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31/07/2026

सच में बीजेपी गाजीपुर की सातों सीटे जीत सकती है?

22/07/2026

कारगिल में गाजीपुर का वह वीर सपूत, जिसने तिरंगे की आन पर जीवन न्योछावर कर दिया — शहीद अश्वनी कुमार यादव

गाजीपुर की पावन धरती ने अनेक वीर सपूतों को जन्म दिया है। उन्हीं अमर वीरों में एक नाम है शहीद अश्वनी कुमार यादव, जिनकी वीरता, त्याग और देशभक्ति आज भी हर भारतीय का सिर गर्व से ऊँचा कर देती है।

4 जुलाई 1977 को गाजीपुर जिले की सेवराई तहसील के बरेजी गांव में जन्मे अश्वनी कुमार यादव बचपन से ही अनुशासित, साहसी और देशप्रेम की भावना से ओत-प्रोत थे। उनके पिता बंशीधर यादव स्वयं भारतीय सेना में रह चुके थे। पिता की वर्दी, उनके संघर्ष और मातृभूमि के प्रति समर्पण ने बालक अश्वनी के मन में भी सैनिक बनने का सपना जगा दिया।

समय बीता और वह सपना हकीकत बन गया। 29 अप्रैल 1996 को अश्वनी कुमार यादव भारतीय सेना में भर्ती हुए। उनकी पहली तैनाती 59 फील्ड रेजिमेंट, खेमकरण सेक्टर (अमृतसर) में हुई। कठिन प्रशिक्षण, अनुशासन और अदम्य साहस ने उन्हें एक जांबाज़ सैनिक बना दिया।

फिर आया 1999, जब कारगिल की बर्फीली चोटियों पर पाकिस्तान ने घुसपैठ कर भारत की संप्रभुता को चुनौती दी। पूरा देश युद्ध की आग में तप रहा था। ऐसे समय में अश्वनी कुमार यादव भी उन वीर सैनिकों में शामिल थे, जिन्होंने बिना अपने प्राणों की परवाह किए दुश्मन के सामने सीना तानकर खड़े होने की शपथ ली।

कारगिल की दुर्गम पहाड़ियों, कड़ाके की ठंड और दुश्मन की लगातार गोलाबारी के बीच अश्वनी अपने साथियों के साथ डटे रहे। उनका एक ही लक्ष्य था—हर हाल में तिरंगे की रक्षा।

18 जुलाई 1999 का वह दिन गाजीपुर के लिए कभी न भूलने वाला दिन बन गया। उस समय मोबाइल फोन का दौर नहीं था। सेना के दो जवान गांव पहुंचे और परिवार को वह खबर सुनाई, जिसने पूरे गांव को शोक में डुबो दिया—"आपका बेटा देश के लिए शहीद हो गया।" यह सुनते ही माता-पिता की दुनिया जैसे थम गई, लेकिन उनके चेहरे पर अपने वीर बेटे पर गर्व भी साफ झलक रहा था।

बाद में उनकी शहादत को लेकर कुछ प्रशासनिक और जांच संबंधी विवाद भी सामने आए, लेकिन एक सत्य कभी नहीं बदला—अश्वनी कुमार यादव ने भारतीय सेना की वर्दी पहनकर राष्ट्र सेवा करते हुए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दिया।

जब उनका पार्थिव शरीर गांव पहुंचा तो हजारों लोगों की आंखें नम थीं। पूरे सैन्य सम्मान के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी गई। हर तरफ एक ही नारा गूंज रहा था—"जब तक सूरज-चांद रहेगा, अश्वनी तेरा नाम रहेगा।"

आज बरेजी गांव में स्थापित उनकी प्रतिमा हर आने-जाने वाले को यह संदेश देती है कि मातृभूमि की रक्षा से बड़ा कोई धर्म नहीं होता। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए साहस, कर्तव्य और बलिदान की अमर प्रेरणा है।

शहीद कभी मरते नहीं, वे राष्ट्र की आत्मा बनकर सदैव जीवित रहते हैं।
गाजीपुर का यह अमर सपूत आज भी हर भारतीय के दिल में तिरंगे की तरह लहरा रहा है।

