Mohit Tiwari

Mohit Tiwari I am a futuristic person who hates politics and loves nature and natural things and belives in sacri

16/01/2026
02/12/2025

6 महीने में लक्ष्‍य: आपात-कार्रवाई + मध्यावधि त्वरित सुधार ताकि सर्दियों/पीक-मौसम में गंभीर धुआँ/PM2.5-PM10 घटनाएँ घटें; साथ ही दीर्घकालिक संरचनात्मक हस्तक्षेप शुरू हो जाएँ (जैसा बेइजिंग ने किया)। बेइजिंग ने कोयला-निवारण, वाहन-नियमन, औद्योगिक नियंत्रण और क्लीन फ़्यूल अपनाकर प्रदूषण घटाया।

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6-Month Roadmap — मास दर मास (Month 1 → Month 6)

> नोट: हर महीने के साथ 'जिम्मेदार' काफार्मेट: (राज्य सरकारें: दिल्ली / Haryana / UP / Punjab जहाँ लागू), केंद्रीय एजेंसी: CAQM / MoEFCC / CPCB, स्थानीय निकाय: MCD / Municipal Corporations, परिवहन: DTC / DMRC / STUs, कृषि: राज्य कृषि विभाग।

Month 1 — आपात-तैयारी, कमान-केंद्र, मॉनिटरिंग तेज़

1. आपात कमान-केंद्र (Air Emergency Command Centre) — 24x7 संचालन; रीयल-टाइम AQI, मौसम-फोरकास्ट, GRAP-संदेश, और त्वरित आदेश। (CAQM lead).

2. GRAP की सख्ती से तैयारी और लागू करना — Stage activation SOP, enforcement teams, निश्‍चित फाइन/कम्प्लायंस। (CAQM + राज्य)।

3. मॉनिटरिंग नेटवर्क फास्ट-अपग्रेड — 50-100 सस्ती सेंसर्स (वायरलेस) देकर 'डेंसिटी' बढ़ाना; सैटेलाइट/स्थानीय सेंसर्स का इंटीग्रेशन। (CPCB + शहर MCD)।

KPI (Month1): कमान-केंद्र स्थापित; GRAP SOP प्रकाशित; 50% अतिरिक्त सेंसर्स तैनात।
लागत (अनुमान): ₹50–120 करोड़ (कमांड-केंद्र + 100 सेंसर्स + IT इंटीग्रेशन)

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Month 2 — वाहनों और यातायात पर त्वरित कदम

1. सख्त पालन-विनियमन (इंफोर्समेंट) — प्रदूषित/ईंधन-मानक न माने वाहन बाहर; CCTV + ANPR + Fines की तैनाती।

2. दिनों में 'पीक-पीरियड' में कुछ हिस्सों में Low Emission Zones (L*Z) और Odd-Even (जैसी ज़रूरत) — सार्वजनिक परिवहन फ्री/सब्सिडी पर।

3. इलेक्ट्रिक-बेस्ड बसों/इवेंटिव्स — तत्काल 500–1000 इलेक्ट्रिक बसों का लीज या ऑन-रेंट प्रावधान; फ्लीट-बूस्ट। (DTC + प्रदेश STUs)

KPI (Month2): प्रदूषण-इस्तेमाल वाले 30% वाहनों पर रोक/बाध्यकारी शमन; सार्वजनिक-परिवहन-यात्रियों में 15% वृद्धि।
लागत (अनुमान): ₹400–900 करोड़ (इंफोर्समेंट, बस-लीज़, ANPR, सॉफ्टवेयर)

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Month 3 — औद्योगिक और कमीशनिंग/फेक्टरियां

1. कठोर औद्योगिक निरीक्षण और तत्काल NOx/SOx/PM नियंत्रण — high-polluting units के शटडाउन/फ्ल्यूरिंग/उन्नयन पर निर्देश।

2.

