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05/09/2024

क्रोध को ज्ञान द्वारा नियंत्रित किया जा सकता है। क्रोध और भय अज्ञानता की वजह से होता है।
यह अज्ञानता,.. की कोई चीज गलत है, इसको ऐसे नहीं वैसे होना चाहिए। और उससे भी बड़ी अज्ञानता की इस गलती को मैं सुधार दूंगा। ऐसा भाव तब आता है जब आप स्वयं को कर्ता मानते है।
जबकि कार्य के कारण और नियंता को प्रकृति स्वयं चुनती है और उसे निर्देशित भी करती है।

स्वयं को कर्ता मानना महामूर्खता है।
अतः इस क्रोध का त्याग कर देने में हीं भलाई है। जहां तमस की अधिकता होगी वहां सात्विकता वास नहीं कर सकती।
धन्यवाद, हर हर महादेव 🙏🏻
राजीव सिंह ☺️

10/06/2024

कल अध्यात्म चर्चा ग्रुप में किसी जिज्ञासु के दो प्रश्न आए।
1. चेतना से ऊपर क्या है?
2. चेतना के भाव का विकास कैसे हो?

पहले प्रश्न का उत्तर:-
चेतना के ऊपर ईश्वर है। परंतु चेतना तो सभी जीवों के पास है, तो क्या वे सभी जीव ईश्वर के समीप हैं?
नहीं!
चेतना के शीर्ष पर पहुंचने के पश्चात हीं ये आत्मा ईश्वर से मिल पाती है।।
*मनुष्य की उत्तम चेतना का शीर्ष बिंदु हीं ईश्वर का सामिप्य है*!
आत्म यात्रा करते हुए अपनी चेतना के शीर्ष पर पहुंचने वाले हमारे सनातन धर्म के इतिहास में कई महात्मा हुए। जिन्होंने एक साधारण आत्मा से महात्मा बनने की यात्रा की, फिर महात्मा से भी कई चरण आगे की यात्रा करके परमात्मा बनें।
उदाहरणार्थ:-
सिद्धार्थ गौतम, वर्धमान महावीर, आद्यगुरु शंकराचार्य, jesus chrisht, मोहम्मद साहब, महाअवतारी बाबा इत्यादि परम आत्माएं।

दूसरे प्रश्न का उत्तर:-
सबसे पहले की चेतना कोई भाव नहीं है।
यह स्वविवेक है। जो आत्मा आपके अंदर है, जिसे आप अंतरात्मा कहते हैं, वह शिवांश है जो अति विकसित और उन्नत है।
उसे विकसित करने की आवश्यता नहीं है।
जरूरत है उस अंतरात्मा के ऊपर चढ़ते परत को विकसित होने से रोकने की या चढ़ी हुई परत को तोड़ने की ।
परंतु अब आपकी उम्र इतनी ज्यादा हो चुकी है की आपकी अंतरात्मा के ऊपर चढ़ी बहिरात्मा की परत बहुत हीं ज्यादा विकसित ( मोटी) हो चुकी है, अब उस परत को भेदना बहुत हीं मुश्किल है।
इसका सबसे सहज उपाय है जब बच्चा पैदा हो यानी की एक आत्मा जब नया शरीर धारण करे तो उसे स्वविवेक का इस्तेमाल करने दिया जाए, उसे किसी भी प्रकार की सांसारिकता न सिखाई जाए, उसे प्रकृति की गोद में छोड़ दिया जाए।
इसे उसके अंतरात्मा के ऊपर बहिरात्मा की गंदी परत नही बनेगी । प्रकृति स्वयं उसकी शुद्ध चेतना को पोषित करती रहेगी और विकसित करती रहेगी।

उम्र बढ़ने के बाद जब आपने इतना कूड़ा जमा कर लिया है तो इसका अब एक ही उपाय है।
अब तक आपने जितना सीखा है, आपके ज्ञानेंद्रियों ने जितना भी संदेश पूर्व से अब तक आपके मस्तिष्क को दिया उन सबको मिटा दीजिए, निर्विकार हो जाइए।
क्या ये संभव है?
है, परंतु बहुत कठीन है। सदगुरु, ज्ञानी जनों ( कथावाचकों / कर्मकांडियों का नहीं) , का संग करो उनसे मूल विधि विधान को सीखो और आत्म यात्रा पर निकल पड़ो।

