Sant nirankari bhawan vistapith kschtra Dehradun

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बालावाला संत समागम अग्रिम सेवा में 22/05/2026
23/05/2026

बालावाला संत समागम अग्रिम सेवा में 22/05/2026

धन निरंकार जी 🙏आज दिनांक 26/04/2026 को संत निरंकारी सत्संग भवन विस्तापित जॉली ग्रांट क्षेत्र भवन पर मसूरी जोन से आयी हुई...
27/04/2026

धन निरंकार जी 🙏
आज दिनांक 26/04/2026 को संत निरंकारी सत्संग भवन विस्तापित जॉली ग्रांट क्षेत्र भवन पर मसूरी जोन से आयी हुई बहन पूज्य सविंदर कौर जी ने सतगुरु के आशीर्वाद प्रदान किये. उन्होंने सबसे पहले सतगुरु का धन्यवाद किया की आज सतगुरु ने पूरे संसार मेँ हम संत महात्माओं हेतु ऐसे स्थान बनाये हैं जहाँ हम प्रभु परमात्मा की चर्चा, गुणगान कर सकते हैं..
उन्होंने कहा की पहले इस परमात्मा के दर्शन करो...फिर इसकी भक्ति....
और इसके दर्शन केवल केवल निरंकारी मिशन मेँ ही हो सकते हैं..
उन्होंने कहा संत का जीवन मेँ आना बहुत बड़ा भाग्यशाली होता हैं. और जीवन मेँ कभी भी किसी संत का दिल ना दुखे इस वात का हमेशा ध्यान रखना हैं. क्योंकी संत ईश्वर का ही रूप होता हैं. उन्होंने निरंकारी मिशन के इतिहास को बताया. तथा अवतार वाणी,और हरदेव वाणी के अनेक शब्दो को समझाया! जिसका श्रवण सभी संत महात्माओं ने बड़ी ही जिज्ञासा पूर्वक किया! उनके साथ आये अनेक महात्माओं ने भी सत्संग के महत्व को बताया! पूज्य बहन गीता भट्ट जी ने अनेक नये महात्माओं को ब्राम्हज्ञान दिया! सत्संग के पश्चात पूज्य बहन रजनी रावत जी ने अपनी शादी की 25 वीं वर्ष गांठ के शुभवसर पर सभी संत महात्माओं हेतु लंगर प्रसाद की सेवा को प्रदान किया! जिसमें पूज्य महात्मा दीवान सिंह रावत जी एवं बिजेंद्र सिंह जी ने भी अपनी और से भी संत महात्माओं हेतु लंगर प्रसाद की सेवा मेँ सहयोग प्रदान किया!
सत्संग कार्यक्रम के पश्चात पूज्य ज्ञान प्रचारिका बहन सविंदर कौर जी ने पूज्य गुसांईं परिवार और पूज्य दीवान सिंह रावत जी के घरों मेँ चरण डाले, तत्पश्चात पूज्य महात्मा रामगोपाल तिवारी जी ने समस्त साध संगत का रविवारीय सत्संग कार्यक्रम मेँ अपने विभिन्न कार्यों को विराम देकर उपस्थित होने हेतु धन्यवाद किया तथा भविष्य मेँ भी इसी प्रकार से सत्संग सेवा सिमरन को सबसे पहला कार्य जीवन मेँ मानने को कहा!
पूज्य महात्मा रामगोपाल तिवारी जी ने समस्त साध संगत की ओर से ज्ञान प्रचारिका बहन सविंदर कौर जी और उनके साथ आयी हुई समस्त प्रचार टोली का भी धन्यवाद किया!

बाबा गुरबचन की शिक्षा बाबा गुरबचन सिंह जी ने सदैव पारिवारिक प्यार व सुख शान्ति का उपदेश ही दिया। मानव जीवन में परिवार का...
12/04/2026

बाबा गुरबचन की शिक्षा बाबा गुरबचन सिंह जी ने सदैव पारिवारिक प्यार व सुख शान्ति का उपदेश ही दिया। मानव जीवन में परिवार का एक विशेष स्थान है। जिस जीवन को पारिवारिक सुख, शान्ति और प्यार नसीब हो जाए वह निश्चय ही भाग्यशाली है। यही कारण है कि आज लाखों निरंकारी परिवार परस्र संबंधों में गुरुमत का रंग भरकर हर रिश्ते को पाक, पवित्र, सत्कार योग्य और गुरुमत का स्रोत बना चुके है। इन संबंधों में भक्ति रंग इतना पक्का होता है कि यही कुछ समय के लिए कोई माया का रंग उन्हें अपने रंग में रंग भी ले तो भी गुरु की रहमत और संगतों का संग इन्हें सही नाम रूपी रंग की पहचान करवा कर माया के रंग से बचा लेता है। सद्‌गुरु अपने भक्तों को कैसे बचाता है, इस संबंध में यह घटना

