01/10/2023
निमन्त्रण पत्र प्राचीन समृद्ध परम्परा:
अपनी सनातन हिन्दू संस्कृति में विवाह व अन्य मांगलिक समारोहों में आमंत्रण पत्र स्वजनों को दावत का न्योता मात्र नहीं है ! अपितु यह एक महत्वपूर्ण संस्कार व आर्शीवाद समारोह का निमंत्रण है। समारोह एवं संस्कारों में जब हम अपने रिश्तेदारों, मित्रों एवं शुभचिंतकों को स्नेह पूर्वक व्यक्तिगत रूप से निमंत्रण पत्र देकर, अपना अपनत्व व स्नेह को प्रगट करते हुए आमंत्रित करते हैं, तब स्वजनों के मन में सम्मान का भाव जागृत होता है ! कार्ड वितरण के माध्यम से हमारी व्यक्तिगत भेंट होती हैं व साथ ही हमारा उन सभी घरों तक जाना हो जाता है जिनके घर सालों- साल से जाना ही न हुआ हो। विवाह समारोह एक ऐसा यादगार अवसर होता है जो हमें परिवार, स्वजनों और समाज के साथ घुलने-मिलने का अवसर प्रदान करता है।
शुभ विवाह का कार्ड प्रिंटेड पेपर पर सूचना मात्र नहीं है, अपितु यह हमारी भावनाओं का स्नेह से भरा प्रगटीकरण होता है। जिसके द्वारा हम अपने रिश्तेदारो एवं स्वजनों को स्वयं घर जाकर उन्हें आने के लिए आमंत्रित करते हैं।
"सोशल मीडिया द्वारा प्रेषित निमंत्रण में हम इस व्यक्तिगत भेंट के सुखद अनुभव, आदर-सम्मान व अपनी समृद्ध परम्परा से वन्चित ही रह जाते हैं। अतः पारम्परिक रीति रिवाजों को आधुनिकता की भेंट चढ़ने से बचाना हमारा कर्तव्य भी है दायित्व भी।"
आदिकाल से चली आ रही इस परंपरा को समय की बचत के लालच में विस्मृत कर देना किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं।
प्राचीनकाल में जब परिवहन की बहुत व्यवस्था नहीं थी तब भी हमारे बुजुर्गों ने व्यक्तिगत आमंत्रण की परम्परा को जीवन्त रखा व रिश्तों में कृत्तिमता की जगह हर रिश्ता ह्रदय से निभाया।
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Manoj Kumar Agrawal Arya
Anupama Agrawal अनुपमा अग्रवाल