04/05/2021
प्रधानमंत्री का नया आवास दिसंबर 2022 तक बनकर तैयार हो जाएगा। इसे सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत तैयार किया जा रहा है। देश इस वक्त महामारी से जूझ रहा है। देश के ज्यादातर राज्यों में लॉकडाउन है, लेकिन सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट में कंस्ट्रक्शन जारी है। प्रोजेक्ट को पर्यावरण संबंधी तमाम मंजूरियां मिल चुकी हैं और ‘आवश्यक सेवा’ अधिनियम में रखा गया है। लिहाजा, यहां निर्माण कार्य नहीं रोका गया है।
सरकार की हरी झंडी
विपक्ष के ऐतराज के बावजूद सरकार ने इसी हरी झंडी दी थी। प्रोजेक्ट की टाइम लाइन का सख्ती से पालन करने के आदेश हैं। सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत जो बिल्डिंग्स अगले साल तक बनकर तैयार होंगी, उनमें प्रधानमंत्री आवास शामिल है। फिलहाल, प्रधानमंत्री 7, लोक कल्याण मार्ग पर रहते हैं। यूपीए सरकार के दौर तक इसे 7, रेसकोर्स रोड कहा जाता था।
उप राष्ट्रपति और SPG का हेडक्वॉर्टर भी
अगले साल दिसंबर तक जो नई बिल्डिंग्स तैयार होंगी उनमें प्रधानमंत्री आवास के अलावा उनकी सुरक्षा में तैनात स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप का हेडक्वॉर्टर भी शामिल है। ब्यूरोक्रेट्स के लिए एक एग्जीक्यूटिव एनक्लेव भी इसी दौरान बनकर तैयार हो जाएगा।
इस प्रोजेक्ट में उप राष्ट्रपति का आवास भी शामिल है। ये अगले साल मई तक तैयार हो जाएगा। सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट पर कुल मिलाकर 13 हजार 450 करोड़ रुपए खर्च होंगे। प्लान के मुताबिक, प्रोजेक्ट में 46 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा।
विपक्ष का विरोध
विपक्षी दल नए संसद भवन, सरकारी ऑफिस और प्रधानमंत्री आवास बनाए जाने का विरोध करते रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी लोगों ने इस प्रोजेक्ट का यह कहते हुए विरोध किया कि महामारी के दौरान इसको रोक दिया जाना चाहिए। कुछ लोगों का कहना है कि इस दौरान हॉस्पिटल्स की परेशानी है। ऑक्सीजन, वैक्सीन और दवाओं की किल्लत है।
प्लान के मुताबिक, 2024 के लोकसभा चुनाव के पहले दिल्ली में सरकारी इमारतें और कुछ आवास बनाए जाने हैं। इसके लिए राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट तक का चार किलोमीटर का क्षेत्र चुना गया था। पिछले दिनों राहुल गांधी ने सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को गैरजरूरी बताया था। सरकार ने यह कहते बचाव किया कि पुरानी इमारतें जर्जर हो चुकी हैं। इस प्रोजेक्ट को सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती दी गई थी, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने भी इस पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि यह प्रोजेक्ट एनवॉयर्नमेंटल या लैंड-यूज रिफॉर्म्स के खिलाफ नहीं है