04/04/2026
100 दिवसीय टीबी उन्मूलन अभियान को मिली नई गति: चिन्हित गांवों में सघन स्क्रीनिंग से लक्ष्य की ओर मजबूत कदम
• चिन्हित हाई रिस्क गांवों को अभियान का मुख्य केंद्र बनाया गया
• पोर्टेबल एक्स-रे मशीन से गांव स्तर पर ही जांच संभव
• सामूहिक सहभागिता से टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को साकार करने पर जोर
किशनगंज, 04 अप्रैल।
टीबी (क्षय रोग) आज भी एक गंभीर संक्रामक बीमारी के रूप में समाज के लिए चुनौती बनी हुई है, जो न केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को कमजोर करती है बल्कि परिवार और समुदाय के स्तर पर भी आर्थिक एवं सामाजिक प्रभाव छोड़ती है। समय पर पहचान और पूर्ण उपचार के अभाव में यह बीमारी तेजी से फैल सकती है, जिससे मृत्यु दर तक बढ़ने का खतरा रहता है। ऐसे में टीबी की रोकथाम, शीघ्र पहचान और प्रभावी उपचार अत्यंत आवश्यक हो जाता है। इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए जिले में 100 दिवसीय विशेष टीबी उन्मूलन अभियान संचालित किया जा रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य अधिक से अधिक संदिग्ध मरीजों की समय पर पहचान, जांच की सुलभता और उन्हें पूर्ण उपचार से जोड़कर संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ना है।
चिन्हित गांव बने अभियान का केंद्र, हर घर तक पहुंचने का प्रयास
जिला यक्ष्मा नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. मंजर आलम ने बताया कि निक्षय पोर्टल के आधार पर जिले के कई गांवों को चिन्हित किया गया है, जिन्हें इस अभियान का मुख्य केंद्र बनाया गया है। उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य केवल मरीजों की पहचान करना नहीं, बल्कि उन क्षेत्रों में गहराई से काम करना है जहां संक्रमण का खतरा अधिक है। चिन्हित गांवों में स्वास्थ्य टीम लगातार सर्वे, स्क्रीनिंग और जागरूकता गतिविधियां चला रही है, जिससे हर संदिग्ध व्यक्ति जांच के दायरे में आ सके।
पोर्टेबल एक्स-रे मशीन से जांच हुई आसान और सुलभ
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने बताया कि अभियान में पोर्टेबल एक्स-रे मशीन का उपयोग एक बड़ी उपलब्धि साबित हो रहा है। उन्होंने कहा कि अब मरीजों को जांच के लिए अस्पताल आने की आवश्यकता कम हो गई है। हमारी टीम सीधे चिन्हित गांवों में पहुंचकर मौके पर ही एक्स-रे जांच कर रही है, जिससे समय की बचत हो रही है और अधिक से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग संभव हो पा रही है।
पोर्टेबल एक्स-रे एवं स्क्रीनिंग पर विशेष जोर
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. देवेंद्र कुमार ने अभियान के तकनीकी पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पोर्टेबल एक्स-रे मशीन और सघन स्क्रीनिंग इस अभियान की रीढ़ हैं। उन्होंने बताया कि टीबी की समय पर पहचान के लिए जरूरी है कि हम अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचें। पोर्टेबल एक्स-रे के माध्यम से संदिग्ध मरीजों की तुरंत जांच संभव हो रही है, वहीं लक्षण आधारित स्क्रीनिंग से संभावित मरीजों को चिन्हित कर उन्हें आगे की जांच और उपचार से जोड़ा जा रहा है।उन्होंने यह भी कहा कि इन आधुनिक तकनीकों के उपयोग से जांच की गति और सटीकता दोनों में वृद्धि हुई है, जिससे अभियान को मजबूती मिल रही है।
उपचार, पोषण और निगरानी के साथ समग्र रणनीति
अभियान के अंतर्गत चिन्हित मरीजों को निःशुल्क दवा उपलब्ध कराने के साथ-साथ उनके पोषण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। निक्षय पोषण योजना के तहत आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है, ताकि मरीज जल्द स्वस्थ हो सकें। स्वास्थ्यकर्मी नियमित रूप से मरीजों का फॉलोअप कर रहे हैं और दवा का पूरा कोर्स सुनिश्चित कर रहे हैं, जिससे टीबी के पुनः फैलाव की संभावना समाप्त हो सके।
जागरूकता के लिए संवाद कार्यक्रम आयोजित
अभियान के तहत जागरूकता को और मजबूत करने के उद्देश्य से एक विशेष संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी, जिला यक्ष्मा नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. मंजर आलम, जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. देवेंद्र कुमार एवं सहयोगी संस्था डब्ल्यूएचपी के जिला समन्वयक शामिल हुए। इस दौरान सभी ने लोगों से अपील की कि वे स्वयं जागरूक बनें और अपने आसपास के लोगों को भी टीबी के लक्षण, जांच और उपचार के प्रति जागरूक करें।
सामूहिक सहभागिता से ही साकार होगा टीबी मुक्त भारत का सपना
कार्यक्रम के दौरान सभी अधिकारियों ने एक स्वर में कहा कि टीबी मुक्त भारत अभियान को सफल बनाने के लिए समाज के हर वर्ग की भागीदारी अनिवार्य है। आमजन, स्वास्थ्यकर्मी, जनप्रतिनिधि और विभिन्न संस्थाएं मिलकर ही इस लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं।जिले में चल रहा 100 दिवसीय यह अभियान न केवल स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत कर रहा है, बल्कि लोगों में जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना भी विकसित कर रहा है। सामूहिक प्रयास और सक्रिय सहभागिता के माध्यम से ही टीबी मुक्त भारत का सपना साकार हो सकेगा।