Mehta vastu Numerology

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03/04/2026
64 योगिनियों के नाम और उनके कार्य  .......64 योगिनियां तांत्रिक परंपरा में शक्ति की विभिन्न रूपों की देवी मानी जाती हैं ...
26/11/2025

64 योगिनियों के नाम और उनके कार्य .......

64 योगिनियां तांत्रिक परंपरा में शक्ति की विभिन्न रूपों की देवी मानी जाती हैं ...

योगिनियां विशेष रूप से भारत के हीरापुर, रानीपुर-झरियाल, और खजुराहो जैसे मंदिरों में पूजी जाती हैं ...

योगिनियां देवी शक्ति के विभिन्न पहलुओं का प्रतिनिधित्व करती हैं और इनमें अलौकिक शक्तियां होती हैं, जैसे प्रकृति पर नियंत्रण, परिवर्तन, और रक्षा ...

१-१६ (प्रथम समूह)

1. माया योगिनी – माया और भ्रम की देवी

2. तारिणी योगिनी – सुरक्षा और मार्गदर्शन करने वाली

3. वायु योगिनी – वायु और हवा पर नियंत्रण

4. मार्जरी योगिनी – फुर्ती और चपलता
5. चार्चिका योगिनी – योद्धा देवी

6. कौमारी योगिनी – ज्ञान और युवा शक्ति

7. भैरवी योगिनी – उग्र और भयावह शक्ति

8. छिन्नमस्ता योगिनी – आत्म-बलिदान और कुंडलिनी शक्ति

9. ज्वाला योगिनी – अग्नि तत्व की देवी

10. विकटा योगिनी – विकराल रूप वाली देवी

11. शंखरी योगिनी – शंख से संबंधित देवी

12. कपालिनी योगिनी – खोपड़ी धारण करने वाली संन्यासिनी

13. धूमावती योगिनी – वैराग्य और तपस्या की देवी

14. बगलामुखी योगिनी – शत्रुओं का नाश करने वाली

15. वाराही योगिनी – वराह स्वरूप, युद्ध की देवी

16. सिद्धिदात्री योगिनी – सिद्धियां प्रदान करने वाली

१७-३२ (द्वितीय समूह)

17. रक्ता योगिनी – युद्ध ऊर्जा की देवी

18. गांधारी योगिनी – सुगंध और इत्र की देवी

19. महोदरी योगिनी – सृजन की देवी

20. कामिनी योगिनी – आकर्षण और इच्छा की देवी

21. चामुंडा योगिनी – चंड-मुंड राक्षसों की संहारक

22. लंबिनी योगिनी – लंबी गर्दन वाली देवी

23. विकृतानना योगिनी – विकराल मुख वाली देवी

24. कोकिला योगिनी – कोयल जैसी मधुर वाणी

25. नारायणी योगिनी – विष्णु की शक्ति

26. मेघेश्वरी योगिनी – बादलों और वर्षा की देवी

27. भोगेश्वरी योगिनी – भोग और समृद्धि की देवी

28. संकटा योगिनी – संकटों को दूर करने वाली

29. कराली योगिनी – प्रलयंकारी देवी

30. चंडिका योगिनी – उग्र शक्ति की देवी

31. इंद्राणी योगिनी – इंद्र की शक्ति

32. शूलिनी योगिनी – त्रिशूल धारण करने वाली देवी

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३३-४८ (तृतीय समूह)

33. गौरी योगिनी – पवित्रता और कोमलता की देवी

34. भवानी योगिनी – मातृ शक्ति का स्वरूप

35. ब्रह्माणी योगिनी – सृजन शक्ति की देवी

36. रेवती योगिनी – काल चक्र की देवी

37. कौशिकी योगिनी – दिव्य योद्धा देवी

38. कात्यायनी योगिनी – शक्ति का उग्र रूप

39. रुद्राणी योगिनी – शिव की शक्ति

40. काली योगिनी – काल और परिवर्तन की देवी

41. भेरुंडा योगिनी – दो सिरों वाली पक्षी स्वरूप देवी

42. शत्रु मर्दिनी योगिनी – शत्रुओं का नाश करने वाली

43. प्रचंडा योगिनी – अत्यंत उग्र रूप

44. शंखिनी योगिनी – शंख से संबंधित देवी

45. शतघ्नी योगिनी – अनेक शस्त्रों से युक्त देवी

46. उग्रचंडी योगिनी – भयंकर योद्धा देवी

47. कपिला योगिनी – स्वर्ण आभा वाली देवी

48. कामेश्वरी योगिनी – प्रेम और आकर्षण की देवी

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४९-६४ (चतुर्थ समूह)

