24/05/2026
🚨 पंचायत चुनाव में इस बार सोच-समझकर वोट दें!
गाँव का भविष्य सिर्फ नारों से नहीं, सही नेतृत्व से बदलता है।
अब समय है विकास, शिक्षा, रोजगार और ईमानदार सोच को चुनने का।
🛣️ अच्छी सड़क
🏫 बेहतर स्कूल
💧 स्वच्छ पानी
💡 हर घर सुविधा
👨🌾 किसानों और युवाओं का सम्मान
❌ लालच, झूठे वादे और जातिवाद से बचें
✅ अपने गाँव के उज्ज्वल भविष्य के लिए सही उम्मीदवार चुनें
🗳️ आपका वोट — आपके गाँव की ताकत!
इस गीत को वीर रस, शक्तिशाली आर्केस्ट्रा (Powerful Orchestra), और तीव्र ढोल/नगाड़ों की थाप के साथ कंपोज़ किया जा सकता है, जो अंदर की कमज़ोरी को मिटाकर उठ खड़े होने का हौसला दे।
गीत: उत्तिष्ठ परन्तप (उठो, हे शत्रुघाती!)
(धमाकेदार ढोल और शंखनाद के साथ संगीत की शुरुआत...)
[कोरस - भारी और गंभीर आवाज़ में]
क्लैब्यं मा स्म गमः पार्थ नैतत्त्वय्युपपद्यते।
क्षुद्रं हृदयदौर्बल्यं त्यक्त्वोत्तिष्ठ परन्तप॥
[अंतरा 1]
मोह के बंधन तोड़ दे अर्जुन, छोड़ ये अश्रु धार,
तेरे कंधों पर टिका हुआ है, इस सृष्टि का भार।
नपुंसकता को मत प्राप्त हो, ये तुझको शोभा देता नहीं,
जो रणभूमि से मुख मोड़ ले, इतिहास उसे चुनता नहीं।
[फास्ट बीट्स और कोरस]
त्यक्त्वोत्तिष्ठ परन्तप!
त्यक्त्वोत्तिष्ठ परन्तप!
हृदय की दुर्बलता को तजकर, उठो हे परन्तप!
[अंतरा 2]
यह कायरता का भाव कैसा? यह कैसी व्याकुलता है?
शत्रु खड़े हैं सम्मुख तेरे, फिर कैसी ये दुर्बलता है?
गांडीव उठा, प्रत्यंचा खींच, और कर अधर्म का संहार,
तू तो रक्षक है धर्म का, मत कर खुद पर अत्याचार।
[बिल्ड-अप - म्यूज़िक तेज़ होता है]
काँपे धरती, थर्राए अम्बर, जब गूँजेगा तेरा शंखनाद,
मिटा दे मन के संशयों को, और रख केशव की बात याद!
[कोरस - पूरे जोश के साथ]
क्लैब्यं मा स्म गमः पार्थ नैतत्त्वय्युपपद्यते।
क्षुद्रं हृदयदौर्बल्यं त्यक्त्वोत्तिष्ठ परन्तप॥
(तीव्र ड्रम्स, नगाड़े और इलेक्ट्रिक गिटार के जुगलबंदी के साथ गीत का अंत होता है...)
श्लोक का सरल भावार्थ:
"हे अर्जुन! नपुंसकता (कायरता) को मत प्राप्त हो, यह तुम्हारे जैसे वीर के योग्य नहीं है। हे शत्रुओं को तपाने वाले! हृदय की इस तुच्छ दुर्बलता को त्यागकर युद्ध के लिए खड़े हो जाओ।"