26/05/2026
#हाबीभौआड़ गाम : जतय संध्या संग गूंजैत अछि #रामायणक_स्वर .....
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#रामचरितमानस केवल एक धार्मिक ग्रंथ नै, बल्कि #हाबीभौआड़ गामक #आत्मा अछि। बेनीपुर क्षेत्रक ई विशाल गाम अपन धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा आ रामभक्ति लेल दूर-दूर धरि प्रसिद्ध अछि। साँझ होइतहि जखन मंदिर सभ सऽ रामायणक चौपाई गूंजय लगैत अछि, तखन पूरा वातावरण भक्तिमय भऽ उठैत अछि।
हाबीभौआड़ गाममे रामायण पाठक परंपरा आइ सऽ नै, बल्कि बहुत पुरान कालसँ चलि आबि रहल अछि। गामक बुजुर्ग दादा-बाबा सभ कहैत छथि जे लगभग 1952-1955 सऽ एकर लिखित अथवा रिकॉर्ड प्रमाण उपलब्ध अछि, मुदा ई परंपरा तकरो बहुत पहिनेसँ चलैत आबि रहल अछि। प्रत्येक रैब दिन, प्रत्येक पाबनि-तिहार आ हर धार्मिक अवसर पर गामक मंदिर सभमे सामूहिक रूपसँ रामायण पाठ होइत अछि।
ई विशाल गाम चारि प्रमुख टोल — उटवारी टोल, दक्षिणवारी टोल, पुबारी टोल आ पछबारी टोल — मे विभाजित अछि। प्रत्येक टोलमे अपन मंदिर आ अपन धार्मिक परंपरा जीवित अछि। विशेष बात ई अछि जे प्रत्येक टोलमे चारि वर्ष पर एक बेर भव्य “रामायण महागोष्ठी”क आयोजन होइत अछि। एहि महागोष्ठीमे अयोध्या, मथुरा आ देशक विभिन्न तीर्थस्थलसँ कथा-वाचक आ वाचिका आबि रामचरितमानसक भाव, आदर्श आ आध्यात्मिक संदेश लोकसभकेँ सुनबैत छथि।
महागोष्ठीक समय पूरा गाम एक परिवार जेकाँ लागि पड़ैत अछि। मंदिर परिसर दीप, भजन, शंखध्वनि आ श्रद्धासँ भरि जाइत अछि। दूर-दूरसँ लोक कथा श्रवण लेल अबैत छथि। भगवान श्रीरामक मर्यादा, भरतक त्याग, हनुमानजीक भक्ति आ माता सीताक धैर्य जखन कथा रूपमे सुनाओल जाइत अछि, तखन श्रोतासभ भाव-विभोर भऽ जाइत छथि।
सबसँ मनमोहक दृश्य तखन देखबाक भेटैत अछि, जखन गामक छोट-छोट दिया-पुता अपन बाबा-दादा संग मंदिरक चबूतरा पर बैस रामायणक चौपाई पढ़ैत छथि। कोनो बालक पुस्तक पकड़ने अछि, कोनो “सियाराम”क नाम जपैत अछि। ई दृश्य केवल धार्मिक आयोजन नै, बल्कि एक पीढ़ीसँ दोसर पीढ़ी धरि संस्कार पहुँचयबाक अनुपम परंपरा अछि।
गामक बुजुर्ग सभ केवल अपन गाम धरि सीमित नै छथि। समय-समय पर ओ सभ आसपासक आन गामसभमे सेहो जा लोकसभकेँ रामायण पाठक प्रति प्रेरित करैत छथि। हुनक मानब छैन जे जतय रामायणक स्वर गूंजत, ततय समाजमे प्रेम, शांति, सद्भाव आ संस्कार जीवित रहत।
गोष्ठीक सदस्यसभ गर्वसँ कहैत छथि —
“ई केवल कार्यक्रम नै, बल्कि हमर पहचान अछि। हमसभ पीढ़ी-दर-पीढ़ी एहि परंपराकेँ निभबैत आबि रहल छी। जीवनमे कतबो सुख-समृद्धि भेटय, मुदा जा धरि कानमे रामायणक चौपाई नै गूंजय, ओ सुख अधूरा बुझाइत अछि।”
वास्तवमे, हाबीभौआड़ गाम मिथिलाक ओहि जीवित परंपराक प्रतीक अछि, जतय आधुनिकताक बीच सेहो धर्म, संस्कृति आ रामभक्ति केर दीप अखनो उज्ज्वल रूपसँ प्रज्वलित अछि।
🙏जय सियाराम🙏
अहाँ सब के इ अपन गाम के कहानी केहेन लागल कमेंट में जरूर कहब... 🙏
✍️ Reportar Shivam
Shivam Kumar Choudhary