20/10/2021
शंख ध्वनि के साथ निकाली गयी प्रभातफेरी
: पूज्य ज्वाला माता जी मंदिर आई.टी.आई. में अमृत वेले शंख ध्वनि के साथ प्रभातफेरी निकाली गयी। जिसमें पूज्य ज्वाला माता जी ने सुन्दर भजन गाकर पहुंची संगत को निहाल किया। प्रभात फेरी के उपरांत श्री मंदिर में पूज्य ज्वाला माता जी ने अपने मुखारबिंद से कार्तिक मास की कथा का पहला अध्याय संगत को सुनाया और कार्तिक मास के महातम के बारे में बताया।
माता जी ने बताया की धर्म शास्त्रों के अनुसार,कार्तिक मास में सबसे प्रमुख काम दीपदान करना बताया गया है। इस महीने में नदी, पोखर, तालाब आदि में दीपदान किया जाता है। इससे पुण्य की प्राप्ति होती है। इस महीने में तुलसी पूजन करने तथा सेवन करने का विशेष महत्व बताया गया है। वैसे तो हर मास में तुलसी का सेवन व आराधना करना श्रेयस्कर होता है, लेकिन कार्तिक में तुलसी पूजा का महत्व कई गुना माना गया है।
भूमि पर सोना कार्तिक मास का तीसरा प्रमुख काम माना गया है। भूमि पर सोने से मन में सात्विकता का भाव आता है तथा अन्य विकार भी समाप्त हो जाते हैं। कार्तिक महीने में केवल एक बार नरक चतुर्दशी (कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी) के दिन ही शरीर पर तेल लगाना चाहिए। कार्तिक मास में अन्य दिनों में तेल लगाना वर्जित है। कार्तिक महीने में द्विदलन अर्थात उड़द, मूंग, मसूर, चना, मटर, राई आदि नहीं खाना चाहिए। शरद पूर्णिमा, जिसे कोजागरी पूर्णिमा या रास पूर्णिमा भी कहते हैं हिन्दू पंचांग के अनुसार आश्विन मास की पूर्णिमा को कहते हैं।
पूरे साल में केवल इसी दिन चन्द्रमा 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है। हिन्दू धर्म में इस दिन कोजागर व्रत माना गया है। इसी को कौमुदी व्रत भी कहते हैं। इसी दिन श्रीकृष्ण ने महारास रचाया था। मान्यता है इस रात्रि को चन्द्रमा की किरणों से अमृत झड़ता है। तभी इस दिन उत्तर भारत में खीर बनाकर रात भर चांदनी में रखने का विधान है। मंदिर के सेवक समर्पित और रसिक का कहना है कि मंदिर में स्थापित हर स्वरुप सुंदर हैं। सभी साध संगत श्री मंदिर आकर स्वरुप के दर्शनों का लाभ उठा सकते हैं।