VSK Chittor

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14/09/2026

पर्यावरण संरक्षण की अनूठी पहल, प्रयागराज की महिलाएं गौमाता के गोबर से बना रहीं भगवान गणेश, शिव और देवी पार्वती की प्रतिमाएं
#श्रीगणेश_चतुर्थी #आत्मनिर्भर_भारत #पर्यावरण

14/09/2026

हस्तीमल व्याख्यानमाला: हम भारत के लोग विषय पर बोले वक्ता - "संपूर्ण विश्व को इकाई के रूप में देखने की दृष्टि देता है भारतीय दर्शन"

उदयपुर, तकनीक कितनी उन्नत हो, इससे अधिक महत्वपूर्ण है उसकी दिशा :एमएलएसयू में "अभियांत्रिकी, नवाचार और राष्ट्र निर्माण’ ...
14/09/2026

उदयपुर, तकनीक कितनी उन्नत हो, इससे अधिक महत्वपूर्ण है उसकी दिशा :

एमएलएसयू में "अभियांत्रिकी, नवाचार और राष्ट्र निर्माण’ विषय पर राष्ट्रीय मंथन

तेजी से बदलती तकनीकी दुनिया में जब कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अंतरिक्ष विज्ञान, जैव- प्रौद्योगिकी, रोबोटिक्स, डिजिटल तकनीक, ऊर्जा और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्र राष्ट्रों की विकास-यात्रा को नई दिशा दे रहे हैं, ऐसे समय में अभियंता की भूमिका केवल तकनीकी समाधान विकसित करने तक सीमित नहीं रह सकती। इसी व्यापक चिंतन को केंद्र में रखते हुए राष्ट्रीय अभियंता दिवस के अवसर पर मंगलवार, कल 15 सितंबर को मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर में “अभियांत्रिकी, नवाचार और राष्ट्र निर्माण” विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित होगी।

संगोष्ठी का आयोजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर एवं विज्ञान भारती, चित्तौड़ प्रांत के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है।
कार्यक्रम राष्ट्रीय अभियंता दिवस के साथ महान अभियंता, राष्ट्र निर्माता एवं भारत रत्न सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की जयंती को समर्पित होगा। ज्ञातव्य है कि भारत में प्रत्येक वर्ष 15 सितंबर को महान अभियंता, राष्ट्र निर्माता एवं भारत रत्न सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की जयंती के उपलक्ष्य में अभियंता दिवस मनाया जाता है। कार्यक्रम का आयोजन विश्वविद्यालय के अतिथि गृह स्थित बप्पा रावल सभागार में प्रातः 10:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक होगा।

*तकनीक नहीं, तकनीक की दिशा होगी विमर्श का केंद्र*
संगोष्ठी में इस प्रश्न पर विशेष मंथन होगा कि तेजी से विकसित होती तकनीक को भारत की सामाजिक, आर्थिक और राष्ट्रीय आवश्यकताओं से किस प्रकार जोड़ा जाए। आयोजन का उद्देश्य अभियांत्रिकी को केवल तकनीकी दक्षता के दायरे से बाहर निकालकर नवाचार, स्वदेशी तकनीकी क्षमता, युवा शक्ति और राष्ट्र निर्माण के व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखने के लिए एक सार्थक संवाद का मंच उपलब्ध कराना है।

आयोजकों के अनुसार आज आवश्यकता केवल ऐसी तकनीक विकसित करने की नहीं है जो अत्याधुनिक हो, बल्कि ऐसी तकनीक की है जो भारत की वास्तविक समस्याओं का समाधान कर सके, समाज के व्यापक वर्ग तक पहुँच सके और आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत के निर्माण में योगदान दे सके।

*राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञ होंगे शामिल*
संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. अरविंद सी. रानाडे, निदेशक, नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन–भारत (NIF), गांधीनगर एवं राष्ट्रीय सचिव, विज्ञान भारती, अपने विचार रखेंगे। वे नवाचार, स्वदेशी विज्ञान, जमीनी स्तर पर विकसित तकनीकी समाधानों तथा राष्ट्र निर्माण में वैज्ञानिक और अभियान्त्रिकी दृष्टिकोण की भूमिका पर अपने विचार रखेंगे। मुख्य अतिथि श्री प्रवीण रामदास जी, राष्ट्रीय सचिव, विज्ञान भारती, भी प्रतिभागियों को संबोधित करेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कार्यक्रम संरक्षक मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कैलाश डागा करेंगे।
संगोष्ठी के संयोजक प्रो. हनुमान प्रसाद, निदेशक, इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर हैं एवं डॉ. गोविन्द नारायण पारीक, प्राचार्य, राजकीय पॉलिटेक्निक महाविद्यालय, अजमेर एवं अध्यक्ष, विज्ञान भारती, चित्तौड़ प्रांत हैं।

