ओबीसी संयोजन समिति रायपुर-छत्तीसगढ़

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ओबीसी संयोजन समिति रायपुर-छत्तीसगढ़ भारतीय संविधान की रक्षा करना,समता, बंधुता,गैर बराबरी और न्याय पर आधारित समाज की संरचना करना।

छत्रपति शाहू जी महाराज (राजर्षि शाहू महाराज) किन152वीं जयंती विशेष -राजर्षि शाहू जी महाराज कोल्हापुर रियासत के प्रसिद्ध ...
26/06/2026

छत्रपति शाहू जी महाराज (राजर्षि शाहू महाराज) किन152वीं जयंती विशेष -

राजर्षि शाहू जी महाराज कोल्हापुर रियासत के प्रसिद्ध शासक, सामाजिक सुधारक और शिक्षाप्रेमी थे। उनका जन्म 26 जून 1874 को कागल (कोल्हापुर, महाराष्ट्र) में यशवंतराव घाटगे के रूप में हुआ था। वे शिवाजी महाराज की वंश परंपरा से जुड़े भोंसले राजवंश के थे। महारानी आनंदीबाई ने उन्हें गोद लिया और 1894 में मात्र 20 वर्ष की आयु में कोल्हापुर की गद्दी संभाली। उन्होंने 1922 तक शासन किया।
खास बातें और योगदान:
सामाजिक न्याय और आरक्षण के अग्रदूत: 1902 में उन्होंने भारत में सबसे पहले 50% आरक्षण की नीति लागू की — सरकारी नौकरियों और शिक्षा में पिछड़ी जातियों (Non-Brahmin) के लिए। यह सामाजिक समानता की दिशा में क्रांतिकारी कदम था।
शिक्षा क्रांति:
मुफ्त और अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा (1917) लागू की, जो सभी जाति-धर्म के बच्चों के लिए थी।
लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा दिया, लड़कियों के लिए स्कूल, हॉस्टल और छात्रवृत्तियां शुरू कीं।
कई हॉस्टल, स्कूल और कॉलेज स्थापित किए (जैसे राजाराम कॉलेज)।
पिछड़े वर्गों, दलितों और महिलाओं के लिए विशेष सुविधाएं दीं। उन्होंने डॉ. बी.आर. आंबेडकर जैसे नेताओं का भी समर्थन किया।
किसानों और समाज के उत्थान: सिंचाई नीतियां शुरू कीं, भूमि सुधार किए और किसानों की स्थिति सुधारने के प्रयास किए।
महिलाओं के अधिकार: बाल विवाह पर रोक, विधवा पुनर्विवाह को बढ़ावा, देवदासी प्रथा पर प्रतिबंध जैसी सुधार लाए।
व्यक्तित्व: वे "राजर्षि" उपाधि से सम्मानित थे। लोकप्रिय राजा के रूप में जाने जाते थे, जो जातिवाद के खिलाफ थे और समानता के पक्षधर थे। उनका निधन 6 मई 1922 को मात्र 47 वर्ष की आयु में हुआ।
शाहू महाराज का योगदान आज भी महाराष्ट्र और पूरे भारत में सामाजिक न्याय, शिक्षा और समावेशी विकास की प्रेरणा है।

नोट: कभी-कभी लोग 18वीं शताब्दी के मराठा सम्राट शाहू (शिवाजी के पौत्र) को भी छत्रपति शाहू कहते हैं, लेकिन "शाहू जी महाराज" से आमतौर पर कोल्हापुर वाले राजर्षि शाहू महाराज ही समझे जाते हैं।

विश्वनाथ प्रताप सिंह (वी.पी. सिंह) जयंती विशेष(25 जून 1931 – 27 नवंबर 2008) 🇮🇳भारत के सातवें प्रधानमंत्री (2 दिसंबर 1989...
25/06/2026