49. शीतला योगिनी – रोग और स्वास्थ्य की देवी

50. मनोहरमा योगिनी – सुंदरता और आकर्षण की देवी

51. अन्नपूर्णा योगिनी – अन्न और पोषण की देवी

52. त्रिपुरा योगिनी – तीन लोकों की शासक देवी

53. ज्येष्ठा योगिनी – दुर्भाग्य और संघर्ष की देवी

54. लक्ष्मी योगिनी – समृद्धि और धन की देवी

55. सरस्वती योगिनी – ज्ञान और संगीत की देवी

56. डंडा योगिनी – न्याय और दंड की देवी

57. पिंगला योगिनी – सूर्य ऊर्जा की देवी

58. विशालाक्षी योगिनी – व्यापक दृष्टि वाली देवी

59. शर्वाणी योगिनी – सर्वोच्च मातृशक्ति

60. त्रिशूला योगिनी – त्रिशूल धारण करने वाली देवी

61. भूतेश्वरी योगिनी – भूत-प्रेतों की स्वामिनी

62. नित्यक्लिन्ना योगिनी – प्रेम और भक्ति की देवी

63. वज्रेश्वरी योगिनी – अटूट शक्ति की देवी

64. ध्यान योगिनी – ध्यान और आत्मसाक्षात्कार की देवी

#64 योगिनियों की पूजा और महत्व

- तांत्रिक साधना – योगिनियों की पूजा तांत्रिक अनुष्ठानों में की जाती है ..

- शक्ति साधना – हर योगिनी देवी शक्ति का एक रूप मानी जाती हैं ..

- रक्षा और उपचार – कुछ योगिनियां रोग, विपत्तियों और शत्रुओं से बचाने वाली होती हैं ...

आज 28-09-2025 दिन रविवार, षष्ठी नवरात्र, मां का स्वरूप कत्यायानी, रंग मेहरून। महर्षि कत के पुत्र ऋषि कात्य के घर पुत्री ...
28/09/2025

आज 28-09-2025 दिन रविवार, षष्ठी नवरात्र, मां का स्वरूप कत्यायानी, रंग मेहरून। महर्षि कत के पुत्र ऋषि कात्य के घर पुत्री के रूप में जन्म लेने के कारण इनका नाम कत्यायानी पड़ा। इनकी उपासना से साधक को बड़ी सफलता से अर्थ, धर्म, काम, मोक्ष - चारों फलों की प्राप्ति होती है। आज के दिन साधक जन अपने मन को आज्ञा चक्र में स्थित करते हैं।

18/06/2025

स्फटिक माला धारण करने से धन, संपत्ति, यश और बल और आकर्षक की प्राप्ति होती है।

ज्योतिष में स्फटिक को एक ऐसी जादुई माला के रूप में जाना जाता है, जिसे धारण करते ही व्यक्ति के आकर्षण में चमत्कारिक रूप से वृद्धि होती है और उस पर मां लक्ष्मी की कृपा बरसने लगती है।

सनातन परंपरा में ईश्वर की कृपा पाने और ग्रहों से संबंधित दोषों को दूर करने के लिए तमाम तरह के उपाय किये जाते हैं, इन्हीं उपायों में विभिन्न रत्नों की माला का जप या फिर उसे धारण करने के कई शुभ फल बताए गये हैं, स्फटिक की माला एक ऐसी ही जादुई माला है, जिसे धारण करते ही व्यक्ति का आकर्षण अपने आप बढ़ जाता है।

स्फटिक एक पारदर्शी रत्न होता है, जो माता लक्ष्मी को अत्यंत प्रिय है, ज्योतिष के अनुसार यदि आपके जीवन में सुख-शांति और एकाग्रता की कमी हो तो, आपको इस माला को धारण करना चाहिए या फिर इस माला से जप करना चाहिए, स्फटिक को कांच मणि, बिल्लौर, क्रिस्टल और क्वार्ट्ज भी कहा जाता है।

इसे हीरे का उपरत्न माना गया है।

शुक्र के अशुभ फल को दूर करने और उसके शुभ फल को प्राप्त करने के लिए इसे माला के साथ-साथ ब्रेसलेट, पेंडेंट आदि के रूप में धारण किया जा सकता है।

