15/11/2018
🌻🌻कुण्डलिनी शक्ति🌻🌻
मनुष्य शरीर स्थित कुंडलिनी शक्ति में जो
चक्र स्थित होते हैं उनकी संख्या सात बताई गई है।
यह जानकारी शास्त्रीय, प्रामाणिक एवं
तथ्यात्मक है-
(1) 🌹मूलाधार चक्र - गुदा और लिंग के बीच चार
पंखुरियों वाला 'आधार चक्र' है । आधार चक्र का ही
एक दूसरा नाम मूलाधार चक्र भी है। वहाँ
वीरता और आनन्द भाव का निवास है ।
(2)🌹 सवाधिष्ठान चक्र - इसके बाद स्वाधिष्ठान चक्र लिंग मूल में
है । उसकी छ: पंखुरियाँ हैं । इसके जाग्रत होने पर
क्रूरता,गर्व, आलस्य, प्रमाद, अवज्ञा, अविश्वास आदि दुर्गणों
का नाश होता है ।
(3) 🌹मणिपूर चक्र - नाभि में दस दल वाला मणिचूर चक्र है । यह
प्रसुप्त पड़ा रहे तो तृष्णा, ईष्र्या, चुगली, लज्जा,
भय, घृणा, मोह, आदि कषाय-कल्मष मन में लड़ जमाये पड़े रहते
हैं ।
(4) 🌹अनाहत चक्र - हृदय स्थानमें अनाहत चक्र है । यह
बारह पंखरियों वाला है । यह सोता रहे तो लिप्सा, कपट, तोड़ -फोड़,
कुतर्क, चिन्ता, मोह, दम्भ, अविवेक अहंकार से भरा रहेगा ।
जागरण होने पर यह सब दुर्गुण हट जायेंगे ।
(5) 🌹विशुद्ध चक्र - कण्ठ में विशुद्धख्य चक्र यह
सरस्वती का स्थान है । यह सोलह पंखुरियों वाला है।
यहाँ सोलह कलाएँ सोलह विभूतियाँ विद्यमान है
(6) 🌹आज्ञाचक्र - भू्रमध्य में आज्ञा चक्र है, यहाँ '?'
उद्गीय, हूँ, फट, विषद, स्वधा स्वहा, सप्त स्वर
आदिका निवास है । इस आज्ञा चक्र का जागरण होने से यह
सभी शक्तियाँ जाग पड़ती हैं।
(7) 🌹सहस्रार चक्र - सहस्रार की स्थिति मस्तिष्क
के मध्यभाग में है । शरीर संरचना में इस स्थान पर
अनेक महत्वपूर्ण ग्रंथियों से सम्बन्ध रैटिकुलर एक्टिवेटिंग
सिस्टम का अस्तित्व है । वहाँ से जैवीय विद्युत का
स्वयंभू प्रवाह उभरता है । किसी भी
साधना के सफल होने का प्रतिशत साधक के शरीर के
चक्रों के संतुलित होने पर निर्भर करता है । साधक को चाहिए कि
वो मूलाधार से आरंभ कर सहस्त्रार तक के चक्रों का मूल मंत्र
के साथ बीज मंत्र की 108 माला एक
ही दिन मे करें ।
🍀🍀चक्र जागरण के मंत्र....🍀🍀
🌼*मूलाधार चक्र – “ ॐ लं परम तत्वाय गं ॐ
फट “
🌼* स्वाधिष्ठान चक्र – “ ॐ वं वं स्वाधिष्ठान जाग्रय
जाग्रय वं वं ॐ फट “
🌼* मणिपुर चक्र – “ ॐ रं जाग्रनय ह्रीम
मणिपुर रं ॐ फट “
🌼* अनाहत चक्र – “ ॐ यं अनाहत जाग्रय जाग्रय
श्रीं ॐ फट “
🌼* विशुद्ध चक्र – “ ॐ ऐं ह्रीं
श्रीं विशुद्धय फट “
🌼* आज्ञा चक्र – “ ॐ हं क्षं चक्र जगरनाए
कलिकाए फट “
🌼* सहस्त्रार चक्र – “ ॐ ह्रीं सहस्त्रार
चक्र जाग्रय जाग्रय ऐं फट “
🌻बीज मंत्र , जिनकी 108 माला
करनी है ( एक दिन मे एक चक्र पर ही
108 माला करना है ...
मूलाधा से आरंभ करना है )-
1 🔺मूलाधार – “ लं “
2 ♦सवाधिष्ठान- “ वं “
3 🔺मणिपुर – “ रं “
4 ♦अनाहत- “ यं “
5🔺 विशुद्ध – “ हं “
6 ♦आज्ञा – “ ॐ “
7🔺 सहस्त्रार – “ ॐ