08/06/2026
एक अनुमान के मुताबिक़ दुनिया भर के कारख़ानों में लगभग 22-25 करोड़ टन यूरिया खाद तैयार होती है..जिसे तैयार करने के लिए कुदरत की फ़िज़ा से लगभग 9-करोड़ टन नाइट्रोजन खींची जाती है..
ह़ैरत की बात यह है कि ये नाइट्रोजन बिल्कुल फ्री ऑफ कॉस्ट होती है..उससे भी बड़ी ह़ैरत की बात यह है कि..जब एक बार बिजली चमकती है तो उसके चमकने से कई सौ किग्रा नाइट्रोजन प्रमाणु के रूप में बदल कर ऑक्सीज़न के साथ और फिर बादलों में मौजूद पानी के साथ क्रिया करके इंसानी ज़िन्दगी के साथ इस्तेमाल होने वाली नाइट्रोजन यानि नाइट्रेट्स बनाती है..😲
एक और अध्यन के मुत़ाबिक़ दुनिया भर में पूरे एक साल के अंदर बादलों की चमक से बनने वाली नाइट्रेट्स की मिक़्दार लगभग 62-करोड़ टन है..सुबह़ान-अल्लाह
अगर हम इसे बिल्कुल ही आसान शब्दों में व्याख्या करें तो बादलों की मात्र एक क्रिया बिजली चमकने से दुनिया भर की तमाम यूरिया कंपनियों से अधिक नाइट्रोजन खाद दुनिया को बिल्कुल फ्री में उपलब्ध होती है...
उफ्फफफ !! अल्लाह/ईश्वर की ने'अमतें हमें कहां कहां और किन किन चीज़ों से मिलती है हम उसका शुमार भी करना चाहें तो इसके लिए पूरी ज़िन्दगी वक़्फ़ करके भी नहीं कर सकते..यह बादलों की चमक जिसके ने'अमत होने के बारे में हम कभी कल्पना भी नहीं कर सकते थे..वह भी ह़िक्मत और तदबीर से ख़ाली नहीं...अल्लाहु-अकबर
ऐ मेरे परवरदिगार ! तू ने यह सब कुछ बे-ह़िक्मत और बिला-तदबीर नहीं बनाया , तू पाक है(हर नुक़्स और मजबूरियों से) बस हमें दोजख़ के अज़ाब से बचा ले..(क़ुरआन)