स्फटिक की माला पहनने के लाभ:--

+. यदि आपको अपने प्रयासों और मेहनत का फल नहीं मिल पा रहा है, तो यह चमत्कारिक स्‍फटिक की माला आपके प्रयासों को सफल बना सकती है।

+. नाम, पैसा और शोहरत कमाने के लिए यह माला बहुत लाभकारी और असरकारी उपाय है। मां लक्ष्‍मी की कृपा से इस माला के प्रभाव से व्‍यक्‍ति को खूब पैसा मिलता है।

+. मां लक्ष्‍मी से संबंधित होने के कारण इस माला को पहनने से धन की प्राप्‍ति होती है। आर्थिक तंगी, कर्ज से मुक्‍ति और धन की कमी दूर करने के लिए इस माला को पहना जाता है।

✓. शुक्रवार के दिन स्फटिक की माला से मां लक्ष्मी के मंत्र का जप करने पर शीघ्र ही उनकी कृपा प्राप्त होती है और आर्थिक स्थिति में चमत्कारिक रूप से तत्काल सुधार होता है।

+. घर की कलह को दूर करने और दांपत्य जीवन में मधुरता लाने के लिए भी आप स्फटिक की माला को धारण कर सकते हैं |

✓स्‍फटिक की माला मानसिक शांति, सिरदर्द, खून से संबंधित विकारों और बुखार को कम करने में भी यह माला मदद करती है।

स्फटिक माला पहनने के नियम:--

स्फटिक की माला के पहनने के कोई ख़ास नियम नहीं होते है, इस माला को आप मंत्र से अभिमंत्रित एवं सिद्ध करके डाल सकते है और इस माला से आप किसी भी देवी देवता के मंत्रो का जप कर सकते है।

स्फटिक माला किस दिन डाले ?

स्फटिक माला को शुक्रवार के दिन डाला जाता है। स्फटिक हीरे का उपरत्न है।

स्फटिक माला को सिद्ध या अभिमंत्रित कैसे करे ?

शुक्रवार के दिन सुबह स्नान करके आप पूजा स्थान पर बैठ जायें और माला को पूजा की थाली में रख लें। माला के ऊपर गंगाजल का छिड़काव करे और 2100 बार 'पंचवक्त्र: स्वयं रुद्र: कालाग्निर्नाम नामत:।।' मंत्र का जाप करे। मंत्र का उच्चारण सही तरीके से करे। नहीं तो माला अभिमंत्रित नहीं हो पायेगी।

स्फटिक की माला पहनने से कई फायदे हो सकते हैं, जिनमें भय और घबराहट से मुक्ति, मन की शांति, धन और समृद्धि में वृद्धि, और भूत-प्रेत बाधा से मुक्ति शामिल हैं. इसके अतिरिक्त, स्फटिक माला को धारण करने से शुक्र ग्रह के दोष दूर होते हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

स्फटिक की माला पहनने के कुछ प्रमुख फायदे इस प्रकार हैं:-- भय और घबराहट से मुक्ति मिलती है।
स्फटिक माला पहनने से मन शांत रहता है और किसी भी प्रकार का भय या घबराहट नहीं होती है।
सुख, शांति और धैर्य:-- यह माला मन में सुख, शांति और धैर्य बनाए रखने में मदद करती है‌।
धन और समृद्धि, ज्योतिष के अनुसार, स्फटिक माला धारण करने से धन, संपत्ति, यश और बल की प्राप्ति होती है।
भूत-प्रेत बाधा से मुक्ति:--स्फटिक माला को धारण करने से भूत-प्रेत आदि की बाधा से भी मुक्ति मिल सकती है।
शुक्र ग्रह के दोषों से मुक्ति:--स्फटिक माला शुक्र ग्रह के दोषों को दूर करने में भी सहायक मानी जाती है।
सकारात्मक ऊर्जा:--स्फटिक माला धारण करने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

मानसिक शांति:--यह माला मन को शांत करने और एकाग्रता बढ़ाने में मदद करती है।
स्वास्थ्य लाभ:--कुछ मान्यताओं के अनुसार, स्फटिक माला शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक होती है।

अन्य फायदे:--
स्फटिक माला को मंत्र जाप के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है, जिससे मंत्र शीघ्र सिद्ध हो जाता है।
यह माला नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने और सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करने में भी मदद करती है।
कुछ लोगों का मानना है कि स्फटिक माला पहनने से आर्थिक संकटों से भी राहत मिलती है।

ध्यान रखने योग्य बातें:--
स्फटिक माला को धारण करने से पहले, इसे गंगाजल से धोकर शुद्ध कर लेना चाहिए।
स्फटिक माला को हमेशा साफ और स्वच्छ स्थान पर रखना चाहिए।
यदि माला टूट जाती है, तो उसे नदी में प्रवाहित कर देना चाहिए या किसी पवित्र स्थान पर रख देना चाहिए।

धन प्राप्ति के लिए कौन सा रत्न धारण करना चाहिए?