प्रस्तुत है:

यह घटना विनय नगर दिल्ली के एक गुरसिख परिवार के साथ संबंधित है। इस परिवार में माँ-बाप, तीन बेटे, तीन बहुएं और दो बेटियाँ भी थी (जो शादी-शुदा होने के कारण अपने-अपने ससुराल में रहती थीं) घर में पूरी तरह भक्ति का रंग था। यह ऐसा संयुक्त परिवार था जिसमें मेरे तेरे की भावना दूर-दूर तक दिखाई नहीं देती थी। घर में एक दूजे के लिए प्यार सत्कार, सेवा व त्याग की भावना प्रवल थी। इस परिवार को देखकर इनके सभी रिश्तेदार, पड़ौसी और मित्र खुश होते थे और मन की भावना को रोक नहीं पाते थे। वे अक्सर यही कहते थे कि इस परिवार के ऐसे स्वर्गीय जीवन का कारण इनका निरंकारी सद्गुरु के साथ जुड़ना, घर में संतों महात्माओं की संगत, सेवा और प्रभु पर अथाह आस्था और विश्वास है। अर्थात् यह परिवार अन्य परिवारों के लिए एक

उदाहरण था।

दातार की ऐसी खेल हुई कि घर के मुखिया अर्थात् पिता जी इस संसार से विदा हो गए परन्तु वह अपने बच्चों को गुरुमत की वह विरासत दे गए जिसकी जड़ें बहुत मजबूत थीं। पिता जी के स्वर्गवास के बाद भी इस परिवार की एकता, मिलवर्तन प्रेम और शान्ति कायम रही। इस एकता और मेहनती स्वभाव के कारण घर में पैसा भी खूब आने लगा। भक्त की परीक्षा दोनों रूपों में होती है, एक उस समय जब कहीं आवश्यकता से अधिक धन आ जाए और दूसरा उस समय जबकि आर्थिक रूप से इतना लाचार हो जाए कि गुजारा करना भी कठिन हो जाए।

अब माया रंग दिखाने लगी। बहुत पैसा होने के कारण फिजूल खर्ची बढ़ गई। परिवार की महिलाएं कभी-कभी एक दूसरे की फिजूल खर्ची पर टोका टाकी करने लग पड़ीं। कभी-कभी भाइयों में भी कहा-सुनी होने लगी। दुनिया का दस्तूर है कि वह दरार पड़ चुकी दीवार को तोड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ती। ऐसा ही इस परिवार के साथ भी हुआ। घर के वातावरण को बिगाड़ने में कई रिश्तेदारों ने जी तोड़ कोशिश की 🙏🏻👏🏻🤲🏻

धन निरंकार जी.....आज संत निरंकारी सत्संग भवन विस्थापित जॉली ग्रांट क्षेत्र भवन पर ब्रांच बालावाला से आये पूज्य महात्मा द...
12/04/2026

