24/08/2026
#मध्यप्रदेश के भिंड से हैरान करने वाली तस्वीर सामने आई है। भारी बारिश के बाद उफान पर आई बैसाली नदी शिक्षकों के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। #भिंड के बाबेड़ी क्षेत्र के नदरौली और सुमेर सिंह का पुरा गांव स्थित सरकारी स्कूलों तक पहुंचने के लिए शिक्षकों को जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ रही है।
स्कूल तक पहुंचने के लिए कोई सुरक्षित सड़क या पुल नहीं होने के कारण करीब छह पुरुष शिक्षक टायर की ट्यूब के सहारे उफनती नदी पार करते हैं। सामने आए वीडियो में एक शिक्षक हवा से भरी ट्यूब पर बैठकर नदी पार करते नजर आ रहे हैं। तेज बहाव के बीच कभी ट्यूब ऊपर-नीचे होती है तो कभी शिक्षक चप्पू के सहारे आगे बढ़ते दिखाई देते हैं।
दरअसल, साल के बाकी महीनों में बैसाली नदी उथली और रेत से भरी रहती है, लेकिन मानसून में नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ आसपास के खेतों में भी पानी भर जाता है। ऐसे में गांवों तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो जाता है।
मुश्किल सिर्फ शिक्षकों तक सीमित नहीं है। दोनों सरकारी स्कूलों में करीब 100 छात्र पढ़ते हैं, लेकिन बारिश के दौरान कई बच्चे नदी के उफान के कारण स्कूल नहीं पहुंच पाते।
वहीं, शिक्षकों के सामने एक और दबाव है। जनवरी से ई-अटेंडेंस ऐप के जरिए उपस्थिति दर्ज करना जरूरी किया गया है। ऐसे में स्कूल पहुंचने में देरी होने पर वेतन कटने का डर भी बना रहता है। यही वजह है कि शिक्षक खराब मौसम और उफनती नदी के बावजूद बच्चों को पढ़ाने के लिए रोज स्कूल पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।
यह तस्वीर सरकारी स्कूलों तक पहुंच की व्यवस्था और ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सुविधाओं पर गंभीर सवाल खड़े करती है। सवाल यह है कि आखिर कब तक शिक्षक और बच्चे जान जोखिम में डालकर शिक्षा के अधिकार तक पहुंचने को मजबूर रहेंगे?