18/01/2026
Team MOH stands united for the protection and preservation of “गोचर”
विकास प्राधिकरण (BDA) द्वारा प्रस्तावित मास्टर विकास प्लान–2043 के अंतर्गत गोचर, पायतन एवं औरण भूमि को अधिग्रहण कर अन्य भू-उपयोग में परिवर्तित करने का प्रस्ताव अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण, जनविरोधी एवं चिंताजनक है। नथानिया, गंगाशहर, भीनासर, उदयरामसर सहित बीकानेर के आसपास के 188 गांवों की पवित्र एवं जीवनदायिनी भूमि को समाप्त करने की यह योजना ग्रामीण समाज, पशुपालकों और पर्यावरण के अस्तित्व पर सीधा प्रहार है।
गोचर और औरण भूमि केवल ज़मीन नहीं हैं, बल्कि हमारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पशुपालन व्यवस्था, जल संरक्षण और पर्यावरण संतुलन की रीढ़ हैं। राजस्थान जैसे मरुस्थलीय क्षेत्र में इन भूमियों का संरक्षण जीवन की आवश्यकता है, न कि कोई विकल्प। विकास के नाम पर इन्हें समाप्त करना हजारों परिवारों की आजीविका और पशुधन आधारित संस्कृति को संकट में डालना है।
ओरण भूमि हमारी आस्था, परंपरा और जैव विविधता की प्रतीक रही है। लोकदेवताओं से जुड़ी इन पवित्र स्थलों को नष्ट करना केवल भूमि का अधिग्रहण नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक पहचान पर आघात है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय एवं राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा भी गोचर और औरण भूमि के संरक्षण को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए हैं, ऐसे में इस प्रकार के प्रस्ताव न्यायिक भावना के भी विपरीत हैं।
मैं स्पष्ट रूप से मांग करता हूँ कि मास्टर प्लान–2043 से गोचर, पायतन एवं औरण भूमि को पूर्णतः बाहर रखा जाए और विकास की ऐसी नीतियाँ अपनाई जाएँ जो जनहित, पर्यावरण संरक्षण और संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप हों।
पवित्र ओरण और गोचर भूमि की रक्षा के इस जनआंदोलन में मैं मजबूती से जनता के साथ खड़ा हूँ। प्रदेश सरकार से भी आग्रह है कि इस विषय पर तत्काल हस्तक्षेप कर इन भूमियों को उनकी मूल अवस्था में सुरक्षित रखने का ठोस निर्णय ले।
विकास का अर्थ विनाश नहीं, बल्कि प्रकृति, संस्कृति और समाज के बीच संतुलन है। यदि आज हमने अपनी धरोहर को नहीं बचाया, तो आने वाली पीढ़ियाँ हमें कभी माफ़ नहीं करेंगी।