*पोस्टर प्रतियोगिता एवं प्रदर्शनी भी होगी*
संगोष्ठी के अंतर्गत ‘राष्ट्र निर्माण में लोक विज्ञान की भूमिका’ विषय पर पोस्टर प्रतियोगिता एवं प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी। पोस्टर प्रतियोगिता प्रातः 10:00 बजे से 11:00 बजे तक होगी। प्रतियोगिता में श्रेष्ठ तीन पोस्टरों का चयन किया जाएगा तथा प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को समापन समारोह के दौरान पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।

*जिज्ञासा से नवाचार तक बनेगा संवाद*
कार्यक्रम में पंजीयन एवं दीप प्रज्वलन के बाद स्वागत उद्बोधन, स्वदेशी विज्ञान आंदोलन एवं राष्ट्र निर्माण पर विचार-विमर्श, मुख्य अतिथि का उद्बोधन तथा जिज्ञासा समाधान सत्र आयोजित होगा। जिज्ञासा समाधान सत्र के माध्यम से विद्यार्थियों और युवा शोधार्थियों को विशेषज्ञों से सीधे संवाद का अवसर भी मिलेगा।
आयोजकों का मानना है कि हर बड़ा नवाचार किसी छोटे-से प्रश्न से शुरू होता है। ऐसे में संगोष्ठी का उद्देश्य केवल विशेषज्ञों के विचार सुनना नहीं, बल्कि युवाओं में यह दृष्टि विकसित करना भी है कि वे अपने आसपास की समस्याओं को शोध, विज्ञान और अभियांत्रिकी के अवसर के रूप में देखें।

*विश्वेश्वरैया की विरासत से आज के भारत तक*
सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया का जीवन इस बात का उदाहरण है कि अभियांत्रिकी को यदि दूरदृष्टि और राष्ट्रहित से जोड़ा जाए तो वह केवल संरचनाएँ नहीं, बल्कि समाज और संस्थाओं का भविष्य भी निर्मित कर सकती है। इसी विचार को आज के संदर्भ में आगे बढ़ाते हुए संगोष्ठी में यह विमर्श प्रमुख रहेगा कि “अभियंता केवल समस्याओं का तकनीकी समाधान खोजने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि भविष्य की संभावनाओं को आकार देने वाला राष्ट्र-निर्माता भी है।”

*आयोजन में सहयोग*
कार्यक्रम के आयोजन सचिव डॉ. अमित कुमार गुप्ता संग सह-आयोजन सचिव के रूप में डॉ. लोकेश कुमार अग्रवाल, डॉ. मोहन सिंह राठौड़ एवं श्रीमती मंजू चौधरी कार्य कर रहे हैं।
संगोष्ठी की सलाहकार समिति में डॉ. एम. एल. कालरा , डॉ. रामेश्वर आमेटा, डॉ. अविनाश पंवार, डॉ. घनश्याम पुरोहित, डॉ. हरीश, डॉ. जितेंद्र सिंह राठौड़, डॉ. कुलदीप शर्मा, डॉ. कमल सिंह राठौड़, डॉ. गिरधर पाल सिंह, डॉ. मोहित गोखरू, डॉ. राहुल गर्ग, डॉ. विमल सारस्वत, डॉ. जया अरोड़ा, डॉ. विजय कोली, डॉ. देवेंद्र जैन, डॉ. तृप्ता जैन, डॉ. लेखराज, डॉ. गिरिमा नागदा एवं डॉ. देवेंद्र कुमार शामिल हैं।
आयोजन समिति में डॉ. प्रफुल्ल कोठारी, डॉ. हिम्मानी पालीवाल, डॉ. जयपाल सिंह राठौड़, डॉ. विमला डांगी एवं डॉ. पुनीत शर्मा सहित विश्वविद्यालय के शोधार्थी एवं विद्यार्थी सहयोग कर रहे हैं।
आयोजकों ने विद्यार्थियों, शोधार्थियों, शिक्षकों, अभियंताओं तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में रुचि रखने वाले सभी प्रतिभागियों से संगोष्ठी में सहभागिता का आह्वान किया है। आयोजकों के अनुसार यह कार्यक्रम तकनीकी शिक्षा को सामाजिक सरोकारों से जोड़ने, स्वदेशी नवाचार को प्रोत्साहित करने तथा राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
#सशक्त_भारत #आत्मनिर्भर_भारत

