवं युवा विषय अध्येता योगेन्द्र कुमार ने अपने व्याख्यान में भारत के युवाओं से आह्वान किया कि राष्ट्र प्रथम का भाव लेकर इस सोच के साथ आगे बढ़ें कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाएं और सोशल मीडिया के एल्गोरिदम, मिथ्या सुचनाओं, भ्रम और नैरेटिव से सावधान रहे। भारतीय युवाओ ने 'राष्ट्र प्रथम' के भाव के साथ वैश्विक षड़यंत्रो को विफल किया है।

उन्होंने कहा कि युवा अपने कर्तव्यों एवं दायित्वों का पालन करते हुए एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में कार्य करें। स्वभाषा एवं स्वसंस्कृति का बोध आज के युवाओं को होना चाहिए। युवा भारत के भविष्य हैं। इन्हें प्रकृति एवं पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, प्लास्टिक मुक्त एवं नशा मुक्त देश बनाने के लिए संकल्पवान एवं जिम्मेदार नागरिक बनना चाहिए।

उन्होंने अपने उद्बोधन में अहिल्याबाई होल्कर, झांसी की रानी लक्ष्मीबाई, किरण बेदी, लता मंगेशकर, मैरीकॉम, बछेंद्री पाल जैसी नारी शक्तियों के योगदान एवं भूमिका का भारत के निर्माण में किस प्रकार योगदान रहा है, इस पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि भारत आर्थिक शक्ति का केंद्र बन रहा है। प्राचीन ज्ञान के केंद्र नालंदा, तक्षशिला विश्वविद्यालय में ज्ञान, विज्ञान, रसायन, गणित, योग, चिकित्सा आदि के क्षेत्र में भारत विश्वगुरु रहा है। 2026 का भारत गुलामी से मुक्त एवं आत्मविश्वास से भरपूर है। युवा भारत है। आज का युवा भारत का भविष्य है और वह राष्ट्र प्रथम का भाव लेकर चले।

प्राचार्य प्रो अंजना गौतम ने अपने स्वागत भाषण में बताया कि युवाओं के व्यक्तित्व निर्माण, संस्कार निर्माण एवं चरित्र निर्माण में शिक्षा के साथ-साथ दोस्त, शिक्षक और परिवार का अपना महत्वपूर्ण योगदान होता है।

प्राध्यापक डॉ. सरोज कुमार ने प्रस्तावना रखी। संचालन डॉ. श्रुति टंडन ने किया तथा विभागाध्यक्ष प्रो. भावना पोखरना ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

महाविद्यालय की छात्राओं ने संवाद कार्यक्रम में सहभागिता करते हुए युवा विमर्श एवं विकसित भारत पर अपने विचार रखे।

इस अवसर पर संकाय सदस्य प्रो. कुलदीप फडिया, प्रो. नवीन झा, प्रो. राजकुमार बोलिया, डॉ. सुनील खटीक, डॉ. प्रहलाद धाकड़, अदिति राठौड़, अश्विनी कुमार आदि उपस्थित थे।

11/08/2026

छोटी-छोटी आदतें, बड़ा बदलाव लाती हैं ...
देश के विकास में सरकार के प्रयासों के साथ प्रत्‍येक नागरिक की जिम्मेदारी और सहभागिता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
आइए, अपने कर्तव्यों को अपनी दैनिक आदत और जीवनशैली का हिस्सा बनाएं।

#पंच_परिवर्तन #नागरिक_कर्तव्य

कोरिया मास्टर्स 2026 : भारत की बेटी अश्मिता चालिहा ने कोरिया में लहराया तिरंगा...असम की प्रतिभाशाली बैडमिंटन खिलाड़ी ने ...
11/08/2026

कोरिया मास्टर्स 2026 : भारत की बेटी अश्मिता चालिहा ने कोरिया में लहराया तिरंगा...
असम की प्रतिभाशाली बैडमिंटन खिलाड़ी ने फाइनल में चीन की चौथी वरीयता प्राप्त हान कियान शी को हराकर अपने करियर का पहला BWF वर्ल्ड टूर खिताब जीता

10/08/2026

रांची प्रोटेस्ट को हाइजेक करने पहुंची ढपली गैंग, छात्रों ने जताया विरोध !

दिल्ली के जंतर-मंतर पर जेएनयू से आई ढपली गैंग के सदस्यों ने जिस तरह अराजकता का समर्थन किया, क्या वे रांची प्रोटेस्ट के कोड ऑफ कंडक्ट को मानेंगे!

आखिर क्यों वे अपने नारों व झण्डों को तानकर प्रोटेस्ट को राजनीतिक एजेंडे की भेंट चढाने के लिए आमादा है?

