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Allah hidayad de Ameen.🇸🇦🇸🇦
03/05/2020

Allah hidayad de Ameen.🇸🇦🇸🇦

वहाबियों का मरकज़      :   (नज्द)तब्लीगी का मरकज़       :  (देवबन्द)अहले हदीस का मरकज़  :  (मुम्बई)शिया का मरकज़           :...
03/05/2020

वहाबियों का मरकज़ : (नज्द)
तब्लीगी का मरकज़ : (देवबन्द)
अहले हदीस का मरकज़ : (मुम्बई)
शिया का मरकज़ : (ईरान)
बोहोरो का मरकज़ : (गुजरात)
कादयानी का मरकज़ : (पाकिस्तान)
सुन्नियों का मरकज़ : (बरेली शरीफ)

बरेली शरीफ ने सबके खिलाफ फतवा निकाला
क्या आज तक किसी मरकज़ से बरेली शरीफ के खिलाफ फतवा निकाला

दरगाह जाना शिर्क वहाबी ने बोला
(जवाब बरेली शरीफ ने दिया)

फातिहा लगाना बिदअत अहले हदीस ने बोला
(जवाब बरेली शरीफ ने दिया)

ईद मीलादुन्नबी का जुलूस गुनाह देवबन्द ने बोला
(जवाब बरेली शरीफ ने दिया

हदीस से इनकार शिया ने किया
(जवाब बरेली शरीफ ने दिया)

नये नबी पर ईमान कादयानी लाए
(जवाब बरेली शरीफ ने दिया

मौला अली की शान में गुस्ताखी की गई
(बरेली शरीफ ने दिया)

एक तन्हा मेरे आला हज़रत ने सबको जवाब दिया और कुछ लोग अब भी ये पूछते हैं कि मस्लके अहमद रज़ा जिन्दाबाद का हुजूर मुफ्तीए आज़म जिन्दाबाद और बस्ती बस्ती करिया करिया ताजुशशरीआ ताजुशशरीआ का नारा क्यों लगता है।

मैं नही डरता किसी फतवे ब़ाज से
क्योंकि मेरा रिशता है शरीयत के ताज़ से
गुलाम-ए-आला हज़रत
गुलाम-ए-मुफ्तीए आज़म
#गुलाम_ए_ताजुश्शरीअह❤❤🇸🇦🇸🇦❤❤

25/04/2020
11/04/2020

*◆मुर्दो को बुजुर्गों के पास दफ्न करो..*
••
📝 मेरे आका आ'ला हज़रत, इमामे अहले सुन्नत, मौलाना शाह इमाम अहमद रज़ा खान रहमतुल्लाह अलैह का फ़रमान है अपने *मुर्दो को बुजुर्गों के पास दफ्न करो कि इन की ब-र-कत के सबब उन पर अज़ाब नहीं किया जाता।* (या'नी) येह ऐसी कौम है जिस का हम नशीन (या'नी सोहबत में रहने वाला) भी महरूम नहीं रहता ।
*■लिहाज़ा हदीस में फरमाया गया हैं : कि अपने मुर्दो को नेकों के दरमियान दफ़न करो !*
*★मरू तयबा में ऐ लोगो ! बक़ीए पाक ले जाना सहाबा और अहले बैत के साए में दफ्नाना★*

*📚कब वालों की 25 हिकायात सफ़ह नं ,9)*
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एक दफा हज़रत बाबा फरीद गंज शकर رحمتہ اللہ علیہ एक पहाड़ पर पहुंचे वहां गैब से आवाज़ आई कि:            "अय मुहम्मद मसऊद म...
11/04/2020

