01/08/2026
देश के नेता आस्था का नाम लेकर पूरे देश को रास्ते पर लाने के लिए दिन-रात जुटे हुए हैं। हालांकि, आस्था से उनका दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है।
क्या आज आस्था जनकल्याण का माध्यम है या फिर राजनीति का सबसे प्रभावी हथियार बन चुकी है? जब जनता के सामने बेरोज़गारी, महंगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं जैसे मुद्दे खड़े हों, तब आस्था के नाम पर राजनीति कितनी उचित है—यह सवाल देश की जनता को खुद तय करना होगा।
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