07/11/2025

एक छोटा सा गाँव था—धूलपुर। यहाँ के लोग खेती करते, मेहनत करते और शांतिपूर्वक जीते। लेकिन हर पाँच साल में वहाँ एक नया तूफ़ान आता—चुनाव।

हर बार नेता जी आते, बड़ी-बड़ी गाड़ियाँ, पोस्टर, और वादों की बारिश के साथ।

इस बार कुछ अलग था।

टीवी पर दिन-रात एक ही बात—सीमा पर तनाव, युद्ध का खतरा, देशभक्ति का जोश।
गाँव के मास्टरजी ने कहा, "समस्या सुलझेगी नहीं, क्योंकि समस्या रहेगी तभी तो प्रचार चलेगा।"
भीड़ ने सुना, मगर समझी नहीं।

नेता जी आए, बोले, "हम देश को बचाएंगे। बस वोट हमें दो।"
गाँववालों ने पूछा, "लेकिन खेत सूख रहे हैं, स्कूल की छत गिर रही है?"
नेता मुस्कराए, "पहले दुश्मन से निपटना है, फिर देखेंगे।"

मास्टरजी ने फिर कहा, "जब तक डर बेचोगे, लोग सोचेंगे नहीं। और जब लोग सोचेंगे नहीं, तभी वोट मिलेगा।"

युद्ध नहीं हुआ। चुनाव जीत गए।
समस्याएं वहीं की वहीं।
पर अगली बार फिर वही स्क्रिप्ट तैयार थी—नया खतरा, नया डर, नया नारा।

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संक्षेप में:
“समस्या सुलझेगी नहीं, क्योंकि समस्या रहेगी तभी सत्ता मिलेगी।"
भीड़ समझेगी नहीं, क्योंकि सोचने का वक्त ही कहाँ मिलेगा जब डर हर वक्त टीवी पर नाचा करेगा।

24/01/2022

की 1GB प्रति सेकेंड की तेज गति से चलकर आखिर हमें जाना कहां है? इसकी हाई रेडियो फ्रीक्वेंसी से बहुत नुकसान है लेकिन सरकार को 5G ही लाना है 4G में ही सुधार करके स्पीड नहीं बढ़ानी...है न कमाल की बात?

WHO का कहना है कि 5G से निकलने वाली #हाई_रेडियो_फ्रिक्वेंसी की वजह से सिर्फ शरीर का तापमान बढ़ेगा लेकिन कोई नुकसान नहीं होगा...असल में बॉडी टेम्परेचर अप डाउन होना ही सब बीमारियों की जड़ है...90 फीसदी बीमारियों में या तो #बॉडी_टेम्परेचर कम हो जाता है या फिर बढ़ जाता है...जिस दिन विज्ञान बॉडी टेम्परेचर को स्थिर रखना सीख गया उस दिन इंसान बहुत सी बीमारियों पर विजय पा लेगा...लेकिन इन्हें 5G लाना है...

#ट्राई ने 3G के लिए मिनिमम स्पीड 1Mb प्रति सेकेंड और 4G के लिए 100Mb प्रति सेकेंड की स्पीड तय की थी...लेकिन हमें 4G के नाम पर स्पीड दी जा रही है औसतन 448 KBPS की जो 3G की असल स्पीड से आधे से भी कम है...कम्पनियों की तरफ से 7 और 8 MBPS की गति के जो दावे हैं वो केवल हमारी आंखों में धूल झोंकने के लिए है... ा_स्तर सुधारने की बजाय 5G के दुष्प्रभाव में जनता को नाहक ही धकेला जा रहा है...भारतीय कम्पनियां आज तक 3G की क्षमता हासिल कर नहीं पाई लेकिन टेस्ट इन्हें 5G के करने हैं...4G तो दूर की कौड़ी है ढंग से 3G भी ला नहीं पाए लेकिन अब इनको 5 G लाना है बिना इसके नुकसान की परवाह किए!!! पता नहीं 5G की गति से किधर जाना चाहते हैं लोग...