शत्-शत् नमन, अमर शहीद अश्वनी कुमार यादव! जय हिन्द! 🇮🇳

गाजीपुर वीरो की धरती
17/07/2026

गाजीपुर वीरो की धरती

क्या आप जानते हैं? गाजीपुर के वीर जवानों के बारे में जो कारगिल युद्ध में शहीद हुए थे।

कारगिल युद्ध (1999) भारत और पाकिस्तान के बीच मई से जुलाई 1999 तक लड़ा गया था। पाकिस्तान की घुसपैठ के बाद भारतीय सेना ने ऑपरेशन विजय चलाकर दुर्गम पहाड़ों पर कब्जा कर दुश्मन को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। 26 जुलाई 1999 को भारत ने ऐतिहासिक विजय प्राप्त की। इस युद्ध में 527 भारतीय सैनिक शहीद हुए, जिनमें गाजीपुर के 6 वीर सपूतों ने भी मातृभूमि की रक्षा करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।

क्या आप गाजीपुर के उन 6 अमर कारगिल शहीदों के नाम जानते हैं?

1. 🇮🇳 शहीद कमलेश सिंह – भैरोपुर

2. 🇮🇳 शहीद इश्तियाक अहमद – फखनपुरा

3. 🇮🇳 शहीद जयप्रकाश सिंह यादव – पंडितपुरा

4. 🇮🇳 शहीद रामदुलार यादव – पड़ैनिया

5. 🇮🇳 शहीद शेषनाथ सिंह यादव – बाघी

6. 🇮🇳 शहीद संजय यादव – धनईपुर

इन छह अमर वीरों की शौर्यगाथा आज भी गाजीपुर की धरती को गौरवान्वित करती है। जय हिन्द! 🇮🇳

16/07/2026

गाज़ीपुर पुलिस के 15 आरक्षियों ने रचा इतिहास, बने उप-निरीक्षक

पुलिस अधीक्षक गाजीपुर ने मिठाई खिलाकर किया सम्मानित, बोले— "अब जिम्मेदारी और बढ़ गई है"

गाज़ीपुर पुलिस के लिए आज का दिन गर्व और उत्साह से भरा रहा। वर्षों की कठिन मेहनत, अनुशासन और लगन आखिरकार रंग लाई, जब जनपद में तैनात 15 आरक्षियों का चयन उप-निरीक्षक (SI) पद पर हुआ।

इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर पुलिस अधीक्षक गाज़ीपुर ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय में सभी चयनित पुलिसकर्मियों को मिष्ठान खिलाकर सम्मानित किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। पूरे परिसर में खुशी और गर्व का माहौल देखने को मिला।

पुलिस अधीक्षक ने कहा कि यह सफलता केवल पदोन्नति नहीं, बल्कि कर्तव्यनिष्ठा, समर्पण और अथक परिश्रम का सम्मान है। उन्होंने सभी नवचयनित उप-निरीक्षकों को नए पद की गरिमा बनाए रखते हुए ईमानदारी, निष्पक्षता और संवेदनशीलता के साथ जनता की सेवा करने का संदेश दिया।

⭐⭐उप-निरीक्षक पद पर चयनित आरक्षी

1. खुशी पांडेय
2. कुमारी अभिलाषा आर्या
3. गुड़िया
4. आदित्य तिवारी
5. उग्रसेन कुमार
6. मो. कासिम
7. अमन पांडेय
8. मुकेश कुमार
9. यशराज सिंह
10. अंकित गौतम
11. सुमित कुमार
12. अविनाश
13. श्रीश कुमार यादव
14. सक्षम मौर्य
15. अजीत कुमार

इस अवसर पर अपर पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) सहित अन्य पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी भी मौजूद रहे।

गाज़ीपुर समाचार की ओर से सभी नवचयनित उप-निरीक्षकों को हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं। Congratulations......

