06/06/2026
दृष्टोऽपि शैलः स मुहुर्मुरारेरपूर्ववद्भिस्मयमाततान ।
क्षणे क्षणे यन्नवतामुपैति तदेव रूपं रमणीयतायाः ॥
---------------------------------------
पर्वत (रैवतक पर्वत) बारम्बार देखिरहेको भए पनि त्यसको सौन्दर्य यति अद्भुत थियो कि भगवान् श्रीकृष्णलाई हरेक पटक नयाँ र अपूर्व अनुभूति भयो । वास्तवमा सुन्दरताको स्वरूप त्यही हो, जो प्रत्येक क्षण नयाँ भएर प्रकट हुन्छ ।
---------------------------------------
Though Lord Krishna had seen the Raivataka mountain many times before, it filled him with wonder each time as if he was seeing it for the first time. Actual beauty is that which renews itself every moment.
---------------------------------------
स्रोत- शिशुपालवध ४. १७ | www.basistha.com