धीरेन्द्र पांचाल

धीरेन्द्र पांचाल कविता लेखन

तीन लोक क मालिक बइठल हउआ तू शमशानजइसन तोर अनुयायी बाबा ओइसन तू भगवान राम से डर लागेला हउवे मर्यादा क बात बाकि तोहसे बतिय...
15/02/2026

तीन लोक क मालिक
बइठल हउआ तू शमशान
जइसन तोर अनुयायी बाबा
ओइसन तू भगवान

राम से डर लागेला हउवे
मर्यादा क बात
बाकि तोहसे बतियावे में
मजा आवेला नाथ
तोहके देख के लगेला बाउ बइठल हवे दलान
जइसन तोर अनुयायी बाबा ओइसन तू भगवान

बड़े बड़े लखपतिन क होला
सुगर बीपी जाँच
जेकरे एक्को धुर ना हउवे
सुते मानस बाँच
घूम घूम रसगुल्ला चाभे तिलक हो या भतवान
जइसन तोर अनुयायी बाबा ओइसन तू भगवान

कइसन तू भगवान की खाली
सिलफर पे खुश होला
पान सोपारी ध्वजा नारियल
ना चाही का बोला
हम निर्धन के खातिर सबसे सस्ता तू भगवान
जइसन तोर अनुयायी बाबा ओइसन तू भगवान

~ धीरेन्द्र पांचाल
( Congratulations Mahadev 🚩)

03/01/2026

क्या लिखु उन पर, अल्फ़ाज़ नही है ।
मेरा चांद है बेदाग, कोई दाग नही है ।

उनके चेहरे ने मुझपे ​​यूँ जादू किया,
ना दिल बस में, ना बस में जिया,
हु नशे में, नशे का मलाल नहीं है ।
मेरा चांद है बेदाग कोई दाग नहीं है ।

आँखों से छूकर लबों तक वो आये,
बातो से अपने दीवाना बनाये,
किया है कमाल बवाल नही है ।
मेरा चांद है बेदाग कोई दाग नही है ।

~ आरती देवी

आपाधापी लोक लाज का काज तू निश्चित कर दे ।हे माधव अब इस जीवन का अंत सुनिश्चित कर दे ।रोजाना की उलझन मुझसे नहीं सही जाती क...
24/12/2025

आपाधापी लोक लाज का
काज तू निश्चित कर दे ।
हे माधव अब इस जीवन का
अंत सुनिश्चित कर दे ।

रोजाना की उलझन मुझसे नहीं सही जाती केशव ।
व्याकुल मन की पीड़ा मुझसे नहीं कही जाती केशव ।
एक बाण से मृत्यु का,
बसंत समर्पित कर दे ।
हे माधव अब इस जीवन का
अंत सुनिश्चित कर दे ।

जग जाहिर है सब हारे हैं अपनों के आघात से ।
मेरे तरकस खाली हो गए धीरे धीरे हाथ से ।
या तो मेरी चिखों को,
उल्लास से सिंचित कर दे ।
हे माधव अब इस जीवन का
अंत सुनिश्चित कर दे ।

प्रत्यंचा पर चढ़ी शिखा है मेरे कुल के मान की ।
भंग होती मर्यादा अब तो आभा धूमिल शान की ।
टूट रहे परिवारों के,
विश्वास तू निर्मित कर दे ।
हे माधव अब इस जीवन का
अंत सुनिश्चित कर दे ।

~ धीरेन्द्र पांचाल

संभव हो गर मिल जाएँ जब हम दोनों एक रोज ।कुछ लोगों की नाकामी पर करेंगे प्रीति भोज ।उनकी पीड़ा का मिलकर मिष्ठान बनाएंगे ।बा...
23/12/2025

संभव हो गर मिल जाएँ जब हम दोनों एक रोज ।
कुछ लोगों की नाकामी पर करेंगे प्रीति भोज ।