विश्वनाथ प्रताप सिंह (वी.पी. सिंह) जयंती विशेष
(25 जून 1931 – 27 नवंबर 2008) 🇮🇳

भारत के सातवें प्रधानमंत्री (2 दिसंबर 1989 से 10 नवंबर 1990 तक) विश्वनाथ प्रताप सिंह आज भी सामाजिक न्याय, ईमानदारी और सिद्धांतों की राजनीति के प्रतीक माने जाते हैं।
जीवन परिचय
एक राजपूत जमींदार परिवार (मांडा राजघराना) में जन्म। उन्होंने मांडा के राजा बहादुर राम गोपाल सिंह द्वारा गोद लिया गया था।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय और पूना (पुणे) विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की (बी.ए., एलएल.बी. और बी.एससी.)।
25 जून 1955 को श्रीमती सीता कुमारी (देवगढ़-मादड़िया राजपरिवार की राजकुमारी) से विवाह। दो पुत्र: अजेय प्रताप सिंह और अभय प्रताप सिंह।
राजनीतिक सफर
छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय; भूदान आंदोलन में भाग लिया। इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्र संघ के उपाध्यक्ष रहे।
कांग्रेस से राजनीतिक शुरुआत। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री (1980–1982)।
राजीव गांधी सरकार में वित्त मंत्री के रूप में काले धन, कर चोरी और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त अभियान चलाया।
रक्षा मंत्री रहते बोफोर्स घोटाले की निष्पक्ष जांच में ईमानदारी का परिचय दिया, जिसके कारण कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया।
बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर को भारत रत्न से सम्मानित किया। उनके प्रयासों से 12 अप्रैल 1990 को संसद के सेंट्रल हॉल में डॉ. आंबेडकर की तस्वीर लगवाई गई (संसद में पहली बार)।
1988 में जनता दल की स्थापना की। 1989 में नेशनल फ्रंट गठबंधन के जरिए प्रधानमंत्री बने।

प्रेस नोटरायपुर, 14 मई 2026ओबीसी संयोजन समिति जिला कार्यकारिणी की बैठक सम्पन्नमां कर्मा धाम, संतोषी नगर, रायपुर में छत्र...
16/05/2026

प्रेस नोट
रायपुर, 14 मई 2026
ओबीसी संयोजन समिति जिला कार्यकारिणी की बैठक सम्पन्न
मां कर्मा धाम, संतोषी नगर, रायपुर में छत्रपति स्वराज्य रक्षक स्वातंत्र्यवीर संभाजी महाराज की 369वीं जयंती के पावन अवसर पर ओबीसी संयोजन समिति जिला रायपुर की महत्वपूर्ण कार्यकारिणी बैठक आयोजित की गई।
बैठक में स्वातंत्र्यवीर संभाजी महाराज के अदम्य साहस, दूरदर्शिता और जीवन-संघर्षों को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया गया। उन्होंने दक्षिण भारत में मुगलों के विस्तार को दृढ़ता से रोका और हिंदवी स्वराज्य की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। संभाजी महाराज के आदर्शों से प्रेरणा लेते हुए बैठक में ओबीसी समाज को सशक्त बनाने के संकल्प लिए गए।
बैठक में संगठन के सात प्रमुख उद्देश्यों को जन-जन तक पहुंचाने का दृढ़ संकल्प लिया गया। इन उद्देश्यों में प्रमुख है- ओबीसी प्रोटेक्शन एक्ट को शीघ्र लागू करने की मांग।
प्रदेश कार्य समिति के अध्यक्ष टिकेश्वर साहू जी ने कहा कि 27% ओबीसी आरक्षण को तत्काल प्रभावी रूप से लागू किया जाए। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और सामान्य वर्ग की भांति ओबीसी वर्ग को भी सभी सार्वजनिक तथा निजी क्षेत्रों में समान अवसर और समान हिस्सेदारी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि अब ओबीसी समाज केवल अधिकारों की मांग नहीं, बल्कि अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए संघर्षरत है।
बैठक में सामाजिक प्रशिक्षण को और अधिक मजबूत बनाने के लिए जिले में व्यापक सदस्यता अभियान चलाने पर विस्तृत चर्चा की गई।
संभागीय अध्यक्ष श्री नारायण साहू जी ने अपने संबोधन में कहा कि ओबीसी समाज पूर्ण भागीदारी की लड़ाई लड़ रहा है। इस ऐतिहासिक संघर्ष में कैडरबद्ध सामाजिक प्रशिक्षण के माध्यम से संगठन को मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने आगामी दिनों में जिले के सभी चारों ब्लॉकों में संगठन को और अधिक सशक्त एवं विस्तारित करने की घोषणा की।
बैठक में किशोर सोनी, डॉ. विजय देवांगन, लाल बहादुर यादव, डॉ. पंच राम सोनी, शकुंतला सिंह, पूजा ठाकुर सहित अन्य गणमान्य सदस्यों ने सक्रिय भागीदारी की। उन्होंने जिले में ओबीसी वर्ग की विभिन्न जातियों के सामाजिक अध्यक्षों, ओबीसी कर्मचारियों, महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं तक सामाजिक जागरण और प्रशिक्षण पहुंचाने की कार्ययोजनाएं प्रस्तुत कीं।
सदस्यों ने ओबीसी जागरण एवं संगठनात्मक मजबूती को लेकर अपने बहुमूल्य सुझाव दिए, जिनमें विशेष रूप से युवाओं और छात्रों को जोड़ने, जागरूकता अभियान चलाने और सामाजिक एकता को और प्रगाढ़ बनाने पर जोर दिया गया।
जारीकर्ता
श्री नारायण साहू
संभागीय अध्यक्ष, ओबीसी संयोजन समिति, रायपुर
मोबाइल: 9009190075