13/07/2026

जिंदगी में भरोसा सिर्फ अल्लाह पर ही होना चाहिए, हर एक चीज पर चाहे कुछ भी हो और लालच थोड़ी सी 4भी नहीं होना चाहिए जिंदगी में।

13/07/2026

अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं है। हर शख्श को अल्लाह ने पैदा किया है। हर शख्स को अल्लाह के पास ही जाना है और अपने कर्मो का हिसाब देना है। आमीन

12/07/2026

असली खूबसूरती चेहरे में नहीं, किरदार में होती है

आज हम सूरत, लिबास, दाढ़ी, टोपी और ज़ाहिरी पहचान को देखकर लोगों का अंदाज़ा लगा लेते हैं, जबकि इस्लाम इंसान की असली पहचान उसके इल्म, अक्ल, अच्छे अख़लाक, नरम ज़ुबान और बेहतरीन मामलात को मानता है।

हज़रत अबू हुरैरा (रज़ि.) से रिवायत है कि एक औरत बहुत नमाज़ पढ़ती, रोज़े रखती और सदक़ा करती थी, लेकिन अपनी ज़ुबान से पड़ोसियों को तकलीफ़ देती थी। नबी ﷺ ने फ़रमाया: "उसमें कोई भलाई नहीं, वह जहन्नम वालों में से है।"

फिर दूसरी औरत का ज़िक्र हुआ, जो सिर्फ़ फ़र्ज़ नमाज़ अदा करती, थोड़ा सदक़ा करती और किसी को तकलीफ़ नहीं देती थी। नबी ﷺ ने फ़रमाया: "वह जन्नत वालों में से है।" (मुस्नद अहमद: 9675, अर्थानुसार)

याद रखिए: इबादत का मक़सद सिर्फ़ रस्म निभाना नहीं, बल्कि इंसान के किरदार को बेहतर बनाना है। अगर नमाज़ और रोज़े के बावजूद हमारी ज़ुबान, व्यवहार और लेन-देन लोगों के लिए तकलीफ़ का कारण बने, तो हमें अपने आप का मुहासबा करना चाहिए।

अल्लाह को वह इंसान सबसे ज़्यादा पसंद है, जो उसके हक़ अदा करने के साथ-साथ उसके बंदों के हक़ भी अदा करे।
अच्छे अख़लाक, नरम ज़ुबान और इंसाफ़ ही एक सच्चे मुसलमान की सबसे बड़ी पहचान हैं।

09/07/2026

गाजीपुर भांवरकोल के गोड़ी खास में चार वर्षीय मासूम सिद्धार्थ का शव मिलने से सनसनी

भांवरकोल (गाजीपुर)। भांवरकोल थाना क्षेत्र के गोड़ी खास गांव में चार वर्षीय मासूम सिद्धार्थ कुशवाहा का शव मिलने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। चार दिन पहले रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हुए मासूम का शव गुरुवार सुबह उसके घर से लगभग 40–45 मीटर दूर चरी के खेत में क्षत-विक्षत अवस्था में मिला। शव काफी हद तक सड़ चुका था, जिससे घटनास्थल के आसपास तेज दुर्गंध फैल रही थी। घटना की जानकारी मिलते ही गांव में शोक और आक्रोश का माहौल बन गया।

जानकारी के अनुसार, गोड़ी खास निवासी जामवंत कुशवाहा उर्फ पिंटू का चार वर्षीय पुत्र सिद्धार्थ सोमवार, 6 जुलाई को घर के बाहर खेलते समय अचानक लापता हो गया था। परिजनों ने काफी खोजबीन की, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिलने पर भांवरकोल थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई गई। इसके बाद पुलिस और ग्रामीण लगातार उसकी तलाश में जुटे हुए थे।

गुरुवार सुबह खेत की ओर गई कुछ महिलाओं को चरी के खेत से तेज दुर्गंध महसूस हुई। पास जाकर देखने पर वहां एक छोटे बच्चे का क्षत-विक्षत शव पड़ा मिला। सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। परिजनों ने शव की पहचान सिद्धार्थ के रूप में की, जिसके बाद परिवार में कोहराम मच गया।

घटना की सूचना पर क्षेत्राधिकारी मुहम्मदाबाद सुधाकर पांडेय, भांवरकोल थानाध्यक्ष रोहित कुमार मिश्रा, फॉरेंसिक टीम और भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा। फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण कर आवश्यक साक्ष्य और नमूने एकत्र किए। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

