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15/10/2021
* कामाख्या कवच *पढोगे तो कोई तंत्र मंत्र जादू टोना असर नहीं करेगा ।कामाख्या कवच माँ कामाख्या देवी को समर्पित हैं ! कामाख...
22/07/2021

* कामाख्या कवच *पढोगे तो कोई तंत्र मंत्र जादू टोना असर नहीं करेगा ।

कामाख्या कवच माँ कामाख्या देवी को समर्पित हैं ! कामाख्या कवच के भगवान शिव जी रचियता है ! कामाख्या कवच को नियमित रूप से पाठ करने से जातक के ऊपर किसी तरह का तांत्रिक प्रभाव, बुरी नज़र का प्रभाव, काला जादू का प्रभाव नही होता हैं

महादेव उवाचशृणुष्व परमं गुहयं महाभयनिवर्तकम्।कामाख्याया: सुरश्रेष्ठ कवचं सर्व मंगलम्।।यस्य स्मरणमात्रेण योगिनी डाकिनीगणा:।राक्षस्यो विघ्नकारिण्यो याश्चान्या विघ्नकारिका:।।क्षुत्पिपासा तथा निद्रा तथान्ये ये च विघ्नदा:।दूरादपि पलायन्ते कवचस्य प्रसादत:।।निर्भयो जायते मत्र्यस्तेजस्वी भैरवोयम:।समासक्तमनाश्चापि जपहोमादिकर्मसु।भवेच्च मन्त्रतन्त्राणां निर्वघ्नेन सुसिद्घये।

महादेव जी बोले-सुरश्रेष्ठ! भगवती कामाख्या का परम गोपनीय महाभय को दूर करने वाला तथा सर्वमंगलदायक वह कवच सुनिये, जिसकी कृपा तथा स्मरण मात्र से सभी योगिनी, डाकिनीगण, विघ्नकारी राक्षसियां तथा बाधा उत्पन्न करने वाले अन्य उपद्रव, भूख, प्यास, निद्रा तथा उत्पन्न विघ्नदायक दूर से ही पलायन कर जाते हैं। इस कवच के प्रभाव से मनुष्य भय रहित, तेजस्वी तथा भैरवतुल्य हो जाता है। जप, होम आदि कर्मों में समासक्त मन वाले भक्त की मंत्र-तंत्रों में सिद्घि निर्विघ्न हो जाती है।।

।। मां कामाख्या देवी कवच।।

ओं प्राच्यां रक्षतु मे तारा कामरूपनिवासिनी।आग्नेय्यां षोडशी पातु याम्यां धूमावती स्वयम्।।नैर्ऋत्यां भैरवी पातु वारुण्यां भुवनेश्वरी।वायव्यां सततं पातु छिन्नमस्ता महेश्वरी।।
कौबेर्यां पातु मे देवी श्रीविद्या बगलामुखी।ऐशान्यां पातु मे नित्यं महात्रिपुरसुन्दरी।।
ऊध्र्वरक्षतु मे विद्या मातंगी पीठवासिनी।सर्वत: पातु मे नित्यं कामाख्या कलिकास्वयम्।।
ब्रह्मरूपा महाविद्या सर्वविद्यामयी स्वयम्।शीर्षे रक्षतु मे दुर्गा भालं श्री भवगेहिनी।।
त्रिपुरा भ्रूयुगे पातु शर्वाणी पातु नासिकाम।चक्षुषी चण्डिका पातु श्रोत्रे नीलसरस्वती।।
मुखं सौम्यमुखी पातु ग्रीवां रक्षतु पार्वती।जिव्हां रक्षतु मे देवी जिव्हाललनभीषणा।।
वाग्देवी वदनं पातु वक्ष: पातु महेश्वरी।बाहू महाभुजा पातु कराङ्गुली: सुरेश्वरी।।
पृष्ठत: पातु भीमास्या कट्यां देवी दिगम्बरी।उदरं पातु मे नित्यं महाविद्या महोदरी।।
उग्रतारा महादेवी जङ्घोरू परिरक्षतु।गुदं मुष्कं च मेदं च नाभिं च सुरसुंदरी।।
पादाङ्गुली: सदा पातु भवानी त्रिदशेश्वरी।रक्तमासास्थिमज्जादीनपातु देवी शवासना।।
।महाभयेषु घोरेषु महाभयनिवारिणी।पातु देवी महामाया कामाख्यापीठवासिनी।।
भस्माचलगता दिव्यसिंहासनकृताश्रया।पातु श्री कालिकादेवी सर्वोत्पातेषु सर्वदा।।
रक्षाहीनं तु यत्स्थानं कवचेनापि वर्जितम्।तत्सर्वं सर्वदा पातु सर्वरक्षण कारिणी।।
इदं तु परमं गुह्यं कवचं मुनिसत्तम।कामाख्या भयोक्तं ते सर्वरक्षाकरं परम्।।
अनेन कृत्वा रक्षां तु निर्भय: साधको भवेत।न तं स्पृशेदभयं घोरं मन्त्रसिद्घि विरोधकम्।।
जायते च मन: सिद्घिर्निर्विघ्नेन महामते।इदं यो धारयेत्कण्ठे बाहौ वा कवचं महत्।।
अव्याहताज्ञ: स भवेत्सर्वविद्याविशारद:।सर्वत्र लभते सौख्यं मंगलं तु दिनेदिने।।
य: पठेत्प्रयतो भूत्वा कवचं चेदमद्भुतम्।स देव्या: पदवीं याति सत्यं सत्यं न संशय:।।