रांची प्रोटेस्ट के छात्रों ने मिलकर संवैधानिक दायरे में विरोध जताने का निर्णय लिया है।

झारखंड सरकार को भी चाहिए कि वे विद्यार्थियों की मांगों को सूने और आवश्यक सुधार की पहल करे।

इस्लामाबाद । 26/11 मुम्बई हमले का षड़यंत्रकर्ता अब्दुल की संदिग्ध मृत्यु। 8 अगस्त को रेस्टोरेंट में खाना खाकर नमाज पढने ...
10/08/2026

इस्लामाबाद । 26/11 मुम्बई हमले का षड़यंत्रकर्ता अब्दुल की संदिग्ध मृत्यु। 8 अगस्त को रेस्टोरेंट में खाना खाकर नमाज पढने के लिए मस्जिद के लिए निकला था। अब्दुल अजीज लश्कर-ए-तैयबा का कमांडर था।

“यह ज्ञान मेरा नहीं है, यह तो भगवान धन्वंतरि का आशीर्वाद है। अगर इससे किसी इंसान को आराम मिलता है, तो इससे बड़ी खुशी मेर...
09/08/2026

“यह ज्ञान मेरा नहीं है, यह तो भगवान धन्वंतरि का आशीर्वाद है। अगर इससे किसी इंसान को आराम मिलता है, तो इससे बड़ी खुशी मेरे लिए और क्या होगी।”

यूरोपियन उपनिवेशवाद के विरुद्ध मुलनिवासी दिवस के क्रम में जनजाति समाज की श्रीमती लिमड़ी बाई मीणा से भेंट एवं साक्षात्कार। लिमड़ी बाई मीणा लोकज्ञान, प्रकृति और जनसेवा की जीवंत परंपरा को आगे बढा रही है। प्रत्येक भारतवासी को अपने स्व का बोध होना चाहिए।

ग्रामीण भारत की पारंपरिक ज्ञान-परंपरा पुस्तकों और संस्थानों तक सीमित नहीं है; वह पीढ़ियों से लोगों के जीवन, अनुभव और प्रकृति से संबंधों में जीवित रही है। इसी लोकज्ञान की प्रेरणादायी प्रतिनिधि हैं जनजाति समाज की लिमड़ी बाई मीणा, जिन्हें स्थानीय लोग स्नेह और विश्वास से “जड़ी-बूटी वाली डॉक्टर” कहते हैं। औपचारिक शिक्षा से वंचित होने के बावजूद उन्होंने अनुभव, जिज्ञासा, साहस और प्रकृति से गहरे जुड़ाव के माध्यम से स्थानीय जड़ी-बूटियों का ज्ञान अर्जित किया और पिछले 50 से अधिक वर्षों से जरूरतमंद लोगों की सेवा कर रही हैं।

खारवा के पास जाली का गुड़ा निवासी लिमड़ी बाई से हुई भेंट और साक्षात्कार उनके जीवन-संघर्ष, पारंपरिक औषधीय ज्ञान और प्रकृति के प्रति संवेदनशील दृष्टि को समझने का महत्वपूर्ण अवसर रहा।

जीवन और उपचार-यात्रा:
लिमड़ी बाई के अनुसार, उनकी उपचार-यात्रा विवाह के बाद शुरू हुई। प्रारंभ में उन्हें ससुराल पक्ष से अपेक्षित सहयोग नहीं मिला, लेकिन उन्होंने अपना विश्वास और साहस बनाए रखा। समय के साथ उनकी तैयार पारंपरिक औषधियों से लोगों को लाभ मिलने लगा और उनके कार्य ने परिवार का विश्वास भी जीता।

विभिन्न आयुर्वेदिक शिविरों में भाग लेने तथा अपने अनुभवों से उन्होंने स्थानीय जड़ी-बूटियों और उनके उपयोग का ज्ञान विकसित किया। धीरे-धीरे उन्होंने स्वयं औषधियाँ, लेप और चूर्ण तैयार करना शुरू किया।

प्रकृति के साथ संबंध:
लिमड़ी बाई के लिए जंगल केवल पेड़-पौधों का समूह नहीं, बल्कि एक जीवित संसार है, जिससे मनुष्य को आवश्यकता भर ही लेना चाहिए। वे आसपास की पहाड़ियों और जंगलों से जड़ी-बूटियाँ एकत्र करती हैं और कुछ पौधे अपने खेत में भी उगाती हैं।

वे कार्तिक से चैत्र तक जड़ी-बूटियों का संग्रह करती हैं और चैत्र के बाद उन्हें तोड़ना बंद कर देती हैं। धनतेरस उनके लिए विशेष दिन है। उनका मानना है कि शेष महीनों में नए पौधों के जन्म और विकास का समय होता है; उस समय उन्हें तोड़ना अनैतिक एवं प्रकृति के साथ अन्याय है। जंगल से उतना ही लेना जितनी आवश्यकता हो, उनके लिए पर्यावरण-संरक्षण का सिद्धांत नहीं, बल्कि जीवन का नियम है।