उनकी पीड़ा का मिलकर मिष्ठान बनाएंगे ।
बारी बारी उन सबको जलपान कराएँगे ।
जो ईर्ष्या रखते थे उनको हम लायेंगे खोज ।
कुछ लोगों की नाकामी पर करेंगे प्रीति भोज ।

अपने परिणय से उनको अवगत करवाएंगे ।
गर लज्जित हो जाएँ वो भूमिगत हो जायेंगे ।
मेरी इस लक्ष्मी को जो कहते थे घर का बोझ ।
कुछ लोगों की नाकामी पर करेंगे प्रीति भोज ।

~ धीरेन्द्र पांचाल

( हनुमान - रावण संवाद )जोर अंजोर देखावे में बा ई त शोर अन्हारे क हउवे जनाला आने ठेगाने से धाई धधाई के माई से का हमरे रण ...
13/12/2025

( हनुमान - रावण संवाद )

जोर अंजोर देखावे में बा
ई त शोर अन्हारे क हउवे जनाला
आने ठेगाने से धाई धधाई के
माई से का हमरे रण खाला
जा लखनु से तू जोर धरा
झूठही में तू का हमसे गरमाला
बा भयवा लगवा जब ले
तब ले भुजदण्ड लगी नाही ताला

~ धीरेन्द्र पांचाल

चूँटी हाथी एक्के भइया ।नारद बाबा गिनें रूपईया ।फोटो खीचें दुनों जून ।सांसद गावें इनकर गुन ।एक्के साल में दू दू घर ।गजब क...
05/12/2025

चूँटी हाथी एक्के भइया ।
नारद बाबा गिनें रूपईया ।

फोटो खीचें दुनों जून ।
सांसद गावें इनकर गुन ।

एक्के साल में दू दू घर ।
गजब क हउवें जादूगर ।

इनकर माइक इनकर माला ।
कोतवाली में पाँव पुजाला ।

अस दामाद क खातिरदारी ।
थाना हव इनकर ससुरारी ।

कानाफुसी रोज करैं ।
तहसीले में भोज करैं ।

येनहि क कुल गुणा भाग ।
बाँट करइला खालैं साग ।

सूखा बाढ़ सुनामी में ।
मारैं मछरी पानी में ।

सांसद अउर बिधायक भी ।
हर दल क दलनायक भी ।

भागल चाहें इनसे दूर ।
एतना हउवें ई मशहूर ।

नाली रोड खड़ंजा क ।
करें समीक्षा दंगा क ।

एनही क ओस्ताद मुरारी ।
करें पलग्गी खद्दरधारी ।

करिया के बतलावें गोर ।
अब के पकड़ी इनकर सोर ।

~ धीरेन्द्र पांचाल

दिल से दिल के तार छुड़ाना अच्छी बात नहीं ।सूरज पर प्रतिबन्ध लगाना अच्छी बात नहीं ।तुमने चंचल राग सुनाया पर मेरी भी बात सु...
28/11/2025

दिल से दिल के तार छुड़ाना अच्छी बात नहीं ।
सूरज पर प्रतिबन्ध लगाना अच्छी बात नहीं ।

तुमने चंचल राग सुनाया पर मेरी भी बात सुनो ,
व्याकुल मन की पीड़ा गाना अच्छी बात नहीं ।

रेत के टीले लग जाते हैं नदियों के तटबंधों पर ,
उनको आवारा कह जाना अच्छी बात नहीं ।

सबके अपने जख्म यहाँ हैं सबकी अपनी यादें ,
हर मरहम हो घाव दिखाना अच्छी बात नहीं ।

नदियाँ झरने झील समंदर सबके आदी हो जाना ,
मयखाने में आना जाना अच्छी बात नहीं ।

यौवन की मादकता कह लो या दिल का दीवानापन ,
इतना भी मन को समझाना अच्छी बात नहीं ।

~ धीरेन्द्र पांचाल

खूबसूरत वो लम्हे संग तेरे बिताये जैसे रुक ही हैं जाती दो घड़ी को हवाएं सारे ख्वाबों को मैंने है संजोया अभी तक तुझे अपने ख...
24/11/2025

