25/10/2025
मैं पहाड़
मैं पहाड़ कहता हूं ,
उठ जाग अब,
हो चला सवेरा,
उठ और रास्ता लगे ,
चल अब हो चला सवेरा,
इस दौड़ती भागती दुनिया में,
चल अब चले रास्ते ,
तू ले चल संग अपने,
बल्चे लाओ, फाऊड़ा लाओ,
और संग संबल भी लाओ,
चल चले अपने को ढूंढने ,
मैं अगर थक गया,
तुम संग तो चलो ,
चलो खोदो इस ,
जमीन को मिलकर,
मैं कहा दफ्न हूं ,
कुछ पता तो चले,
चलो चले कुछ,
शुरुआत तो करे।
मैं पहाड़ मैं पहाड़ ।।
दिवाकर- 📝✒️