औषधियाँ तैयार करते समय वे भगवान धन्वंतरि और अपने इष्ट हनुमान जी का स्मरण करती हैं तथा “रुखड़े के गीत” गाती हैं। इस प्रकार उपचार उनके लिए प्रकृति, आस्था और आध्यात्मिकता के गहरे संबंध का अनुभव है। वे अपने ज्ञान को ईश्वर का आशीर्वाद मानती हैं और लोगों को लाभ पहुँचना अपनी सबसे बड़ी संतुष्टि।

जनसेवा और पहचान:
पाँच दशकों से अधिक समय में लिमड़ी बाई ने अनेक लोगों की सहायता की है। आज भी स्थानीय क्षेत्र के साथ-साथ अन्य राज्यों से लोग उनके पास आते हैं। उनके कार्य को विभिन्न संस्थाओं ने सम्मानित किया है, जिनमें FICCI का सम्मान उल्लेखनीय है। उन्होंने भारत के विभिन्न हिस्सों के साथ जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया की यात्रा कर अपने अनुभव और पारंपरिक ज्ञान को व्यापक मंचों तक पहुँचाया है। यह केवल एक महिला की यात्रा नहीं, बल्कि गाँवों और जंगलों से निकले लोकज्ञान की यात्रा भी है।

ज्ञान-संरक्षण और निष्कर्ष:
लिमड़ी बाई अपने ज्ञान को स्वयं तक सीमित नहीं रखतीं। वे स्थानीय महिलाओं और परिवार के सदस्यों को जड़ी-बूटियों तथा उनके उपयोग की जानकारी देती हैं। उनकी इच्छा है कि यह ज्ञान अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचे और प्राकृतिक संसाधनों के प्रति समझ विकसित हो।

उनकी कहानी ग्रामीण लोकज्ञान, जैव-सांस्कृतिक परंपरा, महिला ज्ञान-परंपरा और प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व का महत्वपूर्ण उदाहरण है। आधुनिक चिकित्सा का अपना वैज्ञानिक महत्व है और गंभीर रोगों में योग्य चिकित्सकीय सलाह आवश्यक है; फिर भी लिमड़ी बाई जैसी महिलाएँ याद दिलाती हैं कि भारत के गाँवों में ज्ञान के अनेक जीवंत भंडार मौजूद हैं, जिन्हें समझने, दस्तावेजित करने और जिम्मेदारी के साथ संरक्षित करने की आवश्यकता है।

प्रकृति केवल हमारे उपयोग की वस्तु नहीं है; वह हमारी शिक्षक भी है।

-भानुप्रिया रोहिला

1492 में यूरोपियन अमेरिका पहुंचे। कोलम्बस ने इंडियन कहा। इसके बाद स्थानीय लोगो के शोषण व अत्याचार हुए। 2010 के अनुसार इन...
09/08/2026

1492 में यूरोपियन अमेरिका पहुंचे। कोलम्बस ने इंडियन कहा। इसके बाद स्थानीय लोगो के शोषण व अत्याचार हुए। 2010 के अनुसार इनकी संख्या 55 लाख ही है, जो की कूल जनसँख्या का मात्र 1.67% है।

1787 में 12 जहाजों से 1500 लोगों का पहला बेड़ा इंग्लैंड से आस्ट्रेलिया पहुंचा। ब्रिटिश द्वारा किये गए नरसंहार एवं अनेक रोगो के कारण मुलनिवासी जनसंख्या 2016 में सात लाख नब्बे हजार ही है, जो की मात्र 3.3% ही है।

9 अगस्त 1982 को घटती मूलनिवासी आबादी पर चिंतन करने वाले संयुक्त राष्ट्र के कार्य समूह की पहली बैठक आयोजित हुई थी। 1994 से विश्व मुलनिवासी दिवस मनाना प्रारम्भ हुआ, जो की यूरोपियन द्वारा विश्व के अनेक भागों में किये गये अत्याचारों को इंगित करता है।

पिछली शताब्दियों में यूरोपियन भारत में सक्रिय रहे है। ब्रिटिश शासक ने संसाधन पर कब्जा कर अत्याचार किये, वहीं ईसाई मिशनरीज ने संस्कृति पर हमले किये और यह आज भी जारी है। इन दोनों को भगवान बिरसा मुण्डा ने "टोपी-टोपी एक साहेब" कहकर उलगुुलान का आह्वान किया।

#विश्व_आदीवासी_दिवस #विश्व_मुलनिवासी_दिवस

CJP प्रदर्शन के ISI लिंक का खुलासा करने वाले अमृतसर CP गुरप्रीत सिंह भुल्लर को पंजाब सरकार ने पद से हटाया गया
09/08/2026

CJP प्रदर्शन के ISI लिंक का खुलासा करने वाले अमृतसर CP गुरप्रीत सिंह भुल्लर को पंजाब सरकार ने पद से हटाया गया

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