धन प्राप्ति के लिए कुछ रत्न हैं जिन्हें धारण करने की सलाह दी जाती है, जैसे कि पुखराज, पन्ना, सिट्रीन, और ग्रीन जेड। ये रत्न आर्थिक समस्याओं से छुटकारा पाने, धन-संपत्ति में वृद्धि करने, और सफलता पाने में मदद कर सकते हैं।

पुखराज:--- पुखराज को गुरु ग्रह से संबंधित माना जाता है, जो समृद्धि और वृद्धि का कारक है। इसे धारण करने से आर्थिक समस्याओं से मुक्ति मिल सकती है, ज्ञान में वृद्धि हो सकती है, और करियर में सफलता के नए रास्ते खुल सकते हैं।

पन्ना:-- पन्ना रत्न बुध ग्रह से संबंधित है और इसे धारण करने से धन-धान्य की कमी नहीं होती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यह रत्न व्यापार में आ रही बाधाओं को दूर करने में भी मदद करता है।

सिट्रीन:-- सिट्रीन रत्न को "व्यापारी का पत्थर" भी कहा जाता है, और यह धन और सफलता को आकर्षित करने की अपनी क्षमता के लिए जाना जाता है।

ग्रीन जेड:-- ग्रीन जेड स्टोन को धन-संपन्नता के लिए बहुत लाभकारी माना जाता है। नए व्यापार की शुरुआत करने वालों के लिए यह रत्न विशेष रूप से शुभ माना जाता है।

अन्य रत्न:-- रत्न शास्त्र में, माक्षिक रत्न, टाइगर स्टोन, और ग्रीन एवेंच्यूरिन भी धन और समृद्धि के लिए लाभकारी माने जाते हैं।

ध्यान रखने योग्य बातें:--

किसी भी रत्न को धारण करने से पहले अपनी कुंडली का विश्लेषण करवाना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वह रत्न आपके लिए सही है या नहीं।

प्रत्येक वर्ष ज्येष्ठ माह के समस्त मंगलवारों को बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल कहा जाता है। धार्मिक दृश्टिकोण से ये सभी दिन बह...
11/06/2025

प्रत्येक वर्ष ज्येष्ठ माह के समस्त मंगलवारों को बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल कहा जाता है। धार्मिक दृश्टिकोण से ये सभी दिन बहुत पावन और महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

बड़ा या बुढ़वा मंगल से जुड़ी हुई महाभारत और रामायण काल की कुछ पौराणिक कथाएं हैं। ऐसी एक कथा के अनुसार, एक बार भीम को अपने बल पर बहुत घमंड हो गया था। तब वहां हनुमानजी ने एक बूढ़े वानर का रूप धरकर भीम का घमण्ड चूर-चूर कर दिया था। माना जाता है कि इस घटना के दिन बड़ा मंगल था। इस घटना से भीम को यह सीख मिली कि कभी भी अपने बल या अपनी शक्ति पर घंमड नहीं करना चाहिए। यह आवश्यक है कि बलशाली या शक्तिशाली व्यकि विनम्र भी हो।

एक अन्य कथा के अनुसार, उस दिन भी ज्येष्ठ मास का एक मंगलवार था जब हनुमानजी माता सीता की खोज में लंका पहुंचे थे। सीताजी को ढूंढने और उनसे मिलने में सफलता प्राप्त करने के बाद, हनुमान जी ने लंका-दहन कर रावण का घमंड चकनाचूर कर दिया था। एक अन्य कथा यह भी है कि ज्येष्ठ माह के मंगलवार को ही हनुमान जी की श्रीराम से पहली बार भेंट हुई थी।

बड़ा या बुढ़वा मंगल के दिन हनुमान जी की, विषेषकर उनके वृद्ध स्वरुप की, पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन पूर्ण श्रद्धा और भक्ति के साथ हनुमान चालीसा, बजरंग बाण और श्री रामचरितमानस के सुंदरकांड का पाठ करना अत्यन्त शुभ और लाभप्रद माना जाता है।

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