स्वराज्य रक्षक छत्रपति संभाजी महाराज जी के 369 वीं जयंती के अवसर पर रायपुर जिला स्तरीय ओबीसी समाज संगठनात्मक समन्वय बैठक...
12/05/2026

स्वराज्य रक्षक छत्रपति संभाजी महाराज जी के 369 वीं जयंती के अवसर पर
रायपुर जिला स्तरीय ओबीसी समाज संगठनात्मक समन्वय बैठक
तारीख - 14 मई 2026 दिन गुरुवार
स्थान - मां कर्मा धाम,संतोषी नगर,रायपुर
समय - दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक
अध्यक्षता - श्री टिकेश्वर साहू
संस्थापक सदस्य,राष्ट्रीय प्रचारक एवं प्रदेशाध्यक्ष
ओबीसी(अन्य पिछड़ा वर्ग)संयोजन समिति छत्तीसगढ़

जिला नेतृत्व - श्री नारायण साहू ,श्री लाल बहादुर यादव, डॉ विजय देवांगन,श्री किशोर सोनी जी

विषय - 01. छत्रपति संभाजी महाराज की 369 वीं जयंती पर पुष्पांजलि और जीवनी का स्मरण
02. रायपुर जिला में कार्यकारिणी,कार्यकर्ता और कार्ययोजना पर चर्चा।
03. जिले के अभनपुर,आरंग, धरसिंवा, तिल्दा ब्लॉकों में संगठन विस्तार पर चर्चा।
04. विभिन्न संगठनों में ओबीसी कार्यकर्ताओं की एकीकरण पर चर्चा
05. संगठन की सात सूत्रीय उद्देश्यों पर खास चर्चा।

नोट - आगंतुकों को पेन डायरी अवश्य लावे साथ नियत समय में पहुंचे।
संपर्क सूत्र:- 9009190075,9617458433,9755967634,9617075275

11 मई को आयोजित वर्चुअल बैठक में विषयों के अनुरूप जो चर्चा हुआ है उसे सार्थक शब्दों में दिया जा रहा है आप इसे जरुर स्टडी...
11/05/2026

11 मई को आयोजित वर्चुअल बैठक में विषयों के अनुरूप जो चर्चा हुआ है उसे सार्थक शब्दों में दिया जा रहा है आप इसे जरुर स्टडी करें ......

मुख्य विषय:
01.स्वराज्य रक्षक छत्रपति संभाजी महाराज की जयंती (14 मई) के अवसर पर रायपुर में आयोजित ओबीसी संगठनात्मक समन्वय बैठक