मां कामाख्या देवी कवच हिन्दी में अर्थ

कामरूप में निवास करने वाली भगवती तारा पूर्व दिशा में, पोडशी देवी अग्निकोण में तथा स्वयं धूमावती दक्षिण दिशा में रक्षा करें।। नैऋत्यकोण में भैरवी, पश्चिम दिशा में भुवनेश्वरी और वायव्यकोण में भगवती महेश्वरी छिन्नमस्ता निरंतर मेरी रक्षा करें।। उत्तरदिशा में श्रीविद्यादेवी बगलामुखी तथा ईशानकोण में महात्रिपुर सुंदरी सदा मेरी रक्षा करें।। भगवती कामाख्या के शक्तिपीठ में निवास करने वाली मातंगी विद्या ऊध्र्वभाग में और भगवती कालिका कामाख्या स्वयं सर्वत्र मेरी नित्य रक्षा करें।। ब्रह्मरूपा महाविद्या सर्व विद्यामयी स्वयं दुर्गा सिर की रक्षा करें और भगवती श्री भवगेहिनी मेरे ललाट की रक्षा करें।। त्रिपुरा दोनों भौंहों की, शर्वाणी नासिका की, देवी चंडिका आँखों की तथा नीलसरस्वती दोनों कानों की रक्षा करें।। भगवती सौम्यमुखी मुख की, देवी पार्वती ग्रीवा की और जिव्हाललन भीषणा देवी मेरी जिव्हा की रक्षा करें।। वाग्देवी वदन की, भगवती महेश्वरी वक्ष: स्थल की, महाभुजा दोनों बाहु की तथा सुरेश्वरी हाथ की, अंगुलियों की रक्षा करें।। भीमास्या पृष्ठ भाग की, भगवती दिगम्बरी कटि प्रदेश की और महाविद्या महोदरी सर्वदा मेरे उदर की रक्षा करें।। महादेवी उग्रतारा जंघा और ऊरुओं की एवं सुरसुन्दरी गुदा, अण्डकोश, लिंग तथा नाभि की रक्षा करें।। भवानी त्रिदशेश्वरी सदा पैर की, अंगुलियों की रक्षा करें और देवी शवासना रक्त, मांस, अस्थि, मज्जा आदि की रक्षा करें।
साधक एवं ज्योतिष रवि सोनी
सैयद सादिक अली
भगवती कामाख्या शक्तिपीठ में निवास करने वाली, महाभय का निवारण करने वाली देवी महामाया भयंकर महाभय से रक्षा करें। भस्माचल पर स्थित दिव्य सिंहासन विराजमान रहने वाली श्री कालिका देवी सदा सभी प्रकार के विघ्नों से रक्षा करें।। जो स्थान कवच में नहीं कहा गया है, अतएव रक्षा से रहित है उन सबकी रक्षा सर्वदा भगवती सर्वरक्षकारिणी करे।। मुनिश्रेष्ठ! मेरे द्वारा आप से महामाया सभी प्रकार की रक्षा करने वाला भगवती कामाख्या का जो यह उत्तम कवच है वह अत्यन्त गोपनीय एवं श्रेष्ठ है।। इस कवच से रहित होकर साधक निर्भय हो जाता है। मन्त्र सिद्घि का विरोध करने वाले भयंकर भय उसका कभी स्पर्श तक नहीं करते हैं।। महामते! जो व्यक्ति इस महान कवच को कंठ में अथवा बाहु में धारण करता है उसे निर्विघ्न मनोवांछित फल मिलता है।। वह अमोघ आज्ञावाला होकर सभी विद्याओं में प्रवीण हो जाता है तथा सभी जगह दिनोंदिन मंगल और सुख प्राप्त करता है। जो जितेन्द्रिय व्यक्ति इस अद्भुत कवच का पाठ करता है वह भगवती के दिव्य धाम को जाता है। यह सत्य है, इसमें संशय नहीं है।।
*साधक एवं ज्योतिष रवि सोनी*
*सैयद सादिक अली*