लेकिन मैं दावे के साथ कह सकता हूं की इस यात्रा में कोई विरला ही निकलेगा।
अपने पूर्व जन्म के सद्कर्मों के बूते कहीं इस रास्ते पर निकल भी गया तो शीघ्र हीं अपने अहम पर चोट खाकर भाग जायेगा। क्योंकि जिस चीज को उसने बचपन से देखा है , सुना है, जिसे वह सत्य मानता आया है; एक सदगुरु उसकी भावनाओं को अनदेखा करते हुए उसके भ्रम को तत्क्षण तोड़ देगा।
ये सब पचेगा नहीं उसे और वह भाग जायेगा🙏🏻
ये कटु सत्य है।
इसको झेल पाओ तो निकल पड़ो अध्यात्मिक (आत्मा) यात्रा पर। नहीं तो चुपचाप गृहस्थी का मजा लो। गृहस्थी में हीं अपनी जिम्मेदारियों को समझो, ईमानदारी से कर्तव्यों का पालन करो। इतने से भी नैया देर सवेर पार लग ही जायेगी।
यही विधान है 🙏🏻☺️
हर हर महादेव 🙏🏻🚩🌷
जय शिवशक्ति 🙏🏻🚩🌷🌺

08/06/2024

किसी नए योग साधक के द्वारा एक प्रश्न -
अगर ध्यान साधना के मार्ग मे मुझे अपने स्वरूप का दर्शन हो जाए, मार्ग मे बिना देवी देवताओ के मिले बिना, तो क्या मैं देवी देवताओ को नकार सकता हूँ या और की तरह मानने ही पड़ेगा कि देवी देवता है ?

उत्तर:- आप ये भी नकार दो की समुद्र में शार्क नहीं रहती, मगरमच्छ नहीं रहते, octopus नहीं रहते।
इससे समुद्र को कुछ फर्क नहीं पड़ने वाला।
लेकिन आप पर फर्क जरूर पड़ेगा।
क्योंकि आप तो मान बैठे हो की शार्क है ही नहीं, उधर shark अपने बच्चों के लिए आपको नाश्ते में परोस देगी।

आप नकार दो की महादेव नही है, इससे महादेव को कोई फर्क नही पड़ने वाला।
फर्क आपको पड़ेगा जिस दिन हिसाब देना होगा। जब 84 लाख 84 योनियों का क्रमिक चक्र बार बार काटोगे।

आपका स्वरूप हीं शिवांश हैं।
जिस दिन आपने अपने आप को पहचान लिया उस दिन तो जाकर शिवलिंग में लिपट जाओगे, नाग की तरह।
ये बकवास भी तभी तक है दिमाग में जब तक ये अहम है ।
आप हो कौन?
इतना हीं ढूंढ लो, समझ जाओगे की आप उसी ईश्वर के अंश हो।
फिर कैसे नकार सकते हो!

हर हर महादेव 🙏💐
जय शिवशक्ति 🙏🌸

23/05/2024

*काम, क्रोध, मद, लोभ, और मोह इनसे डरो नहीं, ना हीं इनसे भागो। ईश्वर ने कुछ सोच समझकर ही तुम्हें ये सब दिया है, तुम्हें बस इनपर नियंत्रण करना सीखना होगा और सही समय पर इनका सही प्रयोग करना सीखना होगा। जिस दिन तुमने इस पर नियंत्रण और इसका सदुपयोग सिख लिया , उस दिन से तुम इसके मालिक होगे ये तुम्हारे दास ।
इन पंच विकारों पर विजय प्राप्ति का अर्थ यह नहीं हैं की इससे मुंह मोड़ लिया, विजय का अर्थ हैं उसपर नियंत्रण करना । पंच विकारों का दास न बनकर , उल्टा उसे अपना दास बना लेना।*
*ऊर्जा का दमन नहीं ऊर्जा का रूपांतरण करना चाहिए।*

19/05/2024

सदकर्म / धर्म / पुण्य हो ! या कुकर्म / अधर्म / पाप हो ! यह दोनों ही, जन्म-जन्मांतर तक ! संचय व अग्रेषित यानि फॉरवर्ड होते रहते हैं. जब तक इनका शुभ-फल ! या उपयुक्त-दंड ! ना मिल जाये.