आदरणीय साथियों,
छत्रपति संभाजी महाराज स्वराज्य की रक्षा के प्रतीक हैं। मुगल साम्राज्य की जबरदस्त ताकत के सामने उन्होंने धर्म, स्वाभिमान और हिंदवी स्वराज्य की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उनकी जयंती पर हम केवल श्रद्धांजलि नहीं अर्पित कर रहे, बल्कि उनके संघर्ष से प्रेरणा लेकर आज के सामाजिक-राजनीतिक संघर्ष में ओबीसी, पिछड़े, दलित और शोषित वर्गों के हक-अधिकारों की रक्षा का संकल्प ले रहे हैं।
रायपुर की यह ओबीसी संगठनात्मक समन्वय बैठक इसी उद्देश्य से आयोजित हो रही है — सभी ओबीसी संगठनों में समन्वय स्थापित करना, एकजुटता बढ़ाना और सामाजिक न्याय की लड़ाई को मजबूत करना।

02. महात्मा ज्योतिबा फुले: शिक्षा एवं सामाजिक क्रांति के प्रणेता
महात्मा ज्योतिबा फुले भारतीय इतिहास की वह अमर कड़ी हैं जिन्होंने अंधकारमय सामंती और जातिवादी व्यवस्था के खिलाफ शिक्षा की क्रांति शुरू की। उन्होंने महिलाओं, शूद्रों और पिछड़ों को शिक्षा का अधिकार दिलाने के लिए स्कूल खोले, सत्यशोधक समाज की स्थापना की और ब्राह्मणवादी वर्चस्व को चुनौती दी।
11 मई 1888 को विट्ठल राव कृष्णजी वंदेकर जी ने उन्हें "महात्मा" की उपाधि दी — यह उपाधि किसी पद या शासन से नहीं, बल्कि जनता की सेवा और क्रांतिकारी विचारों से मिली।
आज हमें मंथन करना है:
समानतावादी समाज निर्माण के लिए शिक्षा को सबसे बड़ा हथियार बनाना।
ओबीसी हक-अधिकारों (आरक्षण, प्रमोशन, आर्थिक योजनाएं) की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित करना।
फुले-शाहू-अंबेडकर की विचारधारा को गांव-गांव तक पहुंचाना।
जाति-आधारित भेदभाव के खिलाफ सकारात्मक सामाजिक अभियान चलाना।
कर्तव्य निर्वहन का समय है — केवल मांग नहीं, बल्कि संगठित शक्ति के माध्यम से हक छीनने का।

03. हाल ही संपन्न 5 राज्यों के विधानसभा चुनावों का विश्लेषण

हाल ही में असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी के विधानसभा चुनाव संपन्न हुए। इन चुनावों से कई महत्वपूर्ण सबक मिले हैं:

जनता का मुद्दा केंद्रित रुख: विकास, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर जनता ने स्पष्ट संदेश दिया।
सामाजिक गठबंधनों की अहमियत: ओबीसी, पिछड़े और वंचित वर्गों को साथ लेकर चलने वाले गठबंधन बेहतर परिणाम दे रहे हैं।
क्षेत्रीय ताकत: कुछ राज्यों में नई ताकतें (जैसे तमिलनाडु में TVK) उभरीं, जो पुरानी द्विध्रुवीय राजनीति को तोड़ रही हैं।
ओबीसी वोट की निर्णायक भूमिका: इन चुनावों में भी ओबीसी समुदाय की एकजुटता और रणनीतिक वोटिंग ने कई सीटों का रुख तय किया।
हमारे लिए सीख:
संगठन मजबूत न हो तो राजनीतिक लाभ अस्थायी रहता है।
ओबीसी एकता बिना सामाजिक न्याय के एजेंडे को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता।
चुनावी विश्लेषण के आधार पर अगले लोकसभा/विधानसभा चुनावों की रणनीति तैयार करनी होगी।
समापन एवं आह्वान
साथियों, संभाजी महाराज की बहादुरी, फुले जी की क्रांतिकारी सोच और हालिया चुनावों के अनुभव को मिलाकर हमें एक मजबूत, संगठित और जागरूक ओबीसी मोर्चा खड़ा करना है।
कार्ययोजना के सुझाव:
सभी ओबीसी संगठनों का समन्वय कमेटी गठन।
14 मई के कार्यक्रम को भव्य बनाना — सांस्कृतिक कार्यक्रम, चर्चा सत्र और संकल्प पत्र जारी करना।
राज्य स्तर पर जिला-ब्लॉक तक ओबीसी सेल सक्रिय करना।
शिक्षा, रोजगार और आरक्षण संरक्षण पर विशेष अभियान।
युवाओं और महिलाओं को मुख्यधारा में लाना।
छत्रपति संभाजी महाराज अमर रहे!
महात्मा ज्योतिबा फुले अमर रहे!
सामाजिक न्याय जिंदाबाद!
ओबीसी एकता जिंदाबाद!
यह बैठक सिर्फ चर्चा की नहीं, बल्कि क्रियान्वयन की हो। हम सब मिलकर इतिहास रचेंगे।
भारत माता की जय!
जय भवानी, जय शिवाजी!