खूबसूरत वो लम्हे
संग तेरे बिताये
जैसे रुक ही हैं जाती
दो घड़ी को हवाएं
सारे ख्वाबों को मैंने
है संजोया अभी तक
तुझे अपने खयालों में
रक्खा सजाकर
तू साँझ की धुप सी लगती है
तू भोर का एक टीमटीम तारा
तू साँझ की धुप सी लगती है
तू भोर का एक टीमटीम तारा

मुस्कान बड़े मतवाले हैं
कैसे मैं इनसे बच पाऊं
वो बातें सचमुच प्यारी हैं
इजहार करूँ या मर जाऊं
सोचा ही नहीं तेरे दर पे मैं
रुसवाई का सर चूमूंगा
अब तन्हा हार चूका हूँ मैं तू जोगन एक पिटारा
तू साँझ की धुप सी लगती है
तू भोर का एक टीमटीम तारा
तू साँझ की धुप सी लगती है
तू भोर का एक टीमटीम तारा

~ धीरेन्द्र पांचाल

इश्क़ पर तुम किताबें लिखे जा रहे हो।मशवरा है मेरा इश्क़ करना नहीं।दर्द काग़ज़ पे अपने लिखे जा रहे हो।मशवरा है मेरा दर्द कहना...
23/11/2025

इश्क़ पर तुम किताबें लिखे जा रहे हो।
मशवरा है मेरा इश्क़ करना नहीं।
दर्द काग़ज़ पे अपने लिखे जा रहे हो।
मशवरा है मेरा दर्द कहना नहीं।

मुस्कुराने की उनकी अदब देखिए तो।
देखकर यूँ ही ख़ुद से फिसलना नहीं।
लाख कह लें तुम्हें, तुम हो मेरे लिए।
मुस्कुराकर कभी सर झुकाना नहीं।

चाँद तारों की बातें वो बेशक करें।
अपने अँजुली पे सूरज उठाना नहीं।
हमसफ़र हैं वो बस कुछ सफ़र के लिए।
हर सफ़र अपने दिल को जलाना नहीं।

बह रही है हवा मौसमी चारों ओर।
इन हवा में दुपट्टा उड़ाना नहीं।
हैं फिसलती निगाहें ज़मीं पे यहाँ।
पाँव कीचड़ से अपने सजाना नहीं।

जब भी बारिश की बुँदे भींगाए तुम्हें।
रो कर आँखों का पानी छिपाना नहीं।
हो मोहब्बत तनिक इस धरा से तुम्हें।
कड़कड़ाती बिजलियाँ गिराना नहीं।

भेजता हूँ बता क्या रज़ा है तेरी।
चिट्ठियों का भी अब तो ज़माना नहीं।
तोड़ दो तुम भले उस क़लम की ज़ुबाँ।
कोरे काग़ज़ पे गुस्सा दिखाना नहीं।

इश्क़ पर तुम किताबें लिखे जा रहे हो।
मशवरा है मेरा इश्क़ करना नहीं।

~ धीरेन्द्र पांचाल

😀.......बड़ा मनउली देवता पित्तर ।मेहरी चाही हमें पवित्तर ।हमरो सपना साच भइल बा ।पूरा मोर बनवास भइल बा ।बहुते सपना जोड़ले ब...
20/11/2025

😀.......