:~
कुकर्म / अधर्म / पाप का, हर हाल में, दंड मिलेगा ही मिलेगा. कुकर्मों का समुचित दंड भोगने के अलावा, इससे बचाव का, कोई भी अन्य मार्ग नहीं है.

:~
दान-पुण्य करके ! देवी-देवता-गण ! यानि इष्ट-आराध्य की पूजा करके ! उनका नाम जप करके ! पुण्यों में बढ़ोतरी तो, की जा सकती है. किंतु उससे रत्ती भर भी ! पाप नहीं काटे जा सकते. पाप का दंड तो, हर हाल में, अगले जन्म में, भोगना ही पड़ेगा. जैसे इस जन्म में, पूर्वजन्म का भोग रहे हो.

:~
वैसे देखें तो, पुण्य एकत्र व संचय करने का, सबसे सर्वोत्तम मार्ग ! धर्म / सदकर्म करना ही है. *कर्म* से बढ़कर, कुछ भी नहीं है. सदकर्म करके ! सदकर्म / पुण्य को, और भी बढ़ाया जा सकता है. लेकिन उससे कुकर्म / पाप को, नहीं मिटाया जा सकता. सदकर्म / पुण्य से, कुकर्म / पाप को, किसी भी हाल में, समायोजित यानि एडजस्ट ! नहीं किया जा सकता.

~~~~~~~~~~~~~~~~

!! जय शिव शक्ति !!

साहिल सिंह सूर्यवंशी सत्यानंद स्वामी सत्यानंद

07/05/2024

" इस संसार में किसी
भी ली - दी जाने वाली वस्तु की अपेक्षा धर्म
आसानी से दिया या लिया जा सकता है . " अतः
सर्व प्रथम तुम्हीं आत्म ज्ञानी हो जाओ तथा संसार
को कुछ देने योग्य बन जाओ और फिर संसार
के सम्मुख देने के लिए खड़े होओ . धर्म बात
करने की चीज नहीं है , न वह साम्प्रदायिकता
है , न मतवाद विशेष . धर्म किसी सम्प्रदाय
अथवा संस्था में आबद्ध नहीं रह सकता . यह
तो आत्मा के साथ परमात्मा का सम्बन्ध है .
अतएव किसी एक संस्था में बद्ध होकर कैसे
रह सकता है ?
ऐसा हो जाने से तो धर्म व्यवसाय ही हो जायगा
और धर्म जब व्यवसाय बन जाता है , तब धर्म
का लोप हो जाता है .

धर्म पुस्तकों में , शब्दों में , व्याख्यानों में नही रहता .
धर्म आत्मसाक्षात्कार में ही है . वास्तव में हम सब
जानते हैं कि जब तक हमको स्वयं सत्य का ज्ञान
प्राप्त नहीं होता , तब तक हमारा समाधान नहीं
होता . हम चाहे कितना वाद - विवाद क्यों न करें
तथा चाहे जितना पढ़ें - सुनें , परन्तु हमें एक ही
चीज से संतोष होगा और वह है स्वयं प्राप्त किया
हुआ आत्मज्ञान और यह अनुभव प्रत्येक को
प्राप्त होना संभव है , यदि उसके लिए प्रयत्न
किया जाय . आत्मज्ञान प्राप्त करने के लिए सबसे
पहले त्याग की आवश्यकता है . जहाँ तक हो
सके हमें त्याग करना चाहिए . अंधकार तथा
प्रकाश , विषयानन्द तथा ब्रम्हानंद दोनों कभी
साथ - साथ नहीं रह सकते . ईश्वर तथा शैतान
दोनों की सेवा एक साथ नहीं की जा सकती .
यदि लोग चाहते हैं तो उन्हें यत्न कर देख लेने दो ।

-- रामकृष्ण परमहंस

जय श्री राम 🙏🏻ट्रेन द्वारा 05 अप्रैल 2024 को दिल्ली से अयोध्या की यात्रा निर्धारित की गई है।यह यात्रा 05 अप्रैल को रात 0...
03/02/2024

जय श्री राम 🙏🏻