संचालन : टिकेश्वर साहू ,मोबाइल: 94060 61165

शिक्षादूत, क्रांतिसूर्य महात्मा ज्योतिबा फुले को 11 मई 1888 को जनसमुदाय द्वारा "महात्मा" की उपाधि प्रदान किए जाने के विश...
10/05/2026

शिक्षादूत, क्रांतिसूर्य महात्मा ज्योतिबा फुले को 11 मई 1888 को जनसमुदाय द्वारा "महात्मा" की उपाधि प्रदान किए जाने के विशेष दिन पर प्रदेश स्तरीय वर्चुअल जूम मीटिंग का आयोजन हो रहा है।
मीटिंग विवरण:
संचालन: टिकेश्वर साहू
फाउंडर लीडर: ओबीसी कॉर्डिनेशन कमेटी, छत्तीसगढ़
मीटिंग लिंक 🔗 To join the meeting on
https://meet.google.com/qge-imbi-com
मुख्य विषय:
स्वराज्य रक्षक छत्रपति संभाजी महाराज की जयंती (14 मई) पर रायपुर में आयोजित "ओबीसी संगठनात्मक समन्वय बैठक" के संबंध में चर्चा और तैयारी।
महात्मा ज्योतिबा फुले द्वारा शुरू की गई शिक्षा क्रांति और सामाजिक क्रांति को आगे बढ़ाना। समानतावादी समाज निर्माण और ओबीसी हक-अधिकार प्राप्ति के लिए कर्तव्य निर्वहन पर मंथन।
हाल ही संपन्न 5 राज्यों के विधानसभा चुनावों का विश्लेषणात्मक चर्चा।

नोट: मीटिंग सुबह होने वाली है, इसलिए सभी साथी जल्दी तैयारी करें। छत्तीसगढ़ के सभी 33 जिलों के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर के सामाजिक कार्यकर्ता भी जुड़ेंगे।
ओबीसी संयोजन समिति के कार्यकर्ता और पदाधिकारी ज्यादा से ज्यादा तैयारी करें।

Please attend the peaceful procession which will start from gandhi Maidan on 29th April at 11am .Ours demands are consti...
27/04/2026

Please attend the peaceful procession which will start from gandhi Maidan on 29th April at 11am .
Ours demands are constitutional and overall development of the country in the right directions

AIBCF is fighting since the independence for strengthen the democracy and to raise the conditions of the dounttroden people of the country.

Please join us.........

ओबीसी संयोजन समिति की प्रमुख मांगें (13 अप्रैल 2026, जिला मुख्यालय)13 अप्रैल 2026 को ओबीसी संयोजन समिति प्रदेश इकाई के न...
18/04/2026

