09/03/2026
*धन निरंकार जी*
आज पूज्य महात्मा श्री वीरेंद्र सिंह रावत प्रचारक महात्मा जी देहरादून ने संत निरंकारी भवन विस्तापित क्षेत्र में अपने विचारों में कहा की, ज़ब अति कृपा से अति अति कृपा हो जाती है तो उस मनुष्य को सत्संग नसीब होता है, इसलिए हम सभी सत्संग कर रहे है! हम पर अति अति कृपा हुई है! हम सभी यहाँ सब परमात्मा का शुक्रिया करने,उसका गुणगान करने हेतु एकत्र हुए है, कितनी अच्छी बात है! यह मनुष्य योनी बढ़े भागो से प्राप्त हुई है, और इस योनि में ही मनुष्य अपना पार उतरा कर सकता है आर्थत मुक्ति को प्राप्त कर सकता है! यह बात ग्रंथो में भी लिखी है,,
बढ़े भाग मनुष्य तन पावा,,,,,,,
आज मनुष्य कई प्रकार से भक्ति कर रहा है! भगवान श्री कृष्ण ने कहा की जो मुझे जिस रूप में भजता है मैं उसी रूप में उसके लिए हूँ,,लेकिन मुक्ति के हक़दार वही है जो मुझे जानकार देखकर तत्वारूप में भजता! उसके लिए मैं परब्रह्म परमेश्वर हूँ!
हम कितने भाग्यशाली है, की निरंकारी मिशन में सतगुरु
के माध्यम से पहले सीधे ही इस परब्रह्म परमेश्वर के दर्शन करवाये! केवल केवल मनुष्य शरीर सबसे पवित्र शरीर माना गया है! क्यूंकि इसी शरीर में परमात्मा का गुणगान किया जा सकता है, अन्य किसी शरीर में इसको नहीं पाया जा सकता है! इसलिये हम आज बहुत भाग्यशाली है की हम सभी को ऐसा सतगुरु मिला है! जिसने हमें बिना किसी भी युक्ति के सबसे पहले सीधे परमात्मा के दर्शन करवाए है,,और फिर कहा अब इसको देखकर अच्छे कर्म करना है,,,परमात्मा,सतगुरु यही चाहता है की मेरा भगत जीवन में अच्छे कर्म करे, चालाकी, निंदा, बैर, का त्याग करें! और सेवा सिमरन सत्संग नित्य प्रति करे! हम सभी को यही करना!
उन्होंने कहा हमें इसके एसास में सदैव रहना है, ज़ब ज़ब हम इसके एसास में रहेंगे हमसे कोई भी गलत कार्य नहीं हो सकता!
पूज्य महात्मा रावत जी अनेक उदाहरण देकर भक्त, भक्ति
, परमात्मा और सतगुरु का आपस में सम्बन्ध समझाया जिसका आनंद सत्संग भवन पर बैठे महात्माओं ने लिया! महात्माओं के साथ देहरादून से आये पूज्य बहन राधा रावत जी, उम्मेद सिंह भंडारी जी तथा अन्य महात्माओं ने भी अपने विचारों को रखा!