14/09/2026

भीलवाड़ा 14 सितंबर 2026- सरसंघचालक एवं संतश्री द्वारा समाज सुधार, गौ सेवा, मतांतरण, धर्म संस्कृति पर हुई सार्थक चर्चा

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक अपने भीलवाड़ा प्रवास के दौरान राष्ट्रसंत मनोज्ञाचार्य श्री पुलक सागर जी गुरुदेव से मिले ।

डॉ मोहन भागवत जी राजस्थान के अपने तीन दिवसीय प्रवास के दौरान आज भीलवाड़ा पहुंचे । भीलवाड़ा में सरसंघचालक पूज्य संत श्री पुलक सागर जी महाराज से भेंट की । महाराज जी ने सरसंघचालक को भेंटस्वरूप ॐ की प्रतिकृति एवं एक पुस्तक भी भेंट की दोनों के मध्य करीब चालीस मिनट तक चली चर्चा राजनीति से हटकर सामाजिक एकता एवं समरसता के मुद्दों पर मंथन हुआ ।

राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के अखिल भारतीय अधिकारी अरूण जैन, क्षेत्र प्रचारक निम्बाराम, मुरलीधर एवं श्री पुलकसागर चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी मौजूद रहे। भागवत ने शुरू में आचार्यश्री के पाद प्रक्षालन किए ओर वंदन अभिनंदन किया। आचार्यश्री ने उनको आशीर्वाद प्रदान करते हुए कहा कि राष्ट्रीय एकता एवं सामाजिक समरसता को मजबूत करने में आरएसएस की भूमिका अहम है।

डॉ मोहन भागवत जी ने इस अवसर पर इन्दौर की सरोज शाह द्वारा आचार्य पुलकसागर के प्रेरणादायी जीवन पर लिखित पुस्तक ‘‘एक और मुक्तिदूत’’ का विमोचन भी किया ओर उसे आचार्यश्री के चरणों में समर्पित किया ।

14/09/2026

(तत्पुरुषाय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि
तन्नो दन्तिः प्रचोदयात् ॥)

विकटोत्कटसुन्दरदन्तिमुखं
भुजगेन्द्रसुसर्पगदाभरणम् ।
गजनीलगजेन्द्रगणाधिपतिं
प्रणतोऽस्मि विनायकहस्तिमुखम् ॥ १॥

#श्रीगणेश_चतुर्थी

शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल पेट भरना अथवा आजीविका उपार्जित करना नहीं है, बल्कि मनुष्य को श्रेष्ठ, समर्थ और संवेदनशी...
14/09/2026

शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल पेट भरना अथवा आजीविका उपार्जित करना नहीं है, बल्कि मनुष्य को श्रेष्ठ, समर्थ और संवेदनशील बनाना है। मनुष्य का जीवन केवल व्यक्तिगत सफलताओं के दायरे में सिमटने के लिए नहीं, बल्कि संपूर्ण समाज और सृष्टि के पोषण के लिए होना चाहिए।
#शिक्षा

मैं’ से ‘हम’ की यात्रा ही भारत के चिंतन का मूल भाव : परिवार, समाज और संपूर्ण विश्व को एक इकाई के रूप में देखने की दृष्टि...
14/09/2026

मैं’ से ‘हम’ की यात्रा ही भारत के चिंतन का मूल भाव :

परिवार, समाज और संपूर्ण विश्व को एक इकाई के रूप में देखने की दृष्टि देता है: हनुमान सिंह राठौड़

