10/06/2025
नीचे प्रशांत किशोर की दो तस्वीरें हैं, दोनों में बहुत अंतर है। पहली तस्वीर साल 2019 की है, जिसमें प्रशांत किशोर महाराष्ट्र के सबसे फायरब्रांड नेता बाला साहब ठाकरे के बंगले मातोश्री में सोफे पर पैर के ऊपर पैर रखकर बैठे हैं। पीके के रुतबे और ताकत का अंदाज़ा तो इस तस्वीर से ही लगाया जा सकता है।
दूसरी तस्वीर प्रशांत किशोर के बिहार बदलाव यात्रा की है, जिसमें बिहार के एक सुदूर गांव में जून महीने की इस चिलचिलाती गर्मी में पीके ज़मीन पर बैठकर एक गरीब की समस्याएं सुन रहे हैं।
प्रशांत किशोर ने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचाने में मदद की, देश के कई राज्यों में नेताओं को मुख्यमंत्री बनाने में कंधा लगाया। पीके के अलावा शायद ही देश में कोई दूसरा शख्स है जिसके पास सत्ता और शक्ति दोनों मदद मांगने के लिए खुद चलकर आते रहे। वो शख्स, जिससे मिलने के लिए देश के बड़े से बड़े नेता समय मांगते हैं वो बिहार की तकदीर बदलने के लिए पिछले 3 वर्षों से संघर्ष कर रहा है। गांव-गली-मोहल्लों में पैदल चल रहा है। जून की बेबस कर देने वाली इस गर्मी में ज़मीन पर बैठकर गरीबों, महिलाओं, बुज़ुर्गों और नौजवानों की दिक्कतें सुन रहा है।
प्रशांत किशोर के पास हमेशा से यह विकल्प रहा है कि वह देश के किसी भी राज्य से सांसद, मंत्री बनकर ऐशो-आराम की ज़िंदगी जी सकते हैं। लेकिन, अपनी जन्मभूमि बिहार की बदहाली को दूर करने की कसम खाकर वो लगातार संघर्ष कर रहे हैं। पिछले तीन साल से गांव-गांव जाकर पीके लोगों को गरीबी बदहाली से निकलने का रास्ता बता रहे हैं। उनको अपने बच्चों की शिक्षा और रोज़गार के लिए वोट करने के लिए जागरुक कर रहे हैं। प्रशांत किशोर का एक ही सपना है कि बिहार देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो सके। प्रशांत किशोर की ये कड़ी मेहनत जरूर रंग लाएगी, नया सवेरा आएगा और बिहार की तकदीर बदलेगी।
!!जनसुराज युवा बिहार !!