16/03/2025
वो कुली
16/03/25
रेलवे स्टेशन में जहां लाल वर्दी में कुली प्रायः देखे जाते है इसमें कुछ आश्चर्य की बात नहीं लेकिन एक कुली की ओर मेरा ध्यान गया और मेरी नजर उसपर टिक गई।
38 - 40 वर्षीय एक पुरुष अपने कंधे में एक बैग लिए फोन पर बात करते हुए आगे चल रहा था जिसके पीछे उसका एक बड़ा बैग अपने सिर पर लिए एक स्त्री कुली जा रही थी।
उसके चेहरे पर जो भाव थे उसे पढ़ पाने में मै असमर्थ थी लेकिन गंतव्य तक पहुंचकर जब अपना पारिश्रमिक लेकर उसके चेहरे के भाव मुखरित हो गए।
उसने तुरंत अपना फोन निकाला कुछ देखा और रख दिया।
अपने काले कुछ उलझे बालों को उसने झटका और बांधते हुए आगे बढ़ने लगी।
सावली सी उस औरत के मजबूत कंधे सामान नहीं उठा रहे थे बल्कि अनगिनत जिम्मेदारी का बोझ उठा रहे थे।
उसके चेहरे का तेज और आत्मविश्वासी चाल बया कर रही थी कि वो हर मुश्किल का सामना करने को तैयार है।