05/08/2021
जितने भी सफल लोगों की motivational stories पढ़ने को मिली
लेकिन एक ही बात निकलकर सामने आई
जानते हो क्या??? ???
"काम मे डूबना "
एक एक करके आपको उदाहरण बताता हूं।
जाकिर हुसैन
मशहूर तबला वादक
2 साल तबला बजाने के बाद बोलते की
मजा नही आ रहा कुछ और करते है,
लेकिन नही sir
ये लोग अपने काम मे इतना डूब गए क्योंकि,इनको
सफलता के अलावा कुछ और मंजूर ही नही था
हो सकता है यही सफलता की चाबी हो
और जब इन्होंने अपने field में कदम रखा होगा या फिर जब इनकी शुरुवात थी तब इनका अपने काम के ऊपर कितना भरोसा था??
99 प्रतिशत
नही sir पूरा का पूरा 100 प्रतिशत क्योंकि इनको विश्वास था अपने स्वयं के ऊपर
सचिन तेंदुलकर
को कितना भरोसा था?
कि उनका career cricket
में ही है।
एक बार भी उनको यह नही लगा होगा कि
इनका passion कुछ अलग है।
ये सब काम मे डूबे हुए लोग थे।
अब आपको ये तो समझ मे आ गया होगा कि
सफलता के लिए सबसे जरूरी चीज सिर्फ यही है
अपने काम मे डूबना
आपको एक और जबरदस्त motivational story बताता हूं ।
तकरीबन 8 या 9 दशक पहले
एक movie बनी थी
मुग़ल ए आजम
आपको याद होगा
नौशाद अली जी ने इस पर music दिया था
और 16 साल लगा दिए
इतना dedication यानी कि समर्पण
अपने काम मे जिसे भी होता है
सफलता उनके कदमो में होती है।
लेकिन जब movie बनकर तैयार हुई तब
कितनी superhit हुई थी इसीलिए चर्चा आज भी हो रही है
लेकिन क्या उसको बनाने में दिक्कत नही आयी होगी ??
जरूर आयी थी,
गाने का एक seen था जिसमे तानसेन गा रहा है वो दृश्य फिल्माया जाना था,
लेकिन उस जमाने मे तानसेन जैसा गायक मिलना असंभव था
उन्होंने पूछा ये गाना कौन गा सकता है??
उनके साथी ने बताया कि
ये गाना बड़े गुलाम अली खान साहब गा सकते है,
लेकिन वो movie के लिए गाना नही गाते
वो बोले मुझे लेकर चलो उनके पास
और जब वो गए तो उनकी बातचीत हुई
कि कैसे आना हुआ ??
उन्होंने बता दिया कि आपसे गाना गवाना चाहते है
लेकिन खान साहब बोले मैं movie के लिए गाने नही गाता
नौशाद अली उस वक्त सिगार पी रहे थे
तो कश खींचते हुए बोले कि गाना तो आप ही गाएंगे !!
एक बार समझाया नही माने
फिर से कश लिया और बोले
गाना तो
आप ही गाएंगे !!!
खान साहब बोले कैसे बदतमीज इंसान हो
उन्होंने कहा कि इनको समझाओ
मैं गाना तो नही गाता फिल्मो के लिए
और उस जमाने मे 500 rs प्रतिमाह मिलते थे
एक सिंगर को
खान साहब बोले 50000 लूंगा
नौशाद अली ने सिगार का कश लेते हुए
10000 की गड्डी निकाली और फिर बोले
गाना तो आप ही गाएंगे !!!
मान गए sir
क्योंकि उनको मालूम था
Best के साथ समझौता नही कर सकते
आखिरकार गाना गवा ही दिया बड़े गुलाम अली खां साहब से
इतना dedication और आत्मविश्वास था उनको उस मूवी के ऊपर
जी जान से लगे रहे और 16 साल लगा दिए
और हम कितनी जल्दी हार मान लेते है ।
मजबूत इच्छाशक्ति से सफल हुआ जा सकता है
आज भी ये बात कही जाती है कि
नौशाद अली जी की हाथो की अंगुलियों के बीच की जगह जली हुई थी
सिगार पीते पीते सिगार
खत्म हो जाती थी मगर
ध्यान साला
जहा लगा रखा होगा वहा से हटता नही था
कुल मिला के ऊपर लिखी सारी बातों का एक ही सार है
जो अपने काम मे डूब जाता है
उसको सफलता मिलनी निश्चित है
और अब तो आपको भी विश्वाश हो गया होगा कि
मैने जो शीर्षक दिया है वो बिल्कुल सही है।
मुझे पूरी उम्मीद है कि
इस लेख से आपको भी ऊर्जा मिली होगी
और आप भी आज से अपने काम में डूब जाएंगे