एक दफा हज़रत बाबा फरीद गंज शकर رحمتہ اللہ علیہ एक पहाड़ पर पहुंचे वहां गैब से आवाज़ आई कि:
"अय मुहम्मद मसऊद मुहिब बनना चाहता है या महबूब?"
हज़रत बाबा फरीदुद्दीन गंजे शकर رحمتہ اللہ علیہ ने अर्ज़ किया:
"या इलाही ! मुहिब का मर्तबा ज़्यादा है या महबूब का?"
हुक्म हुआ:
"मुहिब का..
महबूब जब मुहिब में फना पाता है तो बाक़ी महबूब ही रह जाता है ये दर्जा ए कमाल है इस वास्ते मैं तेरी तौफीक़ से उसी दर्जे में सिराते मुस्तक़ीम पर क़दम रखना चाहता हूं-
हुक्म हुआ कि:
"इस रास्ते में इम्तिहानात शदीद होते हैं चुनांचा इसी बारे में आयत सिपारा दौम में आ चुकी है:
ﻭَﻟَﻨَﺒْﻠُﻮَﻧَّﻜُﻢْ ﺑِﺸَﻲْﺀٍ ﻣِّﻦَ ﺍﻟْﺨَﻮﻑْ ﻭَﺍﻟْﺠُﻮﻉِ ﻭَﻧَﻘْﺺٍ ﻣِّﻦَ الا‌َﻣَﻮَﺍﻝِ وَالاَ‌ﻧﻔُﺲِ وَ الَّمَرٰتِ وَ بَشِّرِ الصّٰبِرِینَ

پ 2 سورۃ البقرہ آیت 155
"और ज़रूर हम तुम्हें आज़माएंगे कुछ डर और भूख से और कुछ मालों और जानों और फलों की कमी से और खुशखबरी सुना इन सब्र वालों को-"

हज़रत बाबा फरीदुद्दीन गंजे शकर رحمتہ اللہ علیہ ने अर्ज़ की कि: " بَشِّرِ الصّابِرین الزَّاھِدِین"
"की खुशखबरी भी तू ही अता करेगा क्यूंकि तेरी तौफीक़ से सिराते मुस्तक़ीम में क़दम रख दिया है"
उस वक़्त उसी पत्थर को जिस पर आप رحمتہ اللہ علیہ खड़े थे हुक्म हुआ कि:
" इसका चमड़ा गोश्त से उतार लो-"
चुनांचा उस पत्थर की सिल ने आगे पीछे से चिमट कर तमाम गोश्त से पोस्त उतार लिया फिर हातिफे गैबी से आवाज़ आई:
"अय मुहम्मद मसऊद तुम को कहा है कि इस रास्ते में आज़माइशें बहुत हैं अब भी हट जाओ-"
अर्ज़ किया:
"अब तो तेरी तौफीक़ से अंधों की मिस्ल थोड़ा सा सुराख होने पर लाठी के वसीले के बगैर रवां हो गया हूं और आगे ही चलूंगा-"
फिर हुक्म हुआ कि:
"इसके गोश्त में कंकर मारो-"
चुनांचा आप رحمتہ اللہ علیہ इस पर भी साबिरो शाकिर रहे फिर जानवरों को हुक्म हुआ कि:
"इसके बदन का गोश्त नोच लो-"
चुनांचा उन्होंने सब गोश्त नोच लिया इस पर भी اِنَّا لِلّٰهِ وَ اِنَّا اِلَیهِ رٰ جِعُونَ के हुक्म से मुत्मइन रहे और उस पर कमाल रहमत और इनायत से फर्दियत के मक़ाम और नौ दना नाम जो मशहूर हैं अता होने की खुशखबरी हासिल हुई और बतौरे इज्ज़ के इस शअर को बाबा जी फरीदुद्दीन गंजे शकर رحمتہ اللہ علیہ ने अपनी आप बीती में बयान किया है🌹
فریدا تن سُکّا پنجر تِھیا تلیاں کُھونڈیں کاگ
اجے سُ ربّ نہ بَو ہڑیو دیکھ بندّے کے بھاگ

उर्दू तर्जुमा:
"अय फरीद ! जिस्म सूख कर हड्डियों का ढांचा बन गया..हाथ पांव के तलवों से कव्वा मास नोच रहा है इतनी जद्दो जहद और दुनियांवी लज़्ज़तों से दूरी के बावजूद भी अगर रब राज़ी ना हो तो फिर बंदे की क़िस्मत ही क़ुसूरवार ठहरेगी..!!"
شرح دیوان فرید گنج شکر رحمتہ اللّہ علیہ المعروف فیضان الفرید رحمتہ اللّہ علیہ💓
صفحہ 548 549

11/04/2020

Plz help all people.🙏🙏

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