14/08/2026
तिरंगा यात्रा के नाम पर बच्चों की जान से खिलवाड़? फोटो के लिए देशभक्ति का दिखावा!
उत्तर प्रदेश के कई स्कूलों में तिरंगा यात्रा के दौरान छात्राओं के बेहोश होने की खबरों ने व्यवस्था और जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि जब बच्चों को तेज धूप और लंबी यात्रा में सड़क पर उतारा जाता है, तो उनके लिए पानी, जलपान, प्राथमिक उपचार और पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था क्यों नहीं होती?
अगर तिरंगा यात्रा देशभक्ति का आयोजन है, तो क्या बच्चों की सुरक्षा उसकी पहली जिम्मेदारी नहीं होनी चाहिए?
विडंबना देखिए—जिन अधिकारियों, नेताओं और मंत्रियों के बच्चे महंगे और सुविधासंपन्न स्कूलों में पढ़ते हैं, क्या वे भी अपने बच्चों को ऐसी यात्राओं में इसी तरह भेजते हैं? आम बच्चों को धूप, भीड़ और अव्यवस्था के बीच खड़ा करके सिर्फ तस्वीरें खिंचवाना क्या देशभक्ति है?
तिरंगा सम्मान का प्रतीक है, बच्चों की परेशानी का नहीं।
देशभक्ति के नाम पर बच्चों को घंटों सड़कों पर खड़ा करने से पहले प्रशासन और स्कूल प्रबंधन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पीने का पानी, जलपान, मेडिकल सहायता, छाया और सुरक्षा की पूरी व्यवस्था हो।
अगर व्यवस्था सिर्फ कैमरे के सामने तिरंगा दिखाने तक सीमित है और बच्चों की बुनियादी जरूरतों का इंतजाम नहीं है, तो सवाल उठना स्वाभाविक है—
क्या यह देशभक्ति है या सिर्फ फोटो खिंचवाने का आयोजन?
तिरंगा सबसे ऊपर है, लेकिन तिरंगे को थामने वाले बच्चों की जिंदगी और सेहत उससे भी बड़ी जिम्मेदारी है।
#तिरंगा_यात्रा #बच्चों_की_सुरक्षा #उत्तरप्रदेश #स्कूल #देशभक्ति #जवाबदेही #प्रशासन #शिक्षा_व्यवस्था #छात्राओं_की_सुरक्षा #जनता_का_सवाल #निर्भीक_आवाज #भारतीयnews24