बड़ा मनउली देवता पित्तर ।
मेहरी चाही हमें पवित्तर ।
हमरो सपना साच भइल बा ।
पूरा मोर बनवास भइल बा ।
बहुते सपना जोड़ले बानी ।
मन क सिकहर तोड़ले बानी ।
गुस्साईब खिसियाईब खूबे
चिखब नीमक तारु से,
त का घाटा मेहरारू से ।

जब जब हमरो माथ पिराई ।
सरसो अजवाइन ओंईछाई ।
घीव से छंउकल दाल मिली ।
जब भात में ओकर बाल मिली ।
तब करब शिकायत साढ़ू से,
त का घाटा मेहरारू से

बइठ के हमहू गाल बजाइब ।
पथरे पर हम दुब उगाईब ।
बदलल हमरो चाल मिली ।
तब फुलल पचकल गाल मिली ।
तू जाके पूछा सोमारु से,
त का घाटा मेहरारू से ।

गांव क मनई गांव नियन बस ।
हमरो धनिया छाँव नियन बस ।
केतनन के हम देखले बानी ।
साल खांड़ क राजा रानी ।
झगड़ा, मूसर - झाड़ू से,
त का घाटा मेहरारू से ।

~ धीरेन्द्र पांचाल

भटक रहे हैं लड़के अब भौकाल मचाने वाले ।काजल देख के उन आँखों का हाल बताने वाले ।गांव की पगडण्डी से लेकर शहरों की फूलवारी त...
19/11/2025

भटक रहे हैं लड़के अब भौकाल मचाने वाले ।
काजल देख के उन आँखों का हाल बताने वाले ।

गांव की पगडण्डी से लेकर शहरों की फूलवारी तक,
सिंच रहे हैं सबको, रोटी दाल कमाने वाले ।

सपने साधन से अपने वो दूर हो जाते हैं,
दूर हो जाते हैं खुद से भी प्यार निभाने वाले ।

इश्क़ में पड़ने वाले अब वो चुपके से रो लेते हैं,
सब कुछ सह जाते हैं अब वो गाल बजाने वाले ।

बात हो जाती है जब उनसे मन ही मन खिल जाते हैं,
इक लड़की के प्यार में सब न्यौछावर करने वाले ।

बड़े सलीके से रहते हैं छोड़ दिया आवारापन,
बात बात में प्यार की खातिर लड़ भीड़ जाने वाले ।

सब कुछ सुनते कुछ ना कहते सहमे सहमे लगते हैं,
उनके झुमके से अपना प्रतिबिम्ब बनाने वाले ।

~ धीरेन्द्र पांचाल

अ जी सुनते हो कुछ कहना है अब हमको आपसेज्यादा कुछ तो कह ना सकूंगी हुई मोहब्बत आपसे लाख कोलाहल आँखों मेंये नहीं बदलने वाली...
18/11/2025

अ जी सुनते हो कुछ कहना है अब हमको आपसे
ज्यादा कुछ तो कह ना सकूंगी हुई मोहब्बत आपसे

लाख कोलाहल आँखों में
ये नहीं बदलने वाली है ।
सांस तुम्हारी धड़कन से अब
नहीं निकलने वाली है ।
आलिंगन में प्रेम को छुआ ऐसी सोहबत आपसे ।
ज्यादा कुछ तो कह ना सकूंगी हुई मोहब्बत आपसे ।

इक वादा जो किया है ज्यादा
साथ निभाने का तुमसे ।
तिल तिल कर मिट जाउंगी मैं
दूर ना होना है तुमसे ।
मेरे सारे शौक नवाबी सारे ग़ुरबत आपसे ।
ज्यादा कुछ तो कह ना सकूंगी हुई मोहब्बत आपसे ।

चाँद सितारें तोड़ के ला दो
ऐसे शौक ना पाले हैं ।
कुछ अटपटी सी बातें मेरी
कुछ अंदाज निराले हैं ।
खट्टे मीठे झगड़े यारी सारी हरकत आपसे ।
ज्यादा कुछ तो कह ना सकूंगी हुई मोहब्बत आपसे ।

अ जी सुनते हो कुछ कहना है अब हमको आपसे
ज्यादा कुछ तो कह ना सकूंगी हुई मोहब्बत आपसे

~ धीरेन्द्र पांचाल

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Chandauli
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