21/06/2020
१. दुनियाँ भर मे मानसिक समस्या से लाखौँ लोग मर रहे है!
हर तप्के के लोग ये समस्या से पिडित है और इन मे से कई लोग इस समस्याको हल करते है, कई लोग इसी के साथ वेबस होकर जी रहे होते है तो कुच लोग जान देकर मूर्खता भरि बहादुरिता देखातें है। (मेरे हिसाब से राजनीतिक नेताओं और गरिव लोग कम आत्महत्या करते है)
२. मानसिक समस्या या बिरामी ?
मेरे हिसाव से ये एक समस्या है। बिमारीको दावाओं से ठिक किया जा सकता है लेकिन इस समस्याको दावाओंको मद्धत थोरबहुत नियन्त्रित किया जा सकता है लेकिन पुरी तरह से नही !
३. मानसिक समस्या क्युं होता है ?
न्यूरोसाइन्टिस्ट और कई वैज्ञानिक मानते है कि दिमाग मे हमें खुस बनाने वाले रसायन मे भारी मात्रा मे गिरावट आना और ना होना एक कारण है। कोई लोग आर्थिक, सामाजिक और पारिवारिक कारणको भी जिम्मेवार ठहरातें है। बाहर से देख्ने मे ये कारणको बहुत बढा तुल दिए जातें है! हालाकी इनका जिम्मेदार देना समस्या के हल नही है। ये समस्या के सीपीयु नही है। समस्या हमारी भावना की है-खराब भावना कि! (दरअसल, आप अपनी सोच्ने कि आदत से सेरोटिन की मात्र घटबढ करा सकते है। और अधिकांस लोगोंको आत्म हत्या करने मे समय लगता है।) और सारे बुरे और अच्छे भावनाको नियन्त्रण या विकासका जड है हमारी सोच। सोच सिर्फ ज्ञान और बुद्धि से आता है! और हमारी चेतना का स्तर एक वृक्ष तरह होते है - इसको निरन्तर बढ्ना चाहिए - लेकिन मरना नही चाहिए।
४. लोग क्युं आत्महत्या करते है?
जब लोगों मे लगातार खराब भावना आ जाता है - जो उनकी ज्ञान बुद्धि और चेतना कि स्तर कि कमी से होता है - तो लोग निरास और दुखी हो जाता है! मुलभूत रुप मे दिमागको सहि हिसाव से काम मे नालगाना और चेतना का स्तर निम्न होना इसके लिए जिम्मेदार है। उनहे एसा लगता है कि सब कुछ खतम हो गया और मरने से ही समस्या मिट जाएगा। लोग समस्याको इतना बढा कर देते है या देखते है कि उनका जीवन बौना लगता है, जैसे हावा आई और पत्ते या कागज को टुकडे को अव खैर नही!
५. आधुनिक युग मे ये समस्या क्युं विकराल और खतरनाक हो गया है?
क्युं कि लोग खुद नही जानते कि वो कौन है। जब लोग पूर्णरुप से जानते है की वो कौन है तब ज्यादतर समस्या अपनेआप हट जाते हैं। समस्या यह है की लोग अपने ही समस्या को अपने से बहुत बडा बनाए है। वो यह वात भूल जाते है कि जो चीज हमने बनाई है या बनाते है - वो सारे के सारे हमारे लिए है, हम उनके लिए नही हम। और ये बनाई हुई चीज कुछ भी हो सकता है - पैसा-पद–प्रतिष्ठा–शक्ति–सम्पत्ति- बंगला–गाडी–आईफोन, लिस्ट लम्बी है। जो भी चीज हम बनाते है वो हमसे बढा कैसे हो सकता है? आप कम्पनि बनाते है और आप कि कम्पनि आप से बढे हो जाते है अब इसी के लिए आप मरते है। ए क्या? एक आईफोन कब और कैसे एपल कम्पनि से बडा हो सकता है? लेकिन आधुनिक संसार मे यहि हो रहा है! तब तो जीवन कि कोई अहिमियत ना रहेगे और एसेमा ज्यान लेना और देना मामुली बात हो जाती है! हर लोगको समझना चाहीए कि जीवन ही केन्द्र है और जीवन से बडा कोई भी नही होते–ना समस्या ना उपलब्धि! जीवनका कोई बिकल्प नही है! हर चीज-परिवार- ज्ञान- समाज – पद- प्रतिष्ठा, जीवन के लिए है और इसीको सवरने कि लिए हम ने ही खडा किया है, बनाया है। जब इस सत्य को समझ लेंगे तब किसिको आत्महत्या करना नही पडेगा। आपके जिन्दगी से बडकर आप कि कोई भी चीज नही हो सकते। आपकि समस्या, आपकी पैसा आपकी उपलब्धि, आपकी पद- कुछ भी - आप कि चीज आप से बडे होते ही नही और होना भी नही चाहिए।
६. क्या करें और क्या करना चाहिए ?
आपको सिर्फ समझना है। जब वात समझ मे आतें है तब किसि को कुछ भी कहेनाका जरुत नही पडेगा। कृपया जिन्दगीको समझले और खुसहाल रहीए।
७. एक और बढी वात !
संसार बहुत बढा है – प्रकृति कठोर प्रतित होती है । इस लिए बाहर क्या होता - ये आप कि हातमे नही है लेकिन आपको अन्दर क्या होता है – इसके लिए १०० प्रतिशत आफ खुद जिम्मेदार हो। वाहर धुप लगे और वर्षात हो – इसको आप के साथ कुछ लेना देना नही है और ये आप कि नही सुनता और वश मे भी नही है ! वारिश मे भिगना है और छत्री का इस्तेमाल करना – ये सव आप कि हात मे है। अगर छत्री आप नही लेंगे तो बेसक आप भिगेंगे ही तब किसी और या झरीको आरोपित मत करना। - अनुसंधित्सु
POST SCRIPT: कृपया एह आपको पसंद आई तो श्यर करें अपनी मित्रों के साथ। मै आपकी आभारी रहूँगा क्युं कि अगर मेरी बजह से कोई भी एक व्यक्ति अपने आपको कत्ल करने से रोकता है तो मुझे बहुत शकुन मिलेगा। सब कि जय हो!
DISCLAIMER: मै पेशेवर सैकोलोजिस्ट नही और आप जानते है कि उपर लिखि हुई बातें आपके उपर जवर्जस्ती थोपा नही किया गया है- ये सिर्फ आपकी चेतना स्तरको बडाने कि लिए कीई गयी एक अपिल है। - अनुसंधित्सु