26/05/2026
महाराजा अग्रसेन अस्पताल हादसे के पीड़ितों को एक करोड़ मुआवजा नहीं मिला तो होगा बड़ा आंदोलन : रमेश दलाल
-- सीवर हादसे पर महाराजा अग्रसेन अस्पताल प्रबंधन, पुलिस व प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप, 31 मई को मांडोठी के दलाल भवन में न्याय पंचायत बुलाने का ऐलान
बहादुरगढ़। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता एवं राष्ट्रीय किसान नेता रमेश दलाल ने नूना माजरा स्थित महाराजा अग्रसेन हॉस्पिटल में हुए सीवर सफाई हादसे को लेकर अस्पताल प्रबंधन, पुलिस और प्रशासन पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि हादसे के बाद पूरे मामले को दबाने, तथ्यों को छिपाने और पीड़ित परिवारों को न्याय से वंचित करने का प्रयास किया गया। रमेश दलाल ने सरकार से मांग की कि अस्पताल प्रबंधन सहित डीसी, पुलिस कमिश्नर, डीसीपी, एसडीएम पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 59,61 आदि धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की जाए क्योंकि उन्होंने सबूत नष्ट किए हैँ। अस्पताल प्रबंधन पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 104 लगनी चाहिए थी बल्कि एफआईआर केवल 106 भारतीय न्याय संहिता की लगाई गई जो कि गलत हैँ। एसडीएम को जो कार्रवाई करनी चाहिए थी वह नही की। भारतीय न्याय संहिता की धारा 55, 59,61, 198,240, 241 और 104 लगनी चाहिए।
दिल्ली-रोहतक रोड स्थित अपने कार्यालय में भारी संख्या में सिलोठी, डाबोदा, मांडोठी व अन्य गांवों से पहुंचे ग्रामीणों और पीड़ित परिवारों की मौजूदगी में आयोजित पत्रकार वार्ता में रमेश दलाल ने कहा कि मृतक सुनील के परिवार और गंभीर रूप से उपचाराधीन कर्मचारी के परिवार को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए। साथ ही दोनों परिवारों को आजीवन वेतन के बराबर पेंशन, मुफ्त इलाज और बच्चों को एमबीबीएस तक नि:शुल्क शिक्षा देने की व्यवस्था की जाए। रमेश दलाल ने कहा कि महाराजा अग्रसेन अस्पताल प्रबंधन ने एक साजिश के तहत बिना किसी सुरक्षा उपकरण के कर्मचारियों को सीवर में उतारा, जबकि वे नियमित सफाई कर्मचारी भी नहीं थे वह अन्य पद पर कार्यरत थे।
राष्ट्रीय किसान नेता रमेश दलाल ने कहा कि हादसे के दिन असली पीड़ितों की जगह अन्य कर्मचारियों को उपचाराधीन दिखाकर पूरे मामले को दबाने का प्रयास किया गया। रमेश दलाल ने कहा कि महाराजा अग्रसेन को न्याय और सेवा के प्रतीक के रूप में जाना जाता है, लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने हादसे के बाद जिस तरह का रवैया अपनाया, उससे महाराजा अग्रसेन की विचारधारा को बदनाम करने का काम हुआ है। राष्ट्रीय किसान नेता रमेश दलाल ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने पीड़ित परिवारों को न्याय और 1-1 करोड़ रुपए का मुआवजा नहीं दिया तो 31 मई को मांडोठी स्थित दलाल भवन में बड़ी ' न्याय पंचायत ' आयोजित की जाएगी। इसके लिए आसपास के गांवों में निमंत्रण भेजे जाएंगे और आंदोलन की रूपरेखा तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो बड़ा जनआंदोलन भी किया जाएगा और इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी। पोस्टमार्टम वाले दिन हुए समझौते पर सवाल उठाते हुए रमेश दलाल ने कहा कि उस दिन पीड़ित परिवार को न तो मुआवजे का चेक मिला, न पोस्टमार्टम के लिए बोर्ड गठित किया गया और न ही महाराजा अग्रसेन अस्पताल प्रधान प्रबंधन व जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई कार्रवाई हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन केवल जल्दबाजी में अंतिम संस्कार करवाकर मामले को शांत करना चाहता था। रमेश दलाल ने कहा कि उन्होंने उसी दिन पंचायत में सार्वजनिक रूप से इस समझौते का विरोध किया था क्योंकि यह पीड़ित परिवारों के हित में नहीं था। इस अवसर पर मौजूद कई ग्राम सरपंचों व ग्रामीणों ने दोनों हाथ उठाकर न्याय पंचायत में ज्यादा से ज्यादा संख्या में पहुंचकर रमेश दलाल की अगुवाई में पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की हुंकार भरी। इस अवसर पर सरपंच मोनू मातन, सरपंच मंजीत मलिक डाबोदा खुर्द, सरपंच मोनू देशवाल दुलहेड़ा, सरपंच भगत दलाल टांडा हेड़ी, छारा प्रधान दीपक दलाल, सरपंच प्रवीण मोरवाल खरमान, सरपंच राकेश राठी सराय औरंगाबाद, सरपंच प्रमोद नया गांव, जिला पार्षद राजीव मास्टर छारा, सरपंच पति संदीप मेहंदीपुर डाबोदा, पूर्व सरपंच हरकेश सिलोठी, डाबोदा कला जयवीरेंद्र दलाल, रघुवीर मांडोठी, जगदीश उर्फ़ जंगली, राज सिंह दलाल आसौदा आदि मौजूद रहे।