15/10/2022
भारत में मंदी आने के कितने पर्सेंट चांस?
हाल ही में सरकार ने पहली तिमाही के आंकड़े जारी किए हैं। मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून के दौरान इंडियन इकोनॉमी (Indian Economy) 13.5 फीसदी की रफ्तार से बढ़ी है। वहीं, भारत अब दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी इकोनॉमी बन गया है।
हाल ही में सरकार ने पहली तिमाही के आंकड़े जारी किए हैं। मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून के दौरान इंडियन इकोनॉमी (Indian Economy) 13.5 फीसदी की रफ्तार से बढ़ी है। वहीं, भारत अब दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी इकोनॉमी बन गया है।
देश में मंदी आने के जीरो फीसदी चांस
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि चालू वित्त वर्ष में जीडीपी में ग्रोथ डबल डिजिट में बने रहने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि अन्य देशों की तुलना में भारत मजबूत स्थिति में है और जरूरतमंद वर्गों को मदद देने के लिहाज से जिम्मेदार भी है। सीतारमण ने इस वर्ष जीडीपी ग्रोथ के डबल डिजिट में रहने की उम्मीद के बारे में पूछे जाने पर कहा, ‘‘देश में मंदी आने के जीरो फीसदी चांस हैं। मुझे डबल डिजिट ग्रोथ की उम्मीद है। हम इसके लिए काम करेंगे। यदि आप मंदी की कगार पर नहीं खड़े हैं, तो इससे भरोसा मिलता है। जरूरतमंद वर्गों की मदद करने और अर्थव्यवस्था को गति देने के लिहाज से हम लगातार कदम उठा रहे हैं...’’
दुनिया में मंदी की आशंका के बीच भारत में डबल डिजिट ग्रोथ
जिस समय दुनिया भर में मंदी की आशंका है और अर्थव्यवस्थाओं का आकार सिकुड़ रहा है, उस समय में भी हमारी ग्रोथ रेट दोहरे अंकों में रही है। हाल ही में सरकार ने पहली तिमाही के आंकड़े जारी किए हैं। मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून के दौरान इंडियन इकोनॉमी (Indian Economy) 13.5 फीसदी की रफ्तार से बढ़ी है।
मंदी की कगार पर भारत से कहीं अधिक विकसित अर्थव्यवस्थाएं
वित्त मंत्री ने कहा कि कुछ लोग इस उच्च ग्रोथ रेट के लिए पिछले साल के निम्न आधार को जिम्मेदार बताने की कोशिश करेंगे। उन्होंने कहा, ‘‘हम जिन अर्थव्यवस्थाओं की बात कर रहे हैं, उनकी तुलना में हम मजबूत स्थिति में हैं। हम वास्तव में सबसे तेजी से ग्रोथ करती हुई अर्थव्यवस्था हैं।’’ उन्होंने विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (IMF) की रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि भारत से कहीं अधिक विकसित मानी जाने वाली अर्थव्यवस्थाएं इस समय मंदी की कगार पर हैं।क्या सही है सरकारों द्वारा फ्री बांटने का चलन
सरकारों की तरफ से बांटे जाने वाले मुफ्त उपहारों से जुड़े एक सवाल पर सीतारमण ने कहा, ‘‘हमें इस चर्चा में हिस्सा जरूर लेना चाहिए, क्योंकि अगर आप किसी को कुछ नि:शुल्क दे रहे हैं, तो इसका मतलब है कि उसका बोझ कोई और उठा रहा है।’’ उन्होंने सुझाव दिया कि सत्ता में आने वाली किसी भी सरकार को अपनी वित्तीय स्थिति का आकलन करने के बाद मुफ्त उपहारों के लिए वित्तीय प्रावधान करना चाहिए।
भारत बना दुनिया की 5वीं बड़ी अर्थव्यवस्था
भारत अब दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी इकोनॉमी बन गया है। अमेरिका, चीन, जापान और जर्मनी के बाद भारत दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। जिस ब्रिटेन का कभी भारत गुलाम रहा, उसे पीछे छोड़ हम इस लिस्ट में पांचवें स्थान पर आए हैं। बीते 10 वर्षों में भारतीय इकोनॉमी ने 11वें पायदान से यहां तक का सफर तय किया है। भारत लंबे समय से दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शुमार है।