- हम भारत के लोग विषयक हस्तीमल व्याख्यानमाला सम्पन्न

- महर्षि दधीचि देहदान सम्मान के अंतर्गत परिजनों का सम्मान

- संविधान चित्र प्रदर्शनी व साहित्य केन्द्र का आकर्षण

उदयपुर। पाथेय कण संस्थान, विश्व संवाद केंद्र एवं रवींद्रनाथ टैगोर आयुर्विज्ञान महाविद्यालय, उदयपुर संयुक्त तत्वावधान में हस्तीमल व्याख्यानमाला के अंतर्गत ‘हम भारत के लोग’ विषयक व्याख्यान कार्यक्रम आयोजित किया गया।

मुख्य वक्ता माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष हनुमान सिंह राठौड़ रहे। अध्यक्षता पाथेय कण संस्थान के अध्यक्ष एवं हरिदेव जोशी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलगुरू प्रो नंदकिशोर पांडे ने की। रवीन्द्रनाथ टैगोर आयुर्विज्ञान महाविद्यालय उदयपुर के प्राचार्य एवं नियंत्रक डॉ राहुल जैन एवं विश्व संवाद केंद्र उदयपुर के अध्यक्ष कमल प्रकाश रोहिला भी मंचासीन रहे।

मुख्य वक्ता हनुमान सिंह राठौड़ ने ‘हम भारत के लोग’ विषय पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने भारत की राष्ट्रीय पहचान, भारतीय चिंतन परंपरा और ‘मैं’ से ‘हम’ बनने की यात्रा पर विस्तार से विचार व्यक्त किए।

राठौड़ ने कहा कि आज दुनिया के सामने यह प्रश्न महत्वपूर्ण बन गया है कि ‘हम कौन हैं?’ राष्ट्रीय पहचान को लेकर जिस प्रकार का संकट दिखाई दे रहा है, उस पर गंभीर चिंतन की आवश्यकता है। भारत के संदर्भ में भी हमें विचार करना होगा कि ‘मैं’ से ‘हम’ कैसे बने और ‘हम’ की अनुभूति का आधार क्या है!

उन्होंने भारतीय दर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि उपनिषदों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि संसार में दिखाई देने वाली प्रत्येक वस्तु में ईश्वर के अंश को देखने की दृष्टि प्रदान करती है। त्यागपूर्ण जीवन और समष्टि के प्रति संवेदनशीलता से ही ‘मैं’ से ‘हम’ की यात्रा प्रारंभ होती है।

राठौड़ ने कहा कि भारत का चिंतन केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवार, समाज और संपूर्ण विश्व को एक इकाई के रूप में देखने की दृष्टि देता है। भारत में कुटुंब भाव इसी चिंतन का परिणाम है। त्याग और अपनत्व से परिवार का निर्माण होता है और यही भावना आगे बढ़कर ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ के रूप में संपूर्ण विश्व को अपना परिवार मानने की प्रेरणा देती है।

उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में मनुष्य ही नहीं, बल्कि सभी प्राणियों के प्रति संवेदना का भाव दिखाई देता है। यहाँ तक कि जीवों के प्रति सम्मान तथा परिवार और समाज में पशु-पक्षियों के प्रति संवेदनशीलता जैसे उदाहरण बताते हैं कि भारतीय जीवन-दृष्टि में समस्त सृष्टि के प्रति आत्मीयता का भाव रहा है। वेद, उपनिषद ने इसी व्यापक दृष्टिकोण को समाज के सामने रखा है।

राठौड़ ने कहा कि जो केवल स्वयं के लिए सोचता और स्वयं के लिए जीता है, वह समाज और मानवता के प्रति अपने दायित्व से विमुख हो जाता है। विभिन्न विचारधाराओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया को विभिन्न वर्गों और समूहों में बांटने वाली प्रवृत्तियों के विपरीत भारतीय चिंतन समस्त संसार के कल्याण की भावना को सामने रखता है।

उन्होंने कहा कि ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’, ‘प्राणियों में सद्भावना हो’ और ‘विश्व का कल्याण हो’ जैसी भावनाएं भारतीय जीवन-दर्शन की व्यापकता को दर्शाती हैं। जो व्यक्ति केवल अपने समूह या अपने हित की चिंता करता है, वह ‘हम’ के भाव को विकसित नहीं कर सकता। ‘हम’ का भाव तभी विकसित होगा, जब व्यक्ति पूरे समाज और विश्व के हित के बारे में चिंतन करेगा।