64 योगिनीयों के क्रमानुसार नाम,=======================तंत्र के ६४ ग्रन्थ हैं ,६४ शाखाएं हैं जिनके आधार पर कहा जाता है की...
15/07/2021

64 योगिनीयों के क्रमानुसार नाम,
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तंत्र के ६४ ग्रन्थ हैं ,६४ शाखाएं हैं जिनके आधार पर कहा जाता है की ६४ प्रकार के तंत्र हैं |तंत्र को ६४ योगिनियों से सम्बंधित किया जाता है |६४ प्रकार की योगिनियाँ हैं |यह योगिनियाँ आद्याशक्ति के अंतर्गत आने वाली विभिन्न प्रकार की शक्तियां है |इनके नाम भिन्न ग्रंथों में विभिन्न मिलते हैं |यह नाम इस प्रकार प्राप्त होते हैं --
1.मायायोगिनी, 2.नारायणीयोगिनी 3.ब्रह्मायणीयोगिनी, 4.भैरवीयोगिनी
5. महेश्वरीयोगिनी 6.रूद्रायणीयोगिनी 7.बसेलीयोगिनी 8.त्रिपुरायोगिनी
9. उग्रतारायोगिनी 10.कार्चिकायोगिनी 11.तारिणीयोगिनी 12.अंबिकायोगिनी
13. कुमारीयोगिनी 14.भागबतीयोगिनी 15.नीलायोगिनी 16.कमलायोगिनी 17.शांतियोगिनी 18.कांतियोगी 19.घटारानीयोगिनी 20.चामुंडायोगिनी 21.चंद्रकांतीयोगिनी 22.माधवीयोगिनी 23. काचीकेश्वरीयोगिनी 24.अनलायोगिनी 25रूपायोगिनी 26.बराहीयोगिनी 27.नगरीयोगिनी 28.खेचरीयोगिनी 29.भूचरीयोगिनी 30.बैतालीयोगिनी31.कालींजरीयोगिनी32.शंखायोगिनी33.रूद्रकालीयोगिनी
34.कलावतीयोगिनी 35.कंकालीयोगिनी 36.बुकुचाईयोगिनी37.बालीयोगिनी 38.दोहिनीयोगिनी39.द्वारिनीयोगिनी 40. सोहिनीयोगिनी 41.संकटायोगिनी 42.तारिणीयोगिनी43.कोटलाईयोगिनी 44.अनुछायायोगिनी 45.केचामुखी समूहायोगिनी 46.उल्कायोगिनी 47.समशिलायोगिनी48.मुधायोगिनी 49.डाकिनीयोगिनी
50.गोपालीयोगिनी 51.कामसेनायोगिनी 52.कपालीयोगिनी 53.उत्रायणीयोगिनी 54.त्रैलोक्यवासिनीयोगिनी 55.त्रिलोचनायोगिनी 56.निमाईयोगिनी 57.डाकेश्वरीयोगिनी 58.कमलायोगिनी 59.रामायणीयोगिनी 60.आदिशक्तियोगिनी 61.बालछत्राणी 62.
ब्राह्मणीयोगिनी 63.धारणीयोगिनी 64.मतांगीयोगिनी
हीरापुर में जिन योगिनियों के नाम प्राप्त हुए उनका नाम निम्नलिखत क्रमानुसार हैं-
१. बहुरूपा २. तारा ३. नर्मदा ४. यमुना ५. शांति ६. वारुणी ७. क्षेमकरी ८. ऐन्द्री
९. वाराही १०. रणवीरा ११. वानरमुखी १२. वैष्णवी १३. कालरात्रि १४. वैद्यरूपा
१५. चर्चिका १६. बेताली १७. छिनमास्तिका १८. वृषभानना १९. ज्वाला कामिनी
२०. घटवारा २१. करकाली २२. सरस्वती २३. बिरूपा २४. कौबेरी २५. भालुका
२६. नारसिंही २७. बिराजा २८. विकटानन २९. महालक्ष्मी ३०. कौमारी ३१. महामाया
३२. रति ३३. करकरी ३४. सर्पश्या ३५. यक्षिणी ३६. विनायकी ३७. विन्द्यावालिनी
३८. वीरकुमारी ३९. माहेश्वरी ४०. अम्बिका ४१. कामायनी ४२. घटाबारी ४३. स्तुति
४४. काली ४५. उमा ४६. नारायणी ४७. समुद्रा ४८. ब्राह्मी ४९. ज्वालामुखी
५०. आग्नेयी ५१. अदिति ५२. चन्द्रकांति ५३. वायुबेगा ५४. चामुंडा ५५. मूर्ति
५६. गंगा ५७. धूमावती ५८. गांधारी ५९. सर्व मंगला ६०. अजिता ६१. सूर्य पुत्री
६२. वायु वीणा ६३. अघोरा ६४. भद्रकाली

