01/03/2026
JNU में UGC (उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्द्धन हेतु) विनियम, 2026 को लागू करवाने के लिए छात्रों-छात्राओं द्वारा किए गए शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बाद JNUSU के पदाधिकारियों (अध्यक्ष और उपाध्यक्ष सहित) को विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा निष्कासित करना, कुलपति शांति श्री धुलीपुड़ी पंडित का यह बयान कि “कुछ लोग हमेशा पीड़ित बने रहने या ‘विक्टिम कार्ड’ खेलने से आगे नहीं बढ़ सकते” और उसे दलितों व अश्वेत समुदायों के संदर्भ से जोड़ना, शांतिपूर्ण “समता मार्च” के दौरान छात्रों-छात्राओं की पिटाई तथा घायल छात्रों को हिरासत में लिया जाना।यह सब लोकतांत्रिक अधिकारों का खुला दमन है। असहमति को लाठी से नहीं दबाया जा सकता।
एक पुलिसकर्मी द्वारा भारतीय संविधान के निर्माता, आधुनिक भारत के शिल्पकार, शोषित-वंचितों और महिलाओं के मुक्तिदाता, विश्व रत्न परम पूज्य बाबा साहेब जी की तस्वीर फाड़ने का कृत्य न केवल दण्डनीय बल्कि उनके समस्त मानवतावादी अनुयायियों की भावनाओं को आहत करने वाला है।
और से हमारी निम्नलिखित मांगे हैं:
1. JNUSU पदाधिकारियों पर लगाए गए निष्कासन आदेश तत्काल प्रभाव से वापस लिए जाएँ।
2. शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई और लाठीचार्ज की न्यायिक जांच कराई जाए।
3. घायल व हिरासत में लिए गए छात्रों को बिना शर्त रिहा कर उनके साथ हुए दुर्व्यवहार पर जवाबदेही तय की जाए।
4. परम पूज्य बाबा साहेब की तस्वीर फाड़ने वाले पुलिसकर्मी की पहचान कर उसके विरुद्ध सख्त विभागीय एवं आपराधिक कार्रवाई की जाए।
5. कुलपति द्वारा दिए गए बयान पर सार्वजनिक स्पष्टीकरण व क्षमा-याचना की जाए।
लोकतंत्र में विश्वविद्यालय विचार-विमर्श और समानता के केंद्र होते हैं, दमन के नहीं। संविधान सम्मत अधिकारों की रक्षा करना ही प्रशासन का दायित्व है।