भारत की ऐतिहासिक भूमिका पर प्रकाश डालते हुए राठौड़ ने कहा कि भारत ने दुनिया को शस्त्रों के माध्यम से प्रभावित नहीं किया, बल्कि ज्ञान, शिक्षा, संस्कृति, वेदों और अपने चरित्र के माध्यम से विश्व को प्रभावित किया है । भारत की सभ्यता ने लोगों को अपने चरित्र और आचरण के माध्यम से जोड़ा। भारत की यह परंपरा उसके ऋषियों और आचार्यों की देन है, जिन्होंने जीवन को कुटुंब भाव और मानवीय मूल्यों के साथ जीने का मार्ग दिखाया।

उन्होंने वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज समाज को जाति, वर्ग और विभिन्न समूहों में बांटने वाली प्रवृत्तियां दिखाई दे रही हैं। संकुचित सोच के आधार पर समाज में विभाजन पैदा करने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी प्रवृत्तियों के प्रति सजग रहते हुए भारतीय दर्शन और सामाजिक समरसता के आधार पर ‘हम’ के भाव को मजबूत करना होगा।

राठौड़ ने संविधान सभा की बहसों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रत्येक नागरिक को संविधान सभा की चर्चाओं का अध्ययन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत की पहचान, भाषा और राष्ट्र से जुड़े विषयों पर संविधान सभा में व्यापक विमर्श हुआ। राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत के निर्धारण से जुड़े प्रसंगों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्र के प्रति ‘मां’ का भाव और अपनत्व ही नागरिकों को ‘मैं’ से ‘हम’ की ओर ले जाता है।

उन्होंने कहा कि भारत को केवल राजनीतिक या भौगोलिक इकाई के रूप में नहीं, बल्कि एक जीवंत सांस्कृतिक चेतना के रूप में समझने की आवश्यकता है। भारतीय दर्शन, समाज और संस्कृति के आधार पर हमें यह चिंतन करना होगा कि व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर समाज और राष्ट्र के प्रति ‘हम’ का भाव कैसे विकसित किया जाए।

पाथेय कण संस्थान के सचिव महेंद्र सिंहल ने कार्यक्रम की प्रस्तावना रखते हुए पाथेय कण संस्थान की यात्रा और उसकी गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस वर्ष पाथेय कण पत्रिका ने अपने सदस्यता के पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए 1 लाख 85 हजार सदस्य जोड़ने का गौरव प्राप्त किया है। पत्रिका के माध्यम से गांव-गांव तक जनजागरण के कार्य को आगे बढ़ाया गया। संस्थान द्वारा साहित्य, सामाजिक जागरण और राष्ट्रहित से जुड़े विषयों पर निरंतर कार्य किया जा रहा है।

महर्षि दधीचि देहदान सम्मान समारोह भी आयोजित किया गया, जिसमें देहदान करने वाले व्यक्तित्वों के परिवारजनों एवं परिजनों का सम्मान किया गया। देहदान करने वाले 15 परिवारों का किया गया सम्मान

इस मौके पर अतिथियों ने पिछले वर्षों में देहदान करने वाले परिवारों का सम्मान किया। साथ देहदान के लिए प्रोत्साहित करने वाली 2 संस्थाओं को भी सम्मानित किया। उन्हें शॉल, अभिनंदन पत्र और स्मृति चिन्ह प्रदान किया गया। इस अवसर पर जिला चिकित्सालय अम्बामाता की प्रभारी डॉ नाजिमा व शरीर रचना विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ श्वेता अस्थाना भी उपस्थित रहे। वर्ष 2025-26 में दिवंगत देहदानी रवि खमेसरा, पुष्पा देवी, मुरारी लाल अग्रवाल, सकु बाई जी, प्रह्लाद कुमार सुहालका, धर्मदेव चौबे, कुसुमबाई चावत, चन्द्रा खमेसरा, सुशीला जैन, संध्या नाहर, नाथू लाल चंडालिया, आशु लाल कुरडिया, बसंती लाल पगारिया, रोशन लाल हिरण व इला चक्रवर्ती के परिजनों का सम्मान किया गया।

प्रोफेसर नंदकिशोर पांडे द्वारा अध्यक्षीय उद्बोधन करते हुए पाठ्यक्रम से संबंधित जानकारी प्रदान की गई।

कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रगीत वंदे मातरम् एवं समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। अतिथिगण द्वारा भारत माता के चित्र के समक्ष पुष्पांजलि अर्पित की गई। नृत्य-सृष्टि समूह के कलाकारों द्वारा आराधना स्वरूप शास्त्रीय नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी गई।
मंच संचालन डॉ सुनील खटीक एवं डॉ सुनील शर्मा, धन्यवाद ज्ञापन विकास छाजेड़ और हनुमान चौहान ने पुस्तक परिचय करवाया। शैलेश चौरड़िया ने दिवंगत हस्तीमल के जीवन पर प्रकाश डाला।

संविधान चित्र प्रदर्शनी व साहित्य प्रदर्शनी का श्रोताओ ने अवलोकन किया।

*कौन थे हस्तीमल*
हस्तीमल हिरण का जन्म राजसमंद के आमेट में हुआ। विद्यार्थी जीवन से ही उन्होंने संघ कार्यों से जुड़कर अपना जीवन राष्ट्रकार्य को समर्पित कर दिया। उदयपुर में प्रचारक के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने संघ के विभिन्न दायित्वों का निर्वहन किया। वर्ष 2004 से 2015 तक अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख रहे। अध्ययन, संगठन, आत्मीयता और सेवा उनके जीवन की प्रमुख विशेषताएं रहीं।
#पुष्प #हरदिनपावन #उदयपुर

14/09/2026

#गणेशोत्सव : आस्था, संस्कृति और एकता का उत्सव

13/09/2026

सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने चारभुजानाथ के किए दर्शन

मन्दिर समाज के संस्कार केन्द्र

राजसमंद। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत शनिवार को चारभुजा गढबोर के अल्प प्रवास पर रहे। अपने प्रवास के दौरान उन्होंने प्रसिद्ध श्री चारभुजानाथ मंदिर पहुंचकर भगवान चारभुजानाथ के दर्शन किए तथा विधिवत पूजा-अर्चना कर देश एवं समाज की सुख-समृद्धि की कामना की।

मंदिर पहुंचने पर मंदिर के पुजारी एवं प्रतिनिधि मंडल द्वारा डॉ. मोहन भागवत का आत्मीय स्वागत-सत्कार किया गया। इस अवसर पर पुजारी एवं प्रतिनिधि मंडल ने उन्हें मंदिर की प्राचीन परंपराओं, धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व तथा मंदिर की व्यवस्थाओं की जानकारी दी।

डॉ. भागवत ने मंदिर की प्राचीन धार्मिक परंपराओं एवं श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र के रूप में चारभुजानाथ धाम के महत्व के बारे में जानकारी प्राप्त की। मंदिर परिसर में उनका प्रवास अत्यंत सहज एवं आत्मीय रहा। उनके आगमन को लेकर मंदिर परिसर में श्रद्धा एवं उत्साह का वातावरण रहा।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत जी ने कहा कि सदियों से लगातार चली आ रही मंगलकारी परंपरा में मंदिर यानी समाज के संस्कारों के केंद्र है। इस परंपरा के निर्वहन हेतु आस्था व संस्कार का पाथेय पीढ़ी दर पीढ़ी लगातार मिलने के कारण समाज उत्तम प्रकार से चला आ रहा है।

दर्शन एवं पूजा-अर्चना के पश्चात डॉ. मोहन भागवत ने मंदिर के पुजारी एवं प्रतिनिधि मंडल से आत्मीय संवाद किया। इस दौरान मंदिर से संबंधित विभिन्न विषयों पर भी चर्चा हुई। पुजारी एवं प्रतिनिधि मंडल द्वारा प्रसाद भेंट कर मंगलकामना प्रेषित की गई।
#सनातन #चारभुजा_नाथ

असम में बाढ़ प्रभावित स्कूली छात्रों के लिए संबल बना भारतीय किसान संघ, 7,000 विद्यार्थियों में निःशुल्क यूनिफॉर्म, नोटबु...
13/09/2026

असम में बाढ़ प्रभावित स्कूली छात्रों के लिए संबल बना भारतीय किसान संघ, 7,000 विद्यार्थियों में निःशुल्क यूनिफॉर्म, नोटबुक, पेन बंडल और बैग का वितरण किया
#सेवापरमो_धर्म

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