Shri Gopal Ji Charitable Trust

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This trust was established in year 2016 .This charitable trust has been established with a view to depreciate the need which is to be fulfilled for the senior citizens .We work for social cause and charity to bring prosperity to our nation.

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Shri Gopal Ji charitable trust Bharat mata ki Jay
05/08/2022

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22/02/2022

SHRI GOPAL JI CHARITABLE TRUST

Jai shri ram
26/08/2021

Jai shri ram

Jai shri ram
05/07/2021

Jai shri ram

स्वयंवर से पहले ही एक दूजे के हो चुके थे शिव-पार्वती


हिमालयपुत्री पार्वती ने जन्म के कुछ समय बाद ही घोर तपस्या शुरू कर दी. मकसद था-शिव को पाना. उनकी तपस्या से तीनों लोक संतप्त हो गए. ब्रह्मा जी पहुंचे और बोले कि देवी काहे दुनिया को जलाए डाल रही हो. तुम्हीं ने सृष्टि बनाई है. काहे के लिए तपस्या कर रही हो.

पार्वती बोलीं कि प्रभु आप सब जानते हैं फिर भी पूछते हैं.

तब ब्रह्मा जी बोले कि जिनके लिए तप कर रही हो वो खुद आकर तुम्हारा वरण करेंगे. देवता लोग भी मौके पर पहुंचे और बोले कि देवी, बहुत जल्द शिव शंकर भोले भंडारी आपके पति होंगे. अब तपस्या फिनिश कीजिए.

तपस्या खत्म करके पार्वती अपने आश्रम में रहने लगीं. तभी वहां भगवान शंकर बहुत विकृत रूप में पधारे. नाक कटी हुई थी, कूबड़ निकला हुआ था और बालों का आखिरी हिस्सा पीला पड़ गया था. शंकर पार्वती से बोले- ‘देवी, मैं तुम्हारा वरण करता हूं.’ पार्वती ने शिव को पहचान लिया था. उनका पूजन करके बोलीं- ‘मैं आजाद नहीं हूं. पिता मेरे मालिक हैं. वही मुझे आपको सौंप सकते हैं.’

शिव उसी रूप में पहुंच गए हिमालय के पास. हिमालय बोले कि सब काम कायदे से होगा. मैं अपनी बेटी का स्वयंवर कराना चाहता हूं. शिव फिर पहुंचे पार्वती के पास और बोले कि तुम्हारे पिता स्वयंवर कराना चाहते हैं. उसमें तुम तमाम सुंदर दूल्हों को छोड़कर हमें काहे चुनोगी?

पार्वती जी बोलीं कि आप बेवजह चिंता कर रहे हैं. मैं आपको ही चुनूंगी. फिर भी आपको संदेह है तो मैं यहीं आपका वरण करती हूं. इतना कहकर पार्वती ने अशोक का गुच्छा लेकर भगवान शंकर के कंधे पर रख दिया. भगवान शंकर प्रसन्न हुए और उन्होंने अशोक के वृक्ष को सजीव कर दिया और उसे खूब वरदान दिए. फिर भगवान शिव पार्वती से विदा लेकर अंतर्धान हुए.

!! नमामि शंकर !!
शिव शंकर के साथ में दिया आपने चित्र
मित्र मित्र तुम मित्र से प्यारे प्यारे मित्र
!! नमामि शंकर वंदन अभिनंदन प्यारे भैया जी !!

(ब्रह्म पुराण, गीता प्रेस, पेज 80)

21/04/2021

Shri Gopal Ji charitable trust26 January 2021

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