ट्रेन द्वारा 05 अप्रैल 2024 को दिल्ली से अयोध्या की यात्रा निर्धारित की गई है।
यह यात्रा 05 अप्रैल को रात 08 बजे दिल्ली रेलवे स्टेशन से निकलेगी तथा 06 अप्रैल की सुबह अयोध्या पहुंचेगी।
06 अप्रैल और 07 अप्रैल, कुल मिलाकर 2 दिन श्री अयोध्या धाम के विभिन्न धार्मिक स्थलों का दर्शन कराया जायेगा ।
इस दौरान भोजन एवं होटल में ठहरने का प्रबंध भी किया गया है। हम सभी 07 अप्रैल की शाम ट्रेन द्वारा अयोध्या से वापस दिल्ली के लिए रवाना होंगे।
यात्रा की लागत राशि 4900 रुपए प्रति व्यक्ति देय होगी जिसमें ट्रेन का AC 3 टियर टिकट ( आना -जाना दोनो तरफ का), होटल में ठहरना तथा नाश्ता एवं भोजन सब शामिल है।
जो भी भक्त अयोध्या दर्शन करने हमारे साथ चलना चाहते हैं, वे कृप्या फोन नंबर 9999832756 (राजीव सिंह) पर संपर्क करके अतिशीघ्र अपनी रिजर्वेशन करा लें।
ट्रेन की कन्फर्म टिकट, यात्रा से 45 दिन पहले तक ही रिजर्व हो सकेगी, अतः शीघ्र अतिशीघ्र संपर्क करके टिकट करा लें।
धन्यवाद ।
जय सियाराम🙏🏻💐🚩
जय श्री अयोध्या धाम🙏🏻💐🚩

जय श्री राम🙏🏻श्री अयोध्या धाम की यात्रा 16 मार्च और 17 मार्च को सुनिश्चित की गई है।यात्रा 16 मार्च, शनिवार के दिन बस के ...
02/02/2024

जय श्री राम🙏🏻
श्री अयोध्या धाम की यात्रा 16 मार्च और 17 मार्च को सुनिश्चित की गई है।
यात्रा 16 मार्च, शनिवार के दिन बस के द्वारा दिल्ली के विभिन्न जगहों से भक्तों को pick करती हुई अयोध्या पहुंचेगी। इस यात्रा में सिर्फ 46 भक्तों की जगह हैं जिसमें 17 seats book हो चुकी हैं। अगर आप 4 फरवरी से पहले यात्रा की बुकिंग करते हैं तो आप 500 रुपए की बचत कर सकते हैं।
कृप्या यथाशीघ्र यात्रा में अपनी सीट सुनिश्चित करें।
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अयोध्या की दूसरी यात्रा 5 अप्रैल, शुक्रवार के दिन शाम 06 बजे ट्रेन के द्वारा जायेगी और 7 अप्रैल, रविवार की रात वापसी होगी।
5 अप्रैल की यात्रा की बुकिंग भी आप अभी ही कर सकते हैं। ट्रेन यात्रा की बुकिंग 15 फरवरी को बंद हो जाएगी।
इसके बाद ट्रेन में आपकी सीट रिजर्व नहीं होगी।
विशेष जानकारियों के लिए आप फोन नंबर 9999832756 पर संपर्क कर सकते हैं।
धन्यवाद, जय श्री राम।
जय श्री अयोध्या धाम 🙏🏻🚩

आगामी श्री वृन्दावन एवं बरसाना धाम यात्रा.. दिनांक 04 फरवरी 2024,  दिन - रविवार के दिन द्वारका से निकल रही है।दर्शन के ल...
27/01/2024

आगामी श्री वृन्दावन एवं बरसाना धाम यात्रा.. दिनांक 04 फरवरी 2024, दिन - रविवार के दिन द्वारका से निकल रही है।
दर्शन के लिए, साथ चलने के इक्षुक श्रद्धालु कृप्या मोबाइल नम्बर 9999832756 पर संपर्क कर सकते हैं।
जय श्री राधे। हरे कृष्ण ।
जय श्री वृन्दावन धाम 🙏💐

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