04/02/2026
गांव कोड्याई में हुई 65-70 वर्षीय बुजुर्ग महिला के शव को लेकर ग्रामीण बैठें धरने पर...🥲😭🥲😭
नोट: कोई भी धरना प्रदर्शन हो शुरूआत में लोगों में जोश जुनून जज्बा होता है कुछ कर गुजरने का! और आर यां पार कर गुजरने का! लेकिन फिर 12-24-36-48 घंटे बाद धरनार्थियों दो तीन धड़ों में बटना शुरू हो जातें हैं!
इसका रीजन है कुछ डर जाते हैं!व, कुछ डरा दिए जाते हैं, कुछ को मजबूर कर दिया जाता है, कुछ अपने नेताओं को की चापलूसी में हट जातें और कुछ बिक जातें....??????
काश! सभी धरणार्थी एकजुट होकर शुरू से लेकर अंतिम तक उसी जोश जुनून जज्बे और ईमानदारी के साथ बैठे कहीं मैनेज न होकर सिर्फ़ और सिर्फ़ न्याय दिलाने की नियति से बैठे रहे तो न्याय यूं ही मिल जाएं! वरना पुलिस प्रशासन भी जानता है 12-24-36 घंटे बाद यह लोग कई धड़ों में बट जाएंगे! फिर हम इन्हें आसानी से हटा देंगे और और कुछ झूठ सासा आस्वासन दे दा के शव का अंतिम संस्कार करवा देंगे!
नोट: अभी तक के धरनो में तो यही साबित हुआ है! और अगर कोई इस धरने में न्याय को लेकर कोई अलग बदलाव देखने को मिल जाए तो बहुत अच्छी बात है...👏👏👏
यह घटना केवल एक अपराध नहीं, बल्कि हमारे समाज की भयावह सच्चाई का आईना है। गांवों में नशे और ड्रग्स का जाल तेजी से फैल रहा है, आज हालत यह है कि खेत में जाने में डर लगता है। महिलाओं को यह कहने पर मजबूर होना कि वे गहने पहनकर खेतों में न जाएं—यह किसी भी सभ्य समाज के लिए शर्मनाक है।
कानून का भय खत्म होते ही अपराध बेलगाम हो जाता है। जरूरत है त्वरित, सख्त और दिखने वाली कार्रवाई की—ताकि अपराधी पकड़े जाएं, सजा पाएँ और एक स्पष्ट संदेश जाए कि महिलाओं की सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं होगा।
समाज, प्रशासन और पुलिस—तीनों को मिलकर नशे के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़नी होगी। वरना आज खेत, कल घर—और परसों पूरा समाज असुरक्षित हो जाएगा।