16/07/2026
🏏 दोस्तों, ग्रामीण क्रिकेट से जुड़ा एक विवाद सामने आया है।
पैसे लेकर खेलने वाला प्लेयर पर भरोसा किया जा सकता है वह कभी भी बिक सकता है कियोकी बाद में सोहना सरदारगढिया गुड़िया टिम में खेल रहे थे नोहर टुनामेट की सबसे अच्छी टीम थी धांसू सोहना सरदारगढिया की बजय से टीम टुनामेट से बाहर हो गई
टीम धांसू (हिसार) का आरोप है कि खिलाड़ी सोहना सरदारगढ़िया ने नोहर क्रिकेट टूर्नामेंट में खेलने के लिए ₹2000 एडवांस लिए थे और आने की हामी भरी थी। लेकिन टीम का कहना है कि मैच वाले दिन वह मैदान तक नहीं पहुँचे और बाद में बताया कि उन्हें दूसरी टीम से ऑफर मिला है, इसलिए वह उनके लिए खेलेंगे।
अगर टीम के ये आरोप सही हैं, तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। किसी भी टीम को अंतिम समय पर इस तरह छोड़ देना खेल भावना और खिलाड़ियों के बीच भरोसे के खिलाफ है। यदि समय रहते टीम को बता दिया जाता, तो वे किसी दूसरे खिलाड़ी की व्यवस्था कर सकते थे।
वहीं दूसरी ओर, टीम के अनुसार सलीम खान (खेदड़) बिना कोई राशि लिए सिर्फ भाईचारे के नाते टीम के साथ खेलने पहुँचे। ऐसे उदाहरण खेल में विश्वास और सम्मान को मजबूत करते हैं।
फिलहाल यह दोनों पक्षों का मामला है, इसलिए सभी की बात सुनना भी जरूरी है। लेकिन यदि लगाए गए आरोप सही साबित होते हैं, तो ऐसे व्यवहार से ग्रामीण क्रिकेट की छवि को नुकसान पहुँच सकता है।
आपकी क्या राय है?
क्या टीम धांसू के आरोपों के अनुसार खिलाड़ी का यह व्यवहार सही है या गलत? और यदि आरोप सही साबित हों, तो ऐसे मामलों में क्या कार्रवाई या नियम होने चाहिए? अपनी राय सम्मानजनक भाषा में जरूर साझा करें।
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