धन निरंकार जी.....
आज संत निरंकारी सत्संग भवन विस्थापित जॉली ग्रांट क्षेत्र भवन पर ब्रांच बालावाला से आये पूज्य महात्मा दिनेश उनियाल जी ने सतगुरु के आशीर्वादें प्रदान किये ! जिसमें उन्होंने अपने प्रवचन में कहा कि हमें मनुष्य तन मिला है, यह सबसे बड़ा हमारा सौभाग्य है क्योंकि इस तन में आने के लिए देवी देवता भी तरसते हैं क्योंकि यही वह तन है जिसके माध्यम से भक्ति की जा सकती, और ब्रह्म ज्ञान को प्राप्त कर परमात्मा की प्राप्ति की जा सकती है तथा 84 लाख योनियों से मुक्ति को पाया जा सकता है उन्होंने कहा कि आज इंसान सब कुछ होते हुए भी परेशान है, उसे संसार अच्छा नहीं लगता है,,,उसका कारण यह है की उसे अपने मूल का पता नहीं, उसे यें पता नहीं की उसे इस योनि में उसका प्रथम कार्य क्या था!
जिस दिन उस इंसान के जीवन में कोई संत महात्मा आता है और वो उस इंसान को सतगुरु से मिलाता है, और ज़ब उसे ब्रम्हांज्ञान की प्राप्ति होती है तब उस दिन उसे पता चलता है की यें मनुष्य तन कई योनि जैसे - घोड़ा, गधा, किट पतंगा आदि काटने के पश्चात प्राप्त हुई है और इस योनि में ही परमात्मा की भक्ति की जा सकती है और समस्त योनियोँ से मुक्ति पायी जा सकती है...तब जिस संसार से वो परेशान था और जो संसार उसे अच्छा नहीं लगता, वही संसार उसे अच्छा लगने लगता है!
उन्होंने कहा कि आज मनुष्य की आत्मा में भटकन है और ज़ब तक आत्मा में भटकन रहती है तब तक इंसान परेशान ही रहता है और इस भटकन को तब ही दूर किया जा सकता है जब उसके जीवन में सतगुरु आता है और ज़ब सद्गुरु ब्रह्म ज्ञान देकर आत्मा को परमात्मा से मिला देते है उसी दिन आत्मा की भटकन भी दूर हो जाती है! ब्रह्म ज्ञान पाने के पश्चात मनुष्य को पता चलता है कि यह संसार माया है और फिर वही इंसान *मीरा की तरह कहता है*
*पायो जी मैंने राम रतन धन पायो ।*
*पायो जी मैंने राम रतन धन पायो ।*
*वस्तु अमोलिक दी मेरे सतगुरु ।*
*कृपा कर अपनायो ॥*
*पायो जी मैंने राम रतन धन पायो ।*
*पायो जी मैंने राम रतन धन पायो ।*

उन्होंने अपने प्रवचनों में रामायण के कुछ दृष्टांत भी रखें तथा समझाने का प्रयास भी किया कि जीवन में परमात्मा का ज्ञान अर्थात इसको पाना कितना आवश्यक है! जिस इंसान को इस योनि में परमात्मा की प्राप्ति अर्थात दर्शन नहीं होते! उसका जीवन व्यर्थ ही गुजर जाता है, और फिर उसे इस जन्म मरण के चक्र से गुजरना पड़ता है! उन्होंने अपने प्रवचनों में अनेक दृष्टांत रखकर महात्माओं को सतगुरु, ब्रह्म, ज्ञान,निरंकार,सेवा, सिमरन,सत्संग के संबंध में अर्थात उसकी आवश्यकताओं को बताया! सभी महात्माओं ने उनके विचारों कों बड़ी ध्यान पूर्वक सुना!
अंत में पूज्य महात्मा राम गोपाल तिवारी जी,दिलावर सिंह नेगी जी,दीवान सिंह रावत जी,बलदेव सिंह जी बहन जिम्मा जी,प्रेम लता जी, माया सोलंकी जी,रमेश जी, विजेंद्र सिंह जी,आदि व सेवादल के सभी महात्माओं वा साध संगत के सभी महात्माओं ने उनका धन्यवाद किया!

धन निरंकार जी..आज पूज्य प्रचारक महात्मा अनिल लिंगवाल जी ऋषिकेश ने अपने वचनों में फ़रमाया की सत्संग करने के पश्चात जीवन मे...
22/03/2026

धन निरंकार जी..
आज पूज्य प्रचारक महात्मा अनिल लिंगवाल जी ऋषिकेश ने अपने वचनों में फ़रमाया की सत्संग करने के पश्चात जीवन में परिवर्तन अवश्य होता है...यदि परिवर्तन नहीं हो रहा,
तो मैं सत्संग में आता तो जरूर हूँ लेकिन सत्संग में बोले जाने वाली वाणी को नहीं सुनता, और यदि मैं सुन रहा हूँ तो फिर मैं समझ नहीं रहा हूँ..और यदि समझ रहा हूँ तो फिर मैं विचार नहीं कर रहा हूँ..और यदि विचार कर रहा हूँ..तो फिर मैं कर्म नहीं कर रहा हूँ और यदि मैं कर्म भी कर रहा हूँ...तो फिर मेरा वह कर्म निष्काम नहीं है, और यही पर इंसान फस जाता है,,