संकलन: ज्योतिष एवम साधक रवि सोनी,मध्यप्रदेश.....

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‘ध्यानयोग सबसे उच्चतम रूप का कार्य है जो मनुष्य कर सकता है।” यह सबसे कुदरती और फायदेमंद मानवीय कार्यों में से एक है। यह हमे उच्च चेतना का प्रत्यक्ष अंतर्ज्ञानी अनुभव देता है और यह आध्यात्मिकता की आधारशिला है। यह संतुलन, आराम और बढ़ती हुई आंतरिक शांति भी प्रदान करता है।

यह पाठ्यक्रम उन सभी लोगो को प्रस्तुत किया जा रहा है जो ध्यान करना सीखना चाहतें हैं, चाहे वे किसी भी धर्म को मानते हों या कोई पिछला आध्यात्मिक ज्ञान हो। चाहे आप ध्यानयोग में शुरुआती हों या नहीं, यह पाठ्यक्रम आपको गहरी नियमित साधना स्थापित करने और विकसित करने में मदद करेगा और आंतरिक शांति, आनन्द और दिव्य प्रेम को जागृत करेगा जो आपकी असली प्रकृति का हिस्सा हैं।

आप क्या सीखेंगे
* एक सरल लेकिन शक्तिशाली ध्यानयोग की तकनीक जिसे आप तुरंत इस्तेमाल कर सकतें है।
* ध्यानयोग के लिए आरामदायक होकर बैठने हेतु सरल सुझाव ।
* कैसे बेचैन मन को शांत करतें है ।
* कैसे अपने दैनिक जीवन में शांति और आनन्द का अनुभव करें।
* सांस और मन के बंधन की महत्वपूर्णता और केंद्रित मन की शक्ति का अनुभव करें।
* प्राण शक्ति के स्तर को नियंत्रण में लाने और बढ़ाने के लिए एक अनुपम व्यायाम पद्धति को सीखें एवं थकान पर विजय प्राप्त करें।

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09/07/2021

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