#गजेंद्र_कटारिया

13/01/2022

उधर कालीचरण महाराज एक बार फिर वर्धा पुलिस द्वारा.... इधर जीतेन्द्र सिंह त्यागी उर्फ वसीम रिज़वी हरिद्वार पुलिस द्वारा गिरफ़्तार कर लिए गए हैं.... आगे नम्बर यति नरसिंहानंद औऱ सुरेश चव्हाणके जी का होगा...
नोएडा में India Speaks के संदीप देव को गिरफ्तारी का नोटिस मिला है... गांधी पर रिपोर्ट के ऊपर....
बोलने और अभिव्यक्ति की आज़ादी इस देश मे सिर्फ ओवैसी ,वामन मेश्राम, प्रकाश अम्बेडकर और जिग्नेश मेवानी सरीखों को ही है...
Via Pawan saxena ji

साभार:- आदरणीय सनातन कालयात्री जीचित्र कृति :- आदरणीय Vishal Verma जी________________________________________जानते हो शि...
28/08/2020

साभार:- आदरणीय सनातन कालयात्री जी
चित्र कृति :- आदरणीय Vishal Verma जी
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जानते हो शिक्षा किसे कहा गया? शुद्ध उच्चारण सिखाने वाला वेदाङ्ग शिक्षा कहा गया। इतना महत्व था शुद्ध उच्चारण का!
बाल अवस्था से ही अभ्यास नहीं होगा तो जब मुख गुहा की पेशियाँ अइलीं, गइलीं, खइलीं टाइप से अभ्यस्त हो जायेंगी तो किङ्कर्तव्यविमूढ या अलर्षियुध्मगजपुरन्दरगरुडध्वजपुण्डरीकाक्ष: बोलते मातामही का स्मरण होने लगेगा!
जो स्तोत्र, विष्णु सहस्रनाम, ललितासहस्रनाम आदि बालिकाओं को घरों में सिखाये जाते थे न, इसलिये ही सिखाये जाते थे कि मुखगुहा की पेशियाँ अभ्यस्त हो जायँ। अंग्रेजी का accent सिखवाना बड़ा तोषकारी लगता है न, संस्कृत पर मुँह क्यों बिचकने लगते हैं द्विजनन्दन? यही स्थिति रही तो एक पीढ़ी पश्चात जर्मन म्लेच्छ हमें शिक्षा पढ़ायेंगे।
जानते हो, म्लेच्छ किसे कहा गया? हाँ, जिनका उच्चारण दूषित हो।
जो अनुस्वारों का ठीक से उच्चारण नहीं कर पाते थे, उन्हें अनास कहा गया, नाक ही कट गयी उनकी तो!
तो महामृत्युञ्जय के 'त्र्यम्बक' का उच्चारण करो तो!!
पता चलेगा कि द्विज हो या म्लेच्छ।

11/03/2020

जब #सर्वोच्च न्यायालय से यह आदेश निकलेगा कि राष्ट्रविरोधी गतिविधियों की फंडिंग के लिए विदेशी धन स्वीकार करने से भारत सरकार संस्थाओं को रोक नहीं सकती है, मना नहीं कर सकती है तो #इलाहाबाद उच्च न्यायालय यह आदेश तो पारित कर ही सकता है कि जिन लोगों ने कानून का सम्मान न करते हुए दंगा आगजनी और हत्यायें की हैं या इसके आरोपी हैं उनका भी कानून और व्यवस्था सम्मान करें, उनकी निजता का सम्मान करे।

अतः, यह कहना सरासर मूर्खता है कि किसी काँग्रेसी माथुर का भतीजा है इलाहाबाद हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश।

जब देश की जनता ने सालों तक कांग्रेसियों को सत्ता दे रखी है तो ये काँग्रेसी अपने प्यादों को सत्ता में बिठायेंगे ही न?

क्या आपके पास इतनी ताकत है कि उन माननीयों से कह सकें कि जो न्यायिक आदेश राष्ट्रविरोधी शक्तियों को मजबूती प्रदान करे, उसका विरोध करना न्यायालय की अवमानना नहीं है? उस आदेश का सम्मान नहीं करना न्यायालय की अवमानना नहीं है?

*जिंदा हो तो अपने जिंदा होने का प्रमाण देते रहो, मुर्दों की कोई सुनता है क्या?*

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