उन्होंने समझाया की सतगुरु ने ज्ञान देने के पश्चात हमें एक चश्मा दें दिया है जैसे मोतियाबिंद वाले इंसान को एक चश्मा दिया जाता है,,,,वैसे ही ज़ब गुरु से ज्ञान प्राप्त होता है तो सतगुरु द्वारा ज्ञान रूपी चश्मा भी प्राप्त होता है..उस चश्मे से इंसान अपने और पराये के भेद से मुक्त हो जाता है फिर जो इंसान अपने और पराये के भेद से मुक्त हों जाता है वही निष्काम कर्म कर सकता है और मुक्ति पथ पर आगे बढ़ सकता है..
उन्होंने अनेक उदाहरण देकर सत्संग मेँ जीवन के महत्वा को समझाया...जिसका भरपूर आनंद दूर दूर से आये हुए संत महात्माओं द्वारा लिया गया! सत्संग के तत्पश्चात महात्माओं ने लंगर प्रसाद का भी आनंद प्राप्त किया!

*धन निरंकार जी*आज पूज्य महात्मा श्री वीरेंद्र सिंह रावत प्रचारक महात्मा जी देहरादून ने संत निरंकारी भवन विस्तापित क्षेत्...
09/03/2026

*धन निरंकार जी*
आज पूज्य महात्मा श्री वीरेंद्र सिंह रावत प्रचारक महात्मा जी देहरादून ने संत निरंकारी भवन विस्तापित क्षेत्र में अपने विचारों में कहा की, ज़ब अति कृपा से अति अति कृपा हो जाती है तो उस मनुष्य को सत्संग नसीब होता है, इसलिए हम सभी सत्संग कर रहे है! हम पर अति अति कृपा हुई है! हम सभी यहाँ सब परमात्मा का शुक्रिया करने,उसका गुणगान करने हेतु एकत्र हुए है, कितनी अच्छी बात है! यह मनुष्य योनी बढ़े भागो से प्राप्त हुई है, और इस योनि में ही मनुष्य अपना पार उतरा कर सकता है आर्थत मुक्ति को प्राप्त कर सकता है! यह बात ग्रंथो में भी लिखी है,,
बढ़े भाग मनुष्य तन पावा,,,,,,,

आज मनुष्य कई प्रकार से भक्ति कर रहा है! भगवान श्री कृष्ण ने कहा की जो मुझे जिस रूप में भजता है मैं उसी रूप में उसके लिए हूँ,,लेकिन मुक्ति के हक़दार वही है जो मुझे जानकार देखकर तत्वारूप में भजता! उसके लिए मैं परब्रह्म परमेश्वर हूँ!
हम कितने भाग्यशाली है, की निरंकारी मिशन में सतगुरु
के माध्यम से पहले सीधे ही इस परब्रह्म परमेश्वर के दर्शन करवाये! केवल केवल मनुष्य शरीर सबसे पवित्र शरीर माना गया है! क्यूंकि इसी शरीर में परमात्मा का गुणगान किया जा सकता है, अन्य किसी शरीर में इसको नहीं पाया जा सकता है! इसलिये हम आज बहुत भाग्यशाली है की हम सभी को ऐसा सतगुरु मिला है! जिसने हमें बिना किसी भी युक्ति के सबसे पहले सीधे परमात्मा के दर्शन करवाए है,,और फिर कहा अब इसको देखकर अच्छे कर्म करना है,,,परमात्मा,सतगुरु यही चाहता है की मेरा भगत जीवन में अच्छे कर्म करे, चालाकी, निंदा, बैर, का त्याग करें! और सेवा सिमरन सत्संग नित्य प्रति करे! हम सभी को यही करना!

उन्होंने कहा हमें इसके एसास में सदैव रहना है, ज़ब ज़ब हम इसके एसास में रहेंगे हमसे कोई भी गलत कार्य नहीं हो सकता!
पूज्य महात्मा रावत जी अनेक उदाहरण देकर भक्त, भक्ति
, परमात्मा और सतगुरु का आपस में सम्बन्ध समझाया जिसका आनंद सत्संग भवन पर बैठे महात्माओं ने लिया! महात्माओं के साथ देहरादून से आये पूज्य बहन राधा रावत जी, उम्मेद सिंह भंडारी जी तथा अन्य महात्माओं ने भी अपने विचारों को रखा!

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