पुलिस जांच के दौरान मासूम की दादी को पूछताछ के लिए हिरासत में लेकर विभिन्न पहलुओं पर जानकारी जुटा रही है। हालांकि पुलिस ने अभी तक किसी भी व्यक्ति की संलिप्तता की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फॉरेंसिक जांच और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल हत्या, दुर्घटना और अन्य सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है।

इस दर्दनाक घटना के बाद पूरे गोड़ी खास गांव में मातम पसरा हुआ है। ग्रामीणों ने मामले का शीघ्र खुलासा कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी निष्पक्षता और गंभीरता से की जा रही है तथा जल्द ही घटना के वास्तविक कारणों का खुलासा किया जाएगा।

एक पल की लापरवाही, पूरी ज़िंदगी पर भारी पड़ सकती है…मुंबई में मोहर्रम के जुलूस के दौरान कथित तौर पर लोगों को दवा बताकर ज...
27/06/2026

एक पल की लापरवाही, पूरी ज़िंदगी पर भारी पड़ सकती है…

मुंबई में मोहर्रम के जुलूस के दौरान कथित तौर पर लोगों को दवा बताकर जहरीले कैप्सूल बांटने का मामला सामने आया। यह घटना हमें एक बड़ी सीख देती है—किसी भी अनजान व्यक्ति से मिली खाने-पीने की चीज़ बिना जांचे-परखे कभी स्वीकार न करें।

क़ुरआन भी इंसान को अपनी जान की हिफाज़त करने की शिक्षा देता है:

«"अल्लाह के मार्ग में खर्च करो और अपने ही हाथों अपने आपको विनाश में न डालो।"
— सूरह अल-बक़रह (2:195)»

इस आयत का संदेश केवल इबादत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी सिखाता है कि इंसान खुद को अनावश्यक खतरे में न डाले और अपनी जान व सेहत की रक्षा करे।

आज के दौर में यह और भी ज़रूरी हो गया है कि किसी अजनबी से मिली दवा, कैप्सूल, पेय पदार्थ या खाने की कोई भी चीज़ बिना भरोसे और पुष्टि के न लें।

सावधानी भी इबादत है, और अपनी जान की हिफाज़त करना इस्लाम की शिक्षा है।

अल्लाह हम सबकी हिफाज़त फरमाए। आमीन।

मुंबई में मोहर्रम जुलूस के दौरान बड़ी साजिश नाकाम, हजारों जहरीले कैप्सूल बरामदमुंबई में मोहर्रम के जुलूस के दौरान पुलिस ...
27/06/2026

मुंबई में मोहर्रम जुलूस के दौरान बड़ी साजिश नाकाम, हजारों जहरीले कैप्सूल बरामद

मुंबई में मोहर्रम के जुलूस के दौरान पुलिस ने एक बड़ी साजिश का खुलासा करने का दावा किया है। पुलिस के अनुसार, पुणे निवासी 39 वर्षीय फैयाज प्रेमजी को उस समय गिरफ्तार किया गया, जब वह लोगों को दर्द की दवा बताकर कैप्सूल बांट रहा था।

जांच में इन कैप्सूलों में जिंक फॉस्फाइड (चूहे मारने में इस्तेमाल होने वाला जहरीला पदार्थ) मिलने का दावा किया गया है। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से करीब 14,900 जहरीले कैप्सूल बरामद किए हैं। प्रारंभिक जांच के मुताबिक, आरोपी ने हजारों और कैप्सूल तैयार करने की योजना बनाई थी।

पुलिस के अनुसार, एक व्यक्ति द्वारा कैप्सूल खाने के बाद तबीयत बिगड़ने पर मामला सामने आया और तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया। अब पुलिस उसके मोबाइल, बैंक लेन-देन और अन्य संपर्कों की जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि वह अकेले काम कर रहा था या उसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क है।

फिलहाल मामले की जांच जारी है। पुलिस का कहना है कि समय रहते कार्रवाई होने से एक बड़ी अनहोनी टल गई।

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