ओबीसी संयोजन समिति की प्रमुख मांगें (13 अप्रैल 2026, जिला मुख्यालय)
13 अप्रैल 2026 को ओबीसी संयोजन समिति प्रदेश इकाई के नेतृत्व में जिला कलेक्टर को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नाम ज्ञापन सौंपा गया। इसमें ओबीसी समाज की निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी गईं:
मुख्य मांगें:
यूजीसी इक्वलिटी रेगुलेशन 2026 का ओबीसी समाज पूर्ण समर्थन करता है। इसे अभिलंब (तुरंत) लागू किया जाए।
जातिवाद जनगणना (Caste Census):
30 अप्रैल 2025 को देशभर के ओबीसी संगठनों के आंदोलन के बाद सरकार ने संसद में जाति जनगणना का ऐलान किया था। लेकिन जनगणना फॉर्मेट में ओबीसी का अलग (पृथक) सेक्शन न होने पर सरकार की नीति पर सवाल उठाया गया है।
आरक्षण:
50% तय सीमा के आधार पर ओबीसी के लिए 27% आरक्षण को प्रभावी रूप से लागू किया जाए।
उच्च शिक्षा:
उच्च शिक्षा संस्थानों (कॉलेजों और विश्वविद्यालयों) में ओबीसी विद्यार्थियों के लिए पर्याप्त संरक्षण (protection/quotas) की व्यवस्था की जाए।
महिला आरक्षण:
महिला आरक्षण बिल में SC, ST और OBC महिलाओं के लिए अलग से सुनिश्चित आरक्षण दिया जाए।
निजीकरण और रोजगार:
सरकारी संस्थाओं/विभागों के निजीकरण को नियंत्रित किया जाए। आरक्षण व्यवस्था को निजीकरण में भी सुनिश्चित रखा जाए। साथ ही युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने की ठोस व्यवस्था की जाए।
क्रीमी लेयर:
क्रीमी लेयर की सीमा और NFC (Non-Creamy Layer) जैसी व्यवस्थाओं की पुनः समीक्षा कर सामाजिक न्याय के अनुरूप संशोधन किया जाए।
मंडल आयोग:
ओबीसी समाज के लिए संजीवनी साबित हुए मंडल आयोग की सिफारिशों को तत्काल प्रभाव से पूरी तरह लागू किया जाए।

संक्षेप में:
ओबीसी संयोजन समिति सामाजिक न्याय, आरक्षण की प्रभावी implementation, जाति जनगणना में OBC के अलग चित्रण, शिक्षा-रोजगार और महिला आरक्षण में उप-कोटा आदि मुद्दों पर जोर दे रही है।

18/04/2026

ओबीसी संयोजन समिति की प्रमुख मांगें (13 अप्रैल 2026, जिला मुख्यालय)
13 अप्रैल 2026 को ओबीसी संयोजन समिति प्रदेश इकाई के नेतृत्व में जिला कलेक्टर को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नाम ज्ञापन सौंपा गया। इसमें ओबीसी समाज की निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी गईं:
मुख्य मांगें:
यूजीसी इक्वलिटी रेगुलेशन 2026 का ओबीसी समाज पूर्ण समर्थन करता है। इसे अभिलंब (तुरंत) लागू किया जाए।
जातिवाद जनगणना (Caste Census):
30 अप्रैल 2025 को देशभर के ओबीसी संगठनों के आंदोलन के बाद सरकार ने संसद में जाति जनगणना का ऐलान किया था। लेकिन जनगणना फॉर्मेट में ओबीसी का अलग (पृथक) सेक्शन न होने पर सरकार की नीति पर सवाल उठाया गया है।
आरक्षण:
50% तय सीमा के आधार पर ओबीसी के लिए 27% आरक्षण को प्रभावी रूप से लागू किया जाए।
उच्च शिक्षा:
उच्च शिक्षा संस्थानों (कॉलेजों और विश्वविद्यालयों) में ओबीसी विद्यार्थियों के लिए पर्याप्त संरक्षण (protection/quotas) की व्यवस्था की जाए।
महिला आरक्षण:
महिला आरक्षण बिल में SC, ST और OBC महिलाओं के लिए अलग से सुनिश्चित आरक्षण दिया जाए।
निजीकरण और रोजगार:
सरकारी संस्थाओं/विभागों के निजीकरण को नियंत्रित किया जाए। आरक्षण व्यवस्था को निजीकरण में भी सुनिश्चित रखा जाए। साथ ही युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने की ठोस व्यवस्था की जाए।
क्रीमी लेयर:
क्रीमी लेयर की सीमा और NFC (Non-Creamy Layer) जैसी व्यवस्थाओं की पुनः समीक्षा कर सामाजिक न्याय के अनुरूप संशोधन किया जाए।
मंडल आयोग:
ओबीसी समाज के लिए संजीवनी साबित हुए मंडल आयोग की सिफारिशों को तत्काल प्रभाव से पूरी तरह लागू किया जाए।

संक्षेप में:
ओबीसी संयोजन समिति सामाजिक न्याय, आरक्षण की प्रभावी implementation, जाति जनगणना में OBC के अलग चित्रण, शिक्षा-रोजगार और महिला आरक्षण में उप-कोटा आदि मुद्दों पर जोर दे रही है।

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