17/01/2025
अम्बेडकर के वे तथ्य जो हमसे छुपाये गए हैं
1. भीम ने प्रिंसिपल को यह सूचित किया था कि गणित विषय में मैं कमजोर होने के कारण इस नवंबर 1908 की परीक्षा में नहीं बैठूँगा। इस कारण उसका एक साल व्यर्थ गया। (कालेज रिकार्ड)
2. सन् 1909 में प्रीवियस में 600अंकों में 223 अंक प्राप्त हुए,मतलब 37.16% सन् 1910 की इंटरमीडियेट परीक्षा में भीमराव की विषयानुसार अंक-सूची निम्न प्रकार से हैः—
अंग्रेजी फारसी गणित तर्कशास्त्र
कुलअंक 200 100 200 100
उत्तीर्ण होने के
लिए आवश्यक अंक 60 30 60 30
प्राप्त अंक 69 52 60 42
(एल्फिंस्टन कॉलेज रिकार्ड फाइल्स Inter 1909, Elphinstone College,BombayPersian and English)
कुल=223/600 =37.16%
3. B.A, 1913, Elphinstone College, Bombay, University of Bombay, Economics & Political Science
scored 449 marks out of 1000.means 44.90%.
इसी तरह अम्बेडकर को मेधावी कहने वाले छुपाते हैं कि 1913 में PG करने गए तो 1917 में Ph.D. कर लेते, किन्तु 1927 में Ph.D. की डिग्री ले पाए -- तीसरी थीसिस पर !!
अंग्रेजों का क़ानून भारत पर थोपने वाली यही "मेधा" थी...मूर्खों को मिर्ची लगेगी तो लगे, सत्य तो सत्य ही रहेगा ।
अम्बेडकर अमरीका की कोलम्बिया विश्वविद्यालय 1913 में गए जहाँ उन्होंने जून 1915 में MA की अर्थशास्त्र में डिग्री ली... उन्होंने अपनी "थीसिस" प्रस्तुत की " Ancient Indian Commerce" पर | विकिपीडिया ही बतलाता है कि उनकी दूसरी "थीसिस" 1916 ईस्वी में "National Dividend of India-A Historic and Analytical Study" पर थीसिस लिखी जिसपर केवल MA की मान्यता मिली और PhD की डिग्री 1927 में मिली !! क्या अर्थ है ?
अमरीका में PhD की डिग्री नहीं मिली तो वे 1916 में ही इंग्लैंड चले गए और बार कौंसिल में घुसने का असफल प्रयास किया एवं महाराज गायकवाड द्वारा दुबारा चार वर्षों की छात्रवृति लेने के बाद "doctoral thesis" ('The problem of the rupee: Its origin and its solution') पर लन्दन में कार्य आरम्भ किया जो उन्होंने 1921 में संपन्न किया और इस "डॉक्टरल थीसिस" पर पुनः केवल MA की डिग्री ले सके !!
1923 में अम्बेडकर को "D.Sc." (Doctor of Science) की उपाधि दी गयी जो लन्दन विश्वविद्यालय ने 1860 में देना आरम्भ किया किन्तु तेरह दशकों के बाद बन्द कर दिया |
1923 तक अम्बेडकर महोदय न तो कहीं से Ph.D. कर पाए थे और न ही अंतर्राष्ट्रीय शोध-पत्रिकाओं में उनके शोध पत्र ही प्रकाशित हुए थे....अतः स्पष्ट है कि उनको D.Sc. की डिग्री किसी शोध कार्य के लिए नहीं बल्कि उनके "दलित" सम्बन्धी हिन्दू-विरोधी "महान" विचारों के कारण मिली जो अंग्रेजों को राजनैतिक कारणों से पसन्द आये ! copy and paste
अम्बेडकर तो अंग्रेजी सरकार और अंग्रेजों की सेवा कर रहा था वह कब कहां और किससे लड़ा, सस्ती लोकप्रियता के लिए जाति को लोकप्रियता का सस्ता साधन बनाया, अंग्रेजी सरकार और अंग्रेजों के अत्याचारों के विरोध में बाबा ने कभी कुछ नहीं लिखा इससे यह पता चलता है कि बाबा अंग्रेजी सरकार के स्वामिभक्त थे, पत्रकार अरुण शौरी की किताब Worshipping false Gods से इस संबंध में पूरी जानकारी ली जा सकती है।
Before 15th august 1947 ie before our indian independence He was serving the British government and the British,and also he served as a labour minister, when, where and with whom did he fight, for cheap popularity he used caste as a cheap means of popularity, this shows that Baba never wrote anything against the atrocities of the British government and the British. That Baba was a devotee of the British government, complete information in this regard can be obtained from journalist Arun Shourie's book Worshiping False Gods.
आपलोग जितना जय भीम जय भीम करते हो उतना अगर
जय किताब
जय विज्ञान
जय कंप्यूटर
जय संविधान
करता तो आज 70 सालों से आरक्षण लेने की जरूरत नहीं पड़ती। आपलोग तो पढ़ेंगे नहीं।बस केवल जय भीम